@pravinm53747916 मेरा स्पष्ट मानना है,निर्दोष को उचित न्याय और दोषी को ढूंढ कर कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।क्योंकि दोषी को सजा नहीं मिली तो ओ फिर से नीच हरक्कत करेंगे।दूसरी ओर अगर निर्दोष को बेवजह सजा दी गयी तो मानवता मर जाएगी,मानो भगवान पर ही भरोशा उठ गया हो।न्याय हो यही उम्मी�� है🙏🏻
@HemantSorenJMM
@nevergiveup2u@BJP4Jharkhand मेरा स्पष्ट मानना है,निर्दोष को उचित न्याय और दोषी को ढूंढ कर कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।क्योंकि दोषी को सजा नहीं मिली तो ओ फिर से नीच हरक्कत करेंगे।दूसरी ओर अगर निर्दोष को बेवजह सजा दी गयी तो मानवता मर जाएगी,मानो भगवान पर ही भरोशा उठ गया हो।न्याय हो यही उम्मीद hai.
@HemantSorenJMM
@nevergiveup2u@BJP4Jharkhand मेरा स्पष्ट मानना है,निर्दोष को उचित न्याय और दोषी को ढूंढ कर कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।क्योंकि दोषी को सजा नहीं मिली तो ओ फिर से नीच हरक्कत करेंगे।दूसरी ओर अगर निर्दोष को बेवजह सजा दी गयी तो मानवता मर जाएगी,मानो भगवान पर ही भरोशा उठ गया हो।न्याय हो यही उम्मीद hai.
@HemantSorenJMM
@IAS7777 मेरा स्पष्ट मानना है,निर्दोष को उचित न्याय और दोषी को ढूंढ कर कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।क्योंकि दोषी को सजा नहीं मिली तो ओ फिर से नीच हरक्कत करेंगे।दूसरी ओर अगर निर्दोष को बेवजह सजा दी गयी तो मानवता मर जाएगी,मानो भगवान पर ही भरोशा उठ गया हो।न्याय हो यही उम्मीद है
@HemantSorenJMM
@IAS7777 मेरा स्पष्ट मानना है,निर्दोष को उचित न्याय और दोषी को ढूंढ कर कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।क्योंकि दोषी को सजा नहीं मिली तो ओ फिर से नीच हरक्कत करेंगे।दूसरी ओर अगर निर्दोष को बेवजह सजा दी गयी तो मानवता मर जाएगी,मानो भगवान पर ही भरोशा उठ गया हो।न्याय हो यही उम्मीद है🙏🏻
@HemantSorenJMM
मेरा स्पष्ट मानना है,निर्दोष को उचित न्याय और दोषी को ढूंढ कर कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।��्योंकि दोषी को सजा नहीं मिली तो ओ फिर से नीच हरक्कत करेंगे।दूसरी ओर अगर निर्दोष को बेवजह सजा दी गयी तो मानवता मर जाएगी,मानो भगवान पर ही भरोशा उठ गया हो।न्याय हो यही उम्मीद है🙏🏻
@HemantSorenJMM
मेरा स्पष्ट मानना है,निर्दोष को उचित न्याय और दोषी को ढूंढ कर कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।क्योंकि दोषी को सजा नहीं मिली तो ओ फिर से नीच हरक्कत करेंगे।दूसरी ओर अगर निर्दोष को बेवजह सजा दी गयी तो मानवता मर जाएगी,मानो भगवान पर ही भरोशा उठ गया हो।न्याय हो यही उम्मीद है��🏻
@HemantSorenJMM
“अगर जेन्युइन हो तो दोबारा परीक्षा देकर फिर पास कर लेना।”
यह तर्क सुनकर लगता है जैसे योग्यता कोई ऐसी चीज है, जिसे हर साल नई रसीद कटवाकर साबित करना पड़ता है।
नीरज चोपड़ा ने टोक्यो 2020 में ओलंपिक गोल्ड जीता, लेकिन पेरिस 2024 में गोल्ड नहीं जीत पाए।
तो क्या इसका मतलब यह है कि टोक्यो का गोल्ड उन्होंने 35 लाख रुपये देकर जी��ा था?
भारत ने 2011 में क्रिकेट विश्व कप जीता, लेकिन 2015 में खिताब नहीं बचा पाया।
तो क्या 2011 की जीत इसलिए संदिग्ध हो गई कि 2015 में वही टीम दोबारा विश्व कप नहीं जीत सकी?
इसी तरह, इस वर्ष NEET की पुनः परीक्षा में मेरे कई जानने वाले छात्रों के अंक पहली परीक्षा की तुलना में कम हो गए।
तो क्या इसका मतलब यह है कि पहली परीक्षा में उनके अंक फर्जी थे?
नहीं।
क्योंकि हर परीक्षा, हर मैच और हर चुनाव एक नई परिस्थिति होती है।
राजनीति में ही देख लीजिए।
नरेंद्र मोदी ने 2019 में वाराणसी से लगभग 4.79 लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। 2024 में जीत का अंतर घटकर लगभग 1.52 लाख रह गया।
तो क्या 2024 में जीत का अंतर कम होने से 2019 की जीत कम वैध हो गई?
बिल्कुल नहीं।
क्योंकि बाद का प्रदर्शन, पहले के प्रदर्शन को अपने-आप अवैध नहीं कर देता।
ठीक यही बात भर्ती परीक्षा पर भी लागू होती है।
अगर किसी अभ्यर्थी ने नियमों के अनुसार परीक्षा दी, ��पने प्रदर्शन के आधार पर कटऑफ पार की और चयनित हुआ,
तो बाद में परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी सामने आने पर यह कहना
“अगर सच में योग्य हो तो फिर से परीक्षा देकर पास कर लो”
दरअसल उसकी पहली सफलता को प्रमाणित करने के बजाय उसे एक नई प्रतियोगिता में फिर से उतारना है।
पहली परीक्षा में उसकी योग्यता का प्रमाण उसका उस परीक्षा में किया गया प्रदर्शन था।
दूसरी परीक्षा में वह पास होगा या नहीं, यह पहली परी��्षा में उसके प्रदर्शन का न तो प्रमाण है, न खंडन।
कोई पहली बार 90 अंक लाकर चयनित हो और दूसरी बार 70 अंक पाए, तो इससे यह सिद्ध नहीं होता कि पहली बार उसके 90 अंक फर्जी थे।
अलग परीक्षा = अलग परिस्थिति = अलग प्रदर्शन।
इसलिए व्यवस्था में गड़बड़ी हुई है तो सवाल यह होना चाहिए
किसने गड़बड़ी की?
किसे उसका लाभ मिला?
गड़बड़ी कितनी व्यापक थी?
किस स्तर तक परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित हुई?
और जिन लोगों की भू���िका संदिग्ध है, उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई होनी चाहिए?
लेकिन हर चयनित अभ्यर्थी से यह कहना
“चलो, अब फिर से साबित करो कि तुम योग्य हो।”
यह समाधान नहीं है।
योग्यता का प्रमाण यह नहीं कि कोई व्यक्ति हर बार वही परीक्षा पास कर सकता है।
योग्यता का प्रमाण है जिस परीक्षा में चयन हुआ, उसमें उसने नियमों के अनुसार कैसा प्रदर्शन किया।
दोषी को खोजिए।
लाभार्थी को चिन्हित कीजिए।
गड़बड़ी का दायरा तय क��जिए।
लेकिन केवल इसलिए कि व्यवस्था अपनी गलती सुधार नहीं पा रही, निर्दोष अभ्यर्थी से उसकी सफलता की दूसरी रसीद मत मांगिए।
@pravinm53747916 मेरा स्पष्ट मानना है,निर्दोष को उचि�� न्याय और दोषी को ढूंढ कर कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।क्योंकि दोषी को सजा नहीं मिली तो ओ फिर से नीच हरक्कत करेंगे।दूसरी ओर अगर निर्दोष को बेवजह सजा दी गयी तो मानवता मर जाएगी,मानो भगवान पर ही भरोशा उठ गया हो।न्याय हो यही उम्मीद है🙏🏻
@HemantSorenJMM
“अगर जेन्युइन हो तो दोबारा परीक्षा देकर फिर पास कर लेना।”
यह तर्क सुनकर लगता है जैसे योग्यता कोई ऐसी चीज है, जिसे हर साल नई रसीद कटवाकर स��बित करना पड़ता है।
नीरज चोपड़ा ने टोक्यो 2020 में ओलंपिक गोल्ड जीता, लेकिन पेरिस 2024 में गोल्ड नहीं जीत पाए।
तो क्या इसका मतलब यह है कि टोक्यो का गोल्ड उन्होंने 35 लाख रुपये देकर जीता था?
भारत ने 2011 में क्रिकेट विश्व कप जीता, लेकिन 2015 में खिताब नहीं बचा पाया।
तो क्या 2011 की जीत इसलिए संदिग्ध हो गई कि 2015 में वही टीम दोबारा विश्व कप नहीं जीत सकी?
इसी तरह, इस वर्ष NEET की पुनः परीक्षा में मेरे कई जानने वाले ��ात्रों के अंक पहली परीक्षा की तुलना में कम हो गए।
तो क्या इसका मतलब यह है कि पहली परीक्षा में उनके अंक फर्जी थे?
नहीं।
क्योंकि हर परीक्षा, हर मैच और हर चुनाव एक नई परिस्थिति होती है।
राजनीति में ही देख लीजिए।
नरेंद्र मोदी ने 2019 में वाराणसी से लगभग 4.79 लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। 2024 में जीत का अंतर घटकर लगभग 1.52 लाख रह गया।
तो क्या 2024 में जीत का अंतर कम होने से 2019 की जीत कम वैध हो गई?
बिल्कु�� नहीं।
क्योंकि बाद का प्रदर्शन, पहले के प्रदर्शन को अपने-आप अवैध नहीं कर देता।
ठीक यही बात भर्ती परीक्षा पर भी लागू होती है।
अगर किसी अभ्यर्थी ने नियमों के अनुसार परीक्षा दी, अपने प्रदर्शन के आधार पर कटऑफ पार की और चयनित हुआ,
तो बाद में परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी सामने आने पर यह कहना
“अगर सच में योग्य हो तो फिर से परीक्षा देकर पास कर लो”
दरअसल उसकी पहली सफलता को प्रमाणित करने के बजाय उ��े एक नई प्रतियोगिता में फिर से उतारना है।
पहली परीक्षा में उसकी योग्यता का प्रमाण उसका उस परीक्षा में किया गया प्रदर्शन था।
दूसरी परीक्षा में वह पास होगा या नहीं, यह पहली परीक्षा में उसके प्रदर्शन का न तो प्रमाण है, न खंडन।
कोई पहली बार 90 अंक लाकर चयनित हो और दूसरी बार 70 अंक पाए, तो इससे यह सिद्ध नहीं होता कि पहली बार उसके 90 अंक फर्जी थे।
अलग परीक्षा = अलग परिस्थिति = अलग प्रदर्शन।
इसलिए व्यवस्था में गड़बड़ी हुई है तो सवाल यह होना चाहिए
किसने गड़बड़ी की?
किसे उसका लाभ मिला?
गड़बड़ी कितनी व्यापक थी?
किस स्तर तक परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित हुई?
और जिन लोगों की भूमिका संदिग्ध है, उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई होनी चाहिए?
लेकिन हर चयनित अभ्यर्थी से यह कहना
“चलो, अब फिर से साबित करो कि तुम योग्य हो।”
यह समाधान नहीं है।
योग्यता का प्रमाण यह नहीं कि कोई व्यक्ति हर बार वही परीक्षा ��ास कर सकता है।
योग्यता का प्रमाण है जिस परीक्षा में चयन हुआ, उसमें उसने नियमों के अनुसार कैसा प्रदर्शन किया।
दोषी को खोजिए।
लाभार्थी को चिन्हित कीजिए।
गड़बड़ी का दायरा तय कीजिए।
लेकिन केवल इसलिए कि व्यवस्था अपनी गलती सुधार नहीं पा रही, निर्दोष अभ्यर्थी से उसकी सफलता की दूसरी रसीद मत मांगिए।
JSSC CGL परीक्षा में अपने मेहनत से चयनित होने वाले सभी सफल छात्रों की ओर से आपको @harisharandevgn बहुत बहुत धन्यवाद सर 🙏🙏🙏
आप हम निर्दोष छात्रों के दर्द को समझ रहे हैं इसके लिए आभार आपका 🙏🙏🙏
JSSC CGL परीक्षा में अपनी मेहनत और कड़ी मेहनत के दम पर चयनित हुए हम सभी सफल छात्रों ने झारखंड के छात्र नेताओं, कोचिंग संचालकों एवं अन्य सक्रिय लोगों से लगातार यह गुहार लगाई कि निर्दोष छात्रों को न्याय मिले और जो वास्तव में दोषी हैं, उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई हो।
लेकिन बेहद दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि हमारी बात सुनने और समझने के बजाय हम लोगों को दरकिनार कर दिया गया और कई बार हमारा उपहास तक उड़ाया गया।
हमारा सवाल है—अपनी मेहनत से चयनित होने वाले छात्र इन लोगों की नजर में दो��ी क्यों हैं?
क्या मेहनत और ईमानदारी से चयनित होकर हमने कोई गुनाह कर दिया है?
हम झारखंड के आदिवासी-मूलवासी छात्र हैं। हमने अपनी मेहनत, संघर्ष और वर्षों की तैयारी के बाद सफलता हासिल की है। आखिर अपनी मेहनत से परिणाम हासिल करके हमने किसका क्या बिगाड़ दिया?
हम केवल इतना चाहते हैं कि दोषी को दोषी माना जाए और निर्दोष को निर्दोष। किसी की गलती की सजा उन छात्रों को क्यों मिले, जिन्होंने दिन-रात मेहन�� करके अपनी सफलता अर्जित की है?
JSSC CGL का कटऑफ कम गया?😆
पेपर में गड़बड़ी करने वालों की वजह से कटऑफ इतना गया। वरना कटऑफ और नीचे जाता, मेहनती छात्रों को ASO का मौका मिलता और कई अन्य योग्य अभ्यर्थियों को भी नौकरी मिल सकती थी।
मेहनत करने वाले छात्रों का हक किसी और की गड़बड़ी की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए।
#JSSCCGL