देश के खातिर शाहिद हुएं मेज़र हमज़ा आरिफ, एक महीना पहले ही हुई थी शादी!
जिस हाथों में सुहागन की मेंहदी थी उस हाथों में तिरंगा का कफ़न है! 😥
(सभी का खून है शामिल यहां की मिट्टी में, किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है)
रात के 3 बजे... गोद में 3 महीने का मासूम बच्चा और पुलिस गाड़ी जब्त कर पति-पत्नी को सड़क पर ही छोड़कर चली गई।
राजस्थान के बारां में मनीष सुमन अपनी पत्नी और 3 महीने के मासूम बच्चे को देवी दर्शन कराने ले जा रहे थे। रात के 3 बजे पुलिस ने उनकी कार रोक ली। कार नई थी। कागज़ घर पर रह गए थे, लेकिन पुलिस ने चोरी का आरोप लगाकर गाड़ी जब्त कर ली।
मनीष ने विनती की – “गाड़ी ले लो, हमें घर तक छोड़ दो।” लेकिन पुलिस ने पति-पत्नी और नन्हे बच्चे को सुनसान सड़क पर ही अकेला छोड़ दिया।
वीडियो बनाने की कोशिश पर धमकाया भी।
इबादत
सादिक
अब्दुल्ला
साहेब
फैजल
आजम
शब्बीर
इमरान
मुश्ताक और राजिक .
इनका नाम ही इनकी पहचान है और इनकी पहचान ही आज के दौर में इनकी सबसे बड़ी मुसीबत है . इस सबको एमपी पुलिस ने दंगा , आगजनी , मारपीट , घर में जबरन घुसने और विस्फोटक रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था , मध्यप्रदेश पुलिस के मुताबिक ये सारे दंगाई थे लेकिन मध्यप्रदेश की ही अदालत ने इन्हें हिंसा और दंगा के आरोपों से बरी कर दिया है . अदालत ने अपने फैसले में ये भी पूछा है कि पुलिस ने आखिर इन 11 लोगों को किस आधार पर दंगे का आरोपी बनाया ? आज इंडियन एक्सप्रेस ने विस्तार से पूरी रिपोर्ट छापी है .
कोर्ट का ये फैसला एमपी सरकार के मुंह पर तो तमाचा है ही इस बात का भी सबूत है कि कैसे इस देश में मुसलमानों को दंगाई घोषित करके सलाखों के पीछे डाल दिया जाता है .
पूरा वीडियो मेरे यूट्यूब चैनल पर
वाह रे इंदौर की नकली प्लास्टर वाली पुलिस...
इंदौर में दो अपराधियों को किसी संगीन जुर्म में पकड़ा गया. जनता की मांग थी कि इनकी पिटाई की जाए और पब्लिक जुलूस निकाला जाए.
पुलिस और अपराधियों के बीच 20,000 रुपए में सौदा तय हुआ. दोनों अपराधियों के हाथ में नकली प्लास्टर लगा कर लंगड़ाते हुए सड़क पर घुमाया गया. जेल के अंदर ले जाने समय, जेल के गेट पर दोनों अपराधियों ने अपने हाथों में लगी फर्जी पट्टी उतार फेंकी.
किसी ने वीडियो बना लिया इसका. अब इंदौर पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है.
इरफान,
मेरे देश को बहुत ज़रूरत है तुम्हारी और तुम्हारे जैसे बहुत सारे नौजवानों की
तुम्हें अपने आस पास, अपने समाज की चिंता अपनी ख़ुद की परेशानियों से ज़्यादा है
इतनी दिक्कतों के बावजूद तुम्हारा संविधान में अटूट विश्वास हौसला देता है
तुम हिंदुस्तान हो 🇮🇳🇮🇳
इरफान,
मेरे देश को बहुत ज़रूरत है तुम्हारी और तुम्हारे जैसे बहुत सारे नौजवानों की
तुम्हें अपने आस पास, अपने समाज की चिंता अपनी ख़ुद की परेशानियों से ज़्यादा है
इतनी दिक्कतों के बावजूद तुम्हारा संविधान में अटूट विश्वास हौसला देता है
तुम हिंदुस्तान हो 🇮🇳🇮🇳
दिल्ली की झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले इरफ़ान की आवाज़ में दर्द है सुनिए इस कला को जो दिल से निकलती है।
इतना सच्चा इतना असरदार बोलने वाला शायद हमने आज तक नहीं सुना होगा।
आप भी सुनिए और सच बताइए किसी नेता की आवाज़ में इतनी सच्चाई सुनी है आपने?
जिसको सुनते सुनते अंदर आत्मा तक रोने लगे!
शायद नहीं, इतनी तो नहीं।
मगर इरफ़ान की आवाज़ में दर्द है पीड़ा है, साथ ही संविधान की प्रस्तावना पर क्या गज़ब मोनोलॉग है।
Thank you @RajatpandeyJF , @TheLallantop for this masterpiece ❤️
जामिया के कुछ छात्र जंतर मंतर से लौट रहे थे, दिल्ली पुलिस ने उन्हें डिटेन कर लिया और साथ थाने ले जाने लगी, वहाँ से गुज़र रहीं सामाजिक कार्यकर्त्ता ज़ेबा खान और पत्रकार अफ़ज़ल आलम ने हिम्मत दिखाते हुए उन बच्चों को छुड़ाया, और पुलिस से सवाल पूछा कि प्रोटेस्ट में जाना कैसे जुर्म है?
21 मिनिटांचा हा व्हिडिओ वेळ काढून नक्की बघा.
इरफान फक्त अंगणवाडीपर्यंत शिकला. त्यानंतरचं त्याचं विद्यापीठ म्हणजे Google, YouTube आणि स्वतःची जिज्ञासा.
त्याच्या बोलण्यातला अभ्यास, समाज-राजकारणाची समज, भाषेवरची पकड आणि कष्टकरी माणसांविषयीची संवेदनशीलता पाहिली की एक गोष्ट स्पष्ट होते—प्रतिभेला महागड्या पदवीची गरज नसते; संधीची गरज असते.
आणि लल्लनटॉपचा पत्रकार रजत पांडे… त्याने घेतलेली ही मुलाखत म्हणजे केवळ प्रश्नोत्तर नाही, तर एका दुर्लक्षित भारताला आवाज देण्याचा प्रयत्न आहे.
देशाच्या झोपडपट्ट्यांमध्ये, छोट्या गावांत आणि दुर्लक्षित वस्त्यांमध्ये असे कितीतरी इरफान आजही आहेत. प्रश्न त्यांच्या क्षमतेचा नाही, तर त्यांना व्यासपीठ मिळतं का याचा आहे.
मिलिए उस मोहम्मद इरफ़ान से जो अपने जंतर मंतर के उस video से viral हो रहा है, जिसमे वह संविधान की प्रस्तावना को जिस लय में सुना रहा है, वो आसपास वालों को बांध लेती है l
एक टूटे हुए से घर में लोकतांत्रिक मूल्यों को हृदय से लगाकर रखने वाला इरफ़ान संघर्ष कर रहा है l इरफ़ान को बस उसकी प्रतिभा के अनुरूप सही अवसर मिलने की देर है , उसके बाद वह अपना रास्ता बना लेगा l
हिंदी लड़के ने जंतर मंतर वो बात बोली कि कोई
मुसलमान भी नहीं बोल पाता है _
हम तो मौलाना हुसैन अहमद मदनी साहब का मानने
वाला हूं जिसने तोप से उसे जाना मंज़ूर
किया लेकिन अंग्रेज़ हुकूमत के खिलाफ़
फतवा वापस नहीं लिया
और कहा अगर मैं सौ बार भी होता तो सौ बार
कहता अंग्रेजों की हुकूमत में आर्मी की नौकरी
करना हराम है हराम हराम...
#संसद_मार्च
ये डेमोक्रेसी है!😳😲
पुलिस उनकी है, डंडे उनके है, सिस्टम उनका है सब-कुछ उनका है ।
तनख्वाह से पैसा कटता है ना, 100 रुपये कमाती हूं तो 30 रुपये देती हूं ना, फिर क्या होता है उसका, ये होता है।
आप लोग मेरे बच्चों को डंडे मारोगे सिर्फ इसलिए कि वो अपना हक मांग रहे हैं।
अंधभक्त मेघा लावरिया #CJP आंदोलन में प्रदर्शनकारियों को बदनाम करने गयी थी।
मुँह छुपाकर अपना प्रोपोगेंडा वीडियो बना रही थी।
एक लड़की ने इसके दाँत देखकर पहचान लिया फिर दोनों में घमासान हुआ।
काफी बेज्जती हुई है इसकी।
नारायणन ने पूरी ज़िंदगी यही सीखा, यही समझा और यही माना कि मुसलमान उनके दुश्मन हैं। आरएसएस के एक कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने वर्षों तक इसी बात का प्रचार किया और इसी नफ़रत को अपनी पहचान बनाए रखा।
फिर ज़िंदगी का आख़िरी मोड़ आया। मुँह का कैंसर, कमज़ोर होता शरीर और भूख से बेहाल हालत—कोझिकोड की एक दुकान के बरामदे में वे अकेले पड़े मिले।
जब यह ख़बर फैली तो लाखों कार्यकर्ताओं वाले संगठन को भी इसकी जानकारी हुई, लेकिन कोई उन्हें देखने नहीं आया। उनकी दो पत्नियाँ थीं, बच्चे थे, बहन थी—फिर भी कोई साथ देने नहीं पहुँचा।
अस्पताल में उन्होंने अंतिम साँस ली। उनका शव पड़ा रहा। पुलिस ने परिजनों को सूचना दी, लेकिन परिवार ने शव लेने से इनकार कर दिया।
तब इरफ़ाना इक़बाल आगे आईं। वही मुसलमान। वही, जिन्हें "दुश्मन" बताया गया था। उन्होंने अपनी कम्युनिटी के लोगों को साथ जुटाया और हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार नारायणन का अंतिम संस्कार पूरे सम्मान और पूरी गरिमा के साथ कराया।
नारायणन की पूरी ज़िंदगी एक झूठ पर टिकी रही, और उनकी मृत्यु ने उस झूठ को बेनकाब कर दिया। जिस नफ़रत को उन्होंने अपनी ढाल बनाया था, वह आख़िरी समय में उनके किसी काम नहीं आई। और जिस मोहब्बत को उन्होंने दुश्मनी समझा, वही अंत में उनके सबसे ज़्यादा काम आई।
🚨 Breaking:
🇮🇱 Israel: "We are activating our ultimate weapon tonight."
🇮🇷 Tehran: "We have had the blueprint for that 'ultimate weapon' ever since your chief scientist left his laptop in a Dubai hotel room last year. Try something else."
Mossad is in a bad spot.