अल्पावधि की सेवा करने वाले अग्निवीर पेंशन के हकदार नही हैं तो जनप्रतिनिधियों को यह ‘सहूलियत’ क्यूँ?
राष्ट्ररक्षकों को पेन्शन का अधिकार नही है तो मैं भी खुद की पेन्शन छोड़ने को तैयार हूँ।
क्या हम विधायक/सांसद अपनी पेन्शन छोड़ यह नही सुनिश्चित कर सकते कि अग्निवीरों को पेंशन मिले?
जींद (हरियाणा) के रहने वाले सचिन ने #अग्निपथ योजना से आहत होकर अपनी जान दे दी। किसी युवा का आत्महत्या करना दिल दहला देता है।
आपमें भी अगर इनका दर्द महसूस करने की क्षमता हो तो समझ जाएंगे कि ये नौजवान किस हाल में हैं।
आखिर कितने युवाओं की जान लेगी मोदी सरकार की संवेदनहीन नीतियां?
भाजपा जिस तरह अपने समर्थकों से ‘अग्निवीर’ के तथाकथित फ़ायदे गिनवाने में लगी है, उससे अच्छा होगा कि भाजपा अपने उन सदस्यों-समर्थकों की सूची जारी करे जो इस योजना में अपने बच्चों को भेज रहे हैं। प्रवचन देने से अच्छा है भाजपाई ख़ुद उदाहरण पेश करें।
भाजपा युवाओं का अपमान बंद करे।
जब एक नौजवान का सपना मरता है, तो पूरे देश का सपना मरता है।
क्या 4 साल के पश्चात अग्निवीरों का सम्मानजनक पूनर्वास होगा? मेरा मानना है कि जब तक समाज के आखिरी व्यक्ति की आवाज न सुनी जाए, तब तक कोई भी कानून का निर्माण न हो।
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आज वायुसेना में चयनित एक जवान मुझ से मिलने आए, उन्होंने कहा —
सेना में हमलोग तिरंगे को सलामी देने जाते हैं।
यह मोदी सरकार चाहती है कि 4 साल बाद अडानी को सलामी ठोकें! यह नहीं होने देंगे!
‘अग्निपथ’ की नीति सरकार ने बनायी है अतः सरकार व सत्ताधारी दल के प्रवक्ता किसी और को आगे न करें।
अमीर उद्योपतियों की आय की सुरक्षा से अधिक ज़रूरी है देश की सुरक्षा इसीलिए जो भी बजट कम पड़ रहा है उसके लिए सरकार कॉरपोरेट पर अतिरिक्त कर लगाए परंतु देश की सुरक्षा के साथ समझौता न करे।
देश का युवा जिसके पास दसवी पास करने के बाद आगे पढ़ने के लिए फीस नही है।दौड़ने के लिए पैर में जूते नही और खाने के लिए दो वक्त की रोटी नही। सुबह 4 बजे उठकर नंगे पाव दौड़ता है सिर्फ़ फ़ौजी बनने के लिए और आज सरकार अग्निपथ योजना लाकर देश के हर युवा के साथ भद्दा मज़ाक़ कर रही हैं।