@DrJaiNathSingh3 संसार की सारी गालियां इसके नाम,इस की नीचता के बयान के लिए शब्द कोश के सारे शब्द ही खत्म होगये है, इसको गिरगिट कहना गिरगिट की बेइज्जती करना है, इसको इंसान कहना इंसानियत की बड़ी भारी बेइज्जती है,इस सदी का सबसे घटिया इंसान, इंसान के नाम पर धब्बा।
@DrJaiNathSingh3 इस आदमी को देखो यह पर वाला चोर है जो अपना मुंह फुला फुला कर इस्तीफा मांग रहा है और खुद 6 महीने से ज्यादा जेल में बैठ रहा लेकिन अपना इस्तीफा नहीं दिया था इसलिए अब यह बेरोजगार घूम रहे
@DrJaiNathSingh3 अन्ना हजारे की credibility खत्म की, बच्चों की झूठी कसम खायी, फिर कांग्रेस से गठबंधन, भ्रष्टाचारियों के गले लगा,गाड़ी, बंगला,सुरक्षा सब ली,Covid में लोग मर रहे थे , ये अपने लिए शीश महल बना रहा था। शराब घोटाले में 100 फोन तोड़ दिया,और आज भी फोन जमा नहीं कर रहा।सड़कों का बजट खा गया।
मदीना में कौन हिंदू जाता है?
और कन्वर्टेड गया तो भी कहां हनुमान चालीसा पढा या वजूह की जगह कपडे धोये?
लेकिन गद्दारों को पूजा स्थल पर ही कपडे होने है।
में अपने घर में नित्य ऐसी हरकतें देखता रोकता और लडता हूं।
अगर कांग्रेस से नफ़रत करने की एक वजह चाहिए, तो ये रही:
67 सालों तक, भारत दुनिया का इकलौता देश बना रहा जिसकी सरकार ने अपने छात्रों को अपने ही अतीत से नफ़रत करना सिखाया।
कांग्रेस सरकार के तहत NCERT की किताबों ने हमें बताया कि हम कायर थे, असभ्य थे, और इतिहास में हमेशा हारने वाले थे।
इसकी मिसाल दुनिया में कहीं और नहीं मिलती। हर देश अपने बच्चों को अपनी विरासत के सकारात्मक पहलुओं के बारे में पढ़ाता है। कम्युनिस्ट चीन अपने योद्धाओं और प्राचीन उपलब्धियों का गुणगान करता है। यहाँ तक कि "वोक" यूरोपीय देश भी अपनी महान सभ्यताओं को गर्व से उजागर करते हैं। मुस्लिम राष्ट्र अपने युवाओं में गौरवशाली इतिहास की भावना भरते हैं।
लेकिन कांग्रेस ने हमें अपनी ही सभ्यता के बारे में सिर्फ नकारात्मकता सिखाई।
किसी और देश ने अपनी जनता के साथ ऐसा नहीं किया।
कांग्रेस हमेशा से ब्रिटिश साम्राज्य का ही एक विस्तार थी।
मेरे दादाजी आगरा में जज थे। उन्होंने स्वयं वे कमरे देखे थे, जहाँ उनके अनुसार कई हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ कृत्रिम दीवारों के पीछे बंद की गई हैं। बात ताजमहल को तोड़ने की नहीं, बल्कि उन दीवारों को खोलकर निष्पक्ष जाँच के माध्यम से सत्य सामने लाने की है।
तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर स्वयं कह रहे हैं मौजूद आंकड़ों से भी अधिक हिन्दू मा+रे गए थे जोकि 50,000 से कम नहीं होंगे। क्योंकि कतल करके नहरों में जो पंजाबी हिन्दुओं की और बिहारी हिन्दुओं की ला+शें फैंकी गई उसका आंकड़ा कहीं ज्यादा था।
ये बात हर हिन्दू को उस मु।स्लि।म से पूछना चाहिए जो दावा करते हैं कि उन्होंने भारत को चुना है। लेकिन फिर भी भारतीय संस्कृति को नहीं चुना और अपने कुनबे बनाकर शरियत में सुविधानुसार जीते रहे। पूरी शरियत भी नहीं अपनायी। और इनकी मानसिक गंदगी के बोझ से भारत का समाज कराह रहा है।
इस #दरोगा_शब्बीर_अहमद की उत्तर प्रदेश के थाना रानीपुर जनपद बहराइच में पोस्टिंग है,
यह महोदय पेट्रोल पम्प पर चेकिंग अभियान लगाए थे लेकिन चालान सिर्फ हिन्दुओं की गाड़ियों का कर रहे है।
अगर कोई मुस्लिम है तो उसे छोड़ देते है जो वीडियो में दिख रहा है,
अतः प्रशासन से अनुरोध है कि जाँच करके इस #जातिवादी_दरोगा के खिलाफ उचित कार्यवाही करने की कृपा करें।
@myogiadityanath@Uppolice@dgpup@AshwiniUpadhyay@AshokShrivasta6@SureshChavhanke
“राम मंदिर में चोरी हुई है, वहां बुलडोज़र क्यों नहीं चला”
~ डिंपल यादव
क्या हो गया है विपक्ष को, ये कैसी राजनीति है, उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ रहे हैं और राम मंदिर पर बुलडोज़र चलाने की बात कर रहे हैं
ये कुल्हाड़ी पर खुद ही अपना पैर मार रहे हैं।
दरअसल इनका दीमाग मुस्लिम अपीजमेंट के लिए इस कदर ट्यून हो चुका है ये उसी पिच पर अभी भी खेल रहे हैं।
ये ऐसा बोल कर अपने खास वोटर को हथियार थमा रही हैं कि तुम इसकी मांग करो।
2023 तक धर्मेंद्र प्रधान का पिठ्ठू बन कर तारीफ करने वाला वांगचुक इतने खिलाफ क्यों हो गया?
कारण है उसका FCRA लाइसेंस का रद्द हो जाना जिसके जरिए उसे विदेशों से करोड़ों रुपए मिल रहे थे और उसका गलत इस्तेमाल कर रहा था।
अब तो सरकार FCRA कानून में संशोधन करने जा रही है जिससे अमेरिकी डीप स्टेट परेशान है और मोदी सरकार को परेशान करने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते हैं।
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की तत्कालीन रिपोर्ट बता रही है कि हनुमान गढ़ी की सीढ़ियों पर ही नहीं, मंदिर के प्रांगण में रोज़ा इफ़्तार और नमाज़ का आयोजन हुआ था
महंत ज्ञानदास का आवास मंदिर के प्रांगण में था और 2003 में वहां पर नमाज़ के लिये मुसलमानों को आमंत्रित करने महंत ज्ञानदास खुद घर-घर गये थे
मंदिर प्रांगण में नमाज़ पढ़ने वालों में बाबरी मस्जिद के मुख्य पैरोकार हाशिम अंसारी के अलावा शहर के तमाम मौलाना शामिल थे
टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार 2004 में महंत योगी आदित्यनाथ और मछलीशहर सांसद रामविलास वेदांती के नेतृत्व में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने आयोजन नहीं होने दिया
और फ़ैज़ाबाद के सिविल जज ने इस पर रोक भी लगाई थी
टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने तब इसे एक “धर्मनिरपेक्ष परंपरा का अंत” बताया था
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अब जबकि मैंने आजतक पर Sweta Singh जी का हनुमान गढ़ी में नमाज को प्रमाणित करने वाला वीडियो पोस्ट किया तो अब अविमुक्तेश्वरानन्द जी, बृज भूषण शरण और अखिलेश के नीच मानसिकता के समर्थक बोल रहे हैं कि नमाज हनुमान गढ़ी की सीढ़ियो पर नहीं महन्त ज्ञानदास जी के आवास पर पढ़ी गई थी।
-ऐसे बोलने वाले मूर्खों को इतना तक नहीं पता है कि हनुमान गढ़ी परिसर ५२ बीघा का है। हनुमान गढ़ी के समस्त महन्त आदि का आवास इसी परिसर में आता है। और इन मूर्खों को ये भी नहीं दिखा कि नमाज और रोजे-इफ्तारी के समय वहाँ स्थित भगवान् के चित्रों को ढँक दिया गया। क्या ये पाप नहीं था? ये धूर्त लोग इस पाप का समर्थन करके किसका भला कर रहे हैं?
यदि नमाज नहीं हुई थी तो फिर कोर्ट ने रोक किस पर लगाई थी? कोर्ट की रोक के बाद उस पवित्र परिसर में महन्त ज्ञानदास जी को रोजा इफ्तारी बंद क्यों करनी पड़ी?
-कोई लाख मोदी-योगी विरोधी हो,,पर कम से कम बात जब अपने धर्म की आए तब आँख बंद करके विधर्+मियों के साथ सुर नहीं मिलाने चाहिए।
जिन्हें राजनीति करनी है करें,,हम ऐसी राजनीति का अंग कभी नहीं बनना चाहेंगे जो श्रीहनुमान जी के पावन परिसर में नमाज जैसे कुकर्म का बचाव करती दिखे।