The essay गौरैया का उन्मीलित सपना
"Der erwachende Traum des Spatzen" by Mohan Rana
published today in "manuskripte issue 252".
The new manuscript number 252 is now available in as a print and e-paper edition from
the magazine website.
#manuskripte
कभी लगता
शायद दो ही
मौसम हों अब से
दो जैसे
अच्छा-बुरा
सुख-दुख
प्रेम और भय
तुम और मैं
*
शायद कोई रंग ही न बचे
किसी सर्दी में
इतनी बारिश के बाद
यह क़मीज़ तब
पानी के रंग की होगी!
*
उसका कोई और रंग होता
तो क्या मैं उसे प्रेम न करता
इसलिए पसंद है नीला रंग क्या!
#मोहन_राणा@Mohan_Rana
कुछ समय पूर्व मेरी एक कविता " कालचक्र"
'रागदिल्ली' की वेबसाइट में प्रकाशित हुई थी।
उसी कविता का अनुवाद/पुर्नसर्जना रूप और एक संक्षिप्त चर्चा से निकली एक विचारणीय टिप्पणी अरूप जी ने अपनी वेब साइट पर प्रकाशित की है। @Kavya_Ras@yogi_chaitanya@vibhuarora
https://t.co/igDmRkEkUC
शब्दों का टीला हम बनाते
भाषा के पथरीले किनारों
एक लंबी चुप्पी
उठेगा उद्वेल मन के समुंदर मे
नमकीन आँखों मे खामोश सीत्कार
उसकी ऊँचाई से हम
देख पायें सच्चाई के आरपार
कुछ उम्मीद
बदलती हुई पहचानो के भूगोल मे
बना पायेंगे एक ठिया;भविष्य की धरोहर
कि संभव है एक इतरजीवन और भी
@Mohan_Rana
कभी-कभी यूँही रुकना फिर ठिक
कर चलना, देखना
आकाश किसी का फिर भी
हवा का मन है तो समुद्र भी
किसी प्रतिबिम्ब में हिलता
~मोहन राणा
@Mohan_Rana
https://t.co/TqxxtWRhv3
मोहन राणा की कविताएँ : शब्द और चित्र - तस्वीरें तो कविताओं के साथ होती ही हैं लेकिन जब तस्वीरें इतनी खूबसूरत हों कि उन पर खासतौर पर कविताएँ लिखी जाएँ तो बात कुछ और ही होती है।
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@yogi_chaitanya@vibhuarora@iccr_colombo@Kavya_Ras@girindranath
कई बरसों बाद एक बार फिर जैसे हमेशा पहली बार कुछ कविताओं का पाठ दिल्ली में आज।
After many years again in Delhi. Will read some poems, Today. Always a first time.
So Many Words About a War That has Passed : Translated and transcreated from Mohan Rana’s poems, “Cheenti” (“Ant”) and “Teesra Yuddha” (“The Third War”) from Hindi by : Arup K. Chatterjee
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@Avinash_1_Kumar@iccr_bangkok@vibhuarora@Kavya_Ras