क्रिकेटर मोहम्मद शमी से बड़ा अंधभक्त आज तक नहीं देखा ,
टाइम्स नाउ नवभारत की पत्रकार रुबिका लियाक़त ने मोहम्मद शमी का इंटरव्यू लिया जिसमे उन्होंने कावड़ यात्रा को लेकर बड़ा बयान दे दिया ,
मोहम्मद शमी से पूछा पूछा गया आप कावड़ को कैसे देखते है , आपके यहाँ से कावड़ बहुत निकलती है , इस पर मोहम्मद शमी ने जवाब दिया हाँ हमारे यहाँ से कावड़ यात्रा बहुत निकलती है इसमें कभी किसी मुसलमान को कोई एतराज नहीं , एक सड़क कावड़ वालो के लिये रिजर्व कर दी हमें कोई एतराज नहीं ,
इसके बाद मोहम्मद शमी ने जमकर योगी आदित्यनाथ की तारीफ की , मोहम्मद शमी ने कहा योगी आदित्यनाथ बहुत अच्छा काम कर रहे है , उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद यूपी में अपराध कम हो गया , स्कूलों की हालात सही हो गयी , योगी जी यूपी का विकास कर रहे है ,
मोहम्मद शमी इतने बड़े क्रिकेटर है लेकिन उनको इस बात की नॉलेज नहीं है की विकास और अच्छा काम क्या होता है ,
यूपी सरकार में धर्म के आधार पर भेदभाव किया जा रहा है , एक तरफ कावड़ यात्रा के लिये सड़क बंद कर दी जाती है तो दूसरी तरफ मुसलमानो को चेतावनी दी जाती है की कोई भी सड़क पर नमाज नहीं पड़ेगा , जबकि मुसलमानो के 2 ही त्यौहार है और मस्जिद या ईदगाह में जगह की कमी की वजह से लोगो को ईद की नमाज पढ़ने में दिक्कत होती हैं ,
मुसलमान कभी शोक में सड़क पर नमाज नहीं पढ़ता , नमाज पढ़ने की वजह सिर्फ जगह कम होना है , लेकिन मुसलमानो को बोला जाता है आप एक ईदगाह में 2 शिफ्ट में नमाज़ पढ़े , क्या मोहम्मद शमी को नहीं दिखता कि ये नियम भेदभाव वाला नहीं है ,
मोहम्मद शमी कहते है यूपी में स्कूलों की हालत अच्छी हुई है , अपराध कम हुए है लेकिन मोहम्मद शमी अंधभक्ति में आकड़ा देखना भूल गए है , यूपी में पिछले कई सालो में हजारों स्कूल बंद हुए है , या मर्ज हुए है , अपराध की बात करे तो NCRB की रिपोर्ट तो कहती अपराध में यूपी नम्बर 1 है , कई घरो , दुकानों को बुलडोजर से खत्म कर दिया विकास के नाम पर लेकिन ये विकास नहीं बल्कि ये आम नागरिकों का सत्यानाश कर रहे है ,
स्कूल बंद होना तो छोटी बात है , यूपी सरकार तो देश की एक बड़ी जौहर यूनिवर्सिटी को बुलडोजर से गिराने वाली थी लेकिन हद से ज़्यादा विरोध की वजह से ये फैसला टाल दिया गया ,
मोहम्मद शमी कुछ तो शर्म करो ,
हिन्दुओ के महान संरक्षक ...
महाराजाधिराज मुग़लकुल शिरोमणि प. पू औरंगजेब जी आलमगीर पर हम आपका ज्ञान वर्धन करेंगे।
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औरंगजेब एक धर्मपरायण शासक थे।
वे औघड़ दानी थे, और हिन्दू धर्म से विशेष लगाव था। जिसके प्रसार और सुरक्षा के लिए अनेक कार्य किये, जिसमे हिंदू मंदिरों, मठों और पूजारियों को भी दान देना शामिल है।
- गौहाटी के उमानंद मंदिर को पहले से मिले भूमि अनुदान को औरंगजेब ने एक फरमान जारी कर पक्का किया।
- 1680 और 1687 में बनारस के दो संतों भगवंत गोसाई और रामजीवन गोसाई को औरंगजेब ने बनारस के घाट पर घर बनाने के लिए जगह उपलब्ध करवायी।
- 1691 में औरंगजेब ने चित्रकूट के महंत बालकदास निर्वाणी को आठ गांव और कर मुक्त जमीन उपलब्ध करवाया ताकि वे बालाजी मंदिर की देखभाल कर सकें।
- इसी तरह शैव मठों को भी दान दिया गया। बोधगया स्थित शैव मठ, जिसकी स्थापना 16 वीं सदी में हुई थी, उसे भी मस्तीपुर और तारीडीह की जमीन अनुदान में औरंगजेब के समय में मिली।
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औरगंजेब जैन धर्म मतावलंबियों का भी विशेष ख्याल रखते थे। इसलिए जैन तीर्थस्थलों को भी जमीन अनुदान में दिया।
इसमें गिरनार और मांउट आबू के जैन तीर्थ स्थल प्रमुख हैं। आजकल कुछ हरे-रामजादे क़िस्म के जैन, जो महावीर के मार्ग को धता बताकर,टनाटनी हिन्दू बनने को कूद रहे है,
वे दरअसल विकट किस्म के अहसान फरामोश है। वे औरंगजेब के न हुए, संघियो के क्या ही होंगे।
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बहरहाल, औरंगजेब की नीति मंदिर, मठों और दान करने के हिन्दू तुष्टिकरण तक सीमित नही थी।
उन्होंने हिन्दू लड़को की बेरोजगारी घटाने के लिए ठोस कार्य किये। दरअसल सल्तनत काल मे जहां हिन्दुओ को सरकारी नौकरी नहीं मिलती थी, वहीं औरंगजेब के दौर में इनकी संख्या बढ़ती गई।
1679 से 1707 के बीच औरंगजेब के कार्यकाल में, मुगल प्रशासन में हिंदू अधिकारियों की संख्या 50 प्रतिशत तक पहुंच गई।
औरंगजेब के अंतिम वर्षों में उसके दरबार में हिंदू कुलीनों (nobles )की संख्या 31 प्रतिशत तक पहुंच गई थी जो अकबर के समय में 22 प्रतिशत के करीब थी।
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सत्ता हासिल करने के बाद सम्राट औरंगजेब ने, एक हिन्दू राजा रघुनाथ को वित्त मंत्री नियुक्त किया। राजा रघुनाथ शाहजहां के कार्यकाल में भी वित्त मंत्री थे।
राजा रघुनाथ हालांकि कुछ साल ही औरंगजेब के साथ रहे और उनकी मौत हो गई, लेकिन औरंगजेब रघुनाथ का अंत तक कायल रहे।
रघुनाथ के काम से औरंगजेब इतना खुश थे कि उन्हें राजा की उपाधि दी, और मनसब का रैंक बढ़ा कर 2500 किया। फ्रेंच यात्री बर्नियर ने औरंगजेब के दरबार में राजा रघुनाथ के रूतबे का उल्लेख किया है।
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हिन्दुओ से औरंगजेब को की मोहब्बत का ये दरअसल यह पुराना रिश्ता था।
हुआ यह था कि जब शाहजहां के कार्यकाल में मुग़ल गद्दी को कब्जाने के लिए उसके पुत्रों के बीच उत्तराधिकार की लड़ाई हुई।
तब औरंगजेब के पक्ष में 21 हिंदू कुलीन (nobles)थे। दारा शिकोह के पक्ष में 24 हिंदू कुलीन थे। परन्तु ज्यादातर अफगान औऱ तुर्की सरदार दारा शिकोह के साथ थे।
उत्तराधिकार की लड़ाई में औरंगजेब को मुसलमान सरदारों की तुलना में हिंदू कुलीनों का से अधिक प्यार और समर्थन मिला, जिसे वे उम्र भर नही भूले।
अतएव जीवन भर उनका ख्याल रखा। कभी उनपर बुलडोजर न चलाया, बेजा जेल न भेजा। प्रजा प्रजा में भेद न किया।
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औरंगजेब ने कभी शासकीय कोष से प्लेन न खरीदा, सूट न लिए, और मशरूम भी खरीदकर न खाया।
18-18 घण्टे राज्य का कार्य करने के बाद वह अपने लिए वह कुरान की प्रतिलिपि करता, और टोपियां सीता। इससे मिलने वाले मूल्य से अपना पेट भरता।
याने उसके बराबर का ईमानदार शासक वस्तुतः मिलना बड़ा कठिन है। ऐसे में अगर उसके वंशज, किसी का हक मारे बगैर, रिक्शा चलाकर अपना पेट भरते हैं, तो वे लोग, सचमुच औरंगजेब की ईमान की विरासत आज भी बनाये हुए है।
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पर जब माननीय योगी जी के मुखारवृन्द यह सूचना प्राप्त हुई, वे सच ही बता रहे होंगे।
औरंगजेब के वे रिक्शा चालक वंशज, सलाम के काबिल है। वे लोग आम भोले भाले इंसानो की धार्मिक भावनाओ का दोहन कर, महलो में ऐश कर रहे महंतो- बाबियों- बाबाओ से, लाख लाख गुना बेहतर इंसान हैं।
तो हिन्दुओ के महान संरक्षक .. महाराजाधिराज मुग़लकुल शिरोमणि प. पू औरंगजेब जी आलमगीर का इकबाल बुलन्द रहे।
अलख निरंजन।
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The surviving children will carry the scars of trauma and painful memories for a lifetime, a lasting impact of the brutality and Genocide in Gaza by Zionists.
#Gaza