@ABPNews ने फ़र्ज़ी ख़बर चलाकर मुझे प्रॉस्टिट्���ूsट कहा, और अब मुझसे मेरा रेट पूछा जा रहा है. क्या एबीपी न्यूज़ का माफ़ीनामा लोगों के दिमाग़ में मेरे ख़िलाफ़ बैठ चुकी अफ़वाहों को ख़त्म कर देगा? क्या माफ़ीनामा लिखने से अपराध ख़त्म हो जाता है? एबीपी न्यूज़ की खबर में मेरा नाम गलती से नहीं आया था. पूरी की पूरी खबर ही मुझे डिफ़ेम करने के लिए गढ़ी गई थी. ये सुपारी जर्नलिज़्म है जिसका उद्देश्य ही व्यक्ति का का मान-मर्दन करना और आईटी सेल को सपोर्टिंग कंटेंट-स्क्रीनशॉट देना होता है. इनकी फ़र्ज़ी ख़बर के स्क्रीनशॉट हमेशा ऑनलाइन मौजूद रहेंगे और इन्हें हमेशा मेरे ख़िलाफ़ यूज़ किया जाएगा. क्या मेरे इस नुक़सान की भरपाई इनके माफ़ीनामे से हो ��ाएगी? मुझे माफ़ी नहीं न्याय चाहिए.
@NCWIndia
Then and Now ☺️
This is Like .... Put Pressure on Client.... And Grab The Project ....
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This is Business Not Journalism ✅
“Lawrence Bishnoi Sahab”
The respect Delhi Police has for gangsters…
Wish they showed even 10% of this courtesy to students and activists who are doing nothing but protest.