Sex is not just a fun.. It is sexercise that keeps you fit and look beautiful and a great remedy for many ailments @teluguammai27 @AmaravatiAunty @Suseela_42 @PushpaSnigdha@Shilparadha417
💋 Kissing is a merging of two lips, two souls, two spirits that make them Divine.
💋 “నీ ముద్దులో దాగిన ప్రేమను మాటల్లో చెప్పలేను… అనుభూతి చెందగలను.” 💕
“నీ పెదవులపై చిరునవ్వు, నా హృదయంలో ప్రేమ… ఆ క్షణమే ప్రత్యేకం.” ✨
#ShobithaDhulipala#Shobitha
इस्लाम की शहजादी
या इस्लामिक आतंकवादी ??
"पहले चोरी, फिर सीनाजोरी"
मोहतरमा का गुस्सा इतना कि बाइक भी दुश्मन बन गई... ?
अब्दुल हो सलमा सबका एक ही Taget ह��,
"👉 काफिर "
काफिर है कि इनका Agenda समझने को तैयार नहीं है,
सेकुलरिज्म में अंधे काफिर को भाईचारा निभाना है ।
वीडियो में साफ साफ देख सकते हैं कि पहले मदरसा छाप, बुर्काधारी, जाहिल मुस्लिम महिला बाईक तोड़कर किस प्रकार बाईक मालिक को ही धमका रही है ।
बाईक मालिक ने वीडियो नहीं बनाई होती तो क्या होता.... ?
यह मुस्लिम महिला अपने घरवालों को फोन कर बुलाती और इस बाईक वाले पर छेडख़ानी का आरोप लगाती, फिर इसे पीटा जाता,
दो चार सेकुलर हिन्दू भी बिना सच जाने इस युवक को कूटकर पुलिस के हवाले कर देते ।
वीडियो में बाइक तोड़ने का यह अंदाज़ देखकर सवाल उठना लाज़मी है
मजहब के नाम पर कट्टरता का चलेग�� या कानून चलेगा... ??
कानून के सामने सब बराबर ! 😳😏
कानून हाथ में लेने वालों के लिए संदेश साफ है—
पत्थर हो या डंडा, जवाब कानून देगा! ⚖️🇮🇳
मैं चाहता हूँ ! जब भी मै तुम्हारे पास आऊँ...तुम सयन कक्ष में अपने खुले केशो को मध्यम से बांध रही हो...और जब मैं तुम्हारे बिल्कुल पास आऊँ तो...तुम्हारे केश खुल जाए तुम्हारी सारी मर्यादाये छूट जाए और...तुम मुझमें ऐसे विलीन हो जाओ जैसे... आत्मा में परमात्मा...🍁💮
Atal Ji sits quietly. Advani Ji is arguing.
> Giridhar Gamang had just become CM of Odisha.
Congress moved a No-confidence motion against Atal Govt in Delhi.
Govt fell by 1 vote. That decisive vote was cast by Giridhar Gamang himself 🤯
Even as a sitting Chief Minister, he came to the Lok Sabha & voted as an MP to pull down the Government 💔
One engineered vote.
Atalji had to resign.
Today Rahul Gandhi & the opposition cry about BJP’s political methods.
This is precisely why Amit Shah is ruthless.
> He makes them CRY for every MP, every MLA, and even every corporator.
The same forces that once toppled Atalji with a single calculated vote are now facing a BJP that has learnt the lesson thoroughly.
FAIR ENOUGH?
August 16, 1946. Direct Action Day.
Survivor of Direct Action Day and Noakhali massacre, Rabindranath Dutta (92) recalls how naked, butchered bodies of Hindu women were hung from hooks at Raja Bazar beef shops.
Victoria College girls were raped, killed and their bodies tied to hostel windows.
Rabindranath Dutta told me how he stood watching heaps of slaughtered Hindu bodies during 1946 Noakhali pogrom, pools of blood around his heels.
Most women's bodies had breasts missing, just black bite marks at those places and their genitals.
It is hard to even listen to his accounts.
After his wife died, Rabindranath Dutta sold her ornaments to self-publish 12-13 books on Direct Action Day, Noakhali massacre, and 1971 genocide. First-hand experiences, rare research.
He says nobody in Bengal gave a damn...no politician, media, publisher, activist, or filmmaker.
We Hindus seem to have learnt no lesson from history.
Pamela Hicks (Daughter of Edwina Mountbatten) confesses how her mother used her influence on Nehru to take the Kashmir issue to UN and stall it forever. She also explains how her Father Lord Mountbatten manipulated Nehru using this relationship.
Ghante ka foreign policy.
नेहरू की विदेश नीति का नायाब नमूना थीं उनकी “अनपढ़” बहन विजयलक्ष्मी पंडित
विदेश नीति से नेहरू-गांधी परिवार का पुराना नाता है... नेहरू से लेकर राहुल-प्रियंका तक... सब खुद को विदेश नीति का ��क्सपर्ट समझते हैं... कई बार तो ऐसा लगता है कि नेहरू-गांधी परिवार के बच्चे स्कूल में एडमिशन नहीं लेते… बल्कि वो सीधे यूनाइटेड नेशन्स में पढ़ने चले जाते हैं... जहां वो A फॉर America… B फॉर Britain और C फॉर China सीखते हैं... नेहरू की ‘अनपढ़’ बहन विजय लक्ष्मी पंडित भी ऐसी ही हाईली टैलेंटेड थीं...
जिसे नेहरू ने सोवियत संघ, अमेरिका और ब्रिटेन में भारत का राजदूत / हाई कमिश्नर बनाया... वो “अनपढ़” बहन जिसने कॉलेज तो छोड़िये, स्कूल का भी मुंह नहीं देखा था, फिर भी उसे यूपी में मंत्री बनाया, महाराष्ट्र का राज्यपाल बनाया और सांसद भी बनाया !!! इस “अनपढ़” बहन को 8 करोड़ लाशों पर खड़ा चीन का तानाशाह माओ-त्से-तुंग अहिंसा के पुजारी गांधी की तरह लगता था!!! वो “अनपढ़” बहन जिसने भारत को सुरक्ष�� परिषद की स्थायी सीट मिलने में अडंगा डाला !!!
ये कहानी ज़रा लंबी है, लेकिन सुनना बहुत ज़रूरी है। वो इसलिए क्योंकि जब इस देश में अनपढ़ नेताओं, नेताओं की फर्जी डिग्री और न जाने क्या-क्या चर्चा चल रही है तो आपको पता होना चाहिए कि परिवारवाद का वो काला सच जिसमें एक अनपढ़ इंसान सारी ऊंचाइयां पा लेता है, क्योंकि उसका जन्म आनंद भवन में हुआ था। जवाहरलाल नेहरू की छोटी बहन विजयलक्ष्मी पंडित बचपन में कभी स्कूल नहीं गईं... घर में ही इन्हें एक अंग्रेज़ आया (केयर टेकर) जेन हूपर ने इन्हें अक्षर ज्ञान और थोड़ी बहुत शिक्षा दे दी। आप कहेंगे कि इसमें बुराई क्या है... ठीक बात है पहले कई लोग घर में ही शुरुआती शिक्षा लेते थे, लेकिन वो उसके बाद कॉलेज और यूनिवर्सिटी भी जाते थे... लेकिन विजयलक्ष्मी ने कभी कॉलेज और यूनिवर्सिटी का मुंह नहीं देखा... वैसे भी जब आप नेहरू खानदान के चश्मों चिराग हो तो फिर किसी डिग्री की क्या ज़रूरत है? अब इनका करियर ग्राफ और इनके कारनामे देखिये –
सोवियत संघ (वर्तमान रूस) में भारत की प्रथम राजदूत
1947 में जब भारत आज़ाद हुआ तो नेहरू ने अपनी बहन विजय लक्ष्मी पंडित को भारत का राजदूत बना कर भेज दिया। ये 1949 तक इस पद पर रहीं और बेहद नाकाम साबित हुईं। तानाशाह स्टालिन पूरे दो साल तक नेहरू की इस अनपढ़ बहन से नहीं मिला। भारत और सोवियत संघ के संबंधों का ये सबसे ठंडा दौर था। मास्को में रहने के दौरान इनकी वजह से भारत को काफी बदनामी झेलनी पड़ी। आरोप है कि इन्होंने अपने सरकारी घर के लिये मास्को के बजाय स्वीडन के स्टॉकहोम से महंगा फर्नीचर खरीदा। जिस पर सोवियत संघ सरकार ने आपत्ति जताई। ���ांधी ने भी विजय लक्ष्मी पंडित की इस फिजूलखर्ची पर आलोचना की थी, इस पर नेहरू को सफाई देनी पड़ी।
अमेरिका में भारत की राजदूत
जब विजय लक्ष्मी पंडित की दाल स्टालिन के सामने नहीं गली तो इन्हें इनके जवाहर भैया ने 1949 में वाशिंगटन में भारत का राजदूत बना कर भेज दिया। यहां भी इन्होंने बंटाधार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अमेरिका और ब्रिटेन चाहते थे कि संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में चीन की बजाय ��ारत को स्थायी सीट दी जाये... इस प्रस्ताव की जानकारी जब विजयलक्ष्मी को मिली तो उन्होंने अपने भाई प्रधानमंत्री नेहरु को 24 अगस्त 1949 को एक पत्र और बताया कि – अमेरिकी विदेश मंत्रालय में भारत को सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट मिलने की चर्चा चल रही और भारत के पक्ष में माहौल बनाया जा रहा है। लेकिन मैंने सलाह दी है कि इस मामले में धीमे चलें क्योंकि भारत इसे पसंद नहीं करेगा।
जवाब में पंडित नेहरू ने अपनी बहन को लिखा कि - हम चीन के ब��ले ये जगह नहीं ले सकते। ये बुरी बात होगी। ये चीन का अपमान होगा। हमारे चीन से संबंध बिगड़ जाएंगे। हम यही प्रयास करेंगे कि चीन को स्थायी सदस्यता मिले। ... मतलब भारत के हाथ में इतना बड़ा मौका आ रहा था और भाई-बहन की इस जोड़ी ने इसे ठुकरा दिया।
(नोट – किसी को ये शक है कि ऐसा नहीं हुआ था, तो भैया-बहिन के ये सारे पत्र "नेहरू म्यूज़ियम एंड लाइब्रेरी"... यानी "प्राइम मिनिस्टर म्यूज़ियम एंड लाइब्रेरी" में Vijaya Lakshmi Pandit Papers, 1st Installment - Pandit 1, File No. 59 में पड़े हुए हैं। तीन मूर्ति भवन में जाकर चेक कर लेना।)
'अनपढ़' बहन को फिर चीन भेजा
नेहरू ने चीन के तानाशाह माओ त्से तुंग और चाऊ एन लाइ का मन टटोलने के लिए 1952 में अपनी लाड़ली बहन विजयलक्ष्मी पंडित को बीजिंग भेजा। इस यात्रा में क्या हुआ इसका संपूर्ण वर्णन लिबरू गैंग के प्रिय वामपंथी इतिहासकार कॉमरेड रामचंद्र गुहा ने अपनी पुस्तक "भारत – गांधी के बाद" के पेज नंबर 212 पर लिखत��� हैं – विजय लक्ष्मी पंडित ने अपने भाई नेहरू को पत्र में लिखा कि -
"माओ बहुत कम बोलते हैं लेकिन उनमें गज़ब का सेंस ऑफ ह्यूमर है। जब वो जनता के बीच होते हैं तो वो गांधी की तरह लगते हैं। महात्मा गांधी की तरह जनता न केवल उनकी प्रशंसा करती है बल्कि उनकी पूजा करती है। उन्हे देखना बड़ा ही भावनात्मक पल है।" वाह... 8 करोड़ इंसानी लाशों पर खड़ा चीन का ये शैतान ��ानाशाह माओ-त्से-तुंग इस अनपढ़ बहन को गांधी की तरह दिख रहा था।
अब देखिए नेहरू की ये लाडली बहन चीन के एक और नेता चाउ एन लाई के लिए क्या लिखती है... विजय लक्ष्मी का ये पत्र भी कॉमरेड रामचंद्र गुहा ने अपनी पुस्तक में छापा है, अनपढ़ बहन लिखती है -
“चाउ एन लाई लोगों को हंसने पर मजबूर कर देते हैं और खुद भी अक्सर हंसते रहते हैं। हम लोगों ने बेहतरीन शराब पी और स्वादिष्ट खाना खाया। वो आगे लिखती हैं कि मास्को की तरह यहां लोगों पर अत्याचार नहीं किया जा रहा और चीन में हर आदमी खुश लगता है।”
चीन में आठ करोड़ लोग मार दिये गये और इस अनपढ़ महिला को सब खुश दिख रहे थे। नेहरू ने विजयलक्ष्मी पंडित की सलाह पर अमल किया और चीन से दोस्ती की राह पर आगे चल निकले और बाद में इसी माओ और चाऊ की जोड़ ने 1962 में भारत की पीठ पर खंजर भोंक दिया। तो ये था परिवारवाद का दंश... ये था अनपढ़ों के हाथ में शक्ति देने का पाप !!!
#Nehru #Congress #Rahul_Gandhi #Italy
I have been asked many times on my various posts as to why so many in Bengal got converted to Islam.
I have tried explaining that in my video.
In Bengal it was mostly the Buddhists that got converted to Islam, especially in the eastern Bengal part (now Bangladesh). After losing royal patronage with the end of the Pala dynasty, the Buddhists initially thought that the foreign Muslim invaders came as saviours, and would help them remove the Sena dynasty and establish Buddhist rule. When that didn’t happen, they quickly converted to Islam under persecution. The tribal communities, also largely in the eastern Bengal area, converted to Islam to save themselves from being exterminated. Rest are Hindus from lower socio-economic status, who couldn’t handle the pressure of heavy taxation, and converted hoping for a reprieve.
The Sufis also played an important role in Bengal conversions.
To know more, do listen to the video.
���విడ పేరు #ఫరియాఅబ్దుల్లా ( సినిమా నటి) భాగ్యనగర్
లాల్ ధర్వాజ మహంకాళి అమ్మవారి బోనాలజాతర సమయంలో అక్కడ సందడి చేయడం తెలిసిందే.
ఆ సమయంలో తెలంగాణ సాంప్రదాయాల గురించి మాట్లాడుతూ భావోద్వేగానికి లోనై దృశ్యాలు ఇప్పుడు సామాజిక మాధ్యమాలలో ఆశ్చర్యం చెందుతున్నాయి.
‘TG కల్చర్ అంటే ఇలాగే ఉంటుంది. అందరినీ యాక్సెప్ట్ చేసి కలిసి ఉంటారు. అదే బెస్ట్' అంటూ ఏడ్చేశారు.
కాగా అన్ని మతాల్లోని మంచిన�� స్వీకరించి, మానవత్వంతో బతకాలని తన పేరెంట్స్ నేర్పించారని ఆమె గతంలో కూడా చెప్పారు.
తెలంగాణ సంస్కృతి, సాంప్రదాయాలను, దేశంలోనే కాదు ప్రపంచంలో ప్రతి ఒక్కరూ ఆదరిస్తారు, అదే ఇక్కడ విశిష్టత. 🥰
A 17th-cent. traveler, John Thévenot saw that many scavengers in Oudh were Brahmins who had been forced into this occupation under Muslim rule as a form humiliation.
A proper census could establish this.
But no such census will ever take place because that would bust their entire atrocity narrative