राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह भगवान भरोसे चल रही है। अब अस्पतालों से जो खबरें सामने आ रही हैं, वे बेहद शर्मनाक और चिंताजनक हैं।
अजमेर के जेएलएन अस्पताल में एक ही मरीज के नाम पर 39 एक्स-रे दर्ज करने और प्रदेश के मुख्यमंत्री के गृह जिले भरतपुर के आरबीएम अस्पताल में शव ले जाने के नाम पर अवैध वसूली जैसे मामले यह साबित करते हैं कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में भ्रष्टाचार और अव्यवस्था चरम पर है।
मैं प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp से पूछना चाहत हूं कि इन तमाम हालातों के बावजूद आप राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री की जिम्मेदारी तय क्यों नहीं कर रहे है ?
यदि सरकारी अस्पतालों में मरीजों के इलाज से लेकर मोर्चरी तक भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है, तो यह स्वास्थ्य मंत्री के साथ सरकार की कार्यप्रणाली की गंभीर विफलता है।
@MoHFW_INDIA@RajCMO
नागौर जिले के जायल क्षेत्र की बेटी भारती डोडवाड़िया की जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के शिवदासपुरा थाना क्षेत्र में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु बेहद दु:खद और चिंताजनक है।
सबसे गंभीर बात यह है कि घटना के बाद कल से जयपुर पुलिस द्वारा पीड़ित परिवार का मुकदमा दर्ज नहीं किया जा रहा है।
मैं राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp से पूछना चाहता हूं कि क्या पीड़ित परिवार की एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी करना और उन पर जबरन पोस्टमार्टम का दबाव बनाना ही सरकार की नीति बन गई है ?
मैंने इस मामले को लेकर सरकार व पुलिस के उच्च अधिकारियों से दूरभाष पर बात कर तत्काल मुकदमा दर्ज करने, पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच करवाने को कहा है |
@RajCMO@PoliceRajasthan
खींवसर थाने में लाल तौलिया लपेटकर ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मी का वायरल वीडियो कई सवाल खड़े करता है।
जब वर्दी की गरिमा से अधिक रौब दिखाने की संस्कृति हावी हो जाए और फरियाद लेकर आए दलित परिवादियों को न्याय के बजाय धमकियां मिलें, तो कानून पर जनता का भरोसा कैसे कायम रहेगा?
राजस्थान सरकार को इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
#हाल_ए_नागौर_पुलिस @RajCMO@PoliceRajasthan@RajPoliceHelp@IgpAjmer
बिना पुलिस कप्तान वाले नागौर जिले के अधिकतर पुलिस थानों में हालात चिंताजनक बने हुए है | सोशल मीडिया पर यह वायरल वीडियो खींवसर पुलिस थाने का है जहां एक पुलिसकर्मी द्वारा दलित परिवादियों के साथ अभद्र व्यवहार किया जा रहा है और उनकी पीड़ा को बिना सुने धमकाकर थाने से बाहर भेजा जा रहा है।
खींवसर थाने में लंबे समय से पदस्थापित और ड्यूटी पर थाने में लाल तोलिया लपेटकर खड़े इस पुलिस कार्मिक का यह रवैया आमजन के न्याय के अधिकार और @NagaurPolice की व्यवस्था ,दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मैं राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp
से पूछना चाहता हूं कि जब पुलिस थाना आमजन को सुरक्षा और न्याय का भरोसा देने का स्थान है तो वहां आम जन को भय और अपमान क्यों मिल रहा है ?
अगर जनता अपनी फरियाद लेकर थाने जाएगी और उसे न्याय की जगह धमकियां मिलेंगी, तो फिर कानून पर भरोसा कैसे कायम रहेगा ?
@RajCMO@PoliceRajasthan
#हाल_ए_नागौर_पुलिस
जोधपुर शहर के एक निजी अस्पताल में
फलोदी जिले के कलाऊ गांव के निवासी श्री संतोष पूरी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु अत्यंत पीड़ादायक एवं चिंताजनक है।
यदि अस्पताल प्रशासन दिवंगत के परिजनों को मृत्यु के कारणों के संबंध में स्पष्ट जानकारी देने से बच रहा है, तो यह गंभीर विषय है।
मैं @RajGovOfficial एवं जिला प्रशासन से मांग करता हूँ कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही या दोष सामने आता है तो जिम्मेदारों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा मौके पर आंदोलित परिजनों के साथ वार्ता की जाए |
इस दुःख की घड़ी में मेरी गहरी संवेदनाएँ शोकाकुल परिवार के साथ हैं।
@RajCMO
नागौर के सरकारी अस्पताल में कथित लापरवाही से खींवसर क्षेत्र की एक दलित प्रसूता की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था, पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर आंदोलन हुआ और आंदोलन के बार प्रशासन के साथ समझौता भी हुआ, लेकिन समझौते के बाद आंदोलन में शामिल राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के कार्यकर्ताओं पर पुलिस द्वारा मुकदमे दर्ज करना BJP सरकार की नियत और नीति पर कई सवाल खड़े करता है | मैं राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp से पूछना चाहता हूं कि अगर न्याय की आवाज़ उठाने वालों पर ही कार्रवाई होगी, तो फिर आम आदमी अपनी पीड़ा किसके सामने रखेगा? क्या यही लोकतंत्र है कि पहले समझौता और फिर सत्ता के इशारे पर मुकदमे ?
@RajGovOfficial और पुलिस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उनका उद्देश्य न्याय दिलाना है या न्याय मांगने वालों को मुकदमों के नाम पर परेशान करना ?
एक तरफ सरकार दलितों के संरक्षण की बात करती है दूसरी तरफ एक दलित महिला जिसने एक नवजात को जन्म देते हुए सिस्टम की लापरवाही के कारण दम तोड़ दिया,उसके परिजनों को न्याय दिलवाने के लिए आवाज उठाने वाले लोगों पर ही मुकदमा दर्ज कर लिया जाता है जो पूर्ण रूप से अनुचित व संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ है |
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी परिवार के सदस्य ऐसे मुकदमों से डरने वाले नहीं है और प्रदेश में जहां भी अन्याय होगा ,वहां हम अन्याय के खिलाफ मजबूती से लड़ेंगे |
सरकार के ऐसे हथकंडों का जनता समय आने पर करारा जवाब देगी |
@RajCMO@RLPINDIAorg
इस खबर को पूरी तरह दबाने की कोशिश की गई। कुछ Instagram इन्फ्लुएंसर्स ने हिम्मत दिखाकर वीडियो बनाए, लेकिन आरोप हैं कि उनके वीडियो तक हटवा दिए गए। राजस्थान का बड़ा मीडिया भी लंबे समय तक चुप्पी साधे बैठा रहा।
लेकिन RLP के योद्धा नहीं रुके। एक-एक कार्यकर्ता ने सोशल मीडिया पर इस बहन की आवाज़ को बुलंद किया, सरकार से सवाल पूछे और इस मुद्दे को दबने नहीं दिया। आखिरकार वही सच आज राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियां बना।
सच्चाई का साथ देने वाले RLP के हर योद्धा को दिल से सलाम। आपने साबित कर दिया कि अगर जनता की लड़ाई ईमानदारी से लड़ी जाए, तो कितनी भी ताकतवर सरकार सच को हमेशा के लिए नहीं दबा सकती। यह सिर्फ एक बहन की लड़ाई नहीं, अन्याय के खिलाफ पूरे राजस्थान की आवाज़ है।
ये कैसी सरकार है राजस्थान में......?
एक तो महिला झुलस जाती है लेकिन उसके बाद सरकार मदद करने के बजाय मामले को दबाने का प्रयास करती है....
FIR तक नहीं करने देती और समझौते का दबाव बनाती है....
वीडियो वायरल हो जाता है तो सरकार उस वीडियो को हटा देती है......
आदरणीय प्रधानमंत्री @narendramodi जी और ग्रहमंत्री @AmitShah जी बचा लीजिये राजस्थान को....किसी समझदार व्यक्ति के हाथ में नेतृत्व दे दो..... @hanumanbeniwal
मैंने पूर्व में भी कहा था और आज पुनः दोहरा रहा हूँ कि यदि राजस्थान के मुख्यमंत्री का काफिला निकलने के कारण किसी आमजन का ठेला पलट जाए और एक बेटी खौलते पानी से गंभीर रूप से झुलस जाए, तो यह किसी भी संवेदनशील शासन के लिए गंभीर चिंतन का विषय होना चाहिए। दुर्भाग्यवश, मुख्यमंत्री स्वयं इस मामले में संवेदनहीन दिखाई दे रहे है। चूँकि यह मामला मुख्यमंत्री के काफिले से जुड़ा है, ऐसे में यदि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा में थोड़ी भी नैतिक संवेदनशीलता होती, तो वे गंभीर रूप से झुलसी उस बेटी की सुध लेते तथा उसके समुचित उपचार की व्यवस्था करवाते। किंतु सत्ता के अहंकार में डूबी सरकार को मानवीय मूल्यों और संवेदनाओं का शायद एहसास ही नहीं है।
जाँच के नाम पर मात्र खानापूर्ति कर मामले को दबाने का प्रयास करने के बजाय दोषी पुलिस अधिकारियों एवं कार्मिकों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए थी तथा पीड़ित बेटी के उपचार स्वयं मुख्यमंत्री को करवाना चाहिए था किंतु जिनकी सोच और कार्यशैली में ही संवेदनहीनता व्याप्त हो, उनसे पीड़ितों के दर्द और जनता की भावनाओं को समझने की अपेक्षा करना कठिन प्रतीत होता है।
@BhajanlalBjp@RajCMO
मुख्यमंत्री जी अक्सर कहते हैं कि वे आम जनता को बेवजह परेशान नहीं होने देंगे। लेकिन अगर ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, वीआईपी मूवमेंट के दौरान एक आम युवती गंभीर रूप से झुलस जाती है, तो क्या यही आम आदमी के प्रति संवेदनशीलता है?
@hanumanbeniwal#राजस्थान_में_आपातकाल@BhajanlalBjp