कल धौलपुर के सरमथुरा पहुंचकर करौली-धौलपुर टाइगर रिजर्व के खिलाफ चल रहे धरना-प्रदर्शन में शामिल होकर आंदोलनरत ग्रामीणों की आवाज़ को मजबूती प्रदान करूंगा। यह लड़ाई जल, जंगल, जमीन, अधिकार और सम्मान की लड़ाई है। आप सभी का भी हमारी इस लड़ाई में हार्दिक स्वागत है।
सरमथुरा में धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व के विरोध में आंदोलन 23वें दिन भी जारी..
गुरुवार को धरनास्थल पर हजारों ग्रामीणों की भीड़ जुटी..
विस्थापन, जमीन, घर व रोजगार को लेकर अपनी चिंता खुलकर सामने रखी।
ग्रामीणों का कहना है कि वे बाघ और वन्यजीव संरक्षण के खिलाफ नहीं हैं। उनकी मांग है कि संरक्षण के साथ स्थानीय लोगों के अधिकार, जीवन और भविष्य की भी रक्षा हो।
उनका सवाल है अगर जंगल और जानवर बचाना जरूरी है, तो वहां पीढ़ियों से रह रहे इंसानों का क्या होगा?
सरमथुरा की पहचान लाल पत्थर और उससे जुड़े पारंपरिक रोजगार से भी है। ग्रामीणों का दावा है कि पत्थर से जुड़े काम पर रोक और टाइगर रिजर्व की प्रक्रिया से हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो रहा है।
खास बात यह है कि आंदोलन को आसपास और दूर-दराज के क्षेत्रों से भी समर्थन मिल रहा है। ग्रामीण सरकार और प्रशासन से सीधी बातचीत कर अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं।
अब जरूरत टकराव की नहीं, संवाद और समाधान की है। ऐसी राह निकले जिसमें बाघ भी बचें और इंसान भी, वन्यजीवों का संरक्षण भी हो और स्थानीय लोगों के घर, जमीन व रोजगार भी सुरक्षित रहें।
#धौलपुर_करौली_टाइगर_रिजर्व_रद्द_करो
🚨 धौलपुर-करौली में आखिर हो क्या रहा है?
धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व के नाम पर अगर हजारों ग्रामीणों और आदिवासियों के मन में अपनी जमीन, घर और रोज़गार छिनने का डर पैदा हो गया है, तो यह स्थिति बेहद चिंताजनक और निंदनीय है।
जंगल बचाना जरूरी है, बाघ बचाना भी जरूरी है—लेकिन क्या इसके लिए सदियों से वहां रहने वाले लोगों की जिंदगी उजाड़ देना ही रास्ता है?
जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय लोगों के अधिकारों को नजरअंदाज करके कोई फैसला थोपना स्वीकार नहीं किया जा सकता। सरकार को सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि स्पष्ट और लिखित जवाब देना होगा कि किसी के साथ जबरन विस्थापन या अन्याय नहीं होगा।
अगर जनता की सहमति के बिना उनकी जमीन और आजीविका पर फैसला होगा, तो सवाल उठेंगे और आवाज़ भी बुलंद होगी।
सरकार याद रखे—संरक्षण के नाम पर लोगों को बेघर करना विकास नहीं, गंभीर अन्याय माना जाएगा!
✊ जल-जंगल-जमीन पर पहला हक, स्थानीय लोगों के अधिकार सुरक्षित रखो!
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@RajGovOfficial@RajCMO@BhajanlalBjp@ForestRajasthan@ntca_india@moefcc@DmKarauli
इन ग्रामीणों की भी सुनो सरकार...
सरमथुरा में धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व के विरोध में आंदोलन 23वें दिन भी जारी रहा। गुरुवार को धरना स्थल पर हजारों ग्रामीणों की भीड़ जुटी और विस्थापन, जमीन, घर व रोजगार को लेकर अपनी चिंता खुलकर सामने रखी।
ग्रामीणों का कहना है कि वे बाघ और वन्यजीव संरक्षण के खिलाफ नहीं हैं। उनकी मांग है कि संरक्षण के साथ स्थानीय लोगों के अधिकार, जीवन और भविष्य की भी रक्षा हो। उनका सवाल है—अगर जंगल और जानवर बचाना जरूरी है, तो वहां पीढ़ियों से रह रहे इंसानों का क्या होगा?
सरमथुरा की पहचान लाल पत्थर और उससे जुड़े पारंपरिक रोजगार से भी है। ग्रामीणों का दावा है कि पत्थर से जुड़े काम पर रोक और टाइगर रिजर्व की प्रक्रिया से हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो रहा है।
खास बात यह है कि आंदोलन को आसपास और दूर-दराज के क्षेत्रों से भी समर्थन मिल रहा है। ग्रामीण सरकार और प्रशासन से सीधी बातचीत कर अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं।
अब जरूरत टकराव की नहीं, संवाद और समाधान की है। ऐसी राह निकले जिसमें बाघ भी बचें और इंसान भी, वन्यजीवों का संरक्षण भी हो और स्थानीय लोगों के घर, जमीन व रोजगार भी सुरक्षित रहें।
@BhajanlalBjp@Sanjay4India1
#धौलपुर_करौली_टाइगर_रिजर्व_रद्द_करो
शांतिपूर्ण विरोध एक अटूट और मौलिक अधिकार है।
भारत के निर्दोष छात्रों पर हमला करने के आदेशों का आँखें बंद करके पालन करने वाले हर पुलिस अधिकारी और सरकारी कर्मचारी ये बात ध्यान रखें:
संविधान ही आपका मालिक है।
सत्ता हमेशा के लिए नहीं रहती।
जवाबदेही ज़रूर तय की जाएगी।
Peaceful protest is a sacred and fundamental right.
Every police officer and govt official blindly following orders to attack India’s innocent students should keep in mind:
The Constitution is your master.
Power is not permanent.
Accountability will follow.
टोडाभीम विधानसभा क्षेत्र के ग्राम भोपुर, बालघाट स्थित गम्भीर नदी में करंट लगने से तीन लोगों की दर्दनाक मृत्यु का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है।
ईश्वर दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिजनों को इस असहनीय दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें।
ॐ शांति।
अव्वल तो अधिकांश लोगों ने कुलदीप सिंह सेंगर को बेल मिलने पर शो नहीं किए
जो थोड़े बहुत शो हुए उसमें BJP ने प्रवक्ता नहीं भेजे
क्या आज एक दिन BJP उन्नाव पीड़िता के साथ, कुलदीप सेंगर के ख़िलाफ़ नहीं खड़ी हो सकती थी?
हर बार की यही कहानी क्यों है?
आज मध्य प्रदेश जा रहा हूं।
और जब से ये खबर देखी है कि वहां बच्चों को मिड-डे मील अख़बार पर परोसा जा रहा है, दिल टूट सा गया है।
ये वही मासूम बच्चे हैं जिनके सपनों पर देश का भविष्य टिका है, और उन्हें इज़्ज़त की थाली तक नसीब नहीं।
20 साल से ज्यादा की BJP सरकार, और बच्चों की थाली तक चुरा ली गई - इनका 'विकास' बस छलावा है, सरकार में आने का असली राज़ तो 'व्यवस्था' है।
शर्म आनी चाहिए ऐसे मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को जो देश के बच्चों, भारत के भविष्य का इस दुर्दशा से पालन-पोषण कर रहे हैं।
Video Courtesy: @Anurag_Dwary
मोदी जी तो लगातार फ़िल्मों को प्रमोट करते हैं
घटिया, नफ़रती फ़िल्मों के बारे में ट्वीट करते हैं, लोगों से पिक्चर देखने की अपील करते हैं
लेकिन इतने बड़े समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले जी के जीवन, उनके संघर्षों और आदर्श पर बनी फ़िल्म ‘फुले’ के बारे में एक शब्द नहीं बोले
शायद शिक्षा, और सामाजिक न्याय उनके लिए रोचक विषय नहीं हैं
वहीं, राहुल गांधी जी ने बिहार में इस फ़िल्म को सामाजिक न्याय इन्फ्लुएंसर्स के साथ देखा - क्योंकि उनके लिए शिक्षा, समता जैसे मुद्दे ज़रूरी हैं - वो इन्हीं मुद्दों की लड़ाई लड़ रहे हैं
ये बेहद दुःखद ख़बर है कि अयोध्या के ग्रामसभा सहनवां (सरदार पटेल वार्ड) में 3 दिन से गायब दलित परिवार की बेटी का शव निर्वस्त्र अवस्था में मिला है, उसकी दोनों आँखें फोड़ दी गई हैं उसके साथ अमानवीय व्यवहार हुआ है। प्रशासन ने तीन दिन पहले ही अगर परिवार की सूचना पर ध्यान दिया होता तो बच्ची की जान बचायी जा सकती थी।
हम उत्तर प्रदेश सरकार से मांग करते है कि जो दोषी हैं और जिन पुलिसकर्मियों ने इस मामले में लापरवाही बरती है, उन सबके ख़िलाफ़ कठोरतम कार्रवाई की जाए और पीड़ित परिवार को तत्काल 1 करोड़ का मुआवज़ा दिया जाए।
खनौरी बॉर्डर से आया ये वीडियो दिल को तोड़ने वाला है, जगजीत सिंह डल्लेवाल जी की गिरती सेहत को देख वहां मौजूद हर किसान और उनका परिवार चिंतित है, ये आंसू सिर्फ उनकी सेहत के लिए नहीं, बल्कि सरकार की निष्ठुरता, बेरुखी और अन्याय के खिलाफ हैं, इतनी बेरुखी तो अंग्रेज सरकार में भी नहीं थी
"पहले तो भर्ती नहीं निकलती, भर्ती निकल जाए तो परीक्षा समय पर नहीं होती......"
◆ राहुल गांधी ने X पर पोस्ट कर बीजेपी को घेरा
@RahulGandhi | #RahulGandhi | Rahul Gandhi
राजस्थान कनिष्ठ लेखाकार और तहसील राजस्व लेखाकार भर्ती 2023 का अंतिम परिणाम घोषित हो चुका है, लेकिन बीजेपी सरकार की निष्क्रियता के कारण नियुक्ति आदेश अभी तक जारी नहीं हुए हैं। मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी, से अनुरोध है कि जल्द नियुक्ति आदेश जारी करें। #JRA_TRA_मांगे_नियुक्ति_पत्र