जोहार,
जिन जिन को हम फोलो कर रहे हैं प्लीज वो भी फोलो बैक कर देना
पुराना अकाउंट ब्लाॅक हो गया है
इसलिए यहाँ फोलो कीजिए, फोलो बैक मिलेगा विद गारंटी @meenaumesh97
जो भी इस ट्वीट को देखे
हमें फोलो कर लीजिये
हम भी आपको फोलो बैक करेंगे
पुराना अकाउंट किसी ने उड़वा दिया है
मेल आईडी ही सपोर्ट नही कर रहा है
Plz.... Follow @MeenaUmesh97
Old account - @MeenaUmesh1
Message from Sonam :
20th JULY
आज़ादी का दूसरा आन्दोलन
भय मुक्त भारत, अन्याय मुक्त भारत
Freedom from injustice (Like paper leaks)
Freedom from Fear (my illegal detention)
India’s 2nd FREEDOM MOVEMENT
March to the Parliament
Please make it a big success
Sent through Gitanjali
from my illegal detention at Safdarjung
बाँधने मुझे तो आया है,जंजीर बड़ी क्या लाया है?
यदि मुझे बाँधना चाहे मन,पहले तो बाँध अनन्त गगन !
सूने को साध न सकता है,वह मुझे बाँध कब सकता है ??
#SonamWangchuk
जर्नलिस्ट –– सोनम वांगचुक के BJP के खिलाफ प्रोटेस्ट पर आप क्या कहना चाहते हैं?
विवेक ओबेरॉय 😂 –– "मैं एक एक्टर हूं, कोई पॉलिटिशियन नहीं जो ऐसे मुद्दों पर बोल सकूं। मैं बस चीजों को देखता हूं"
इसी आदमी ने मोदी पर मूवी बनाई थी और BJP को खुलकर सपोर्ट करता था।
शर्म की बात है : 00% 🤢
महिला कोर्ट में खड़ी होकर रोते हुए बोली
मिलार्ड, 15 साल हो गए... सब कुछ बर्बाद हो गया है। मेरी भी एक बार सुन लीजिए प्लीज।
CJI ब्राह्मण सूर्यकांत शर्मा ने शांत कहा आपको अगले मंगलवार की तारीख दी जाती है। आने की जरूरत नहीं है, ऑनलाइन अपीयरेंस भी चलेगा।
महिला ने आंसू पोछते हुए अपना मंगलसूत्र उतार कर रख दिया और गिड़गिड़ाते हुए कहा - सर प्लीज... मेरा परिवार बर्बाद हो चुका है। बच्चों को खाना नहीं मिल पा रहा, पढ़ाई छूट गई है। बस एक बार तो सुन लीजिए...
लेकिन जज नहीं पिघले। इसी रवैया, वजह है कि लोग इनका सम्मान नहीं करते हैं।
सोनम वांगचुक, जिसने कभी अपने लिए नहीं माँगा, कुछ कि पद चाहिए, सत्ता चाहिए।
अपनी ज़िंदगी देश, समाज और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए लड़ते रहे है और 15-16 दिनों से अनशन पर बैठे हैं!
अपने लिए नहीं, देश के लिए। देश के बच्चों के भविष्य के लिए! उसके बाद भी देश के नेताओं की सोई हुई संवेदनाएँ नहीं जाग पा रही।
सत्ता की ख़ामोशी बरकरार है।
भूख हड़ताल और अनशन भी अगर व्यवस्था को सुनाई नहीं दे रहा, तो एक आम नागरिक की आवाज़ की कीमत क्या ही होगी?
अब दर्द सिर्फ़ यह नहीं कि एक व्यक्ति अनशन पर है, बड़ा दर्द यह है कि देश धीरे-धीरे उस मुकाम पर पहुँच रहा है जहाँ जनता की पीड़ा का महत्व खत्म है और उस पर सत्ता हावी है।
सोचिए, आज अगर एक ऐसे व्यक्ति की आवाज़ अनसुनी की जा सकती है, जिसने अपना जीवन देश के लिए लगा दिया, तो कल बेरोज़गार युवा, न्याय की गुहार लगाता परिवार, किसान, छात्र या कोई भी आम नागरिक किस उम्मीद से अपनी तकलीफ़ के लिए लड़ पाएगा और कौन उसकी सुनेगा?
लोकतंत्र का मतलब सिर्फ़ चुनाव है क्या? अगर सत्ता अपने शांत नागरिक की आवाज़ नहीं सुन रही, तो ये लोकतंत्र पर सवाल नहीं है?
और अगर वह आवाज़ भी अनसुनी होने लगे! तो यह चिंता सिर्फ़ पूरे देश को होनी चाहिए।
Be stand with Sonam Wangchuk
नही रही वो 13 साल की मासूम जिसे दरिंदो ने नोच खाया था😭
अब इंसाफ तो यही कहता है कि जैसे वो तड़प तड़प कर मरी है ,उसके गुनहगार भी वैसे ही तड़प तड़प के मरे, उसको न्याय तुरंत मिले, नही तो न्याय पर से विस्वास उठ जाएगा😡
शेयर करिये अगर आप के अंदर तनिक भी इंसानियत है तो,ताकि उस नीच को फांसी हो सके।
महज 13 साल की बच्ची के साथ 32 लोगों ने 5 दिन हैवानियत बहुत ही दर्दनाक और शर्मनाक है!
ऐसी घटनाएं सिर्फ एक परिवार को नहीं बल्कि पूरे समाज को झकझोर देती है!
दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा मिले और बच्चों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाये जाये!!
यह डॉ अनिल कुमार मीणा जी है,जालौर राजस्थान में कार्यरत है।
पहले उनके साथ अस्पताल में मारपीट ओर जातिगत उत्पीड़न होता है।
SC/ST एक्ट में FIR दर्ज कराने के बाद सरपंच प्रतिनिधि वीरेंद्र सिंह राजपूत द्वारा FIR वापस लेने फिर से जातिगत उत्पीड़न करके उनके सरकारी आवास में जान से मारने हेतु धमकाया जाता है।
अब FIR के कुछ बिंदु पढ़िए।
रात्रि लगभग 11 बजे एक मरीज सग्रामाराम (आयु लगभग 80 वर्ष) को उसके परिजन गंभीर अवस्था में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दासपा लेकर आए थे।
मैंने तुरंत मरीज को अटेंड किया और उपलब्ध आपातकालीन प्राथमिक चिकित्सा व इनिशियल ट्रीटमेंट (इनिशियल ट्रीटमेंट) प्रदान किया।
मरीज की नाजुक एवं चिंताजनक स्थिति को देखते हुए मैंने परिजनों को स्पष्ट रूप से अवगत कराया कि मरीज सीरियस है अतः इसे तुरंत उच्च चिकित्सा केंद्र (हाई सेंटर) के लिए रेफर करना आवश्यक है। तदनुसार मैंने तुरंत मरीज का रेफरल कार्ड तैयार कर दिया तथा चिकित्सालय स्तर से त्वरित कार्रवाई करते हुए एम्बुलेंस (एम्बुलेंस) की व्यवस्था भी करवा दी। एम्बुलेंस उपलब्ध होने के बावजूद मरीज के परिजनों ने मरीज को तुरंत ले जाने से मना कर दिया और आनाकानी करने लगे परिजनों का कथित तौर पर कहना था कि हमारे घर पर काम है, हम सुबह लेकर जाएंगे अथवा हम इसे हमारे पर्सनल व्हीकल (निजी वाहन) से ही लेकर जाएंगे और वे एम्बुलेंस ले जाने से साफ मुकर गए। मरीज को विधिवत रेफर करने और एम्बुलेंस सुपुर्द करने के बाद, मैं रात्रि भोजन के लिए अस्पताल परिसर में ही स्थित अपने सरकारी क्वार्टर पर चला गया। फिर परिजनों की घोर लापरवाही और समय पर उच्च केंद्र न ले जाने के कारण लगभग 40 मिनट के बाद मरीज सग्रामाराम की अस्पताल परिसर में ही मृत्यु हो गई। मरीज की मृत्यु होते ही परिजनों ने अचानक उग्र व हिंसक रूप धारण कर लिया और ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग ऑफिसर श्री रामलाल जी के साथ गाली-गलौज व मारपीट करते हुए, उन्हें जबरन पकड़कर मेरे सरकारी क्वार्टर की तरफ लेकर आए तथा बाहर चिल्लाने लगे कि डॉक्टर साहब को बाहर निकालो।
जैसे ही में चिल्लाने की आवाज सुनकर अपने क्वार्टर के पीछे के हिस्से से बाहर अस्पताल परिसर की तरफ आया, वहां खड़े परिजनों में शामिल 5 पुरुषों (मेल) ने मुझे देखते ही तुरंत मेरे साथ बेरहमी से मारपीट शुरू कर दी और चिल्लाने लगे कि आपने हमारे बाप को मार दिया है और अब हम आपको मारेंगे। वे पांचों पुरुष मुझे रास्ते में लगातार बर्बरतापूर्वक थप्पड़ मारते और पीटते हुए जबरन खींचकर अस्पताल के वार्ड (वार्ड) के अंदर लेकर चले गए और फिर आगे का पूरा हिंसक प्रकरण व मारपीट अस्पताल वार्ड के अंदर की गई, जहाँ उनके साथ उपस्थित एक महिला (फीमेल) भी इस पूरे कृत्य में उनकी मदद कर रही थी तथा पुरुषों में से एक ने मेरे सिर पर किसी अज्ञात ठोस वस्तु (ऑब्जेक्ट) से जोरदार वार किया जिससे मुझे गंभीर चोट आई। हमलावरों ने हमें धमकाते हुए सख्त हिदायत दी कि अपने-अपने मोबाइल फोन जेब में ही रखो, कोई भी अपने फोन को टच (स्पर्श) नहीं करेगा और उन्होंने हमें किसी को भी फोन लगाने या सूचना देने से पूरी तरह रोक दिया। इसके बाद उन्होंने हमें जान से मारने की प्रत्यक्ष धमकियां देते हुए कहा कि तुम्हें जान से मार देंगे, तुम्हारा गला काट देंगे, तुम्हारी गर्दन और पूरा शरीर अलग करके कुएं में डाल देंगे, यह दासपा है और यहां किसी को पता भी नहीं चलेगा। इस घोर मानसिक व शारीरिक खौफ के साए में उन्होंने मुझसे जबरन दबाव बनाकर एक नोट (पत्र) लिखवाया कि मैंने गलत इंजेक्शन लगाकर मरीज को मार दिया है और इसका मुआवजा कौन देगा अपनी तथा नर्सिंग स्टाफ की जान बचाने के लिए मुझे मजबूरन उस झूठे पत्र पर हस्ताक्षर करने पड़े और उन्होंने नर्सिंग ऑफिसर रामलाल जी से भी उस पर जबरन हस्ताक्षर करवा लिए। 7. यह कि इसके बाद आरोपियों ने हमें उसी वार्ड में बंद करके बंधक (होस्टेज) बना लिया और पानी पीने अथवा शौच (पेशाब) तक जाने की अनुमति नहीं दी तथा खड़े रहने पर मजबूर किया।
आरोपियों ने हमें उसी वार्ड में बंद करके बंधक बना लिया और पानी पीने अथवा शौच (पेशाब) तक जाने की अनुमति नहीं दी तथा खड़े रहने पर मजबूर किया। इसी दौरान उन्होंने जातिगत द्वेषता व दुर्भावना प्रदर्शित करते हुए मेरी जाति के बारे में पूछा और मेरे द्वारा स्वयं को मीणा बताने पर अत्यंत अपमानजनक व जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि मीणा, चमार तुमको कोई नॉलेज नहीं है तुम यहाँ के नहीं हो और यहाँ के बारे में कुछ नहीं जानते, तुम्हारी पगार कितनी है, सरकार तुम्हें कितनी पगार देती है, तुम्हारे पास डॉक्टर की डिग्री है भी या नहीं है।
घटना के 8 दिन बाद भी @JalorePolice ने अभी तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया है।
@BhajanlalBjp@RajPoliceHelp@RajCMO
नक्सलियों की पहचान : भीड़ में शेर बनते हैं भीड़ के समाने ही धमकी देते हैं और फिर जवाब मिलने पर दोष दूसरों से सिर मड़ देते हैं।
#हाकिम_अली खुद स्वीकार कर रहा है कि वे #पांचना_बांध के कुंडली मारकर बैठें है और गीदड़ फफकी दे रहा है कि कोई एक बूंद पानी लेकर बताएं।
ये भोली कौम बताई
20 वर्षों से पांचना बांध का पाणी रोकने के बाद भी...
एक काश जाति के लिए... तुम्हारा प्रोपेगेंडा तो मस्त है, पर हम चलने नहीं देंगे।🙋
और हां किसान आंदोलन को एक जाति का बताने से पहले आंखे खोलकर देख 👇
आंदोलन में बैरवा...माली..शर्मा...गुप्ता...जाट.. राजपूत.. मीणा..योगी... खटीक.. प्रजापत... सेन..खंगार पूरी 35 कॉम शामिल हैं।👇👇
उत्तर प्रदेश में ललितपुर जिले के महारा गांव में सहरिया आदिवासी परिवारों को उनकी बस्ती और ग्राम पंचायत की भूमि से बेदखल करने की कोशिश की जा रही है। विरोध करने पर मारपीट, गाली-गलौज, महिलाओं के रास्ते बंद करने और बस्ती में आग लगाने जैसी घटनाएं सामने आई हैं। क्या उत्तर प्रदेश में आदिवासियों का जल, जंगल, जमीन और सम्मान सुरक्षित है? प्रशासन निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करे।