आर्थिक सशक्तिकरण ही समाज के असली बदलाव की चाबी है।
धनराज नथवानी जी के नेतृत्व में अब देश क�� वंचित युवाओं को उद्योग और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलेंगे। जब हमारे युवाओं को सही शिक्षा और कौशल (Skilling) मिलेगा, तभी देश का हर वर्ग आर्थिक रूप से सशक्त होगा।
Regarding the Ayush Malik case in Shamli, I had shared an incorrect post after the Allahabad High Court hearing. As soon as I came to know that the information was being circulated incorrectly on social media, I immediately deleted the post.
I thank Shamli Police for the clarification. There was no intention to spread misleading or false information. It was an inadvertent mistake, and I sincerely regret it.
खान सर,
बिहार के फैजल खान की आलोचना ���हुत करते हैं लोग।
लेकिन उनकी दरियादिली कोई नहीं देखता। बिहार बाढ़ पीड़ितों के राहत सामग्री की लाइन लगा दिया है भाई ने...!!
देश की राजधानी दिल्ली मैं किशनगंज AMU के सिलसिले मैं केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी से मिलने पहूंचे असदुद्दी�� ओवैसी की अध्यक्षता में AIMIM के पांचो विधायक।
सब डिटेल में लिख दिया...
₹5,000 के ट्रांजैक्शन पर ₹20 की कटौती ₹10,000 के लेन-देन पर ₹40 का चार्ज याद है न वो दिन? जब गली-नुक्कड़ के हर ठेले, चाय की टपरी और किराना दुकान पर QR Code चिपकाए जा रहे थे। नारा दिया गया ‘डिजिटल इंडिया’, जेब में कैश रखने का झंझट खत्म, देश आधुनिक बन रहा है।
शुरुआत में सब कुछ बिल्कुल 'फ्री' था। दुकानदारों को भरोसा दिया गया कि शून्य प्रतिशत MDR रहेगा, यानी डिजिटल लेन-देन पर एक पैसा भी नहीं कटेगा। छोटे-बड़े व्यापारियों ने भी सहूलियत देखी और खुशी-खुशी ग्राहकों से ऑनलाइन पेमेंट लेना शुरू कर दिया।
लेकिन अब खेल का दूसरा अध्याय शुरू हो चुका है
तर्क यह दिया जा रहा है कि UPI के रख-रखाव में खर्च आता है। जबकि हकीकत यह है कि UPI का संचालन करने वाली संस्था NPCI खुद हजारों करोड़ के मुनाफे में है।
फिनटेक जगत से जुड़े जानकारों का भी साफ कहना है कि इस सिस्टम से किसी का कोई नुकसान नहीं हो रहा, फिर भी 0% MDR को खत्म करने की तैयारी है।
अब सबसे बड़ा दिलासा सुनिए यह चार्ज ग्राहक को नहीं, बल्कि दुकानदार (मर्चेंट) को देना होगा।
सुनने में कितना सुकून मिलता है न?
लेकिन अर्थशास्त्र का सीधा नियम है व्यापारी अपनी जेब से कभी टैक्स या सरचार्ज नहीं भरता।
ठीक वैसे ही जैसे पेट्रोल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी और सेस सरकार तेल कंपनियों से मांगती है, लेकिन पेट्रोल पंप पर ₹50 का तेल ₹100 में हम और आप ही खरीदते हैं।
जब दुकानदार के खाते से ₹5,000 पर ₹20 कटेंगे, तो वह उस घाटे की भरपाई सामान के दाम बढ़ाकर आम जनता की ही जेब से करेगा।
कैशलेस अर्थव्यवस्था का सपना दिखाकर पहले नकदी की आदत छुड़���ाई गई, और अब जब पूरा देश स्क्रीन पर अंगूठा दबाने का आदी हो चुका है, तो हर क्लिक पर डिजिटल टोल टैक्स लगाया जा रहा है।
व्यवस्था का यह हुनर वाकई ला जवाब है पहले सुविधा को जरूरत बनाओ, फिर उस जरूरत पर टैक्स लगाओ।
एक बात गौर करने वाली है,
जब से Bigg boss 20 स्टार्ट हुआ है एक्टर Salman Khan हमेशा कैप या सिर ढंके हुए दिख रहे हैं।
सलमान खान का बुढ़ापा साफ दिखाई दे रहा है। करण जौहर की तरह दिखने लगे हैं।
ऊपर से हेयर ट्रांसप्लांट की खबरें जोरों शोरों पर है।
2100+ दिन जेल में, लेकिन ट्रायल अब तक नहीं।
सुप्रीम कोर्ट कहता है “Bail is the rule, jail is the exception.”
फिर उमर खालिद के मामले में यह सिद्धांत आखिर कहाँ है?
छह साल गुजर गए, अदालत में मुकदमे का फैसला तो दूर, सुनवाई का इंतजार ही जारी है।
न्याय में देरी, क्या खुद अन्याय नहीं?
#UmarSixYearsWithoutTrial