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1000 करोड़ के गुप्त फंड का पर्दाफाश!
नागपुर और यरूशलम के बीच अंतरराष्ट्रीय गठजोड़
नागपुर के विजयदशमी उत्सव और यरूशलम में हुई बैठकों के बीच एक बड़ा कूटनीतिक खेल सामने आ रहा है।
शुरुआत में ये तीन बड़े सबूत सामने आए हैं...
1. 18 अक्टूबर को यरूशलम में RSS पर किताब लिखने वाले इजराइली शोधकर्ता ने ऑन-रिकॉर्ड कहा कि RSS में उनके कई दोस्तों से उनकी मुलाकात इजराइली डिप्लोमैटिक टीम के इवेंट्स के दौरान हुई थी।
2. इसके ठीक दो दिन बाद 20 अक्टूबर को नागपुर के विजयदशमी उत्सव में भारत में इजराइल के कंसुल जनरल ने आकर कहा कि भारत और इजराइल की चुनौतियां और वैल्यूज एक जैसी हैं।
3. इसी वक्त 'बेलिंगकैट' की रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि अमेरिका की दो संस्थाओं "एकल USA" और "सेवा USA" को पिछले 5 सालों में लगभग 1000 करोड़ रुपये मिले हैं।
• यह सारा पैसा "डोनर-एडवाइज्ड फंड्स"के जरिए आता है, जिससे असली पैसा देने वाले कॉर्पोरेट घरानों और अमीरों का नाम हमेशा के लिए छिप जाता है।
• कागजों में इसे स्कूल और शिक्षा के नाम पर भेजा जाता है, लेकिन एक तरफ विदेशी फंडिंग का यह नेटवर्क है और दूसरी तरफ जमीन पर 'फॉर्म-7' के जरिए वोटर लिस्ट से मुस्लिमों के नाम काटने के खेल की खबरें हैं।
• सरकार खुद मानती है कि गुप्त विदेशी फंडिंग से चुनाव प्रभावित होते हैं, फिर भी संघ से जुड़ी संस्थाओं के लिए ये रास्ते खुले हैं जबकि सवाल पूछने वाले 22,000 NGO बंद कर दिए गए।
एक तरफ़ गुप्त अमरीकी फंड का नेटवर्क, मंच पर विदेशी कूटनीति और जमीन पर नागरिकों का वोट काटने का हथियार, यह सब मिलकर एक बड़े 'पावर कैप्चर सिंडिकेट' की तरफ इशारा करते हैं।
देश को अब खोखले भाषणों की नहीं, बल्कि इस दोहरे खेल की पूरी सच्चाई और जवाबदेही की जरूरत है।
Saurav and Ashu are the leaders I look up to.
I had no clue how we would take this movement forward but then these two took things into their hands and made the CJP is what it is today.
I am just fortunate that I get to call these two my brothers and that I get to learn so much from them.
स्पष्टीकरण एवं खेद : ABP नेटवर्क के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लोक गायिका नेहा सिंह राठौर से संबंधित एक ख़बर प्रसारित की गई, जो तथ्यों के आधार पर ग़लत पाई गई. इस त्रुटिपूर्ण प्रसारण के लिए हमें खेद है, हम इसके लिए क्षमा प्रार्थी हैं.