ऊर्जा मंत्री के निर्देश के अनुसार मार्च 2023 के आंदोलन से संबंधित सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस लेने की मांग : संघर्ष समिति ने पावर कॉरपोरेशन अध्यक्ष को सौंपा ज्ञापन: ऊर्जा मंत्री के निर्देशों का तीन वर्ष बाद भी पालन न होना चिंताजनक : उत्पीड़न समाप्त कर ऊर्जा निगमों में स्वस्थ कार्य वातावरण बनाया जाए
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल को ज्ञापन सौंपकर मार्च 2023 के आंदोलन के फलस्वरूप बिजली कर्मियों के विरुद्ध की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को तत्काल वापस लेने की मांग की। संघर्ष समिति ने कहा कि ऊर्जा निगमों में सकारात्मक एवं सहयोगात्मक कार्य वातावरण स्थापित करने के लिए यह आवश्यक है कि सभी लंबित दंडात्मक कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए।
संघर्ष समिति ने गहरा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि मार्च 2023 के आंदोलन से संबंधित मामलों को समाप्त करने के बजाय उत्पादन निगम के कर्मचारी श्री दिनेश सिंह को वृहद दंड दिया गया है, जिससे प्रदेश भर के बिजली कर्मियों में भारी असंतोष एवं आक्रोश व्याप्त है।
केंद्रीय पदाधिकारियों ने पावर कॉरपोरेशन अध्यक्ष को अवगत कराया कि आंदोलन समाप्त होने के बाद 19 मार्च 2023 को माननीय ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आंदोलन के कारण की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस ली जाएं, हटाए गए संविदा कर्मियों को पुनः कार्य पर लिया जाए तथा बिजली कर्मियों के विरुद्ध दर्ज सभी एफआईआर एवं मुकदमे वापस लिए जाएं।
संघर्ष समिति ने अपने ज्ञापन के साथ माननीय ऊर्जा मंत्री एवं संघर्ष समिति की संयुक्त प्रेस वार्ता की प्रतिलिपि तथा उत्तर प्रदेश सूचना विभाग द्वारा जारी आधिकारिक वक्तव्य की प्रति भी अध्यक्ष को उपलब्ध कराई। संघर्ष समिति ने कहा कि उक्त वक्तव्य में ऊर्जा मंत्री ने आंदोलन समाप्त करने के लिए संघर्ष समिति का आभार व्यक्त करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आंदोलन से संबंधित सभी दंडात्मक एवं उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त की जाएं।
संघर्ष समिति ने आश्चर्य एवं अफसोस व्यक्त किया कि ऊर्जा मंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद तीन वर्ष से अधिक समय बीत जाने पर भी उनका पूर्ण पालन नहीं हुआ है। इससे सरकार एवं प्रबंधन की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि वर्तमान में भीषण गर्मी के दौरान बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों को कार्य से पृथक किए जाने के कारण विद्युत व्यवस्था प्रभावित हो रही है तथा उपभोक्ताओं को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त कर संविदा कर्मियों की बहाली की जानी चाहिए, ताकि बिजली कर्मी पूर्ण मनोयोग एवं समर्पण के साथ विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में अपना योगदान दे सकें।
संघर्ष समिति ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन से आग्रह किया कि वह संवाद, सहयोग एवं विश्वास का वातावरण स्थापित करते हुए सभी लंबित मामलों का न्यायोचित समाधान करे, जिससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़े और प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके।
संघर्ष समिति के प्रतिनिधि मंडल में जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, सुहेल आबिद, श्री चंद, दीपक चक्रवर्ती, सरजू त्रिवेदी,के एस रावत, आर सी पाल सम्मिलित थे।
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वर्टिकल व्यवस्था और शीर्ष प्रबंधन की मनमानी से प्रदेश की बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो रही है।
पावर कारपोरेशन के प्रबंधन के मनमानी तरीके से राजधानी लखनऊ सहित कई महानगरों में पूंजीपतियों के इशारे पर वर्टिकल व्यवस्था लागू की गई है जबकि सभी कर्मचारी संगठनों ने पूर्व में ही कहा था कि वर्टिकल व्यवस्था से राजधानी की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर सकती है, लेकिन ऊर्जा प्रबंधन ने किसी की नहीं सुनी और इस व्यवस्था को जबरदस्ती तानाशाही पूर्वक लागू किया गया, इस व्यवस्था के लागू होते ही राजधानी लखनऊ में हजारों की संख्या में संविदा कर्मचारियों को नौकरी से बाहर निकाला गया, सैकड़ो की संख्या में टेक्नीशियन, कार्यालय सहायक सहित योग्य एवं प्रशिक्षित कार्मिकों को लखनऊ से बाहर फेंका गया, कई अभियंताओं को अकारण ही निलंबित किया गया, साथ ही बिजली कर्मियों पर मनमाने आदेश थोपे गए।
पहले जहां प्रत्येक फीडर पर एक गैंग हुआ करती थी राउंड द क्लॉक तीन गैंग हुआ करती थी लेकिन आज सभी फील्डरों को मिलाकर एक उपकेंद्र पर मात्र एक गैंग है पूरे प्रदेश में लगभग 20000 संविदा कर्मचारियों को छटनी के नाम पर बाहर निकाला गया है आज जो कर्मचारी बचे हैं वह अपनी क्षमता से 5 गुना अधिक कार्य कर रहे हैं जिस कारण कई संविदा कर्मचारियों की कार्य के दबाव व मानसिक तनाव के कारण दुर्घटना भी हो रही है जो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
आज पावर कारपोरेशन में लगभग 73000 नियमित स्वीकृत पद हैं इसके सापेक्ष वर्तमान में सिर्फ 29000 ही पद भरे हुए हैं 43000 से अधिक पद रिक्त पड़े हुए है, पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की लापरवाही के कारण पिछले 4 वर्षों से किसी भी प्रकार की कोई नई भर्ती नहीं हुई है। इसके अलावा ऊर्जा प्रबंधन द्वारा पूरे प्रदेश में 2 वर्षों से तानाशाही रवैया बनाते हुए बिना किसी का पक्ष सुने बड़ी संख्या में निर्दोष अभियंताओं को निलंबित किया गया है, बड़ी संख्या में अभियंताओं को चार्जशीट देकर उनको पदोन्नति से वंचित किया गया है, ट्रांसफार्मर डैमेज पर मनमाने तरीके से नियम-10 के नोटिस देकर उनके वेतन से कटौती की जा रही है, बिना किसी बात के कारण ही एडवर्स एंट्री के दंड दिए गए हैं, इन सबको देखते हुए बड़ी संख्या में अभियंता, कर्मचारी एवं संविदा कर्मचारी अपने आप को उत्पीड़ित महसूस कर रहे हैं, इसके बावजूद भी बिजली कर्मी प्रदेश वासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात कार्य कर रहे हैं।
आज अगर प्रदेश की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर रही है तो इसका जिम्मेदार सिर्फ पावर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन है और उसकी मनमानी नीतियों है।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि प्रदेश की जनता के व्यापक हित में पावर कार्पोरेशन प्रबंधन पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए, सभी बाहर निकाले गए संविदा कर्मचारियों को काम पर वापस लिया जाए, बिजली कर्मियों पर की गई उत्पीड़न की सभी कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए, पिछले 4 वर्षों से रुकी हुई सभी रिक्त पदों पर भर्ती प्रारंभ की जाए, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और मीटिंग पर मीटिंग का खेल बंद कर धरातल स्तर पर प्रभावी रूप से कार्य किया जाए और ऊर्जा निगमों में बेहतर कार्य का वातावरण स्थापित किया जाए, जिससे सभी विद्युत व्यवधानों को कम से कम समय में दूर करते हुए प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करायी जा सके।
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निर्दोष मुख्य अभियंता इं• पंकज अग्रवाल जी का निलंबन बिल्कुल गलत एवं अन्यायपूर्ण है।
ऊर्जा प्रबंधन अपनी नीतियों और आरएमएस सहित तकनीकी सिस्टम की विफलता का ठीकरा ईमानदार और मेहनती अभियंताओं को निलंबित कर उनपर फोड़ रहा है,जो की कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
@myogiadityanath@UPPCLLKO
निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को समाप्त कराने हेतु विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केन्द्रीय पदाधिकारियों और समस्त जनपदों और परियोजनाओं के संयोजकों/ सह संयोजकों की लखनऊ में 07 दिसम्बर, 2025 को हुई बैठक में सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय -
निजीकरण के विरोध में पूर्ववत आंदोलन जारी रहेगा। निजीकरण का एकतरफा टेंडर होते ही सामूहिक जेल भरो आदांलन प्रारंभ कर दिया जाएगा।
निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में जनपदों और परियोजनाओं पर मोबिलाईजेशन हेतु व्यापक दौरे के कार्यक्रम बनाएं जाएंगे।
01 जनवरी 2026 को आंदोलन के 400 दिन पूरे होने पर सभी बिजली कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बांधेगें और कार्यालय समय के उपरांत विरोध प्रदर्शन करेंगे।
01 जनवरी, 2026 से 08 जनवरी, 2026 तक सभी बिजली कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बांधेगें और कार्यालय समय के उपरांत सभी जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे।
08 जनवरी को समस्त परियोजनाओं और डिस्कॉम मुख्यालयों पर बड़े विरोध प्रदर्शन किये जाएंगे जिसमें संबंधित डिस्कॉम के अंतर्गत आने वाले सभी जनपदों के वितरण और ट्रांसमिशन के बिजली कर्मी और परियोजनाओं पर संबंधित परियोजनाओं के बिजली कर्मी सम्मिलित होंगे ।
08 जनवरी, 2026 से 21 जनवरी, 2026 तक समस्त बिजली कर्मी कार्यालय अवधि के उपरांत विद्युत आपूर्ति बनाए रखने के अतिरिक्त कोई अन्य कार्य नहीं करेंगे।
21 जनवरी, 2026 को लखनऊ में प्रांतव्यापी विशाल रैली होगी जिसमें आंदोलन के अगले कार्यक्रम घोषित किये जाएंगे।
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देश के सामने आज जो संकट खड़ा है वह साफ संकेत देता है कि अति निजीकरण किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है. एक ही क्षेत्र में एक निजी कंपनी की मनमानी ने नागरिकों को जिस तरह परेशान किया है वह बताता है कि जब सार्वजनिक संपदा पूरी तरह निजी हाथों में पहुँच जाएगी तब स्थिति कितनी भयावह हो सकती है।
संविधान हमें जनहित, सामाजिक न्याय और कल्याणकारी राज्य का मार्ग दिखाता है लेकिन जब आवश्यक सेवाएँ अकेले निजी नियंत्रण में जाती हैं तो मनमाने शुल्क, पारदर्शिता की कमी और नागरिक अधिकारों की अनदेखी बढ़ जाती है।
देश के एयरपोर्ट पर भारतीय यात्रियों की पीड़ा साफ दिखाई देती है. टिकट के कई गुना दाम वसूले जा रहे हैं फिर भी शिकायतों पर उचित कार्रवाई नहीं होती। यह स्थिति प्रश्न खड़ा करती है कि क्या नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा से बड़ी किसी निजी कंपनी का लाभ हो गया है?
इसीलिए लगातार कहना पड़ता है उप्र बिजली का निजीकरण बंद करो क्योंकि निजीकरण का अति प्रयोग राष्ट्रहित में नहीं है बल्कि जनहित के विपरीत है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों के अधिकार सर्वोपरि होने चाहिए ना कि निजी कंपनियों का मुनाफा।
आज से ठीक 3 साल पहले 3 दिसंबर 2022 को माननीय ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा जी व माननीय मुख्यमंत्री जी के मुख्य सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी जी की अध्यक्षता में बिजली कर्मचारियों के साथ एक लिखित समझौता हुआ था, उस समझौते में बिजली क्षेत्र में निजीकरण नहीं किया जाएगा यह भी लिखा था तथा अन्य मांगे भी थी जिन पर सहमति बनी थी।
लेकिन दुर्भाग्य का विषय है कि आज 3 साल पूरे होने के बाद भी वह समझौता लागू नहीं किया जा रहा है और मनमाने तरीके से पूंजीपतियों के हित में बिजली के निजीकरण का प्रयास किया जा रहा है।
अब माननीय मंत्री जी ही समझौते का पालन नहीं कराएगे, तो फिर जनता का लोकतंत्र से ही विश्वास उठ जाएगा।
माननीय ऊर्जा मंत्री श्री @aksharmaBharat जी से पुनः अनुरोध है कि आपके द्वारा 3 दिसंबर 2022 को बिजली कर्मचारियों के साथ किए गए समझौते का पालन कराये जाने की कृपा करें, जिससे कर्मचारियों व जनता का विश्वास आप पर बना रहे।
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रिस्ट्रक्चरिंग कर हजारों पदों को समाप्त करने से राजधानी लखनऊ की बिजली व्यवस्था पटरी से उतारने की जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी - संघर्ष समिति ने दी चेतावनी: बिजली व्यवस्था चौपट कर निजीकरण की पृष्ठभूमि तैयार करने का आरोप।
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निजीकरण और उत्पीड़न के विरोध में विद्युत अभियंता संघ ने दी आंदोलन की चेतावनी : अभियंताओं पर की गयी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस न ली गई तो 20 नवंबर के बाद होगा आंदोलन:
उ.प्र. राज्य विद्युत अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी ने पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन को चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस न ली गयी और अभियंताओं की ज्वलंत समस्याओं का समय रहते समाधान न किया गया तो प्रदेश के तमाम विद्युत अभियंता 20 नवंबर के बाद आंदोलन प्रारंभ करने हेतु बाध्य होंगे।
अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी द्वारा पारित प्रस्ताव में यह संकल्प दोहराया गया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण का टेंडर होते ही तमाम अभियंता सामूहिक जेल भरो आंदोलन प्रारंभ करने के लिए बाध्य होगें जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी द्वारा पारित प्रस्ताव में मुख्यतः संयुक्त उपक्रम में बनाई जा रही ओबरा डी और अनपरा ई परियोजना को उत्पादन निगम को दिया जाए, उत्पादन निगम में सैकड़ों की संख्या में अधिशासी अभियंताओं के पद रिक्त होने के बावजूद विगत 04 वर्षों से सहायक अभियंता से अधिशासी अभियंता के पद पर रुकी हुई पदोन्नति तत्काल की जाए, वर्टिकल रीस्ट्रचरिंग के नाम पर निजीकरण करने हेतु अभियंताओं के पदों को समाप्त करने की साजिश तत्काल बंद की जाए, मार्च 2023 की हड़ताल के दौरान की गयी समस्त उत्पीड़नात्म कार्यवाहियां ऊर्जा मंत्री के 19 मार्च 2023 के निर्देश के अनुसार वापस ली जाए, वर्तमान आंदोलन के फलस्वरुप परामर्श व चार्जशीट के नाम पर अन्य कारणों से की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के तहत अभियंताओं की रोकी गयी प्रोन्नति, स्थायीकरण आदेश तत्काल जारी किये जाएं और आंदोलन के फलस्वरुप उत्पीड़न की दृष्टि से अभियंताओं के ट्रांसफर निरस्त किये जाएं, आईटी के नाम पर अभियंताओं के साथ लगातार किया जा रहा भेदभाव व उत्पीड़न बंद किया जाए।
उ.प्र. राज्य अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी की आज लखनऊ में हुई बैठक में उक्त निर्णय लिया गया। बैठक के बाद अभियंता संघ के अध्यक्ष संजय सिंह चौहान और महासचिव जितेंद्र सिंह गुर्जर ने बताया कि विद्युत अभियंताओं ने निजीकरण के विरोध में आंदोलन के साथ-साथ प्रदेश को बेहतर बिजली आपूर्ति देने का सतत् प्रयास किया है और अभी भी विद्युत अभियंता इस कार्य में लगें हैं किंतु पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन इसके बदले में अभियंताओं का तरह-तरह से उत्पीड़न करने पर आमदा है। जिसके विरोध में केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में जबरदस्त आक्रोश व्यक्त किया गया।
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विधान सभा की प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष अमित अग्रवाल ने वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग का किया विरोध : निजीकरण के उद्देश्य से हजारों पदों को समाप्त कर बिजली व्यवस्था पटरी से उतारने की साजिश : केवल लेसा में लगभग 8000 पद समाप्त करने के निर्णय से बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा
उत्तर प्रदेश के चार शहरों में विद्युत वितरण प्रणाली की वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग करने से आए दुष्परिणामों को देखते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र ने 01 नवंबर से लेसा में वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग लागू कर हजारों पदों को समाप्त किए जाने का विरोध किया है।
आज संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने इस संबंध में विधानसभा की प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष और मेरठ के माननीय विधायक श्री अमित अग्रवाल जी से फोन पर बात की। श्री अमित अग्रवाल ने कहा कि वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के बाद मेरठ की बिजली व्यवस्था पहले से खराब हो गई है। श्री अमित अग्रवाल ने बताया कि 12 सितंबर 2025 को हुई प्राक्कलन समिति की बैठक में भी प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष के पद से उन्होंने वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग का प्रबल विरोध किया था। श्री अमित अग्रवाल ने कहा कि विद्युत वितरण की वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग आम उपभोक्ताओं के हित में नहीं है अतः इसे वापस लिया जाय।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि पावर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन निजीकरण के नाम पर वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग लागू कर रहा है और इसके बहाने बिजली कर्मियों के हजारों पद समाप्त किया जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अकेले लेसा में ही 8000 से अधिक पद समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।
संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से अपील की है कि वह मनमाने ढंग से हजारों पदों को समाप्त करने के मामले में तत्काल प्रभावी हस्तक्षेप करें अन्यथा पावर कार्पोरेशन प्रबंधन उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था ध्वस्त कर देने पर आमादा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि प्रबन्धन यह सब तब कर रहा है जब बिजली कर्मी और अभियन्ता दीपावाली के पर्व पर रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति करने हेतु योजनाबद्ध ढंग से काम कर रहे हैं। अभियंता संघ ने इस संबंध में प्रदेश के सभी जनपदों में 16 अक्टूबर को अभियंताओं की सभा भी बुलाई है।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि लेसा में 2055 नियमित पद और लगभग 6000 संविदा कर्मियों के पद मनमाने ढंग से समाप्त पर पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन प्रदेश की राजधानी की बिजली व्यवस्था पटरी से उतारने का काम कर रहा है जिसका उपभोक्ता सेवा पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ने जा रहा है।
संघर्ष समिति ने बताया की वर्तमान में लेसा में अधीक्षण अभियंता स्तर के 12 पद स्वीकृत है उन्हें घटाकर आठ किया जा रहा है, अधिशासी अभियंता स्तर के 50 पद स्वीकृत है उन्हें घटाकर 35 किया जा रहा है, सहायक अभियंता स्तर के 109 पद स्वीकृत उन्हें घटाकर 86 किया जा रहा है, अवर अभियंता स्तर के 287 पर स्वीकृत है उन्हें घटाकर 142 किया जा रहा है और टीजी 2 के 1852 पर स्वीकृति उन्हें घटाकर 503 किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त लेखा संवर्ग में अकाउंटेंट के 104 पद हैं उन्हें घटाकर 53 किया जा रहा है, एग्जीक्यूटिव अस्सिटेंट के 686 पद हैं उन्हें घटाकर 280 किया जा रहा है और कैंप असिस्टेंट के 74 पद हैं उन्हें लगभग समाप्त कर 12 किया जा रहा है ।
संघर्ष समिति ने बताया कि पद समाप्त करने और छटनी के मामले में सबसे बड़ी मार संविदा कर्मियों पर पड़ रही है। संविदा कर्मियों के छह हजार से अधिक पद समाप्त किए जा रहे हैं।
निजीकरण के विरोध में आज प्रदेश के समस्त जनपदों पर बिजली कर्मचारियों ने लगातार 320 वें दिन जोरदार प्रदर्शन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
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@GoKiwiNow Hello Kiwi team,
I wanted to know whether biometric (fingerprint or Face ID) authentication for UPI payments is available or planned in upcoming updates?
It will enhance both security and convenience. Please confirm if this feature is in rollout or testing phase.
निजीकरण की प्रक्रिया तेज होते देख संघर्ष समिति ने नियामक आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर वार्ता हेतु समय देने की मांग की : संघर्ष समिति का पक्ष सुने बिना आर एफ पी डॉक्यूमेंट पर निर्णय लिया गया तो नियामक आयोग मुख्यालय पर मौन विरोध प्रदर्शन होगा
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने निजीकरण की प्रक्रिया तेज होते देख विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष श्री अरविंद कुमार को आज एक पत्र भेजकर मांग की है कि वह पॉवर कारपोरेशन द्वारा दिये गए आरएफपी डॉक्यूमेंट पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों पर पावर कॉरपोरेशन का जवाब सुनने के पहले विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश को अपना पक्ष रखने के लिए समय दें।
संघर्ष समिति ने पत्र में चेतावनी दी है कि यदि विद्युत नियामक आयोग से बार-बार अनुरोध करने के बावजूद भी संघर्ष समिति के प्रतिनिधि मंडल को समय न दिया तो विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के आह्वान पर सैकड़ों बिजली कर्मी विद्युत नियामक आयोग के मुख्यालय पर मौन प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी नियामक आयोग के अध्यक्ष की होगी।
पत्र में कहा गया है कि समाचार पत्रों के माध्यम से यह विदित हुआ है कि विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष ने माननीय ऊर्जा मंत्री, प्रमुख सचिव ऊर्जा और पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष से पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम केआरएफपी डॉक्यूमेंट पर नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों के संबंध में अलग से चर्चा की है। चर्चा यह भी है कि इस बैठक में यह तय हो गया है कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा आपत्तियों पर दिए जाने वाले जवाब पर विद्युत नियामक आयोग ने अपनी सहमति दे दी है जिसके बाद निजीकरण का रास्ता प्रशस्त हो जाएगा।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि यदि यह सही है तो यह बहुत ही गंभीर बात है कि सरकार, प्रबंधन और विद्युत नियामक आयोग के बीच निजीकरण को लेकर मिलीभगत हो गई है। एक लाख करोड रुपए से अधिक की पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की परिसंपत्तियों को कौड़ियों के दाम पूर्व निर्धारित निजी घरानों के हाथ बेचने की साजिश है यह ।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली के क्षेत्र में सबसे बड़े स्टेकहोल्डर बिजली के उपभोक्ता और बिजली के कर्मचारी हैं। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण से लगभग 60000 संविदा कर्मियों और साढ़े सोलह हजार नियमित कर्मचारियों की नौकरी समाप्त होने जा रही है। हजारों की संख्या में बिजली कर्मियों की पदावनती होने जा रही है। निजीकरण के दुष्प्रभाव से बिजली कर्मचारियों में भारी चिंता और गुस्सा व्याप्त है।
बिजली के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के आज लगातार 315वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
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केन्द्रीय विद्युत मंत्रालय, केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण और आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की मिलीभगत से संपूर्ण ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण की साजिश : संघर्ष समिति ने सार्वजनिक किये डॉक्यूमेंट: राष्ट्रीय स्तर के आन्दोलन की तैयारी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन केंद्रीय विद्युत मंत्रालय और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के साथ मिली भगत में अपना समांतर सेक्रेटेरिएट चला रहा है और संपूर्ण ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण की गुपचुप योजना तैयार की जा रही है। संघर्ष समिति ने इस बाबत ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के सचिवालय के पत्र व्यवहार को आज यहां सार्वजनिक किया।
संघर्ष समिति ने बताया कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के डायरेक्टर जनरल श्री आलोक कुमार ने 09 सितंबर देश के सभी ऊर्जा निगमों के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशकों को एक पत्र भेजा है जिस पत्र से बिल्कुल स्पष्ट हो जाता है की केंद्रीय विद्युत मंत्रालय और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की शह पर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन ऊर्जा निगमों के कार्य में सीधे दखलंदाजी कर रहा है। श्री आलोक कुमार अपने पत्र में देश के विभिन्न ऊर्जा निगमों से डाटा ऐसे मांग रहे हैं मानो वही देश के विद्युत मंत्री बन गए हों।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह बहुत ही गंभीर मामला है और अब यह बिल्कुल स्पष्ट हो गया है कि ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण के लिए ही ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन बनाया गया है और यह एसोशिएशन सरकार और निजी घरानों के बीच बिचौलिए का काम कर रही है।
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने कहा कि फेडरेशन और नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स इस मामले को केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर के सामने शीघ्र रखेगी।
उन्होंने बताया कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के सेक्रेटेरिएट की दखलंदाजी तत्काल बंद न की गई और ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन से जुड़े हुए ऊर्जा निगमों के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक पद से न हटाए गए तो देश के 27 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर इसके विरोध में सड़क पर उतरकर आंदोलन प्रारंभ करने हेतु बाध्य होंगे।
संघर्ष समिति ने कहा की पत्र में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के डायरेक्टर जनरल श्री आलोक कुमार ने लिखा है कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने 08 सितंबर को एक मीटिंग किया था जिसमें ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को भी बुलाया गया था । इस मीटिंग में केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन से यह कहा कि वह विद्युत वितरण, ट्रांसमिशन और उत्पादन में कॉस्ट रिडक्शन के लिए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण को एक सुझाव दें। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की मीटिंग में यह भी तय हुआ कि इस बाबत ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन देश के सभी ऊर्जा निगमों से इनपुट डाटा मांगे और प्रस्ताव बनाए। इसी आधार पर श्री आलोक कुमार ने देश के सभी ऊर्जा निगमों के चेयरमैन से इस संबंध में डाटा मांगा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह सारे घटनाक्रम बहुत ही गंभीर है और सरकारी काम में सोसाइटी एक्ट के अंतर्गत रजिस्टर्ड एक संस्था की इस प्रकार की दखलंदाजी देश के इतिहास में पहली बार हो रही है।
संघर्ष समिति ने आश्चर्य व्यक्त किया कि कि यह सब केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के इशारे पर हो रहा है। श्री आलोक कुमार ने पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन ने अप्रैल 2025 में केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के सामने भी एक प्रेजेंटेशन किया था।
संघर्ष समिति ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में ऑल इंडियाडिस्कॉम एसोसिएशन का प्रादुर्भाव अचानक नहीं हुआ है बल्कि यह एक सोची समझी रणनीति के तहत निजीकरण को अंजाम देने हेतु बनाई गई संस्था है। सबसे आपत्तिजनक बात यह है कि महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के ऊर्जा निगमों के अध्यक्ष ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के शीर्ष पदाधिकारी भी बने हुए हैं जिससे यह मामला सीधे तौर पर हितों के टकराव का बनता है।
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बिजली व्यवस्था में अप्रत्याशित सुधार के दृष्टिगत बिजली के निजीकरण निरस्त करने की मांग:बिजली के निजीकरण के विरोध में प्रदेश भर में ध्यानाकर्षण कार्यक्रम जारी:
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आज यहां कहा कि कल दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री जी की अध्यक्षता में आयोजित ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की बैठक में उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था में हुए अप्रत्याशित सुधार की चर्चा की गई । मीटिंग में बिजली की तकनीकी और वाणिज्यिक हानि में निरंतर कमी की सराहना की गयी है जिसकी पुष्टि प्रदेश के ऊर्जा मंत्री मा अरविन्द कुमार शर्मा जी द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से स्वयं की गई है।
संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि जब सार्वजनिक क्षेत्र में रहते हुए एटीएंडसी हानियों में काफी गुणात्मक कमी हुई है और प्रदेश में पूर्व में हुए आगरा और ग्रेटर नोएडा का निजीकरण का प्रयोग विफल हो गया है तथा निजीकरण में हुए घोटाले व देश में अन्य जगहों पर निजीकरण के विफल प्रयोग को देखते हुए पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जानी चाहिए।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन कथित घाटे का हवाला देते हुए पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की दलील दे रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन का प्रबंधन घाटे को लेकर इतना संवेदनशील है तो उसे सबसे पहले आगरा का फ्रेंचाइजी करार तत्काल रद्द कर देना चाहिए,जिसके चलते पावर कारपोरेशन को प्रति वर्ष 1000 करोड रुपए का नुकसान हो रहा है । संघर्ष समिति ने कहा कि ए टी एंड डी हानियां के गलत आंकड़ों के कारण से टोरेंट पावर को बहुत सस्ती दरों पर पॉवर कॉरपोरेशन बिजली दे रहा जिससे विगत 14 वर्षों में 3432 करोड रुपए की हानि हो चुकी है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि काम करने के बावजूद बिजली कर्मचारियों को लगातार तीन माह तक वेतन नहीं दिया जाना यह बहुत ही गंभीर उत्पीड़नात्मक कार्यवाही है और पूरी तरह अमानवीय है। संविदा कर्मियों को बड़े पैमाने पर हटाए जाने से विभिन्न जनपदों में प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।निजीकरण किये जाने हेतु बिजली कर्मचारियों पर बड़े पैमाने पर की गई उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के वापस न लिये जाने से बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त है।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में आज लगातार 293 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में समस्त जनपदों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया और संकल्प व्यक्त किया कि जब तक निजीकरण का फैसला निरस्त नहीं किया जाता और समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस नहीं ली जाती तब तक बिजली कर्मी लगातार आंदोलन जारी रखेंगे।
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डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का मुख्य एजेंडा - विद्युत वितरण निगमों का निजीकरण : मुंबई में होने वाली मीट के आयोजक , होस्ट और समर्थक संगठनों में निजी घरानों का प्रभुत्व: ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की निजीकरण में मुख्य भूमिका के चलते उप्र में कांफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट का मामला: निजीकरण के विरोध में प्रान्त व्यापी विरोध प्रदर्शन
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने बताया कि आगामी 04 एवं 05 नवम्बर को मुम्बई में हो रही डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का मुख्य एजेंडा ही विद्युत वितरण निगमों का निजीकरण है। ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन और निजी घरानों का इस मीट में प्रभुत्व खुलकर दिखाइ दे रहा है।
डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 के लिए जारी किए गए एजेंडा से बिल्कुल साफ हो जाता है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की निजी घरानों के साथ मिली भगत है और निजीकरण में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की सबसे प्रमुख भूमिका है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का आयोजक इंडियन स्मार्ट ग्रिड फोरम है जो सोसाइटी एक्ट में रजिस्टर्ड एक निजी संस्था है। इस संस्था के वेब साइट पर जाने से पता चलता है कि इसका मुख्य उद्देश्य ही निजीकरण की पहल है।
संघर्ष समिति कहा कि यह बहुत ही आपत्तिजनक बात है की उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष आशीष गोयल अध्यक्ष की हैसियत से पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण में लगे हुए हैं वहीं दूसरी ओर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के महामंत्री के रूप में आशीष गोयल की निजी घरानों के साथ मिली भगत है। संघर्ष समिति ने कहा कि यह सीधे-सीधे कनफ्लिक्ट आफ इंटरेस्ट (हितों के टकराव) का मामला है जो बहुत गम्भीर बात है ।
डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट के मेजबान टाटा पावर और सह मेजबान बीएसईएस राजधानी पावर और बीएसईएस यमुना पावर हैं जो रिलायंस पावर की विद्युत वितरण कंपनियां है। ध्यान देने योग्य बात है कि मुख्य मेजबान टाटा पावर के सीईओ कई बार ऐलान कर चुके हैं कि टाटा पावर उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को खरीदने की लिए बेताब है।
संघर्ष समिति ने कहा कि ध्यान देने योग्य बात यह है कि इसी प्रकार की डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट नवंबर 2024 में लखनऊ में हुई थी। इसी मीट में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन का गठन किया गया था जिसमें महाराष्ट्र विद्युत वितरण निगम के सीएमडी लोकेश चंद्र को अध्यक्ष बनाया गया, उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन के अध्यक्ष आशीष गोयल को महामंत्री बनाया गया और नोएडा पावर कंपनी के पी आर कुमार को कोषाध्यक्ष बनाया गया। लखनऊ में हुई मीट के कुछ दिन बाद ही पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की घोषणा कर दीगई थी।
संघर्ष समिति ने कहा डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 के एजेंडा से बिल्कुल साफ हो गया है कि उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया तेज की जा रही है और इसके बाद महाराष्ट्र में बिजली के निजीकरण की पूरी तैयारी है। ऐसे में संघर्ष समिति ने महाराष्ट्र के बिजली कर्मियों से अपील की है कि वे चार-पांच नवंबर को मुंबई में होने वाली डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का पुरजोर विरोध करें।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 296वें दिन आज बिजली कर्मियों ने प्रांत भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया।
आज मुख्यतया वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया।
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