Yesterday, @IndianExpress reported an unprecedented rupture inside the Election Commission: TWO of its three members objecting on record, 14 times in 10 months, to decisions taken without their knowledge.
Today, the second part of our investigation looks at the concern Election Commissioners Sukhbir Singh Sandhu and Vivek Joshi flagged most often: Who really controls our electoral rolls?
We followed that question to Goa, where we found something deeply concerning.
Stay with me....
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चुनाव आयुक्तों ने क्यों की दस महीने में चौदह बार लिखित में शिकायत या आपत्ति. इंडियन एक्सप्रेस इन्वेस्टीगेशन @RitikaChopra__ द्वारा
https://t.co/cnSCtIdFDD
किसी का नाम नहीं लिया हूँ,मेरी बात जिसको चुभेगी उन्हीं के लिए कह रहा हूँ। अगर आपको बुरा लग रहा है,तो समझ लेना रबी,ख़रीफ़,जायद, तीनों ही सीजन में ज़हर की खेती करते हो आप।
हर कोई जंतर-मंतर नहीं पहुंच सकता, लेकिन हर कोई गवाह जरूर बन सकता है.
रील्स स्क्रॉल कीजिए, सिर्फ देखने के लिए नहीं बल्कि उसे अपने तरीके से दर्ज भी करिए. ऐसे आंदोलन रोज़ नहीं आते. दशकों बाद दस्तक देते हैं जब कोई पीढ़ी इस तरह अपने सवाल लेकर सड़क पर उतरती है और सत्ता को बेचैन कर देती है. ये सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं बल्कि अपने समय का दस्तावेज़ है.
समय निकालिए और इसे रिकॉर्ड कीजिए. Gen Z का अपना पॉलिटिकल ग्रामर है. पोस्टर देखिए, नारे सुनिए, उनकी भाषा समझिए. वे अपने आंदोलन को कैसे खड़ा कर रहे हैं, कैसे संगठित हो रहे हैं, कैसे नेविगेट कर रहे हैं, किन तरीकों से अपनी बात लोगों तक पहुंचा रहे हैं. इसे दर्ज कीजिए.
पुलिस बर्बरता के वीडियो मिले तो वेरिफाई करिए और अपने पास रखिए. जो इम्पोरटेंट है उसे एक जगह जमा कीजिए. थ्रेड बनाइए, नोट्स लिखिए, तस्वीरें और पोस्टर सहेजिए, गवाहियों को दर्ज कीजिए. जो सच है, उसे थामने की जरूरत है.
याद रखिए कि कुछ महीनों बाद यह सब आपकी स्क्रीन से गायब हो जाएगा, लेकिन इतिहास इन्हीं बिखरे हुए सबूतों से लिखा जाएगा, जिसे सरकारी मशीनरी हिला नहीं पाएगी.
यह आपका समय है. इसे सिर्फ़ देखकर आगे मत बढ़ो.
मैंने शुरुआत कर दी है. आंदोलन में छात्रों के सैकड़ों पोस्टरों को दस्तावेज़ की तरह सहेज रहा हूं. जल्द ही उन्हें आपके साथ शेयर करुंगा.
आप क्या करने वाले हैं बताइये.
रामनाथ गोयनका अवार्ड पा चुके हमारे समय के उम्दा पत्रकार @kotiyalrahul को भी लाठियाँ पड़ी थीं.
उन्होंने दिल्ली पुलिस का धन्यवाद करते हुए ये तस्वीरें पोस्ट की हैं.
अगर पुलिस वकीलों के साथ ये बदतमीजी कर देती है तो वकील बदला लेते हैं, लेकिन हमारी पत्रकार क़ौम चुपचाप मार खाकर पड़ी रहती है.
What is this behaviour Mumbai Police? Why is a male cop mandhandling a young female protestor like this? Why isn't he letting his female colleagues handle this? What action will be taken against him? This is unacceptable @Dev_Fadnavis
20 जुलाई को हुए कॉकरोच जनता पार्टी के संसद चलो मार्च पर चप्पल पहनकर, बिना वर्दी के एक व्यक्ति प्रदर्शनकारियों पर डंडे भांज रहा था.
लल्लनटॉप के पत्रकार अभिलाष ने सवाल किया तो केवल सवाल पूछने की वजह से ही रिपोर्टर को लाठी मार दी गई.
इसके बाद पुलिस ने भी लाठी मारने वाले का बचाव किया और बदतमीज़ी करते हुए माइक जमीन पर फेंक दिया.
@DelhiPolice
CJP | Delhi Police | Reporter
क्या आपने इस वीडियो को देखा।
इस पुलिसवाले का नाम Sandeep Lamba है। जो Additional DCP of North-East Delhi है।
दोस्तों इस पुलिस वाले को कॉल आउट करिए।
#CJPProtestUpdate