2000 परिचितों को दिलवाई नौकरी
ऐसा कोई सगा नहीं, जो नौकरी लगा नहीं,
ऐसी कोई भर्ती नही जिसमे बेरोजगार ठगा नही।
बेरोजगार सोचता एक नंबर से रह गया अगली में तैयारी करेंगे लेकिन ठगों ने असली मेहनत पर हर बार पानी फेरा।
इनको संरक्षण देने वाले नेता और अधिकारी पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
जनवरी 2026 में SOG ने RSSB (राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड) के तत्कालीन टेक्निकल हेड संजय माथुर समेत 5 लोगों को गिरफ्तार किया था। OMR शीट्स में छेड़छाड़ कर -6 अंक वाले को 259 नंबर दिलाने, 63 से 185 तक अंक बढ़ाने का खेल चला। 38 अभ्यर्थियों ने 10-10 लाख रुपये देकर सरकारी नौकरी हथियाई।आज 26 अप्रैल 2026 है गिरफ्तारी के ठीक 3 महीने बाद। सवाल ये हैं कि38 फर्जी नौकरियों पर क्या कार्रवाई हुई?अभी तक शून्य।
जब SOG की टीम उनके घर पहुंची तो सभी अंडरग्राउंड हो चुके थे। 3 महीने बीत गए, लेकिन न तो नाम सार्वजनिक किए गए, न उन्हें नौकरी से निकाला गया, न गिरफ्तार किया गया। ये लोग आज भी सरकारी तनख्वाह ले रहे हैं। क्या सिस्टम जानबूझकर उन्हें बचाना चाहता है?
मास्टरमाइंड संजय माथुर की स्थिति क्या है?जमानत पर बाहर!
हाई कोर्ट ने संजय माथुर और उनकी रिश्तेदार पूनम माथुर (जिसके लिए खुद माथुर ने अंक बढ़ाए थे) को जमानत दे दी। वो जो बोर्ड का टेक्निकल हेड था, जिसने जांच कमेटी में खुद को शामिल करवाया था, आज खुले घूम रहा है।
पूरा मामला अचानक शांत क्यों पड़ गया? 38 अभ्यर्थियों के नाम गुप्त क्यों रखे गए?
आगे कोई जांच हुई या नहीं?
पूछताछ में अन्य बड़े नामों का खुलासा हुआ या दबा दिया गया?
SOG ने 8 साल पुरानी भर्तियों की जांच का ऐलान किया था, उसका क्या हुआ?
ये सन्नाटा बेहद संदिग्ध है।
एक तरफ ईमानदार युवा 0.1% अंक के लिए रोते हैं, दूसरी तरफ फर्जीवाड़ा करके नौकरी हथियाने वाले आज भी पद पर काबिज हैं। संजय माथुर जैसे अधिकारी को जमानत मिल जाना युवाओं के साथ सबसे बड़ा धोखा है।सबसे बड़ा सवाल:
सरकार, शिक्षा विभाग और RSSB क्या इन 38 लोगों को बचाने की साजिश चल रही है? नाम क्यों नहीं जारी? नौकरियाँ क्यों नहीं रद्द? क्या ये लोग किसी बड़े नेता या अफसर के करीबी हैं?
38 अभ्यर्थियों के नाम तुरंत सार्वजनिक किए जाएँ।
उनकी नौकरियाँ तुरंत रद्द की जाएँ और मेरिट वाले उम्मीदवारों को नियुक्ति दी जाए।
संजय माथुर समेत सभी आरोपियों पर CBI जांच हो।
पूरे RSSB की 8 साल की भर्तियों की निष्पक्ष जांच हो।
फर्जी नौकरी पाने वालों की संपत्ति जब्त की जाए।
फर्जी ओएमआर प्रकरण में लगभग तीन महीने बाद भी क्या इन 38 लोगों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई हुई है? यह पूरा मामला अचानक शांत कैसे पड़ गया?
इस मामले में गिरफ्तार आरोपी संजय माथुर “जी” फिलहाल जेल में हैं या उन्हें जमानत मिल चुकी है? इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर सबसे ज्यादा मौन क्यों है?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन 38 लोगों के नाम सार्वजनिक क्यों नहीं किए गए और इन्हें अब तक सरकारी सेवा में क्यों बनाए रखा गया है? क्या इनके संबंध में आगे कोई जांच हुई है? क्या इन्होंने पूछताछ के दौरान अन्य नामों का खुलासा किया है?
OMR घोटाले का मास्टरमाइंड संजय माथुर को जमानत? राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) के तत्कालीन टेक्निकल हेड संजय माथुर जिसने OMR शीट्स में छेड़छाड़ कर माइनस 6 अंक वाले को 259 नंबर दिलाए, 38 अभ्यर्थियों को 10-10 लाख लेकर नौकरी दिलाई वो अब जमानत पर बाहर!
ये वही माथुर है जिसने अपनी रिश्तेदार पूनम माथुर के अंक 63 से बढ़ाकर 185 किए
जांच कमेटी का हेड खुद बनकर घोटाले को दबाने की कोशिश की,2018-19 की भर्तियों में लाखों युवाओं का सपना चुराया
जमानत मिल गई तो क्या घोटाला खत्म हो गया?
जिन फर्जी उम्मीदवारों को नौकरी मिली, उनकी नियुक्ति कब रद्द होगी?
8 साल की भर्तियों की पूरी जांच CBI को क्यों नहीं सौंपी जा रही?
पैसे देकर नौकरी पाने वाले अभी भी सरकारी दफ्तरों में बैठे होंगे, और मेहनत करने वाले सड़कों पर?
ये जमानत भ्रष्टाचार को प्रोत्साहन है। जब बड़े घोटालेबाज आसानी से बाहर आ जाते हैं, तो आम युवा का भरोसा न्याय व्यवस्था पर से उठ जाता है।
RPSC SI भर्ती 2021 को लेकर कोर्ट में इस तरह फैसला हुआ।
आज लाखों युवाओं में खुशी की लहर है और जो चयनित अभ्यर्थी थे जिनको उम्मीद थी भर्ती रद्द नहीं होगी वो मायूसी में चले गए।
सत्यमेव जयते ✌️
धन्यवाद जननायक डॉ किरोड़ीलाल जी, धन्यवाद लड़ाका सांसद हनुमान बेनीवाल जी, धन्यवाद ADG वीके सिंह जी ।
हम सब के 4 वर्षों के अथक संघर्ष की जीत हुई, दर्जनों धरना, प्रदर्शन, आंदोलन , मुकदमे , 3 दिन भूखे प्यासे पानी की टंकी का सफर, आज अंजाम तक पहुंच गया, बधाई हो मेरे क्रांतिकारी साथियों आज हम जीत गए ।
माननीय न्यायपालिका का बारंबार आभार, आज साबित हो गया कि सत्य को परेशान किया जा सकता है, पराजित नहीं।
आज हमारे प्रिय शरत जी वीडियो में बहुत अच्छे से पेलेंगे सबको। शाम को स्पेशल वीडियो बनाकर।
बहुत बहुत धन्यवाद। बहुत साथ दिया है इन्होंने हर प्रकार से।
इन जितना किसी ने नहीं किया।
@sharatjpr
राजस्थान उच्च न्यायालय की डिविजन बैंच ने ,S.I. भर्ती 2021 को एकलपीठ द्वारा रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा है जो स्वागत योग्य निर्णय है | S.I. भर्ती 2021 में हुई धांधली तथा पेपर लीक की वजह से लाखों मेहनतकश अभ्यर्थियों के भविष्य पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो गया, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने मेहनतकश अभ्यर्थियों के पक्ष में इस भर्ती को रद्द करवाने के लिए लंबा आंदोलन किया,बड़ी रैली भी राजधानी जयपुर में की और जब राजस्थान उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने S.I. भर्ती 2021 को रद्द करने का फैसला दिया तो राजस्थान की दोगली बीजेपी सरकार ने इस भर्ती को यथावत रखवाने का पुरजोर प्रयास किया मगर आज फिर से मेहनतकश अभ्यर्थियों की भावनाओ की कोर्ट में जीत हुई है |
OMR घोटाले में ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ जैसी कार्रवाई…सरकार ने वाहवाही लूटी, विपक्ष ने की CBI जांच की मांग...अब 3 महीने से चौतरफा शांति क्यों?
पूर्व अध्यक्ष सहित पुलिस जवान से क्या हुई कोई पूछताछ या FIR में दर्ज तथ्य झूठे!
तथ्य सही थे तभी हुई 5 लोगों की गिरफ्तार, आगे कब बढ़ेगा OMR घोटाले में गड़बड़ करने वालों की तरफ कार्रवाई का रथ?
क्या @BhajanlalBjp सरकार पूरे मामले में कार्रवाई का फॉलोअप लेने में नाकाम?
जनवरी 2026 में OMR घोटाले को लेकर SOG द्वारा गिरफ्तारी की गई थी। 5 लोगों की गिरफ्तारी के बाद भी इस पूरे मामले में तीन महीने बाद तक कोई नई गिरफ्तारी नहीं हुई है। इस पूरे मामले में सरकार द्वारा वाहवाही लूटने और श्रेय लेने की होड़ तो मची, लेकिन सरकार के लोग OMR सहित अन्य मामलों में अप-टू-डेट नहीं रह पा रहे हैं। इस पूरे मामले को लेकर जनवरी में विपक्ष काफी हावी रहा था। यहां तक कि पहली बार आक्रमण विपक्ष ने इस पूरे मामले की CBI जांच करवाने की मांग ने भी तेजी पकड़ी थी।
FIR के एक साल बाद हुई गिरफ्तारी
इस पूरे मामले में 2025 जनवरी में FIR हुई। उससे पहले जनवरी 2019 में लखनऊ के गोमती नगर थाने में दर्ज FIR में पांच लोगों को मौके पर ही पैसों के साथ पकड़ा गया था, जिनके पास से लगभग 62 लाख 50 हजार रुपये की राशि जब्त की गई थी। 2019 की FIR दर्ज होने के बाद भी राजस्थान की जांच एजेंसी को इस मामले में एक साल बाद केवल 5 लोगों को गिरफ्तार कर इसे बड़ी उपलब्धि की तरह प्रस्तुत किया गया। जबकि इनमें से 2 लोग शादान खान और विनोद कुमार गौड़ को तो पहले ही इस मामले में लखनऊ में गिरफ्तार किया जा चुका था। दो कर्मचारी और एक महिला अभ्यर्थी की गिरफ्तारी को ही आंशिक उपलब्धि के रूप में देखा जा सकता है।
इस पूरे मामले में दो FIR (लखनऊ 2019 / जयपुर SOG 2025) में संजय माथुर और एक कर्मचारी गंगवाल का कहीं भी नाम नहीं था, फिर भी इस पूरे मामले में जांच पड़ताल कर SOG ने कार्यकुशलता का परिचय देते हुए लिंक जोड़कर इनकी गिरफ्तारी की। जो कि फर्जीवाड़े करने वालों को सलाखों के पीछे पहुंचाने की SOG की मंशा को दिखाता है। लेकिन, आश्चर्य की बात यह है कि राजस्थान SOG के साथ गोमती नगर थाने में दर्ज FIR में एक नाम जिन लोगों के नाम है। उनका कुछ अतापता ही नहीं है। इस लिस्ट में पुलिस के पूर्व जवान से लेकर पूर्व बोर्ड अध्यक्ष का नाम तक शामिल है।
अनिल पुलिस विभाग का ही पूर्व जवान है। राजस्थान SOG में दर्ज FIR में दर्ज FIR में यह व्यक्ति मुख्य सूत्रधार है। आज तारीख तक भी SOG इस व्यक्ति तक नहीं पहुंच पाई है। आपको यह जानकर भी काफी आश्चर्य होगा कि 2025 की FIR के अनुसार, इस अनिल ने अपनी पत्नी, साली, दोस्त की पत्नी सहित कई रिश्तेदारों को नौकरी में लगवाया है। अब राजस्थान SOG बताए कि आखिर जिन लोगों के नाम FIR में है। उनके खिलाफ क्या एक्शन लिया जा रहा है।
डिबार होने के बाद भी नौकरी कर रहे हैं OMR घोटाले से जुड़े अभ्यर्थी — सूत्र
जानकार सूत्र बताते हैं कि अनिल के रिश्तेदार, जिनकी OMR शीट बदली गई थी, उन्हें बोर्ड द्वारा नौकरी से हटाने का दावा किया गया था। लेकिन सूत्रों के अनुसार, वे आज भी उसी नौकरी में सरकारी सेवा में बने हुए हैं। अगर यह दावा सही साबित होता है, तो इस पूरे मामले में बोर्ड के पूर्व से लेकर वर्तमान तक के लोगों की भूमिका संदेह के घेरे में होगी। साथ ही, इस दिशा में SOG द्वारा गंभीर जांच करने की आवश्यकता है। क्योंकि आने वाले दिनों में अगर यह बात सही साबित होती है तो पूर्व सरकार से ज्यादा वर्तमान सरकार कटघरे में खड़ी हो सकती है।
बाकी, शक के आधार पर कार्रवाई करने वाली SOG ने बड़े मगरमच्छों, जिनका नाम FIR में है, उनसे इस मामले में अब तक किसी भी तरह की पूछताछ की है क्या? अगर पूछताछ हुई तो क्या निकल कर आया या अभी तक पूछताछ ही नहीं की, तो तीन महीने बाद भी पूछताछ नहीं करने का क्या कारण है? SOG में स्टाफ की कमी की बात जरूर जांच करने में देरी का एक तर्क हो सकती है। लेकिन, ज्यादा देरी SOG सहित सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़ा करेगी।
@BhajanlalBjp@RajCMO@alokrajRSSB@Kunal_Alwar
आपको OMR में नंबर बढ़ाकर चयन लेने वाला घोटाला याद है? सबसे बड़ा सवाल इस मुद्दे पर विपक्ष मौन क्यों है?
इन 38 लोगों की सूची जारी हुए अब लगभग तीन महीने से ज्यादा समय हो गया है। OMR घोटाले में शामिल 38 लोगों के खिलाफ अब तक क्या कोई कार्रवाई हुई है? इसको लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में कुछ अहम सवाल खड़े होते हैं–
1.ये 38 लोग इस समय कहाँ हैं?
2.क्या ये अभी भी सरकारी सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं?
3.अवैध तरीके से नौकरी हासिल करने के बाद इन्हें जो वेतन मिला, क्या उसकी वसूली की गई है?
4.क्या इनमें से किसी की गिरफ्तारी हुई है?
क्या इन्होंने पूछताछ के दौरान किसी और का नाम उजागर किया है?
5.इस पूरे मामले पर सरकार अपना पक्ष रखेगी या विपक्ष इस पर सवाल उठाएगा?
यह मामला केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं के भविष्य से सीधे जुड़ा हुआ है। ऐसे गंभीर विषय पर कोई भी पक्ष युवाओं के साथ मजबूती से खड़ा होता दिखाई क्यों नहीं देता?
संसद में गूंजा बड़ा सवाल, आपका बचा हुआ mobile data क्यों हो जाता है खत्म?
AAP सांसद राघव चड्ढा ने Zero Hour में मांग उठाई कि users को अपना unused data rollover करने का अधिकार मिलना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि लोग अपना data एक दूसरे को transfer कर सकें।
सीधी बात है, जो data आपने खरीदा है उसका पूरा फायदा आपको मिलना चाहिए, हर एक MB का हिसाब होना चाहिए।
रात 12 बजते ही मोबाइल डेटा की डेली लिमिट खत्म हो जाना लाखों यूज़र्स के लिए परेशानी बन जाता है। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने मांग उठाई है कि बचा हुआ डेटा अगले दिन इस्तेमाल करने की अनुमति मिलनी चाहिए। उनका कहना है कि यह उपभोक्ताओं के हित में एक जरूरी सुधार होगा, जिससे लोगों को अपने पैसे की पूरी कीमत मिल सकेगी। डिजिटल युग में डेटा अब जरूरत बन चुका है, ऐसे में लचीली और उपभोक्ता-अनुकूल नीतियां समय की मांग हैं। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो छात्रों, कामकाजी लोगों और ऑनलाइन सेवाओं पर निर्भर आम नागरिकों को बड़ा लाभ मिल सकता है।