जन सुराज ने बिना सहमति के जिला कार्यवाहक समिति में डाले नेताओं के नाम
जदयू के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर [@PrashantKishor] आने वाले 2 अक्टूबर को अपनी राजनीतिक पार्टी जन सुराज [@jansuraajonline] लॉंच करने जा रहे हैं।
लॉन्चिंग से पहले जिलावार पार्टी की कार्यवाहक समिति की घोषणा की जा रही है। प्रत्येक ज़िले की लिस्ट में सैकड़ों नाम शामिल हैं। लेकिन, लिस्ट में मौजूद कई नेता दूसरी पार्टी के सक्रिय सदस्य हैं या उनसे जन सुराज ने किसी तरह सहमति नहीं ली है या न ही उन्हें इसकी सूचना दी है।
अररिया ज़िले के पलासी के रहने वाले विनोद विक्टर ऋषिदेव, राजद [@RJDforIndia] युवा के जिला प्रधान महासचिव हैं। बिना किसी बात या मुलाक़ात किये अररिया जिले की जन सुराज जिला कार्यवाहक समिति के पदाधिकारियों व सदस्यों की विस्तृत सूची में विक्टर का नाम डाल दिया गया है।
"मेरा जन सुराज से किसी प्रकार का संपर्क नहीं है, मेरे से एक बार पूछा भी नहीं है। लगता है किसी के कहने पर नाम जोड़ दिया है। हमसे न कभी फ़ोन पर बात की, न ही हम कभी उनके किसी प्रोग्राम में गए", विक्टर ने 'मैं मीडिया' से कहा।
इसी तरह कटिहार जिला कार्यवाहक समिति में मो. मोजीबुर रहमान का नाम शामिल है। रहमान जदयू [@Jduonline] के अल्पसंख्यक जिला अध्यक्ष हैं। रहमान कहते हैं, "जन सुराज एक एजेंसी है, पार्टी नहीं। ये लोग खासकर मुसलमानों को टारगेट कर रहे हैं ताकि वो क्षेत्रीय दलों से निकलें।"
रहमान आगे कहते हैं, "मेरा नाम भी लिस्ट में सही से नहीं लिख पाया है, बेईमानी भी उनसे ईमानदारी से नहीं हुई।"
कटिहार की लिस्ट में युवा कांग्रेस [@INCIndia] के नेता मो. इज़हार अली का नाम भी शामिल है। इज़हार और उनकी पत्नी कटिहार नगर निगम के क्रमशः वार्ड नंबर 23 और 24 से पार्षद हैं। इज़हार कहते हैं, "हम कांग्रेस में हैं, जन सुराज वाला बार-बार बोला, लेकिन हम मना कर दिए। बिना सहमति के नाम डाल दिया है। एक बार प्रशांत किशोर से मिलने बुलाया था। हमलोग सिर्फ उनसे मिले थे। उसके बाद उनलोगों ने जोड़ने का खूब प्रयास किया, लेकिन हमने मना कर दिया। मैंने उनके किसी कंसेंट फॉर्म में हस्ताक्षर नहीं किया है, न ही हामी भरा है।"
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राजद के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने दिया पार्टी से इस्तीफा
श्याम रजक पटना के फुलवारी शरीफ विधानसभा क्षेत्र से छह बार विधायक रह चुके हैं। पहले जनता दल, फिर राजद और 2010 व 2015 में जदयू के टिकट पर चुनाव जीते और बिहार सरकार में मंत्री भी बने थे। 2020 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने जदयू से इस्तीफ़ा दे दिया और राजद में वापस लौट गए थे। लेकिन महागठबंधन में ये सीट भाकपा माले (लिबरेशन) के हिस्से में चली गई और पार्टी के उम्मीदवार गोपाल रविदास यहाँ से चुनाव भी जीत गए।
इस्तीफा के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “अभी मेरे पास विकल्प खुला है… अगर किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़ूंगा तो संन्यास लेने की स्थिति होगी। एक सप्ताह के अंदर आपको सूचना मिल जायेगी।”
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'Is This Justice?': Muslim Auto Driver's House Bulldozed After Tenant's Minor Son Injures Classmate
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While the government promotes the Kosi-Mechi Link Project as a solution to Bihar’s flooding issues, many experts and local representatives argue that it could exacerbate existing problems.
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