एक गरीब ब्राह्मण था….
यह लेखक की कल्पना थी।
हर कहानी में मिल जाएंगी।
आपने कभी किसी कहानी में ऐसा सुना,
एक गरीब कुर्मी था।
एक गरीब मल्लाह था।
एक गरीब ठाकुर था।
एक गरीब कुम्हार था।
एक गरीब दलित था।
एक गरीब मुसहर था।
ऐसी कहानियाँ नहीं मिलेंगी।
क्योंकि ये हक़ीक़त है।
हमारे क्षेत्र मध्यप्रदेश के सिवनी जिले के केवलारी के बाज़ार चौक के टॉवर में BSNL की सेवाओं का उपयोग करने में बहुत दिक्कत आ रही है नेटवर्क कभी आता है कभी नही और अगर जैसे कभी नेटवर्क आया तो सर उसमे इंटरनेट नही चलता और दूसरे क्षेत्र के टॉवर में इंटरनेट चलाने में बढ़िया चलता है
किया गया
अतः आपसे निवेदन है कि मामले को संज्ञान में लेकर तुरंत सेवाएं बहाल की जाए
सर हमारे प्रधानमंत्री जी के द्वारा BSNL को आगे बढ़ाने में बहुत अच्छे कदम उठाए जा रहे है आशा करता हूं की आप मामले को संज्ञान में लेंगे और सेवाएं बहाल करने में जल्द कार्यवाही करेंगे
सर आप खुद कह रहें हैं कि
दो बार आपने ट्रैनिंग ली और नौकरी भी की IRTS के तौर पर एक साल नौकरी की
और उस समय (2021 वाली इंटरव्यू में) IDAS में कार्यरत थें
फिर भी आपको ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट की जरूरत थीं ?
' वो चली गईं. 5 महीने की शादी थी. मेरा बेटा शहीद हो गया. हमारे पास क्या बचा...ऐसे बहुत केस आ रहे हैं...बहुएं भाग जा रही है ले देकर. राहुल जी ने कहा है वो राजनाथ जी से बात करेंगे इस पर '
कीर्ति चक्र से सम्मानित शहीद अंशुमन सिंह के माता-पिता को सुनिए
वीडियो- @pankajjilive
@BSNLCorporate पहले भी इंटरनेट सेवाओं को लेकर आपसे शिकायत कर चुके है हम हमारे क्षेत्र केवलारी में इंटरनेट की स्पीड बहुत कम चलती है जिसके कारण यह की जनता अपने घरों में इंटरनेट का उपयोग सुचारु ढंग से नही कर पा रही है
मध्यप्रदेश पुलिस के द्वारा दलित डिप्टी कलेक्टर निशा बांगरे के साथ और बाबासाहेब की तस्वीर के साथ कि गई अभद्रता और दुर्व्यवहार शर्मनाक है। मध्यप्रदेश से दलित आदिवासी विरोधी भाजपा की विदाई निश्चित है।
बस हो, ट्रेन हो या हो मेट्रो,
सफ़र करते वक्त महिलाओं में एक बड़ी कॉमन चीज़ देखने को मिलती है।
अगर कोई पुरुष सीट पर बैठा होता है तो वो उम्मीद करती हैं कि उन्हें देखते ही सीट से उठ जाए। आमतौर पर पुरुष उठ जाते हैं और महिलाओं को बैठने की जगह भी देते हैं।
लेकिन अगर वो सीट पर बैठी हैं और कोई पुरुष आता है जिसे बैठने की ज़्यादा ज़रूरत है या कोई बहुत सामान लेकर खड़ा है या दिव्यांग हैं….. तो वो अपनी सीट से नहीं उठती।
सभी महिलाएं ऐसा नहीं करतीं। पर ज्यादातर यही करती हैं। तो बस उनसे यही कहना है कि दोस्त हम बराबरी की बातें करते हैं। तो हर जगह होना चाहिए। ऐसा नहीं होता कि हम जब चाहें तब पुरुषों पर निर्भर हो जाएं और बाकी वक्त बराबरी की बात करें।
Copied : @raksha_s27
जिस देश की सेना युद्ध में महिलाओं के साथ बर्बरता करती है, उन्हें नंगा करके घुमाती है वह किसी भी सम्मान की हकदार नहीं होती। वह अपने आप बर्बाद हो जाती है।
प्रेस कांफ्रेंस का कमरा पत्रकारों से खचाखच भरा हुआ था. राहुल जी से जातिगत जनगणना पर एक सवाल पूछा गया- जवाब में उन्होंने पूछा
- आपमें से कितने दलित हैं?
एक हाथ नहीं उठा
- आपमें से कितने आदिवासी हैं?
एक हाथ नहीं उठा
- आपमें से कितने लोग OBC हैं?
एक हाथ नहीं उठा
उनका जवाब साफ़ था - यही कारण है कि जाति जनगणना की आवश्यकता है, सच्चाई जानने के लिए
@RahulGandhi