अयोध्या के चंदा चोरी मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई जरूर होनी चाहिए, लेकिन विरोध के नाम पर साधु-संतों की वेशभूषा पहनकर उनका मजाक बनाना गलत है।
राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, पर किसी धर्म, संत या आस्था का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता। विपक्ष को मुद्दे पर सवाल उठाने चाहिए, हिंदू संतों और सनातन परंपराओं का उपहास नहीं करना चाहिए।
Scientific Deconstruct of Cockroaches
*Jantar Mantar protests were never just about students. From radical Islamists, Maoists, criminals, church, foreign funded NGOs gave lethal twist to campaign*
K.A. Badarinath
A scientific deconstruction of what Cockroach Janata Party (CJP) and its 49-days violence ridden protests at Jantar Mantar warrants looking beyond the ordinary.
Neither the protests were simply about leak of papers relating to national examinations for admitting students to top medical colleges nor were they instant outpour of student’s anger against the system alone.
https://t.co/6b4LfHOczB
CJP मंच से गर्व से गाया जाता है "बस नाम रहेगा अल्लाह का", लेकिन 'राम-नाम' लिखने वाले को मिल रही हैं धमकियां
चावल पर 'राम-राम' लिखने वाले मनीष पाल का आरोप: "कॉकरोचों ने कहा यहाँ राम-नाम नहीं चलेगा"
अल्लाह से प्रेम, राम से बैर? क्या यही है कॉकरोचों की असलियत? देखिए @Anurragmishra की ग्राउंड रिपोर्ट
माननीय @uttarakhandcops एवं @pushkardhami जी से विनम्र निवेदन है कि हम गुजरात से आए यात्रालु हैं। मेरे भाई श्री जयेश बाबूलाल वर्मा (स्वामीनारायण नगर, माधापर, भुज, कच्छ, गुजरात) का मोबाइल फोन लक्ष्मण झूला थाना क्षेत्र में चोरी हो गया है।
लिखित शिकायत देने के बावजूद अभी तक अपेक्षित सहायता नहीं मिल रही है, जबकि खोया हुआ मोबाइल नंबर 7228854550 अभी भी चालू दिखा रहा है। कृपया मामले में शीघ्र कार्रवाई कर यात्रालुओं की सहायता करें।
शिकायतकर्ता:
जयेश बाबूलाल वर्मा
संपर्क: 7983421813
उत्तराखंड देवभूमि है, हमें उत्तराखंड पुलिस पर पूर्ण विश्वास है कि वह इस मामले में उचित कार्रवाई करेगी।
#UttarakhandPolice #LakshmanJhula #Rishikesh #MobileTheft #HelpTourists
भारत-पाक सीमावर्ती क्षेत्र कच्छ के अंजार नगर में चल रहे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ–सौराष्ट्र प्रान्त के संघ शिक्षा वर्ग के 288 शिक्षार्थियों द्वारा पथ संचलन...
(23 मई, 2026 )
किसी और की जीत पर ख़ुश हो कि न हो पर हर महिला को इन तीनों की जीत पर जश्न मनाना चाहिए।
माँ दुर्गा ने मानो अपने आँचल में समेट कर इन्हें आशीर्वाद दिया
*कलिता माझी*- ऑसग्राम सीट से जीतीं
-भाजपा की ये उम्मीदवार घरों में बर्तन माँजने का काम करती
कमाई- लगभग 2500 रुपये प्रति माह
-बीजेपी का समर्थन करने के लिए टीएमसी के कार्यकर्ता उन्हें लगातार परेशान करते थे।
-कलिता ने टीएमसी के उम्मीदवार को 12,535 से ज्यादा वोटों से हराया।
यह सीट पूर्व बर्धमान जिले में आती है।
*रत्ना देबनाथ*- पानीहाटी सीट से जीती
आरजी कर अस्पताल में बलात्कार और हत्या की शिकार हुई बेटी की मां हैं।
टीएमसी को 28,000 से ज्यादा वोटों से हराया
उत्तर 24 परगना जिले की ये सीट शहरी क्षेत्र है
*रेखा पात्रा*- हिंगलगंज (SC) सीट से जीतीं
संदेशखाली में टीएमसी के लोगों द्वारा किए गए सामूहिक बलात्कार की पीड़ित
टीएमसी के उम्मीदवार को 5000 से ज़्यादा वोटों से हराया।
लोकसभा में हार गई थीं लेकिन विधानसभा में बीजेपी ने फिर उतारा..
ભુજ જિલ્લા માં બજરંગદળ ના કાર્યકર્તા ને “૭૦ ટુકડા કરી નાખવાની” ખુલ્લી ધમકી આપવામાં આવી છે.
આવો ગંભીર ગુનાહિત ધમકીનો મામલો તાત્કાલિક FIR લાયક છે.
માનનીય @SPWestKutch ને વિનંતી કે તાત્કાલિક કાર્યવાહી કરી કાર્યકર્તા ની સુરક્ષા સુનિશ્ચિત કરવામાં આવે.👇
https://t.co/77lDOR7W3a
#Bhuj
"विकास के नाम पर विनाश का रास्ता"
भारत की सबसे प्राचीन पर्वतमाला अरावली आज अपने अस्तित्व की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ रही है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश के बाद 100 मीटर से कम ऊँचाई वाली पहाड़ियों को “पहाड़” न मानने की व्याख्या सामने आई है, जिसने अरावली के विशाल भूभाग को कानूनी संरक्षण से बाहर करने का खतरा पैदा कर दिया है। यह केवल शब्दों का खेल नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और पूरे उत्तर-पश्चिम भारत के पर्यावरणीय भविष्य को सीधे प्रभावित करने वाले हैं।
अरावली पर्वतमाला लगभग 692 किलोमीटर तक गुजरात से लेकर दिल्ली तक फैली है और इसे लगभग तीन अरब वर्ष पुरानी पर्वत श्रृंखला माना जाता है। इसका दो-तिहाई हिस्सा राजस्थान में स्थित है, जहाँ यह जलवायु संतुलन, वर्षा चक्र और भूजल रिचार्ज की रीढ़ के रूप में कार्य करती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि अरावली न होती, तो पश्चिमी, मध्य और दक्षिण भारत का बड़ा भूभाग रेगिस्तान में बदल चुका होता। ऐसे में इस प्राकृतिक ढाल को कमजोर करना दीर्घकालिक पर्यावरणीय आत्मघात से कम नहीं है।
फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के आँकड़े इस संकट की गंभीरता को और स्पष्ट करते हैं। देश में मैप की गई 12,081 पहाड़ियों में से केवल 1,048 यानी महज 8.7 प्रतिशत ही 100 मीटर की ऊँचाई के मानक पर खरी उतरती हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि अरावली का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा इस नई व्याख्या के बाद कानूनी सुरक्षा खो सकता है। यह स्थिति खनन, रियल एस्टेट और निजी परियोजनाओं के लिए रास्ता खोलती है, जबकि पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के लिए यह विनाश का संकेत है।
अरावली केवल पहाड़ियों की श्रृंखला नहीं है। यह 300 से अधिक जीव-जंतुओं और पक्षियों का प्राकृतिक आवास है, लाखों पशुपालकों के लिए चारागाह है और बनास, साबरमती तथा लूणी जैसी नदियों का उद्गम स्थल भी है। इसकी चट्टानी संरचना वर्षा जल को रोककर उसे जमीन के भीतर पहुँचाती है, जिससे पूरे क्षेत्र में भूजल रिचार्ज होता है। पहले से ही जल संकट से जूझ रहे पश्चिमी राजस्थान के लिए अरावली का कमजोर होना सूखे को स्थायी बना देने जैसा होगा।
सरकार की पर्यावरण नीति की वास्तविक तस्वीर जोजरी नदी की उपेक्षा और खेजड़ी वृक्षों के साथ हो रहे व्यवहार से भी साफ होती है। खेजड़ी, जिसे राजस्थान का राज्य वृक्ष माना जाता है और जो रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र की जीवनरेखा है, आज योजनाबद्ध कटाई का शिकार बन रहा है। सरकारी आँकड़ों और जमीनी आकलनों के अनुसार, सोलर परियोजनाओं और औद्योगिक लीज़ के नाम पर अब तक लगभग 26 लाख खेजड़ी पेड़ काटे जा चुके हैं, जबकि आने वाले समय में करीब 50 लाख और खेजड़ी पेड़ों की कटाई की तैयारी की जा रही है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि एक पूर्ण विकसित खेजड़ी पेड़ के साथ अन्य पेड़ो को तैयार होने में लगभग 100 वर्ष लगते हैं, जिससे मरुस्थल के इस अनमोल पारिस्थितिकी तंत्र पर दीर्घकालिक और गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
एक पेड़ औसतन 1,200 किलोलीटर ऑक्सीजन प्रतिवर्ष देता है। इस आधार पर, जो 26 लाख पेड़ काटे गए, वे हर साल लगभग 25 करोड़ किलोलीटर ऑक्सीजन प्रदान करते थे जो अब पूरी तरह बंद हो चुकी है। पेड़ों के कटने और बड़े पैमाने पर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना के कारण तापमान में 3 से 4 डिग्री तक वृद्धि दर्ज की गई है। पर्यावरणविदों के अनुसार, पश्चिमी राजस्थान में बारिश कम होने का यह एक प्रमुख कारण बन गया है। तापमान बढ़ने और आवास नष्ट होने के चलते रेगिस्तान के कई छोटे जीव भी विलुप्ति के कगार पर पहुँच गए हैं। जबकि यही पारिस्थितिकी तंत्र है जो न्यूनतम पानी में पनपता है, मिट्टी को बाँधकर मरुस्थलीकरण को रोकता है, पशुओं के लिए चारा देता है और स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है।
विडंबना यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने अतीत में अरावली की रक्षा के लिए ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। 1990 के दशक से लेकर एम.सी. मेहता बनाम यूनियन ऑफ इंडिया जैसे मामलों में कोर्ट ने राजस्थान और हरियाणा में अनियंत्रित खनन पर रोक लगाई और यह स्वीकार किया कि इससे होने वाला पर्यावरणीय नुकसान अपूरणीय है। ऐसे में आज उसी अरावली को कमजोर करने वाली व्याख्या सामने आना न केवल चिंताजनक है, बल्कि न्यायिक परंपरा के भी विपरीत प्रतीत होता है।
“भुज एयरपोर्ट के सामने खड़ा यह मज़हबी अवैध ढांचा क्या सिर्फ निर्माण है?
या एक संभावित आक्रमण की तैयारी का स्पष्ट संकेत?
स्थानीयों ने बार-बार चेताया, पर प्रशासन अब भी मौन है।
राष्ट्र की सुरक्षा से कोई चूक नहीं, जहाँ खतरे की बू आए, वहाँ देर नहीं, तुरंत कार्रवाई हो
आख़िर क्यों भुज एयरपोर्ट के सामने टेकरी पर जिहादियों ने मजहब के नाम पर अवैध ढांचा बनाया है ?
क्या जिहादियों के निशाने पर भुज एयरपोर्ट है ?
@GujaratPolice@dgpgujarat
माननीय @Bhupendrapbjp जी एवं @sanghaviharsh भाई, स्थानिकों ने कई बार प्रशासन से इस अवैध ढांचे को हटाने की माँग की है, मगर स्थानिक प्रशासन ने इस पर कोई कारवाई नहीं की, स्थानिकों के अनुसार इस जगह पर कई अवैध गतिविधियां देखी गई है एवं असामाजिक तत्वों द्वारा ग़ैर क़ानूनी कार्य भी होते आ रहे है, कृपया संज्ञान लिजिए।
Location-
Mota pir.
Near muslim Education school
Opp Sanskar collage
Air port road ,
Bhuj Kutch
Cc @narendramodi@AmitShah
आख़िर क्यों भुज एयरपोर्ट के सामने टेकरी पर जिहादियों ने मजहब के नाम पर अवैध ढांचा बनाया है ?
क्या जिहादियों के निशाने पर भुज एयरपोर्ट है ?
@GujaratPolice@dgpgujarat
माननीय @Bhupendrapbjp जी एवं @sanghaviharsh भाई, स्थानिकों ने कई बार प्रशासन से इस अवैध ढांचे को हटाने की माँग की है, मगर स्थानिक प्रशासन ने इस पर कोई कारवाई नहीं की, स्थानिकों के अनुसार इस जगह पर कई अवैध गतिविधियां देखी गई है एवं असामाजिक तत्वों द्वारा ग़ैर क़ानूनी कार्य भी होते आ रहे है, कृपया संज्ञान लिजिए।
Location-
Mota pir.
Near muslim Education school
Opp Sanskar collage
Air port road ,
Bhuj Kutch
Cc @narendramodi@AmitShah
રાજ્યની શાળા–કોલેજોમાં ફૂડ મેલામાં નોનવેજ પીરસાય જેવી બેદરકારી ગંભીર મુદ્દો છે.
વિદ્યાર્થીઓના શારીરિક, માનસિક અને સાંસ્કૃતિક આરોગ્ય માટે સંસ્કારમૂલક વાતાવરણ અનિવાર્ય છે.
શૈક્ષણિક સંસ્થાઓમાં શુદ્ધ આહાર, રાષ્ટ્રીય મૂલ્યો અને શિસ્ત માટે કડક માર્ગદર્શિકા અમલમાં આવે તેવી વિનંતી. 🙏