जरा सोचिए, जो सरकार एग्जाम पेपर की सुरक्षा करने में नाकाम है। ऐसी सरकार पर हम देश की सुरक्षा सौंपकर कितना बड़ा खतरा मोल ले रहे हैं !
: मधु किश्वर, लेखिका
सूर्या चौहान की हत्या असद ने की . असद मुस्लिम था…
चिराग त्यागी की हत्या यश ने की… यश हिंदू है…
दोनों घटनाएँ गाज़ियाबाद जिले की हैं . दोनों मामलों में हत्यारे मृतकों के दोस्त थे . दोनों हत्याएँ सुनियोजित तरीके से की गईं . दोनों घटनाएं यूपी में हुई . क़ानून के मुताबिक दोनों मामलों में सख्त सज़ा का प्रावधान है . लेकिन दोनों घटनाओं में फर्क क्या है ? सूर्या का कातिल मुस्लिम है ,चिराग का कातिल हिंदू है . सूर्या के क़ातिल असद को योगी की पुलिस ने एनकाउंटर में मारने का दावा किया है. सूर्या चौहान की हत्या को लेकर बीजेपी सांसद , विधायक और मंत्री समेत तमाम हिंदू संगठनों ने मोर्चा संभाल रखा है. योगी आदित्यानाथ तक बयान दे चुके हैं . हत्यारे असद की आड़ में बीजेपी और मीडिया का ज्वाइंट बेंचर अपने काम पर लग गया है. असद का मुसलमान होना ही टीवी चैनलों के लिए एजेंडा बन गया है . सोशल मीडिया पर मामले पर काफी ज़्यादा आउटरेज देखा जा रहा है लेकिन सवाल ये है कि क्या चिराग त्यागी के मामले में भी वैसा ही आक्रोश क्यों नहीं दिख रहा है ? आख़िर सूर्या की हत्या पर आवाज़ बुलंद करने वाले चिराग की हत्या पर उतने मुखर क्यों नहीं दिखे ? हत्या तो दोनों की हुई लेकिन चिराग की हत्या को बीजेपी नेता और हिंदुवादी संगठन मुद्दा क्यों नहीं बना रहे हैं ? वजह सिर्फ एक है . पैरा एथलीट चिराग त्यागी का हत्यारा हिंदू है , मुसलमान नहीं . इसमें हिंदू- मुस्लिम एंगल नहीं है .
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कहा, मैं एक महिला हूँ और साथ ही एक माँ भी हूँ। मैं मासूम बच्चों के हत्यारे के साथ खड़ी नहीं हो सकती। अगर इस्लामी देश एकजुट होकर इज़राइल से व्यापार बंद कर दें, तो ये ज़ायोनिस्ट एक हफ्ते तक भी बाहर नहीं निकल पाएंगे।
Mera Fair & Lovely babua @DripsAjaypal - Hum toh woh log hai joh kaidey se apke Chhota Fanta aur Bada Fanta ka bhi ilaaj kar lete hai!! Herogiri thoda samhaal ke kijiye.
SIR के बाद जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट में नहीं मिले उन्होंने मीडिया से बताया की पासपोर्ट देने के बावजूद नाम काट दिया गया जबकि बताया गया था पासपोर्ट सबसे स्ट्रांग डॉक्यूमेंट है। मीडिया से बात करते इस व्यक्ति को सुनिए…
चुनाव आयोग इतना ढीला, लिजलिजा और निकम्मा कैसे है?
क्या बंगाल के 27,16,393 वोटरों को प्रशासनिक कमी की वजह से मतदान न करने देना सही होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने डांटा और इलेक्शन कमीशन ने माना सॉफ्टवेयर में कमी रही तो मतदाता को सजा क्यों?
RP Act 1950 इस बारे में क्या कहता है?
हमारी चुनाव व्यवस्था कैसे बन गई है मज़ाक़?
वोटिंग का अधिकार लोकतंत्र की नींव है इसकी रक्षा कैसे हो?
सभी सवालों के जवाब
आपकी राय
Follow करें, जवाब ज़रूर दूंगा
देश में ऐसा कानून बनना चाहिए कि चुनाव जीतने के बाद अगर कोई नेता अपने वादे पूरे ना करे ,
तो उसे पांच साल की सजा , 50 लाख का जुर्माना और जीवन भर चुनाव ना लड़ने पर प्रतिबंध लगे ,
अगर आप सहमत हैं तो एक रीट्वीट करके कमेंट में अपनी राय दें।