आज दिनांक 19-08-2026 को आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी के निर्देशानुसार जनपद सीतापुर के विधानसभा क्षेत्र मिश्रिख में बहुजन समाज पार्टी द्वारा आयोजित एक दिवसीय विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन में शामिल होने का अवसर प्राप्त हुआ जिसमें विशेष रूप से श्रीमती अभिलाषा वर्मा जी को विधानसभा मिश्रिख बहुजन समाज पार्टी का प्रभारी/ प्रत्याशी घोषित किया गया साथ ही लाखों की संख्या में मौजूद अपार जनसमूह ने 2027 में आदरणीय बहनजी को मुख्यमंत्री और श्रीमती अभिलाषा वर्मा जी को विधायक बनाने का संकल्प लिया।
आप सभी पार्टी के सम्मानित पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं विशाल जनसभा में मौजूद अपार जनसमूह का हार्दिक आभार🙏
#बहनजी_का_संदेश
#जयभीम #मिशन_2027
#BSP #सीतापुर #मिश्रिख
#बहुजन_समाज_पार्टी
दुःखद खबर 😭💔
बसपा के रसड़ा से एक मात्र विधायक श्री उमाशंकर सिंह जी कैंसर की लंबी बीमारी के कारण निधन अति दुखद है कुदरत उनके परिजनों को इस रहने की शक्ति प्रदान करें।
1.काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का देश की राजधानी नई दिल्ली में संसद के नज़दीक जन्तर मन्तर में पिछले कई दिनों से, ख़ासकर मेडिकल की नीट जैसी विशेष परीक्षा आदि में पेपरलीक व अन्य गड़बडियों के दुष्परिणामों से छात्र-छात्राओं व उनके परिवार के काफी बुरी तरह से प्रभावित हो रहे जीवन को लेकर जारी अनिश्चितकालीन आन्दोलन के कारण सड़क से लेकर संसद तक में ज़बरदस्त हंगामा बरपा है और अब इसका राजनीतिकरण करने से यह मुद्दा सरकार के साथ सीधे टकराव का हो गया है, जिस विषम स्थिति से देश को निकालना ज़रूरी है, क्योंकि इससे दिल्ली में ही नहीं बल्कि विभिन्न राज्यों में भी आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
2.वैसे चाहे पूरे देश में अयोध्या श्रीराम मन्दिर में चढ़ावा चोरी/ग़बन आदि का गर्म मामला हो या फिर आल-इण्डिया व राज्यों की परीक्षाओं आदि में पेपरलीक का मुद्दा हो, यह सभी मूलतः भ्रष्टाचार के हर स्तर पर पनपने का ही परिणाम है।
3.इसके साथ ही यह संवैधानिक नैतिकता (constitutional morality) से भी जुडा़ मामला है, जिसके अभाव में यह देश को दीमक की तरह खाता चला आ रहा है, जबकि संविधान निर्माता परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने गुड गवरनेन्स हेतु इस पर ख़ास ध्यान देने की ज़रूरत पर विशेष बल दिया है।
4.संक्षेप में मेरा यही कहना है कि देश व जनहित से जुड़े वर्तमान विकट हालात के सौहार्दपूर्ण समाधान हेतु सरकार तथा माननीय कोर्ट जैसी संवैधानिक संस्थाओं को अपनी भूमिका निभाने की पहल करनी चाहिये तो यह बेहतर होगा।
5.साथ ही, सीजेपी के व्यापक हो रहे आन्दोलन का अब विभिन्न राजनीतिक पार्टियों द्वारा अपने-अपने संकीर्ण स्वार्थ में राजनीतिकरण करके सड़क से लेकर संसद तक में टकराव व हिंसा किया जाना घोर अनुचित। सरकार व आन्दोलनकारी दोनों मिलकर इसका शान्ति व सौहार्दपूर्ण समाधान जितना जल्द निकालें उतना ही उचित।
दिनांक 11.07.2026 : जैसाकि सर्वविदित है कि बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी), दूसरी पार्टियों की तरह अपना राजनीतिक व चुनावी स्वार्थ साधने के लिये धरना-प्रदर्शन, सड़क जाम, हल्लाबोल, सरकारी व प्राइवेट सम्पत्तियों के तोड़फोड़ व दूसरी हिसंक घटनाओं तथा हवाहवाई वादों-दावों एवं मिथ्या प्रचार-प्रसार आदि के माध्यम से जनता को गुमराह करने आदि में विश्वास नहीं करती है।
अर्थात् बी.एस.पी. ऐसी तमाम राजनीतिक व चुनावी चालबाज़ियों से पूरी तरह से पाक-साफ देश की एकमात्र ऐसी अम्बेडकरवादी पार्टी है जो ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के सिद्धान्त व नीति पर चलकर यहाँ सर्वसमाज में भी ख़ासकर ग़रीबों, मज़दूरों, शोषितों-पीड़ितों व उपेक्षितों के हित व कल्याण हेतु समर्पित है, और जिसका जीता-जागता प्रमाण यहाँ उत्तर प्रदेश में बी.एस.पी. के नेतृत्व में चार बार रही सरकार में व्यापक जनहित, जनकल्याण व विकास का तथा अपराध-नियंत्रण व क़ानून-व्यवस्था के मामलों में ’क़ानून द्वारा क़ानून का बेहतरीन राज’ रहा है।
इससे यहाँ यूपी जैसे विशाल राज्य में एक आदर्श संवैधानिक सरकार देने के साथ-साथ यह भी सूरज की रौशनी की तरह पूरी तरह से स्पष्ट है कि बी.एस.पी., विरोधी पार्टियों व उनके इशारे पर चलने वाले दलित संगठनों व पार्टियोें आदि की तरह छल व छलावा की राजनीति तथा उनके लिये मगरमच्छ के आँसू नहीं बहाती और ना ही संकीर्ण स्वार्थ हेतु गिरगिट की ही तरह रंग बदलती है, बल्कि करोड़ों दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ-साथ अपरकास्ट समाज के ग़रीबों के वास्तविक हित व कल्याण के लिये ’बहुजन समाज’ में समय-समय पर जन्मे महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों में भी ख़ासकर महात्मा ज्योतिबा फुले, श्री नारायणा गुरु, राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर व बहुजन नायक मान्यवर श्री कांशीराम जी के बताये रास्तों पर चलकर मुख्यतः सत्ता की मास्टर चाबी के माध्यम से ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक उत्थान’ का महान लक्ष्य हासिल करना चाहती है।
और अब यहाँ ख़ासकर उत्तर प्रदेश विधानसभा के आगामी आमचुनाव में बी.एस.पी के प्रभाव को तेज़ी से आगे बढ़ता हुआ देखकर विरोधी पार्टियाँ में द्वेष व बेचैनी स्वाभाविक है और इसीलिये वे अपने साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हथकण्डों के तहत् कुछ दलित संगठनों व पार्टियों आदि को आगे करके दलित व बहुजन समाज के अन्य विभिन्न अंगों को तरह-तरह से भटकाने व गुमराह करने में लगे हुये हैं,
जबकि शोषितों-पीड़ितों व उपेक्षितों को अच्छी तरह से मालूम है कि ’मा. बहन कुमारी मायावती जी’ के नेतृत्व वाली सरकार ही उनकी सभी राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक समस्याओं का उसी प्रकार से बेहतरीन निदान है जैसाकि उनकी सभी सरकारों में होता रहा है जब सत्ता की शक्ति, संसाधन व ऊर्जा तथा सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल भी हर स्तर पर सबके साथ न्याय एवं सबको न्याय दिलाने के लिये समर्पित व तत्पर रहा।
साथ ही, चुनाव नज़दीक आता देख विरोधी पार्टियाँ अपने हथकण्डों आदि के साथ-साथ दलित संगठनों व गुलाम मानसिकता रखने वाले लोगों के कंधे पर बंदूक रखकर बी.एस.पी. व बाबा साहेब के मूवमेन्ट-विरोधी राजनीतिक स्वार्थ का अपना खेल आगे बढ़ाना चाहती हैं, जिससे सर्वसमाज के लोगों को व विशेषकर दलित एवं ’बहुजन समाज’ के सभी लोगों को बहुत ही ज़्यादा सचेत व सतर्क रहने की ज़रूरत है ताकि विरोधियों केे नापाक इरादे सफल ना हों सकें।
इसको लेकर बी.एस.पी. की असली चिन्ता यही है कि सर्वसमाज के ग़रीब, मज़दूर व बेरोज़गार नौजवान आदि के साथ-साथ समाज के शोषित-पीड़ित व अन्य उपेक्षित लोग, अपनी समस्याओं को लेकर सड़क पर उतरने के क्रम में सरकारी द्वेष, उत्पीड़न व आतंक आदि का शिकार ना बनने पायें,
क्योंकि नौजवान अगर सरकारी ज्यादती के कारण यदि मुकदमा व जेल आदि में उलझ जायेंगे तो इससे उनका भविष्य ख़तरे में पड़ जाने की आशंका है तथा अगर परिवार का मुखिया इन चक्कर में पड़ जायेगा तो उनका घरबार तबाह हो जायेगा और उनके पूरे परिवार के इस प्रकार से अंधकार में डूब जाने का खतरा है, जो बी.एस.पी. कतई भी नहीं चाहती है, क्योंकि बी.एस.पी. का अम्बेडकरवादी मिशन प्रभावित हो सकता है जो कि विरोधियों की असल चाल है।
इसके साथ ही, सर्वविदित है कि दलित-विरोधी सहारनपुर काण्ड में जातिवादी, सामंती व सरकारी आतंक के विरुद्ध बी.एस.पी. व उसके नेतृत्व ने सड़क से लेकर संसद तक में जबरदस्त लड़ाई लड़ी, किन्तु संसद में भी इसका सही से निदान नहीं मिलने के विरोध में तब बी.एस.पी. नेतृत्व ने, दलितों व अन्य पिछड़ों आदि के हक की अनदेखी करने पर परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर द्वारा देश के पहले कानून मंत्री पद से इस्तीफा देने का अनुसरण करते हुये, राज्यसभा से ही इस्तीफा दे दिया था कि जब संसद में भी हमारी बात नहीं सुनी जाती है तो ऐसी संसद में रहने का फायदा ही क्या?
इस प्रकार यह उन जबरदस्त उदाहरणों में एक है जो बी.एस.पी. नेतृत्व ने अपने संघर्ष के क्रम में दिया है अर्थात् स्पष्ट है कि बी.एस.पी. को अपनी तरह ही मगरमच्छ के आँसू बहाने की सलाह देेने वाले संकीर्ण स्वार्थी लोग विरोधी पार्टियों के जातिवादी व विशैले षडयंत्र का शिकार ना बनें तो यह बेहतर होगा।
वैसे भी सभी जानते हैं कि मान्यवर श्री कांशीराम जी ने बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) का गठन देश में जाति के आधार पर सदियों से सताये, तोड़े व पछाड़े गये उन लोगों को ’बहुजन समाज’ को आपसी भाईचारा के आधार पर एकता में जोड़कर राजनीतिक शक्ति अर्थात् ’’हुकमरान जमात’’ बनाने के लिये इसलिये किया था ताकि इन वर्गों के मसीहा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के सत्ता की मास्टर चाबी के माध्यम से आत्म-सम्मान व स्वाभिमान मूवमेन्ट को मंज़िल तक पहुँचाया जा सके, और यह क्रम लगातार जारी है, जिसकी राह में रोड़ा बनकर खड़ा होना बी.एस.पी के मिशन 2027 को प्रभावित करने का घोर बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर-विरोधी अनुचित कृत्य होगा। जय भीम, जय भारत।
NEET-UG 2026 का रद्द होना सिर्फ एक परीक्षा का रद्द होना नहीं है, यह उन लाखों परिवारों के भरोसे की बात है, जिन्होंने अपने बच्चों के लिए सपने देखे, मेहनत से पढ़ाया और यह माना कि अगर बच्चा ईमानदारी से पढ़ेगा, तो व्यवस्था भी उसके साथ ईमानदारी से पेश आएगी।
मैं जानता हूँ कि देश भर में एक साथ परीक्षा कराना आसान काम नहीं है। लेकिन हमारे युवाओं को इतना अधिकार तो है कि उनकी मेहनत का सम्मान हो, और उनका भविष्य किसी की लापरवाही की भेंट न चढ़े।
जब पेपर लीक एक के बाद एक दोहराए जाएँ, और छात्र सड़कों पर न्याय माँगने को मजबूर हों तो यह सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं रह जाती, यह हमारे साझा भरोसे की चूक बन जाती है।
हमारे परम पूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे बड़ा हथियार बताया था। उस हथियार को कमजोर करने वालों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
सरकार और एजेंसियों को जवाब देना होगा कि आखिर हर बार युवाओं का भविष्य ही क्यों दांव पर लगाया जाता है?
देश के सभी छात्रों के साथ हमारी पूरी संवेदना और एकजुटता है। न्याय, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना अब सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है।
#NEET
माननीय प्रधानमंत्री जी की हालिया अपील ऐसे समय आई है जब देश की अर्थव्यवस्था पहले से ही दबाव में है। पिछले तीन महीनों में हमारा विदेशी मुद्रा भंडार लगभग $38 अरब घटकर मात्र $690 अरब रह गया है। रुपया डॉलर के मुक़ाबले ₹95 पार कर चुका है, और व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है। ये केवल आँकड़े नहीं हैं, ये करोड़ों परिवारों की रोज़मर्रा की चिंता हैं।
मैं मानता हूँ कि मौजूदा हालात में अर्थव्यवस्था चलाना आसान काम नहीं है, और दुनिया भी एक कठिन दौर से गुज़र रही है।
ऐसे समय में सरकार का ध्यान मांग बढ़ाने पर होना चाहिए, मांग घटाने पर नहीं। दुनिया का आर्थिक इतिहास हमें एक सीधी बात सिखाता है कि जब आर्थिक गति धीमी हो, तब लोगों से कम खर्च करने को कहना समाधान नहीं होता, समाधान यह है कि टैक्स में राहत देकर, छोटे व्यापारियों को सहारा देकर, मध्यम वर्ग पर बोझ कम कर आम परिवारों के हाथ में थोड़ा ज़्यादा पैसा छोड़ा जाए।
मुझे दुख इस बात का है कि हर बार किफ़ायत की ज़िम्मेदारी उसी ईमानदार करदाता पर आ जाती है जिसने कोविड के समय भी सबसे ज़्यादा सहा। उसने उस वक़्त भी पूरे भरोसे से अपनी भूमिका निभाई थी, तब भी उसके लिए राहत सीमित थी, और आज फिर उसी को बलि का बकरा बनाया जा रहा है और वो भी बिना ये बताए कि सरकार अपनी ओर से उसके लिए क्या करने जा रही है।
केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को रेवडियां बांटने वाली नीतियों पर तुरंत रोक लगानी होगी ताकि सरकारी खजाने पर बोझ कम हो सके। अगर सरकारें fiscal dicipline और productive capital creation पर ध्यान नहीं देंगी, तो थोड़े समय का राजनीतिक लाभ देश को लंबी आर्थिक कीमत चुकाने पर मजबूर करेगा।
देश को अपील नहीं, एक स्पष्ट रास्ता चाहिए। लोग जानना चाहते हैं विकास कैसे लौटेगा, नौकरियाँ कैसे बढ़ेंगी, और किसानों, छोटे व्यापारियों व मध्यम वर्ग को असली राहत कब मिलेगी।
सिर्फ़ नागरिकों से त्याग माँगना शासन नहीं होता। जवाबदेही, दूरदृष्टि और आर्थिक संतुलन यही असली राष्ट्रहित है।
देश में सामाजिक परिवर्तन के पितामह के रूप में प्रसिद्ध ’बहुजन समाज’ में अति-पिछड़े वर्ग में जन्मे महात्मा ज्योतिबा फुले को आज उनकी जयंती पर मेरे व बी.एस.पी. की ओर से भी शत्-शत् नमन व अपार श्रद्धा सुमन अर्पित।
ख़ासकर शिक्षा के माध्यम से स्त्री/नारी शक्ति के प्रणेता के रूप में महात्मा ज्योतिबा फुले व उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले का नाम इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। महात्मा ज्योतिबा फुले के शब्दों में ’’विद्या बिना मति गयी, मति बिना नीति गयी। नीति बिना गति गयी, गति बिना वित्त गया। वित्त बिना शुद्र हताश हेये, और गुलाम बनकर रह गये।’’ अर्थात यह सब कुछ शिक्षा के अभाव में हुआ और इसीलिये आगे चलकर परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने इनसे प्रेरित होकर शिक्षा की तरफ विशेष ध्यान दिया।
साथ ही, उन्नीसवीं सदी के मध्य में दलितों व शोषितों की मुक्ति के लिये महात्मा ज्योतिबा फुले के ज़बरदस्त प्रयासों के कारण अकेले पुणे में ही नहीं बल्कि पूरे महाराष्ट्र में सामाजिक परिवर्तन की नई अलख जगी और विशेषकर नारी मुक्ति व सशक्तिकरण का ऐतिहासिक कार्य शुरू हुआ, जिस संघर्षों के लिये उनकी जितनी भी सराहना व प्रशंसा की जाये वह कम है।
ऐसे अति-पिछड़े/ओबीसी समाज के महापुरुष की स्मृति व उनके सम्मान में मेरी बी.एस.पी. सरकार द्वारा अनेकों कार्य यहाँ यूपी में किये गये जिनमें अमरोहा को नया ज्योतिबा फुले नगर ज़िला बनाना शामिल है, किन्तु सपा सरकार ने इसे भी अपनी संकीर्ण राजनीति व जातिवादी द्वेष आदि के कारण इसका नाम भी बदल डाला।
उल्लेखनीय है कि बी.एस.पी की सरकार द्वारा कासगंज को कांशीराम नगर ज़िला बनाने के साथ-साथ कानपुर देहात को रमाबाई नगर, संभल को भीमनगर, शामली को प्रबुद्ध नगर व हापुड़ को भी पंचशील नगर के नाम से नया ज़िला बनाया था, जिसे सपा सरकार ने ज़िला तो बनाये रखा लेकिन इन सभी ज़िलों के नामों को बदल डाला, यह है इनके पीडीए का अति-दुखद चाल, चरित्र व चेहरा।
करौली के पूर्व विधायक सुरेश मीणा ने सैकड़ो समर्थकों के साथ आज बहुजन समाज पार्टी में की घर वापसी।
सुरेश मीणा पूर्व विधायक
@journalist_syed@Mayawati@TheJonyVerma