इस तस्वीर को देखिए,
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ प्रेस कांफ्रेंस कर रहे हैं,
आपको पता होगा कि
जो सौभाग्य इस अमेरिकी मीडिया को मिला है वह सौभाग्य भारतीय मीडिया को नहीं मिला,
पिछले 11 सालों में नरेंद्र मोदी जी ने भारत में एक भी प्रेस कांफ्रेंस नहीं की है।
अब तक जो दुनिया में शेर होने का दावा कर रहा था, #ईरान ने आज रात से उसकी हेकड़ी निकाल दी
#अमेरिका भी साथ में हमला करने का हिम्मत नहीं जुटा पा रहा
ईरान ने अमेरिका को भी चेतावनी दी है और बाकी सभी देशों को भी की कोई इस जंग के बीच में ना आए ,ईरान ने वह कर दिया है जो आज पूरे दुनिया में किसी के पास हिम्मत नहीं
ईरान इज न्यू #सुपर_पावर
#الحرب_العالمية_الثالثة
#Iran #Israel #IranAttack #Iranians #cryptocrash #WorldWar3 #WorldWarIII
भारत का प्रधानमंत्री हिंदू है
महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री हिंदू है
भारत का राष्ट्रपति हिंदू हैं
सुप्रीम कोर्ट का CJI हिंदू हैं
तीनों सेना का प्रमुख हिंदू हैं
महाराष्ट्र के नागपुर में RSS का शाखा है
यह सब होने के बावजूद भी जय श्री राम बोलने पर हिंदू मार खाता है और मुसलमान इसी भारत में बोलता है कि वह अल्पसंख्यक होते हुए पीड़ित है तो फिर इससे बड़ा मजाक कुछ और नहीं हो सकता हैं।
आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? क्योंकि हिंदू जाति में बंटे हैं, निजी स्वार्थ उनके ऊपर हावी है और जब तक यह रहेगा तुम ऐसे ही अपने देश में प्रताड़ित होते रहोगे, 120 करोड हिंदू होते हुए भी तुम अल्पसंख्यक की तरह ही रहोगे 🤨
दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता भानु प्रताप और महमूद प्राचा को पुलिस ने डिटेन कर लिया!
ये लोग EC के सामने EVM के खिलाफ प्रदर्शन करने जा रहे थे!
तानाशाही रवैया!
"EVM हटाओ, देश बचाओ"
#EVM
https://t.co/2Gy6IsBpxL
Suzlon’s partnership with the KP Group for their #WindEnergy project will undoubtedly boost their green energy footprint, as they power the nation with renewable technologies.
To know more: https://t.co/oHM8Ph04jD
#RenewableEnergy#KPEnergy @kpgroupgujarat @FarukPatel3
स्कूटर बिक रहा है या नारी को अपनी प्रोडक्ट में लड़कियों का अश्लील प्रयोग क्यो करवा रहा है.?
ये सभी #इंडस्ट्रीज़ वाले.!🙄🤔
सच कहूँ तो पहली नजर में स्कूटर दिखा ही नही, क्यों सच छिपाऊं,, मैं सोच रहा हूँ ,, आखिर ये हो क्या रहा है,,नारी क्यों देख ओर समझ नही पा रही बाजार ने उसे एक वस्तु बना दिया है,, वो क्यों विरोध नही करती,,
अगरबत्ती के ऐड में महिला,, शेविंग क्रीम के ऐड में महिला,, डिओ के ऐड में महिला की अमुक डिओ लगाओगे तो,, खिंची चली आंदी ए,, पुरुषों के इनर वियर में महिला
18 ,20 साल के लड़के ,, ओर लड़कियों पर इसका क्या असर हो रहा है,, उसका समाज पर क्या असर होगा,,कुछ लड़किया कहती है कि हम क्या पहनेगे ये हम तय करेंगे....
पुरुष नहीं.....
जी बहुत अच्छी बात है.....
आप ही तय करे....
लेकिन हम पुरुष भी किस लड़की का सम्मान/मदद करेंगे ये भी हम तय करेंगे, स्त्रीया नहीं....
और हम किसी का सम्मान नहीं करेंगे इसका अर्थ ये नहीं कि हम उसका अपमान करेंगे
लड़को को संस्कारो का पाठ पढ़ाने वाला स्त्री समुदाय क्या इस बात का उत्तर देगा की क्या भारतीय परम्परा में ये बात शोभा देती है की एक लड़की अपने भाई या पिता के आगे अपने निजी अंगो का प्रदर्शन बेशर्मी से करे?
क्या ये लड़किया पुरुषो को भाई/पिता की नज़र से देखती है ?
जब ये खुद पुरुषो को भाई/पिता की नज़र से नहीं देखती तो फिर खुद किस अधिकार से ये कहती है की "हमें माँ/बहन की नज़र से देखो"
कौन सी माँ बहन अपने भाई बेटे के आगे नंगी होती है?
भारत में तो ऐसा कभी नहीं होता था....
सत्य ये है कीअश्लीलता को किसी भी दृष्टिकोण से सही नहीं ठहराया जा सकता। ये कम उम्र के बच्चों को यौन अपराधो की तरफ ले जाने वाली एक नशे की दूकान है।।
और इसका उत्पादन #स्त्रीसमुदाय करता है।
मष्तिष्क विज्ञान के अनुसार 4 तरह के नशो में एक नशा अश्लीलता(सेक्स) भी है।
आखिर में मुझे ,, नॉन प्रोग्रेसिव या रूढ़िवादी भी कहा जा सकता है,, हो सकता है मैं हूँ भी,,
पर मैंने जो कहा बहुत थोड़ा कहा,, बहुत कुछ कह सकता था,,
बाकी पॉइंट ये है कि संस्कार ,, इस विषय मे वेशभूषा का,, ना भुला जाए,, हम संस्कृति के इस चीरहरण कर्ण या भीष्मपिता बनकर मुख दर्शक नहीं रहेंगे हम अपने धर्म का पालन करेंगे और आप ये भारत है बैंकॉक नही,,,
औरंगजेब द्वारा किया गया एक ऐसा इन्साफ, जिसे देश की जनता से छुपाया गया।
औरंगज़ेब काशी, बनारस की एक ऐतिहासिक मस्जिद (धनेडा की मस्जिद) यह एक ऐसा इतिहास है जिसे पन्नो से तो हटा दिया गया है, लेकिन निष्पक्ष इन्सान और हक़ परस्त लोगों के दिलो से मिटाया नही जा सकता और क़यामत तक मिटाया नहीं जा सकेगा।
औरंगजेब की हुकूमत में काशी बनारस में एक पंडित की लड़की थी जिसका नाम शकुंतला था।
उस लड़की को एक मुसलमान जाहिल सेनापति ने अपनी हवस का शिकार बनाना चाहा और उसके बाप से कहा– "तेरी बेटी को डोली में सजा कर मेरे महल पे 7 दिन में भेज देना"
पंडित ने यह बात अपनी बेटी से कही।
उनके पास कोई रास्ता नहीं था।
बेटी ने पिता से कहा– "1 महीने का वक़्त ले लो कोई भी रास्ता निकल जाएगा"
पंडित ने सेनापति से जाकर कहा– “मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं कि मैं 7 दिन में सजाकर लड़की को भेज सकूँ, मुझे महीने का वक़्त दो”
सेनापति ने कहा– “ठीक है, ठीक महीने के बाद भेज देना”
पंडित ने अपनी लड़की से जाकर कहा– “वक़्त मिल गया है, अब?
लड़की ने मुग़ल शहज़ादे का लिबास पहना और अपनी सवारी को लेकर दिल्ली की तरफ़ निकल गई,।
कुछ दिनों के बाद दिल्ली पहुँची, वो दिन जुमे का दिन था।
और जुमे के दिन औरंगजेब नमाज़ के बाद, जब मस्जिद से बहार निकलते थे तो लोग अपनी फरियाद एक चिट्ठी में लिख कर मस्जिद की सीढियों के दोनों तरफ़ खड़े रहते थे।
औरंगजेब वो चिट्ठियाँ उनके हाथ से लेते जाते, और फिर कुछ दिनों में फैसला फरमाते।
वो लड़की (शकुंतला) भी इस क़तार में जाकर खड़ी हो गयी।
उसके चहरे पे नकाब था, और लड़के का लिबास (ड्रेस) पहना हुआ था, जब उसके हाथ से चिट्ठी लेने की बारी आई, तब हज़रत औरंगजेब आलमगीर ने अपने हाथ पर एक कपड़ा डालकर उसके हाथ से चिट्ठी ली।
तब लड़की बोली– "महाराज, मेरे साथ यह नाइंसाफी क्यों?
सब लोगों से आपने सीधे तरीके से चिट्ठी ली और मेरे पास से हाथों पर कपड़ा रख कर?
तब औरंगजेब ने कहा– "इस्लाम में ग़ैर मेहरम (पराई औरतों) को हाथ लगाना भी हराम है और मैं जानता हूँ तू लड़का नहीं लड़की है"
शकुंतला बादशाह के साथ कुछ दिन तक ठहरी, और अपनी फरियाद सुनाई।
औरंगजेब आलमगीर ने उससे कहा– “बेटी, तू लौट जा तेरी डोली सेनापति के महल पहुँचेगी अपने वक़्त पर”
शकुंतला सोच में पड़ गयी कि यह क्या?
वो अपने घर लौटी और उसके पिता (पंडित) ने पूछा– क्या हुआ बेटी?
वो बोली– "एक ही रास्ता था, मै हिन्दोस्तान के बादशाह के पास गयी थी, लेकिन उन्होंने भी ऐसा ही कहा कि डोली उठेगी, लेकिन मेरे दिल में एक उम्मीद की किरण है, वो ये है कि मैं जितने दिन वहाँ रुकी बादशाह ने मुझे 15 बार बेटी कह कर पुकारा था और एक बाप अपनी बेटी की इज्ज़त नीलाम नहीं होने देगा।
फिर वह दिन आया जिस दिन शकुंतला की डोली सज–धज के सेनापति के महल पहुँची।
सेनापति ने डोली देख के अपनी अय्याशी की ख़ुशी में फकीरों पर पैसे लुटाना शुरू किया।
जब वह पैसे लुटा रहा था, तब एक कम्बल-पोश फ़क़ीर जिसने अपने चेहरे पे कम्बल ओढ रखी थी, उसने कहा– “मैं ऐसा-वैसा फकीर नहीं हूँ, मेरे हाथ में पैसे दे”
उसने हाथ में पैसे दिए और उन्होंने अपने मुह से कम्बल हटाया तो सेनापति देखकर हक्का बक्का रह गया।
क्योंकि उस कंबल में कोई फ़क़ीर नहीं बल्कि औरंगजेब खुद थे।
उन्होंने कहा– "तेरा एक पंडित की लड़की की इज्ज़त पे हाथ डालना मुसलमान हुकूमत पे दाग लगा सकता है, और औरंगजेब आलमगीर ने इंसाफ फ़रमाया।
4 हाथी मंगवा कर सेनापति के दोनों हाथ और पैर बाँध कर अलग अलग दिशा में हाथियों को दौड़ा दिया गया,
और सेनापति को चीर दिया गया।
फिर आपने पंडित के घर पर एक चबूतरा था, उस चबूतरे के पास दो रकात नमाज़ नफिल अदा की, और दुआ कि– “ऐ अल्लाह, मैं तेरा शुक्रगुजार हूँ, कि तूने मुझे एक ग़ैर इस्लामिक लड़की की इज्ज़त बचाने के लिए, इंसाफ करने के लिए चुना"
फिर औरंगजेब ने कहा– “बेटी, एक ग्लास पानी लाना”
लड़की पानी लेकर आई, तब उन्होंने कहा– “जिस दिन दिल्ली में मैंने तेरी फरियाद सुनी थी, उस दिन से मैंने क़सम खायी थी के जब तक तेरे साथ इंसाफ नहीं होगा पानी नहीं पिऊंगा"
तब शकुंतला के पिता (पंडित जी) और काशी–बनारस के दूसरे हिन्दू भाइयों ने उस चबूतरे के पास एक मस्जिद तामीर की, जिसका नाम “धनेड़ा की मस्जिद” रखा गया।
और पंडितों ने ऐलान किया कि ये बादशाह औरंगजेब आलमगीर के इंसाफ की ख़ुशी में हमारी तरफ़ से इनाम है।
और सेनापति को जो सज़ा दी गई वो इंसाफ़ एक सोने की तख़्त पर लिखा गया था, जो आज भी धनेड़ा की मस्जिद में मौजूद है।
Post– @TanveerPost