Whether you agree with me or not is a separate matter. But it shows just how deeply unconscious we have become-how little we honour those who are fighting for us. @Pushpendraamu
मैं जल्दी ही एक पूरे प्लान के साथ इस विषय पर बात करूंगा ।
SC/ST act के दुरुपयोग को जहां तक संभव हो रोकना होगा । सबके साथ न्याय ही एक सफल समाज का आधार है । अन्यथा यह सब छिन्न भिन्न होते देर नहीं लगेगी ।
हमने पूर्व में भी यह काम कर चुके हैं किन्तु अब सार्वजनिक रूप से करेंगे ।
शताब्दियों से हिंदू समाज संगठित रहा है क्यूंकि हम आपस में बात करते थे । कोई समाज दूसरे को नीचा नहीं दिखाता था ।
साझा शत्रु से सब मिल कर लड़े , इसलिए विजयी हुए ।
We will try to reduce the Damage being inflicted by alleged misuse of certain acts of the Indian Constitution.
Talking to each other instead of talking at each other, can help reduce the damage.
That's all.
आदिशक्ति माता पार्वती जगतपिता महादेव जी की कृपा से आप सभी के गृहस्थ जीवन में प्रेम अनुराग विश्वास बना रहे। विघ्न विनाशक गणपति जी की कृपा से आप सब के जीवन के कभी कोई संकट न आ सके।
हरितालिका तीज व्रत और गणेश चतुर्थी की आप सभी को बहुत बहुत बधाई।
मैंने पहले भी कहा है, फिर कह रहा हूं सर, UGC की guidelines महापाप थीं ।
किसी भी हिंदू बच्चे के भविष्य के साथ उस भयावह खिलवाड़ को अनदेखा नहीं किया जा सकता ।
यदि UGC के नए नियम यह सरकार लागू करती है तो मैं स्वयं सड़क पर आकर आंदोलन करूंगा ।
और SC/ST act मोदी नहीं लाए थे ।
पर जो भी कमियां हैं वे आपस में बातचीत करके सुलझाई जा सकती हैं।
पर मुझे एक बात समझाएँ, ये UGC और SC/ST act की बातें करते करते आरक्षण पर हमला क्यूँ ??
मैं नहीं कहता कि आरक्षण foolproof व्यवस्था है, किन्तु सत्तर वर्षों से काम चल ही रहा है।
आज देश 8% की दर से विकसित हो रहा है ।
कुछ सरकारी नौकरियों के लिए इतना शोर मचाकर हम प्राप्त क्या कर लेंगे ? 50% हिंदू समाज को अपमानित करके करना क्या चाहते हैं हम??
आरक्षण का केवल एक समाधान है - मुक्त बाज़ार व्यवस्था । दस वर्षों में आरक्षण अप्रासंगिक हो जाएंगे ।
अंतिम बात ।
देश व धर्म के शत्रु हमारी आपस की फूट पर पेट पकड़ कर हंस रहे हैं और किसी तरह नमो को निर्बल बनाकर सत्ता परिवर्तन चाहते हैं ।
चलिए नमो को हटा देते हैं सत्ता से ।
फिर PCTV bill आएगा और निजी क्षेत्र में आरक्षण ।
फिर जब विदेशी कम्पनियाँ यहां से भागें और देश की अर्थव्यवस्था का भट्टा बैठ जाए तब सब मिलकर ugc-ugc खेलना ।
Eventually societies become too stupid to survive.
भगवान श्री कृष्ण का अवतरण भारतीय मानस के लिए अभूतपूर्व घटना है। द्वापर में कृष्ण का जन्म एक बालक का चमत्कारिक विधि से जन्म लेना मात्र एक जन्म नहीं, अधर्म पर धर्म की स्थापना है। इसीलिए जन्माष्टमी सिर्फ एक पर्व नहीं, यह जन जन की आस्था है, वासुदेव कृष्ण पर विश्वास है। आशा का उदय है, अधर्म अन्याय असुरक्षा का अंत है और उदय है उत्सव का, आनंद का उल्लास का।
चमत्कार और कृष्ण तो परस्पर जुड़े हुए हैं। कृष्ण का पूरा जीवन ही चमत्कारों से भरा हुआ है, बाल्यकाल में कारागार में जन्म होना और जन्मते ही माता देवकी पिता वासुदेव से बिछुड़ कर गोकुल में अभीरों के साथ यशोदा के ममत्व और नंद बाबा की छत्रछाया में पलना सब कुछ असाधारण हैं। भविष्यवाणी थी कि कंस का वध उसकी बहन देवकी के पुत्र के हाथों होगा, इसलिए देवकी को उसके पति वसुदेवसहित कारागार में डाल दिया गया था। बाल कृष्ण गोकुल में बड़े हुए और बाल्यकाल से ही उनके देवत्व दृष्टिगत होने लगा और उनकी लीलाएं आरम्भ हो गईं।
मथुरा नगरी कृष्ण भगवान जैसी विभूति का जन्मस्थान होने के कारण धन्य हो गई। मथुरा ही नहीं, सारा शूरसेन या ब्रज जनपद आनंदकंद कृष्ण की मनोहर लीलाओं की क्रीड़ाभूमि होने के कारण गौरवान्वित हो गया। उनके लोकरंजक रूप ने भारतीय जनता के मानस-पटल पर जो छाप लगा दी है, वह अमिट है। ब्रज में भगवान श्रीकृष्ण को लोग कई नामों से पुकारते है- और इन सभी नामों से कृष्ण की कोई न कोई लीला का इतिहास छिपा हुआ है : कान्हा, गोपाल, गिरधर, माधव, केशव, मधुसूदन, गिरधारी, रणछोड़, बंशीधर, नंदलाल, यशोदानंदन, मुरलीधर आदि नामों से जाने वाले कृष्ण भगवान की विराट उपस्थिति भारतीय संस्कृति भारतीय जीवन दर्शन के कण कण में दिखती है।
कृष्ण भगवान ने सहज भाव से जीवन जीते हुए समाज को प्रेम बंधुत्व और करुणा का सन्देश दिया। माँ यशोदा के साथ वात्सल्य, गोपियों, ग्वालों के साथ सख्य भाव, राधा रानी के साथ निस्वार्थ प्रेम भाव, समस्त जीवों के साथ प्रेम सम्मान का भाव सिखलाते हुए कृष्ण ने किशोरावस्था में ही बृज छोड़ दिया। इस प्रस्थान के पीछे मथुरा की रक्षा का भाव था और मोह को त्यागते हुए आगे कर्मरत रहने का सन्देश भी।
महाभारत के युद्ध में जब अर्जुन मोह में पड़ गए, तब श्री कृष्ण ने जो ज्ञान दिया, वह आज भी पूरे विश्व को रास्ता दिखाता है।
युद्ध के समय कृष्ण अर्जुन को कर्मयोग की शिक्षा इस प्रकार देते हैं कि "गीता" जीवन की सार्वकालीन महानतम पथ प्रदर्शिका बन गई। मोह त्यागो, कर्म करो निरासक्त कर्म करो, क्यूंकि वही तुम्हारा धर्म है, तुम्हारा जन्म कर्म करने के लिए हुआ है, फल की इच्छा मत करो। यह ज्ञान का महामंत्र आज सबके जीवन की आदर्श कुँजी बन चुकी है।
"कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि।।"
श्रीमद्भगवद्गीता में कर्म योग और जीवन जीने की कला मिलती है । गीत में समत्व का संदेश है। सुख-दुख, लाभ-हानि में समान रहो।
भगवान श्री कृष्ण के दिव्य व्यक्तित्व का चमत्कार है कि कृष्ण पर जितना साहित्य लिखा गया है वैसा दूसरा उदाहरण नहीं मिलता। जिसने कृष्ण पर रचा वह अमर हो गया। महाभारत भगवतगीता रचने वाले महर्षि वेदव्यास जी से लेकर यह श्रृंखला सूरदास मीराबाई,रसखान नंददास विद्यापति तक चलती है। बल्लभाचार्य द्वारा स्थापित पुष्टिमार्ग और अष्टछाप के कवियों ने कृष्ण की लीलाओं पर अद्भुत भक्ति साहित्य रचा। श्री कृष्ण के सम्पूर्ण व्यक्तित्व का ऐसा आभा मण्डल है कि प्रत्येक भक्त अत्यंत सहजता से उनसे अपने आपको जुड़ा हुआ अनुभव करता है।
श्री कृष्ण को पूर्णावतार कहा गया है। वे सोलह कलाओं से युक्त थे - ज्ञान, प्रेम, न्याय, धैर्य, क्षमा, सौंदर्य, कला, संगीत, नृत्य, नेतृत्व - सब कुछ एक ही अवतार में। इसलिए वे एक ही समय में नटखट माखन चोर हैं, बांसुरी बजैया हैं, सुदर्शन चक्र धारी योद्धा हैं और गीता ज्ञान देने वाले जगद्गुरु भी हैं।
प्रति वर्ष जन्माष्टमी आती है हमे भगवान कृष्ण के अवतरण की शिक्षाएँ देने के लिए, कि जीवन में धर्म के साथ रहो, प्रेम से रहो, और हर परिस्थिति में मुस्कुराते हुए अपना कर्म करते रहो। आप सभी को श्री कृष्णजन्माष्टमी की बहुत बहुत बधाई
https://t.co/I5CjzSEKnU
गीता सत्र में आज रात्रि नौ बजे श्री कृष्ण के अवतार रूप पर चर्चा करेंगे ।
प्रश्नों का स्वागत ।
लिंक को परिजनों व मित्रों के साथ साझा करें।
आज जन्माष्टमी के दिन दिल्ली से लखनऊ आते हुए कन्नौज के पास मार्ग पर इन महान संत को गाते सुना, और सुनती रह गई. आँसू बह निकले और हाँथ चरण छूने को बढ़ गए, मेरे आग्रह पर उन्होंने दुबारा गाया,मैंने आप सबके लिए इन्हें रिकॉर्ड कर लिया । सच्चे संत की पुकार अपने कन्हैया के लिए ,
पार लगाओ कन्हैया , तार दो हमे…
अहा! भारत ऐसे ही आध्यात्मिक संतों के बल पर टिका हुआ है .. ऐसा लगा कि आज जन्माष्टमी के दिन वासुदेव ने स्वयं दर्शन दे दिए 🙏
Message from Sonam :
20th JULY
आज़ादी का दूसरा आन्दोलन
भय मुक्त भारत, अन्याय मुक्त भारत
Freedom from injustice (Like paper leaks)
Freedom from Fear (my illegal detention)
India’s 2nd FREEDOM MOVEMENT
March to the Parliament
Please make it a big success
Sent through Gitanjali
from my illegal detention at Safdarjung
WHEN WILL I END THE FAST….!
Not withstanding my health my fast continues till after the Sansad Chalo March, and will be broken only under the following circumstances…
Sonam Wangchuk is trying hard to see you all! Just submitted a letter to the hospital as his health is good and they claim he is not in detention. So why the restrictions?