Today the whole country is celebrating Independence Day.
But there are 6 families who have been waiting for the last 27 years for just one thing. They want respect for their sons.
These are those 6 names:
Captain Saurabh Kalia
Sepoy Arjun Ram
Sepoy Bhanwar Lal Bagaria
Sepoy Bhika Ram
Sepoy Moola Ram
Sepoy Naresh Singh
In the Kargil War of 1999, these 6 soldiers were the first patrol who found out that the Pakistani army had entered our area.
The Pakistani army caught all 6 of them alive.
Then for 22 days, they tortured them in the most cruel way.
This was a full violation of the Geneva Convention, the international law which says that captured soldiers must be treated with humanity.
When their mortal remains came back to India, the post mortem report showed the truth.
That report is still available on the internet.
But even after such a big sacrifice, these 6 martyrs have not got any gallantry award till date.
So today, on Independence Day, we are keeping one simple demand in front of the Government of India.
@rashtrapatibhvn@PMOIndia@narendramodi@DefenceMinIndia@adgpi
Give Captain Saurabh Kalia and his 5 jawans the gallantry award for their sacrifice.
These 6 men did not fight for medals. But giving them respect is the duty of 140 crore Indians.
If you agree with this demand, then like this tweet, retweet it, and repost it with your thoughts.
Jai Hind 🇮🇳
#GallantryForJawaans
@RajCMO@GajendraKhimsar@DIPRRajasthan
दो जगह=निजी एवं सरकारी क्षेत्र की लैबो में रिएजेंट की खरीदारी,
दोनों जगह अलग अलग मेंटेनेंस का भुगतान
जांचों की गुणवत्ता पर मार,
सरकार पर अतिरिक्त भार,
फिर भी निजीकरण पर इतनी मेहरबानी
आखिर क्यों?
@BhajanlalBjp@RajCMO@GajendraKhimsar
माननीय जब एक लैब टेक्नीशियन आए हुए मरीज की रिपोर्ट 5/6 घंटे में दे सकता है
तो विभाग में अधिकारी/कर्मचारियों को लंबा जमावड़ा 2-3 साल तक पदनाम परिवर्तन/ DPC जैसी मांगो पर लापरबाह है?
इन माँगो में तो कोई वित्तीय लाभ भी नहीं
फिर भी देरी?
@BhajanlalBjp@RajCMO@GajendraKhimsar
माननीय जब एक लैब टेक्नीशियन आए हुए मरीज की रिपोर्ट 5/6 घंटे में दे सकता है
तो विभाग में अधिकारी/कर्मचारियों को लंबा जमावड़ा 2-3 साल तक पदनाम परिवर्तन/ DPC जैसी मांगो पर लापरबाह है?
इन माँगो में तो कोई वित्तीय लाभ भी नहीं
फिर भी देरी?
@RajCMO@GajendraKhimsar
DPC भी इतनी मुश्किल कि DOP के साल में दो DPC करने के आदेश बेकार
पदस्थापन में आफ़्शन फॉर्म मांगे
इनमें पदस्थापन नहीं
परिणाम..
मजबूरी में forgo
या न्यायालय की शरण
नेक्स्ट DPC में Defer बढ़ते हैं
शीट खाली रहती हैं
भर्तियों में पद कम मिलते हैं
चिकित्सा मंत्री @GajendraKhimsar जी फुर्सत मिली हो तो बताए कि नागौर में लैब संचालक मरीजों को जांच के नाम लूट रहे हैं। 24 जांच डॉक्टर लिखते ही नहीं, लेकिन बिल बनाने के लिए सब हो रहा है। मजाक हो रहा है। राजस्थान की चिकित्सा को लकवा लगा है!
#नर्सिंग_भर्ती_मेरिट_बोनस_से_हो@RajCMO
@RajCMO@DIPRRajasthan@BhajanlalBjp
संस्थान पर जो डॉक्टर है ही नहीं
मरीज ने उस dr को दिखाया ही नहीं
उसकी साइन शील से स्वयं ही जांच कर रही कृष्णा लैब
मरीज की गजब चिन्ता है निजी लैब को
डॉ को दिखाया नहीं और मरीज की 24 जांच की रिपोर्ट भी प्राप्त हो गई
क्या से क्या हो गया?
स्वास्थ्य विभाग बैठा आंख बंद किए,
ठेके पर सारे जांच लैब चलवाए,
जिसको जितना मौका मिले,
उतना ज्यादा बिल वो बनवाए...!!
अगर मदर लैब एक की जगह 3 जांच कर सकती है तो क्या कृष्णा लैब एक की जगह 24 जांच नहीं कर सकती...??
भाजपा की 'भ्रष्टाचार पर ज़ीरो टॉलरेंस पॉलिसी' शायद चिकित्सा मंत्री जी के गृह जिले के सरकारी अस्पताल में ही भर्ती है...!!
@INCIndia@INCRajasthan
प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी,आपका ध्यान राजस्थान राज्य की अत्यंत चिंताजनक एवं बदहाल सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। वर्तमान में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था लगभग “वेंटिलेटर” पर है, जहाँ आम जनता को बुनियादी उपचार भी समुचित रूप से उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करने के बजाय अपने निजी व्यवसायों को बढ़ाने में अधिक ध्यान दे रहे हैं। इसके अतिरिक्त, एक निजी डायग्नॉस्टिक कंपनी को सरकारी अस्पतालों में लैब जांच का कार्य सौंपा गया है, जो कथित रूप से स्वास्थ्य मंत्री के करीबी व्यक्ति से जुड़ी हुई है। सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं में निजी लैब द्वारा की जा रही कई गंभीर अनियमितताएँ सामने आ रही हैं ,बिना सैंपल जांच किए ही रिपोर्ट जारी की जा रही हैं,स्वस्थ व्यक्तियों को थायराइड एवं कैंसर जैसे गंभीर रोगों से ग्रसित बताया जा रहा है और इन घटनाओं से संबंधित समाचार प्रतिदिन समाचार पत्रों में प्रकाशित हो रहे हैं। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सीधे-सीधे लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ है, जो आपराधिक श्रेणी में आता है। प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp से यह प्रश्न है कि इस निजी लैब को संरक्षण क्यों दिया जा रहा है? गलत रिपोर्टों के कारण जिन मरीजों के जीवन पर खतरा उत्पन्न हो रहा है, उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? यह मामला केवल जांच का नहीं, बल्कि आपराधिक लापरवाही का है, और राजस्थान की जनता शासन से जवाब मांग रही है। जिस स्वास्थ्य मंत्री से पूरा राजस्थान अपेक्षा रखता है,उनके खुद के गृह जिले नागौर की स्वास्थ्य सेवाएँ भी अत्यंत दयनीय स्थिति में हैं,चिकित्सकों की कमी, खराब एवं बंद मशीनें तथा व्यापक अव्यवस्थाएँ यह दर्शाती हैं कि वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग की स्थिति अत्यंत कमजोर है। सरकारी अस्पतालों के हालत देखते हुए मैं यह कहना चाहता हूं कि राजस्थान को ऐसे नाकारा और गैर जिम्मेदार स्वास्थ्य मंत्री की कोई जरूरत नहीं है जिन्हें अपने महकमे में धरातल से जुड़ी कोई जानकारी तक नहीं है | प्रधानमंत्री जी को इस स्थिति पर त्वरित संज्ञान लेकर एक कड़ा संदेश गैर - जिम्मेदार मंत्रियों को देना चाहिए ताकि राजस्थान में स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण महकमे का जिम्मा संभाल रहे व्यक्ति को कड़ा सबक मिले और जनता को सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतर लाभ मिल सकें | सरकार द्वारा लैब से जुड़ा कार्य निजी कंपनी को देने से वर्षों से अल्प वेतन पर कार्य कर रहे संविदा कार्मिकों / प्लेसमेंट कार्मिकों की आजीविका पर भी संकट आ गया | मैं राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा को पुनः कहना चाहता हूं कि आपको विगत दस दिनो में राज्य के विभिन्न जिलों में प्राइवेट लैब को जांचों का कार्य देने से क्या स्थिति बनी ? उसकी उच्च स्तरीय समीक्षा करनी चाहिए क्योंकि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अपनी जवाबदेही के प्रति लापरवाह है और उन्हें इस महकमे से जुड़ी धरातल की कोई जानकारी भी नहीं है |
@PMOIndia@RajCMO
@cmo@DIPRRajasthan
MNJY जांच व्यवस्था मजबूत थी
जिसमें रोजगार भी था
गुणवत्ता भी थी
किफायती भी थी
हब एंड स्पोक मॉडल से जांच व्यवस्था कमजोर हुई
सरकारी अस्पताल को ही अगर प्राइवेट हाथों में सौंपना कितना जायज है?
@hanumanbeniwal
@hanumanbeniwal 🚨 बारां जिला अस्पताल में मरीजों की दुर्दशा!
ऑन-बेड सैंपल और जांच रिपोर्ट की शर्तें पूरी नहीं हो रहीं, परिजन स्ट्रेचर घसीटने को मजबूर हैं।
इस गंभीर मुद्दे को उठाने के लिए #हनुमान_बेनीवाल जी को सलाम 👏
अब राजस्थान सरकार बताए—जिम्मेदार कौन? कार्रवाई कब होगी?