LADY : Why are throwing flowers at Airport?
MEN : Because we are coming from Hajj.
LADY : Why you littered flowers here inside Airport? Who will clean it? 😳
MEN : What?
LADY : Can you do this in Dubai?
Men left !!
अनुराधा तिवारी ने हर्ष दुबे से सवाल किया, “रिजर्वेशन किस आर्टिकल के तहत आता है? जॉब का, एजुकेशन का और पॉलिटिकल का? ये तीनों मुझे बताइए।”
हर्ष दुबे ने जवाब दिया, “मुझे ना आर्टिकल पता है, ना इतिहास पता है, कुछ नहीं… पता है, मुझे।”
इस पर अनुराधा तिवारी ने कहा, “ये जे.पी. नड्डा जी इनको बुला रहे हैं, जिनको रिजर्वेशन किस आर्टिकल के तहत आता है, ये तक नहीं पता।”
मेरी औकात यही है कि मेरे बाप नौ बार के सांसद नहीं थे बल्कि ‘लाल कार्ड’ धारक किसान रहे और मैंने अपनी प्रतिभा के बल पर वह सब पाया, जो तुम्हारे चिराग जी नौ बार के सांसद पिता के पुत्र हो कर भी कभी पा नहीं सकते। उनको खड़े होने के लिए डंडा चाहिए, चलने के लिए बैसाखी, बोलने के लिए बासी लेख।
ये वीडियो देहरादून पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी का
है लड़का बोलता रहा मेरा एकादशी का व्रत है
मम्मी ने रखवाया है पर दूसरे छात्र रैगिंग के नाम
पर उसे मारते रहे गालियां देते रहे क्या ये सही है
मां बाप अपने बच्चों को पढ़ेंने भेजते हैं न कि इस
तरह रैगिंग के नाम पर पीटने के लिये!
'HANUMAN ANSH' IS REWRITING THE RECORD BOOKS – 7275% JUMP ON *FOURTH FRIDAY*...
⭐ Day 1: ₹ 8 lacs
⭐ Day 22: ₹ 5.90 cr
#HanumanAnsh jumps 7275% on Day 22 [vis-à-vis Day 1] – the kind of growth that is UNHEARD OF and UNIMAGINABLE in today's times.
The show count has also MULTIPLIED across #India...
⭐ Week 1 - Friday: 276 shows
⭐ Week 4 - Friday: 850 shows
The fourth Friday business, frankly, is an EYE-OPENER... The power of content... The power of word of mouth.
⭐ #HanumanAnsh [Week 4] Fri 5.90 cr. Total: ₹ 17.60 cr.
Official Nett BOC | #India biz | #Boxoffice
श्री सुभाष चन्द्र जी ने 22000 करोड़ का लोन लिया था, दे नहीं पा रहे थे। सरकार ने कहा कि आपने मोदी जी के साथ फोटो खिंचाई है, और आप सुभाष चंद्र बोस वाली टोपी भी पहनते हैं, इसलिए ना तेरा, ना मेरा, साढ़े छः करोड़ दो और मामला समाप्त करो।
जिस तरह से ये सब हुआ है, लोग इन बैंकों का नाम पूछ रहे हैं कि कौन हैं ये दिलदार बैंक, कहाँ हैं इनका ऑफिस। देखिए जीवन में बड़े व्यक्ति बनिए, फिर आप बिज़नेस टाइकून भी कहे जाएँगे और बैंक का पैसा ले कर ऐसे भी गायब हो जाएँगे।
इन फैक्ट, अब आपको यह भी बताया जाएगा कि NCLT ने 22000 के बाद का करोड़ नहीं देखा था और उन्हें लगा कि 6.5 करोड़ तो देश का फ़ायदा ही हो रहा है, अतः उन्होंने कहा सारा ब्याज जोड़ कर 22000 का साढ़े छः करोड़ राष्ट्रवाद है। ये सब चल रहा था तभी NCLT और पार्टी के कार्यालय से यह वीडियो सामने आ गया, देखिए।
ब्रो! पहले तो धमकी देना और बाप पर जाना बंद करो। हम आपको और आपके जैसे हर नेता को हर गठबंधन में मंत्री बनते देख चुके हैं।
कोई किसी का अधिकार नहीं छीन रहा। अठावले जैसे लोग बाल्मीकि, मुसहर, भुइयाँ, डोम, मातंग आदि को आरक्षण का लाभ नहीं देना चाहते इसलिए उपवर्गीकरण जैसी समीक्षा पर बिलबिला उठते हैं।
आप एक विचारधाराहीन नेता हैं जो दुर्भाग्य से अपने जाति समूह का स्वघोषित नेता बन कर, उसी समूह की 1000 अन्य जातियों का अधिकार खा रहा है।
पिछले सात साल से ये पोस्ट रिपीट कर रहा हूँ पर अब भी लोग ढंके की चोट पर बकवास कर रहे हैं कि रानी कर्णावती ने हुमायूँ को राखी बाँध कर रक्षाबंधन की शुरुआत की
दुखद ये है कि मौके पर किसी ने उसकी फ़र्ज़ी कहानी को चैलेंज नहीं किया
वीर सावरकर जैसे महान क्रांतिकारी और राष्ट्रनायक के प्रति इस प्रकार की आपत्तिजनक एवं अशोभनीय वीडियो को किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता। ऐसे वीडियो पर @DelhiPolice@MumbaiPolice को तत्काल संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए।
जिस वीर सावरकर का आज कुछ लोग उपहास उड़ाने का दुस्साहस कर रहे हैं, उनके योगदान को समझने के लिए इतिहास पढ़ना पड़ेगा, सोशल मीडिया की घटिया मानसिकता नहीं।
मदनलाल ढींगरा जैसे क्रांतिकारी सावरकर के संपर्क में आए और उनके विचारों से प्रभावित हुए। जिस ‘हिंदू पद-पदशाही’ का आज शायद नाम तक ये चिलगोजर नहीं जानते होंगे, उसकी छह पंक्तियाँ भगत सिंह जी ने अपनी जेल डायरी में अपने हाथ से लिखी थीं।
‘The Indian War of Independence – 1857’? जिस पुस्तक ने 1857 को केवल ‘Sepoy Mutiny’ कहने वाली औपनिवेशिक व्याख्या को चुनौती दी, वह ब्रिटिश राज में प्रतिबंधित थी। इसके बाद इसके संस्करण क्रांतिकारी नेटवर्क के माध्यम से प्रकाशित और प्रसारित हुए।
वीर सावरकर केवल क्रांतिकारी नहीं थे, वे लेखक, इतिहास-चिंतक और संगठनकर्ता भी थे। उन्होंने अभिनव भारत और फ्री इंडिया सोसाइटी जैसे संगठनों के माध्यम से क्रांतिकारी गतिविधियों को संगठित किया और अपनी लेखनी से युवाओं को प्रभावित किया।
1857 के उन वीरों को, जिन्हें अंग्रेजी इतिहासलेखन ने लंबे समय तक ‘विद्रोही’ कहकर छोटा किया, सावरकर जी ने ‘स्वतंत्रता संग्राम’ के व्यापक राष्ट्रीय आख्यान में सम्मान दिया।
और फिर उनके जीवन का अंतिम अध्याय देखिए, आजादी के बाद भी उन्होंने कोई सत्ता या ऐश्वर्य का जीवन नहीं चुना। अपने अंतिम समय में उन्होंने अन्न, जल और दवाइयां त्यागकर ‘आत्मार्पण’ का मार्ग अपनाया और 26 फरवरी 1966 को उनका निधन हुआ।
जिस व्यक्ति ने अपना जीवन राष्ट्र, लेखनी और क्रांतिकारी चेतना के लिए खपा दिया, उसके योगदान को समझने के लिए पहले इतिहास पढ़िए। वीर सावरकर को गाली देने से उनका इतिहास छोटा नहीं होगा। हाँ, इतिहास जाने बिना उन्हें गाली देने वालों की अपनी समझ जरूर छोटी दिखाई देगी।
But what is the difference between kids abusing at Jantar Mantar and this Lady? People notice that this lady has gone mad but the ones who abused at Jantar Mantar are free to Abuse openly Sakshi ma’am?