शाहरुख खान का नशेड़ी लौंडा आर्यन खान दोस्तों की बर्थडे पार्टी में इतना टल्ली हो गया कि गाड़ी तक जाने का होश नहीं रहा , ये है शाहरुख खान का चश्मों चिराग...
ज़्यादा पैसा आसानी से पचता नहीं है, संस्कार क्या होते हैं, ये अंबानी और अदानी के परिवारों से सीखा जा सकता है...😎
शाहरुख खान ने अपने बेटे को ड्रग्स के आरोप से तो बचा लिया, उल्टे नार्कोटिक्स के अधिकारी समीर वानखेड़े को ही फँसा दिया
लेकिन आज सड़क पर नशे में झूमते अपने उसी लड़के की इस हालत के लिये किसे दोष देगा
Addressed the Green Power India Conclave 2026 at the India International Centre, New Delhi, and emphasized the importance of accelerating the clean energy transition through innovation, sustainability, and collaborative efforts to build a greener and energy-secure India.
🧘♂️ योग चेतना महोत्सव 🧘♀️
12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में
योग आयोग, मध्यप्रदेश सरकार एवं अखिल भारतीय योग शिक्षक महासंघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “योग चेतना महोत्सव” में आप सभी का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन।
📍 भोपाल, मध्यप्रदेश
📅 14 जून 2026
आइए, योग को जन-जन तक पहुंचाकर स्वस्थ, सकारात्मक एवं शांतिमय समाज के निर्माण में सहभागी बनें।
योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की भारतीय संस्कृति का आधार है।
“योग अपनाएं, स्वास्थ्य और आत्मबल बढ़ाएं।” 🌿
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अच्छा स्वास्थ्य ही जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति है, जिसमें व्यायाम की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। मैं सभी देशवासियों के स्वस्थ और सुखी जीवन की कामना करता हूं।
व्यायामाल्लभते स्वास्थ्यं दीर्घायुष्यं बलं सुखम्।
आरोग्यं परमं भाग्यं स्वास्थ्यं सर्वार्थसाधनम्॥
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग लगाओ: पैकेट पर लिखा होगा- फूड हेल्दी या अनहेल्दी; जानें ये क्यों जरूरी
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#healthcare#healthyliving Anchor By @anchorNehayadav
@star_orm@TweetAbhishekA Iam a doctor and facing lot of problem with star health Insurance
Without knowing the true indication of hoispitalisation u people deny the claim, now a days it big problem with star health
Star Health का कौन सा खेल चल रहा है? मरीज तो मरीज, डॉक्टर खुद बता रहे हैं, वे भी त्रस्त हैं। देखिए डॉक्टर अरविंद कह रहे हैं कि बिना ये जाने कि मरीज को भर्ती होने की जरूरत है, Star Health Insurance क्लेम रिजेक्ट कर देती है। और ये कंपनी बहुत बड़ी समस्या बन गई है।
देश में कोई नहीं है कंपनी के खिलाफ ऐसी शिकायतें सुनने वाला?
कोई मंत्रालय-मंत्री हैं जिनके अंदर ये कंपनियां आती हो ?
हेल्थ इंश्योरेंस का 'Exclusion' स्कैम: जब कंपनियां खुद को डॉक्टर से बड़ा समझने लगें!
आज भारत में हेल्थ इंश्योरेंस के नाम पर एक सुनियोजित खेल चल रहा है। कंपनियां 'सस्ते प्रीमियम' और 'कैशलेस' के बड़े-बड़े विज्ञापनों से ग्राहकों को लुभाती हैं, लेकिन जब अस्पताल के बिस्तर पर पड़ा मरीज क्लेम मांगता है, तो उसे थमा दिया जाता है 'रिजेक्शन लेटर'। बहाना होता है 'Exclusions' (बाहरी शर्तें) और तर्क दिया जाता है कि "यह इलाज तो घर पर या OPD में हो सकता था, भर्ती होने की क्या जरूरत थी?"
डॉक्टर के विवेक पर कंपनी का 'कब्जा'
सबसे बड़ा विवाद तब पैदा होता है जब एक विशेषज्ञ (Specialist) डॉक्टर मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे अस्पताल में भर्ती करता है। लेकिन, बीमा कंपनी के दफ्तर में बैठा एक क्लर्क या मैनेजर, जिसने मरीज को देखा तक नहीं, वह अपनी पॉलिसी के 'Exclusions' (वर्जित शर्तों) का हवाला देकर उसे 'Non-Medical Necessity' कहकर खारिज कर देता है।
यह न केवल मरीज के साथ धोखा है, बल्कि संपूर्ण चिकित्सा पद्धति का अपमान है। क्या अब बीमा कंपनियां तय करेंगी कि डॉक्टर को मरीज का इलाज कैसे करना चाहिए?
हाई कोर्ट के आदेशों की सरेआम धज्जियां
विभिन्न माननीय हाई कोर्ट्स (जैसे सुलभा प्रकाश बनाम न्यू इंडिया एश्योरेंस) ने अपने ऐतिहासिक फैसलों में बार-बार कहा है कि: "बीमा कंपनी के पास कोई मेडिकल विशेषज्ञता नहीं है कि वह डॉक्टर के विवेक को चुनौती दे सके। यदि डॉक्टर ने भर्ती करने का फैसला लिया है, तो वही अंतिम सत्य है।"
दुर्भाग्य की बात यह है कि बीमा कंपनियां इन अदालती आदेशों को रद्दी की टोकरी में डाल देती हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि हर ग्राहक कोर्ट जाने की हिम्मत या साधन नहीं रखता।
IRDAI: 'चोरी के बाद आने वाली पुलिस'
बीमा नियामक (IRDAI) की भूमिका आज उस पुलिस जैसी हो गई है जो चोरी होने के बाद रिपोर्ट लिखने आती है, लेकिन चोरी रोकने के लिए गश्त नहीं लगाती। IRDAI के पास शिकायत (Bima Bharosa) करने पर समाधान तो मिलता है, लेकिन वह कंपनियों पर ऐसा भारी जुर्माना नहीं लगा पा रही जिससे उनकी यह मनमानी हमेशा के लिए बंद हो जाए।
बड़े नाम, खोखले दावे:
बाजार में Star Health और Care Health जैसी कंपनियों का बड़ा नाम है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि क्लेम रिजेक्शन की सबसे ज्यादा गूंज इन्हीं के खिलाफ सुनाई देती है। कंपनियां 'कॉन्ट्रैक्ट' की भाषा को इतना उलझा देती हैं कि आम आदमी को समझ ही न आए कि उसने बीमा लिया है या खुद के लिए नई मुसीबत खरीदी है।
#Note: ऊपर में 2 कंपनी का नाम इसलिए लिखा है क्योंकि इरडा के लिस्ट में ये उपर हैं, इसका कतई ये मतलब नहीं है कि बाकी कंपनिया दूध की धुली है। सभी इस नियम के आड़ में मनमानी कर रही हैं, बस तुलना इतनी है की “मेरा दाग तेरे दाग से हल्के हैं”😊
मेरी मांगें और सुझाव (IRDAI के लिए):
Section/Exclusion की मनमानी खत्म हो:
पॉलिसी में छिपे हुए उन क्लॉज को हटाया जाए जो कंपनी को डॉक्टर के निर्णय को ओवररूल (Overrule) करने की ताकत देते हैं।
'Preventive' रेगुलेशन:
चोरी होने का इंतज़ार न करें। अगर कोई कंपनी बार-बार 'OPD Basis' कहकर क्लेम रिजेक्ट कर रही है, तो उसके लाइसेंस पर कार्रवाई हो।
क्लेम अप्रूवल की समय सीमा:
भर्ती के 1 घंटे के भीतर कंपनी को स्पष्ट करना होगा कि क्लेम मिलेगा या नहीं। डिस्चार्ज के वक्त नया बहाना बनाना 'क्रिमिनल ऑफेंस' माना जाए।
सफलता की 100% गारंटी: क्लेम न मिले तो ये 'ब्रह्मास्त्र' चलाएं
अगर आपका क्लेम 'Exclusion' या 'OPD' के नाम पर रिजेक्ट हुआ है, तो यह आपकी जीत का पक्का रास्ता है:
Rebuttal Letter (विरोध पत्र):
सबसे पहले कंपनी को एक सख्त ईमेल लिखें। उसमें डॉक्टर का 'Justification' लगाएं कि अस्पताल की मशीनरी और स्टाफ के बिना इलाज संभव नहीं था।
Legal Precedents:
अपने पत्र में हाई कोर्ट के फैसलों का जिक्र करें। कंपनियों को पता चलना चाहिए कि ग्राहक अपने अधिकारों के प्रति सजग है।
बीमा लोकपाल (Ombudsman) -
सबसे बड़ा हथियार: लोकपाल कंपनियों की इन 'बनावटी' शर्तों को नहीं मानता। यहाँ 90% से ज्यादा फैसले ग्राहकों के पक्ष में होते हैं क्योंकि लोकपाल भी 'मेडिकल जरूरत' को 'कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों' से ऊपर रखता है।
सोशल मीडिया का दबाव:
Threads, X (Twitter) पर कंपनियों और IRDAI को टैग करें। जब बात पब्लिक होती है, तो कंपनियां तुरंत सेटलमेंट के लिए फोन करती हैं।
बीमा कंपनियों ने इसे व्यापार बना लिया है, जबकि यह एक सेवा है। जब तक आप चुप रहेंगे, आपकी मेहनत की कमाई लूटी जाएगी।
जागरूक बनिए, सवाल पूछिए और अपने हक के लिए लड़िए क्योंकि आपकी चुप्पी ही इन कंपनियों की ताकत है।
धन्यवाद
Bablu Kummar Singh, CFP®
एक आम इंसान मेहनत की कमाई से Insurance कंपनियों का प्रीमियम भरता है। जहाँ एक तरफ़ वो प्राइवेट अस्पतालों के महँगे इलाज की मार झेलता है, वहीं कुछ Insurance Companies भी उनकी परेशानी कम करने की जगह बढ़ाने का काम करती हैं।
बेकार कारण देकर Claims रिजेक्ट हो जाते हैं, ठीक से जवाब नहीं मिलते।
जनता को परेशान करने वाली कंपनियों पर एक्शन होना चाहिए।
हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों की मनमानी बहुत बढ़ गई है
लोग यह सोचकर हजारों लाखों रुपए प्रीमियम भुगतान करते हैं की जरूरत पर इंश्योरेंस कंपनियां मदद करेंगी
लेकिन इंश्योरेंस कंपनीयां इतनी लुटेरी हो गई है कोई ना कोई बहाना बनाकर लोगों का क्लेम रिजेक्ट कर रही हैं