एडवोकेट रविंद्र सिंह खालसा का यह कथन जमीनी हकीकत को उजागर करता है—जो समाज आज भी अपने अधिकारों के लिए थाने की दहलीज तक जाने से डरता है,उस पर सुरक्षात्मक कानूनों के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाना बेबुनियाद और निराधार है। असली न्याय वही है जो कमजोर को संबल दे। ✊
#SCSTAct
जिला बदायूं के दातागंज थाना क्षेत्र में दलित युवक राजेश कोरी की पुलिस कस्टडी में मौत बेहद दुखद,गंभीर और चिन्ताजनक है।
परिजनों के अनुसार, पुलिस की पिटाई के बाद राजेश की हालत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। अब हवालात के अंदर का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें राजेश पानी पीने की हालत में तक नजर नहीं आ रहा है और पुलिसकर्मी के हाथ छोड़ते ही वह जमीन पर गिर जाता है। यह वीडियो पुलिस की भूमिका और पूरे घटनाक्रम पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पुलिस कह रही है कि पहले राजेश की तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। लेकिन सवाल यह है कि अगर राजेश की हालत इतनी खराब थी तो उसे समय रहते इलाज क्यों नहीं दिया गया?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि पुलिस के बचाव में परिजनों से तहरीर लेकर दूसरे पक्ष के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर दिया गया। अगर हत्या हुई थी, तो राजेश पुलिस की हवालात में क्यों था? और अगर वह पुलिस हिरासत में सुरक्षित था, तो हवालात के अंदर उसकी हालत इतनी गंभीर कैसे हुई?
दातागंज थाने के CCTV फुटेज को तत्काल सुरक्षित कर सार्वजनिक किया जाए। पुलिस हिरासत में हुई इस मौत की जांच उसी पुलिस तंत्र से नहीं, बल्कि स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय एजेंसी से कराई जाए।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी जवाब दें कि दलित युवक राजेश कोरी की मौत के लिए जिम्मेदार कौन है?
@UPGovt से हमारी मांग है कि पुलिस हिरासत में हुई दलित युवक राजेश कोरी की मौत की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। दोषियों को बचाने के बजाय उनके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा मृतक के परिवार को न्याय, सुरक्षा और उचित मुआवजा दिया जाए।
हमारी संवेदनाएँ भाई राजेश कोरी के शोकाकुल परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। प्रकृति उन्हें इस असीम दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे।
माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय का यह आदेश स्वागत योग्य है। हाथरस की पीड़िता बहिन मनीषा बाल्मीकि की मृत्यु के 6 साल बाद भी उनके परिवार को न्याय, सुरक्षित आवास और रोजगार के लिए संघर्ष करना पड़े, यह मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी की सरकार की संवेदनहीनता और प्रशासनिक विफलता का गंभीर उदाहरण है।
न केवल हाथरस की दलित पीड़िता के न्याय का मुद्दा, बल्कि उनके परिवार की सुरक्षा, सम्मान और पुनर्वास का सवाल भी कई बार उठाया गया। इसके बावजूद सरकार ने परिवार की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया।
जब पीड़ित परिवार अपनी सुरक्षा को लेकर स्पष्ट रूप से खतरा बता रहा था, तब भी सरकार का अलीगढ़, कासगंज या एटा में घर देने पर अड़ना बेहद चिंताजनक था। पीड़ित परिवार की सुरक्षा सरकार की कृपा नहीं, उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है।
माननीय उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप बताता है कि जब सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल होती है, तब न्यायपालिका को हस्तक्षेप करना पड़ता है। अब सरकार को बहानेबाजी छोड़कर हाईकोर्ट के आदेश को तत्काल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से लागू करना चाहिए।
छह साल, शर्मनाक!
कहते हैं ना जिसे ऊपर वाला बचाना चाहे, उसे मौत भी छूकर निकल जाती है! 🙏
इतना भयंकर हादसा और स्कूटर सवार को खरोंच तक नहीं आई। सच में, आज किस्मत ने मौत को भी मात दे दी। 😳
#GalaxyS26FE#आधी_आबादी_पूरा_धोखा
दलित बेटी Peter Cullen
मुज़फ्फरनगर की 17 वर्षीय दलित बेटी के साथ दरिंदगी के आरोपों पर राजनीति नहीं, न्याय की आवाज़ चाहिए। अगर न्याय के सवाल पर भी राजनीतिक सुविधा के हिसाब से चुप्पी रहे, तो PDA के दावों पर भरोसा कैसे किया जाए?
#PDA#AkhileshYadav#SamajwadiParty#DalitJustice#Muzaffarnagar
सामाजिक न्याय का दावा करने वालों के लिए कसौटी साफ होनी चाहिए—पीड़िता की जाति, धर्म या राजनीतिक पहचान देखकर नहीं, हर मामले में समान आवाज़ और न्याय की मांग।
दलित बेटी हो या किसी भी समाज की बेटी—न्याय पर चुप्पी नहीं, निष्पक्ष कार्रवाई चाहिए। ⚖️🇮🇳
न्याय की राह भले ही कितनी कठिन और लंबी क्यों न हो, सत्य और संवेदना की जीत हमेशा होती है।
हाथरस की उस बेकसूर दलित बेटी को खोने का दर्द आज भी पूरे देश के दिल में ताज़ा है। जिस परिवार ने अपनी मासूम को खोया और लगातार प्रताड़ना व भय के साए में जीने को मजबूर रहा, उसकी चीखें सत्ता के बहरे कानों तक भले न पहुंची हों, लेकिन अदालत ने आज बीजेपी सरकार की असंवेदनशीलता पर करारा तमाचा जड़ा है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि पीड़िता के परिवार को तीन महीने के भीतर नोएडा या गाज़ियाबाद में पुनर्गवासित किया जाए। सरकार के टालमटोल वाले रवैये पर सख्त टिप्पणी करते हुए अदालत ने साफ कर दिया कि यदि निर्देशों का पालन नहीं हुआ, तो गृह विभाग के एसीएस को स्वयं अदालत में हाजिर होकर जवाब देना होगा।
कांग्रेस पार्टी की न्याय की यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक हाथरस की बेटी को पूर्ण न्याय और उसके परिवार को सम्मानजनक जीवन नहीं मिल जाता।
@INCUttarPradesh
नगीना सांसद @BhimArmyChief चन्द्रशेखर आजाद का SC-ST एक्ट को लेकर बड़ा बयान 👇🏻
"SC-ST एक्ट उसपर लगता है जो अपराध करता है। कमजोर व्यक्ति इसका गलत इस्तेमाल नहीं कर सकता। हमारा तो 90% समाज कमजोर है, जो थाने में जाने से भी डरते हैं"
कृपया सभी साथी ध्यान दे
इंस्टग्राम पर एक पेज बना है reservation hatao andolan नाम से है इसके 22 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हो चुके हैं ये लोग आरक्षण के विरोध में सोशल मीडिया पर ट्रेंड चलाएंगे
आरक्षण तभी हटेगा जब जाति हटेगी इसलिए अभी हमें
#WeSupportReservation का सपोर्ट करना चाहिए
कितने लोग आरक्षण के समर्थक है?