जब भी कोई आंदोलन होता है तब वामपंथी दल SFI और आइसा वाले संविधान की प्रति लेकर सबसे पहले पहुंचते हैं
लेकिन यह खुद कितने बड़े दोगले हैं सोचिए
यह 2020 का वीडियो है जब केरल में इन वामपंथी दलों की सरकार थी
यह महिला एमसी जोसेफिन केरल राज्य महिला आयोग की चेयरमैन है जिसे केरल में कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला है
यह कह रही है कम्युनिस्ट पार्टी ही कोर्ट है और सारे कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ता पुलिस है, केरल में कम्युनिस्ट पार्टी जो फैसला देगी वह कोर्ट का फैसला माना जाएगा और हमारे कार्यकर्ता किसी भी क्रिमिनल केस की जांच करके जो कहेंगे वह पुलिस की जांच रिपोर्ट मानी जाएगी
आज जब मैंने इस एमसी जोसेफिन का बयान देखा तब सोच रहा था सभी हिंदी चैनलों पर नेशनल मीडिया पर इस महिला का बयान दिखाया जाएगा रवीश कुमार खूब बड़ा पोस्ट लिखेंगे
लेकिन एकदम सन्नाटा है यदि बीजेपी का एक सरपंच भी ऐसा बयान दिया होता तब आज सारे नेशनल मीडिया में डिबेट चल रही होती कि मोदी तो तानाशाह है मोदी तो हिटलर है मोदी को ना कोर्ट में भरोसा है मोदी को ना अदालत पर भरोसा है पुलिस में भरोसा है
मियां साहब बौखलाये कहा मुसलमानों के बाप का देश है इसलिए रोड पर नमाज पढ़ेंगे ...
देख रहे हो सनातनियों अब शांतिदूत खुद हिंदू
को अपना अब्बू मानने लगे हे समझ रहे हो न ..?