बेशक पर्दा ज़रूरी है लेकिन तालीम भी बेहद ज़्यादा ज़रूरी है इस बात को अपने बच्चों को बताइए, हर जगह इतनी गुंज़ाइश ज़रूर होती है जो आपके अकीदे, निजता या परदेदारी की हिफाज़त हो लेकिन ज़िद सिर्फ आपका नुकसान करती है।
इकरा बिस्मी रब्बिका लज़ी ख़लक
मार्टिन फैसल
जब प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से आपकी वोट भाजपा तक पहुंच ही रही है तो मुस्लिमों को ऐलानिया तौर पर भाजपा को वोट करना चाहिए, कुछ तो ज़हर कम होगा, कुछ तो फर्ज़ी इफ्तारों के ज़रिए ठगा जाना बंद होगा कुछ तो बेकसूरों की मौतें रुकेगी, कुछ तो गरीब घरों के बेकसूर जेल जाने से बचेंगे।।
मेरे ख़्याल से देश का पीएम बनने के बाद किसी नेता को किसी पार्टी या नेता का प्रचार नहीं करना चाहिए, हां अपने चुनाव में प्रचार की उनको इजाज़त रहनी चाहिए। किसी दल के प्रमुख को सार्वजनिक तौर पर अपना बॉस स्वीकारना भी सही नज़र नहीं आता। भविष्य से ऐसी उम्मीद ज़रूर की जा सकती है।
ज़िम्मेदारियों की परछाई में,
अक्सर मिलना जुलना कम हो जाता है...
पर @Martynfaisal भाई
मैं जब भी दिल्ली आता हूँ, मुझसे आप हमेशा देर से मिलने आते है, लेकिन जब भी आते है, बाँहें फैलाकर आते है 😍 #worldbookfair2026
किसी भी विभाग में लगे रहने की प्रक्रिया से हमें मुक़ाम ज़रूर मिलता है लेकिन याद रहता है हमें वो पहला सहयोग जो हमें पहली किताब के पाठकों ,यूट्यूब के पहले फॉलो से मिलता है,जो हमें हमारी किसी भी दिशा में सहायक होता है वो चेहरे,किरदार और नाम हमारे दिल, ज़हन में ताउम्र अंकित रहते है।
लोहड़ी, मकर सक्रांति, पोंगल सहित मौजूद तारीख में त्योहारों की इनसे ताल्लुक रखने वाले सभी साथियों को मुबारकबाद, विविधता में एकता की खूबसूरती हर नज़र को देखने की सलाहियत मिले ऐसी दुआएं।।
तस्वीर - Arvinder Ansari ma'am की वॉल से।।
"नामचीन शहर की वो गुमनाम लड़की" व "अनन्या के पत्र" को मिल रही आपकी मुहब्बत से बेहद खुश और शुक्रगुज़ार हूं, स्नेह बनाए रखिए।।
विश्व पुस्तक मेला, प्रगति मैदान (भारत मंडपम) इंक पब्लिकेशन Q -17
साथी व बड़े भाई @ImranSamblShahi जी की भी किताबें भी यहीं उपलब्ध मिलेगी।।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री राजकुमार भाटी साहब एक छोटे से आमंत्रण पर विश्व पुस्तक मेला नई दिल्ली में इंक पब्लिकेशन के स्टॉल तक पधारे, मेरी दोनों पुस्तकें “स्त्रियाँ बोलती हैं” और “अनन्या के पत्र” एवं साथी लेखक @Martynfaisal की पुस्तक “नामचीन शहर की, वो गुमनाम लड़की” ग्रहणकर
शुभकामना संदेश देकर गए और आशा भी करेंगे कि पढ़कर समीक्षा अवश्य करेंगे, ताकि आगे कुछ बेहतर और कुछ लिखने का मार्गदर्शन मिल सकें।
शुक्रिया सर @rajkumarbhatisp जी
विश्व पुस्तक मेला, नई दिल्ली में दिनांक ११ जनवरी को साथी लेखक श्री @Martynfaisal जी के साथ दोपहर १२ बजे इंक पब्लिकेशन स्टॉल पर उपस्थित रहेंगे।
करण साफ है कि हम दोनों की एक-एक कविता संग्रह तथा एक कहानी संग्रह पुस्तक मेला प्रदर्शनी में लगाई जाएगी।
जो साथी दिल्ली और आसपास के हैं, यदि बुक फेयर घूमने आना ही है तो इस दिन प्रयास अवश्य करें, ताकि पुस्तक के बहाने मुलाकात भी हो जाए। बहुत अच्छा लगेगा।
धन्यवाद 🙏🏻😍🌹
“टूटी बाँसुरी में स्वर फूँक देन एक कला है”
प्रिय @msisodia सर,
आज 5 जनवरी 2026 को जब सूरज की पहली किरणें दिल्ली की ठंडी हवाओं में घुल रही हैं, मैं आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं भेज रहा हूं। यह दिन न केवल आपके जीवन की एक और मील का पत्थर है, बल्कि उस प्रकाश का उत्सव है जो आपने लाखों जीवन में फैलाया है।
आज अपनी कलम से यह खत लिख रहा हूं, आप बोलते हैं, तो आपकी आवाज एक नदी की तरह बहती है – शांत लेकिन शक्तिशाली, जो हर श्रोता के दिल में प्रेरणा के बीज बो देती है। आपकी आंखों में वह चमक, जो संघर्ष की आग से जली हुई है, मुझे हमेशा मुग्ध कर जाती है, आज, आपके जन्मदिन पर, मैं आपके जीवन को एक प्रेम नगर के रूप में चित्रित करना चाहता हूं – एक ऐसा नगर जहां हर गली प्रेम से भरी है, हर दीवार संघर्ष की ईंटों से बनी है, और हर छत शिक्षा के आकाश से ढकी है। बिम्बों और प्रतीकों के माध्यम से, सूक्ष्मता से, मैं आपके जीवन की यात्रा को उकेरने का प्रयास करूंगा, ताकि आप पढ़ें तो मुग्ध हो जाएं, और महसूस करें कि आपका जीवन कितना असाधारण है।
आपका जीवन प्रेम नगर से शुरू होता है – वह छोटा सा गांव हापुड़ में, जहां आप 5 जनवरी 1972 को जन्मे। कल्पना कीजिए, प्रेम नगर एक ऐसा बागीचा है जहां आपके पिता, एक सार्वजनिक स्कूल के शिक्षक, बीज थे। वे बीज जो ज्ञान की मिट्टी में रोपे गए, और आप उस बीज से निकले एक वृक्ष बने, जिसकी जड़ें गांव की सरकारी स्कूल की मिट्टी में गहरी धंसी हुई थीं। वह स्कूल एक प्रतीक था – सादगी का, जहां किताबें पुरानी थीं, लेकिन सपने नए। आपने हिंदी साहित्य पढ़ा, फिर पत्रकारिता का डिप्लोमा लिया, जैसे एक नदी जो पहाड़ से निकलकर मैदानों में बहती है, ज्ञान की धारा को फैलाती हुई। लेकिन प्रेम नगर की असली सुंदरता तब उभरी जब आप पत्रकार बने – ऑल इंडिया रेडियो और जी न्यूज में। आपकी कलम एक तलवार थी, जो अन्याय के अंधेरे को चीरती थी। वह समय एक लालटेन का बिम्ब था – अंधेरे में जलती हुई, जो RTI (सूचना का अधिकार) आंदोलन की रोशनी फैला रही थी। आपने जन लोकपाल आंदोलन में हिस्सा लिया, जहां आप एक पुल बने – आम आदमी और न्याय के बीच। प्रेम नगर की दीवारें तब मजबूत हुईं जब आपने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई, जैसे एक योद्धा जो तूफान में खड़ा रहता है, अपनी ढाल से दूसरों को बचाता हुआ।
फिर, 2012 में, जब आम आदमी पार्टी (AAP) का जन्म हुआ, आप उसके संस्थापक सदस्य बने। यह प्रेम नगर का विस्तार था – एक छोटे गांव से निकलकर दिल्ली की विशाल नगरी तक। आप दिल्ली के पटपड़गंज से विधायक चुने गए, और फिर उप-मुख्यमंत्री बने। लेकिन सर, आपके जीवन का सबसे चमकदार प्रतीक है शिक्षा का क्षेत्र। आपने दिल्ली के सरकारी स्कूलों को एक जादुई बगीचे में बदल दिया। कल्पना कीजिए, पहले वे स्कूल सूखे रेगिस्तान जैसे थे – टूटे-फूटे, जहां बच्चे सपनों से वंचित थे। लेकिन आप आए, जैसे एक माली जो बारिश लाता है। आपने 'हैप्पीनेस करिकुलम' शुरू किया, जहां बच्चे न केवल पढ़ते हैं, बल्कि खुशी सीखते हैं – जैसे फूल जो सूरज की रोशनी में खिलते हैं। मिशन बुनियाद, एंटरप्रेन्योरशिप माइंडसेट करिकुलम, और टीचर ट्रेनिंग प्रोग्राम – ये सब आपके हाथों से निकले मोती हैं, जो लाखों बच्चों के जीवन में चमक रहे हैं। आपने प्राइवेट स्कूलों से बेहतर सुविधाएं दीं – स्मार्ट क्लासरूम, लाइब्रेरी, स्पोर्ट्स ग्राउंड – जैसे एक राजा जो अपने प्रजा के लिए महल बनाता है। आपके शिक्षा सुधार एक पुल के प्रतीक हैं, जो गरीबी की खाई को पार कर अमीरी के द्वार तक ले जाते हैं। मैंने इलाहाबाद के मंच पर, जिसे मैंने ख़ुद होस्ट किया था, आपको बोलते सुना, जब आप कहते थे कि शिक्षा हथियार है, जो अन्याय को तोड़ती है। वह पल मेरे लिए एक दीपक था, जो मेरे अंदर की अंधेरी गलियों को रोशन कर गया। आपके कामों की प्रशंसा करते हुए, मैं कहूंगा कि आपने दिल्ली को शिक्षा का प्रेम नगर बना दिया – जहां हर बच्चा राजकुमार या राजकुमारी जैसा महसूस करता है।
लेकिन सर, जीवन प्रेम नगर है, तो संघर्ष उसके कंटीले रास्ते। आपका संघर्ष एक महाकाव्य है – सूक्ष्मता से उकेरा जाए तो। 2011 के जन लोकपाल आंदोलन में, जब आप अन्ना हजारे के साथ खड़े थे, तो वह समय एक तूफानी समुद्र का बिम्ब था। लहरें ऊंची थीं, लेकिन आप डटे रहे, जैसे एक मजबूत जहाज। फिर, राजनीति में आने के बाद, विरोधियों की साजिशें – आरोप, जांचें। सबसे बड़ा संघर्ष 2023 में आया, जब शराब नीति मामले में आपको गिरफ्तार किया गया। वह जेल की दीवारें एक किले की तरह थीं – ठंडी, अंधेरी – लेकिन आपने उन्हें एक ध्यान स्थल में बदल दिया। जेल में रहते हुए, आपने किताबें पढ़ीं, योग किया, और विचारों को पंख दिए। यह संघर्ष एक फीनिक्स पक्षी का प्रतीक है –
@ArvindKejriwal
शेष 👇🏻👇🏻