Happy Birthday Darling Rubal 🎂❤️
मेरे लिए घर आने का मतलब ही है—आपसे मिलना। घर लौटने का इंतज़ार हो या घर पहुँचने की खुशी, उसके केंद्र में हमेशा आप ही रहती हैं।
आप हैं तो घर में रौनक है, अपनापन है और वह सुकून है जिसके लिए बार-बार घर लौटने का मन करता है। मेरी छोटी बहन होकर भी आप मेरी ज़िंदगी में कितनी बड़ी जगह रखती हैं, शायद यह शब्दों में कभी ठीक से कह ही नहीं पाऊँगी।
मेरी आँखों का तारा, मेरी सबसे प्यारी Rubal…❤️
आप मेरी ज़िंदगी की उन सबसे खूबसूरत खुशियों में से हैं, जिनके होने भर से सब कुछ पूरा-सा लगता है।
जिस सीट को सत्ता और प्रशासन के दम पर हथियाने की कोशिश हुई थी आज वही सीट कांग्रेस जीत गई।
धरना सफल। संघर्ष सफल। लोकतंत्र विजयी। ✊
जिस सीट पर सत्ता के विधायक और प्रशासन की मिलीभगत व चुनावी धांधली के खिलाफ हम रात भर धरने पर बैठे थे, जहाँ पुलिस से लेकर RO तक की भूमिका संदिग्ध थी, जहाँ निर्धारित समय 3 बजे के बाद, 3:29 बजे भाजपा विधायक स्वयं पर्चा और पार्टी सिंबल जमा करवाते हैं और वहाँ उसी महत्वपूर्ण समय की वीडियो फुटेज गायब कर दी गई थी मथानिया नगर पालिका के वार्ड नं. 6 के प्रत्याशी द्वारा फॉर्म जमा करने और RO द्वारा उसे चेक करने की कोई वीडियो फुटेज उपलब्ध नहीं थी आज वही सीट कांग्रेस जीत गई।
तब पूछ रहे थे-समझ नहीं आ रहा, धरना क्यों दे रहे हैं?
“आज नतीजे ने जवाब दे दिया।”
चुनाव चोरी नहीं चलेगी।
जनमत की चोरी नहीं चलेगी।
सत्ता का दबाव हारा। संघर्ष जीता।
लोकतंत्र जीता। कांग्रेस जीती। ✊
उस सदी की आख़िरी दहलीज़ पर ठहरा था वक़्त,जहां ख़तों में मोहब्बत और लहजों में अदब ज़िंदा था।
ना वो बिजली की चकाचौंध थी, ना गाड़ियों का शोर,अठारह सौ नब्बे का वो दौर, सादगी का सवेरा था।
@DivyaMaderna#80sTrend#divyamaderna
उस सदी की आख़िरी दहलीज़ पर ठहरा था वक़्त,जहां ख़तों में मोहब्बत और लहजों में अदब ज़िंदा था।
ना वो बिजली की चकाचौंध थी, ना गाड़ियों का शोर,अठारह सौ नब्बे का वो दौर, सादगी का सवेरा था।
@DivyaMaderna#80sTrend#divyamaderna@DivyaMaderna
कोई भी व्यक्ति परफेक्ट नहीं होता। किसी योग्य व्यक्ति का हक अगर कहीं छूट जाता है, तो स्वाभाविक है कि उसे नाराज़गी होगी ही, लेकिन हमारा धर्म और फर्ज़ बनता है कि उनकी नाराजगी को दूर करें।
राजस्थान की 309 निकायों में कांग्रेस ने पूरी पारदर्शिता के साथ करीब साढ़े 11 हजार सिंबल बांटे हैं। प्रदेश में ऐसा पहली बार हुआ है जब कांग्रेस पार्टी ने इतने सिंबल दिए हों। 50 प्रतिशत से ज्यादा युवाओं को टिकट देने का काम किया है।
दूसरी तरफ ओसियां में दोपहर 3:30 बजे बाद बीजेपी विधायक द्वारा पुलिस के पहरे में सिंबल जमा करवाना लोकतंत्र पर धब्बा है। भाजपा ने सत्ता के दुरुपयोग से कई जगहों पर शर्मनाक काम किया है, पीछे से चोरी करना इनकी आदत बन गई है।
क्योंकि ये लोग जानते हैं कि बीजेपी के पास जनता को बताने के लिए न विकास है, न इंफ्रास्ट्रक्चर और ना कोई ठोस नीति। ढाई साल में इस सरकार ने सिर्फ कोरी बातें और झूठे दावे किए हैं। जनता सब देख रही है, और आने वाले समय में इसका जवाब देगी।
अन्याय के खिलाफ डटकर खड़े रहना और जनता के हक़ की आवाज़ उठाना ही संघर्ष की पहचान है।
पूर्व विधायक दिव्या जी मदेरणा का यह संघर्ष निश्चित रूप से लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया की मजबूती की आवाज़ है।
संघर्ष जारी रहेगा…
@DivyaMaderna@DivyaMadernaINC
मथानिया में नगर निकाय चुनाव के नामांकन के दौरान जो हुआ, उसने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
समय सीमा के बाद क्षेत्रीय विधायक और BJP के एक प्रत्याशी को RO कार्यालय में प्रवेश की अनुमति दी गई। क्षेत्रीय थानाधिकारी द्वारा स्थानीय विधायक को गेट से रिसीव कर कार्यालय के अंदर तक लाया गया, जबकि कार्यालय के अंदर मौजूद कांग्रेस प्रत्याशी के साथ बदतमीजीपूर्ण व्यवहार करते हुए उन्हें बाहर निकाल दिया गया। एक ही नियम दो लोगों के लिए अलग-अलग कैसे हो सकता है?
मैं इस भेदभाव के खिलाफ़ अभी RO कार्यालय, मथानिया के बाहर प्रशासन से जवाब मांगने के लिए बैठी हूँ। अगर चुनाव प्रक्रिया में ही पक्षपात होगा, तो निष्पक्ष चुनाव और लोकतंत्र पर जनता का विश्वास कैसे कायम रहेगा? यह सिर्फ़ कांग्रेस प्रत्याशी के साथ भेदभाव नहीं, बल्कि संविधान की भावना और लोकतांत्रिक व्यवस्था का अपमान है।
RO को जवाब देना होगा कि आखिर यह भेदभाव किसके दबाव में और क्यों किया गया?
पुलिस-प्रशासन की तानाशाही नहीं चलेगी।
सत्ता के दबाव में मिलीभगत और गुंडागर्दी नहीं चलेगी।
लोकतंत्र में नियम सबके लिए बराबर होने चाहिए। सत्ता पक्ष के लिए अलग नियम और विपक्ष के लिए अलग व्यवहार किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
जब 3 बजे के बाद किसी को नामांकन प्रक्रिया में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती, तो स्थानीय विधायक और उनके लोगों को अंदर कैसे जाने दिया गया?
गेट बंद था तो पुलिस अधिकारी उन्हें अंदर लेकर कैसे पहुंचे? और कांग्रेस प्रत्याशी को बाहर निकालने के लिए पुलिस को किसने कहा?
क्या चुनावी प्रक्रिया में सत्ता पक्ष और विपक्ष के लिए अलग-अलग नियम हैं? क्या यही प्रशासन की निष्पक्षता है?
जिम्मेदार अधिकारियों को जवाब देना होगा। किसी भी तरह की लीपापोती स्वीकार नहीं की जाएगी।
मथानिया नगर पालिका चुनाव में निष्पक्ष चुनाव की मांग को लेकर पूर्व विधायक सुश्री दिव्या मदेरणा जी ने धरना दिया।
नामांकन के अंतिम दिन निर्धारित समय समाप्त होने के बाद भाजपा विधायक भैराराम सियोल की RO कक्ष में मौजूदगी को लेकर चुनावी पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं।
निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद हैं। इसलिए हर कदम पारदर्शी होना चाहिए, ताकि किसी प्रत्याशी या मतदाता के मन में संदेह की कोई गुंजाइश न रहे।
चुनाव आयोग को मामले का संज्ञान लेकर जांच करनी चाहिए और पूरी चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करनी चाहिए।
@DivyaMaderna
#NirmalChoudhary
मथानिया में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठे तो दिव्या मदेरणा जी ने चुप रहने के बजाय प्रशासन से सीधे जवाब मांगने का फैसला किया। यही जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। लोकतंत्र के लिए उनकी यह लड़ाई सराहनीय है।
#DivyaMaderna
मथानिया नगर पालिका चुनावों को लेकर पूर्व विधायक दिव्या मदेरणा जी ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर धरना प्रदर्शन दिया। नामांकन के आख़िरी दिन निर्धारित समय समाप्ति के बाद भाजपा विधायक भैराराम सियोल की RO कक्ष में मौजूदगी चुनावी पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है।
चुनाव आयोग को इस मामले में संज्ञान लेना चाहिए और प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करनी चाहिए।
जब एक ही नियम दो लोगों के लिए अलग-अलग तरीके से लागू होता दिखे, तब सवाल उठाना जरूरी है। दिव्या मदेरणा जी ने जनता और लोकतंत्र के हित में आवाज उठाकर एक बार फिर साबित किया है कि वे अन्याय के सामने झुकने वाली नहीं हैं।
#DivyaMaderna
मथानिया नगर पालिका चुनाव में निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
चुनाव आयोग को बताना चाहिए कि नामांकन का अंतिम समय बीत जाने के बाद भी भाजपा विधायक भैराराम सियोल का RO कक्ष में मौजूद रहना आखिर किस अधिकार और किस उद्देश्य से था? जब चुनावी प्रक्रिया नियमों और समय-सीमा से संचालित होती है, तो सत्ता पक्ष के लिए क्या अलग नियम बनें हैं?
पूर्व विधायक दिव्या मदेरणा जी का धरना चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता की मांग है। चुनाव आयोग को इस मामले की निष्पक्ष जांच कर ये सुनिश्चित करना चाहिए कि लोकतंत्र में सत्ता का दबाव नहीं, बल्कि कानून और नियम सर्वोपरि है।
@CeoRajasthan@ECISVEEP@DivyaMaderna
मथानिया नगर पालिका चुनाव में निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
चुनाव आयोग को बताना चाहिए कि नामांकन का अंतिम समय बीत जाने के बाद भी भाजपा विधायक भैराराम सियोल का RO कक्ष में मौजूद रहना आखिर किस अधिकार और किस उद्देश्य से था? जब चुनावी प्रक्रिया नियमों और समय-सीमा से संचालित होती है, तो सत्ता पक्ष के लिए क्या अलग नियम बनें हैं?
पूर्व विधायक दिव्या मदेरणा जी का धरना चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता की मांग है। चुनाव आयोग को इस मामले की निष्पक्ष जांच कर ये सुनिश्चित करना चाहिए कि लोकतंत्र में सत्ता का दबाव नहीं, बल्कि कानून और नियम सर्वोपरि है।
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