शर्मनाक!
एक महिला डॉक्टर का हिजाब खींचना उसकी गरिमा और धार्मिक पहचान पर सीधा हमला है।
जब राज्य का मुख्यमंत्री ऐसा करे, तो महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठना लाज़मी है।
जज साहब बहराइच और महराजगंज में हिंसा फैलाने वाले इन चरमपंथियों पर भी कोई मनुस्मृति का श्लोक सुनाएंगे या नहीं!
“मुसलमानों को हिला देना है… पुलिस वाले ने 2 घंटे दिए थे, कुछ ने गद्दारी की, वर्ना महाराजगंज ख़त्म हो जाता”
जब भी कोई भाजपा सरकार की पोल खोलता है या उनसे तीखे सवाल करता है तो ये भ्रष्ट भाजपा सरकार उसके ख़िलाफ़ कोई पुराना मुद्दा झाड़-पोंछकर निकाल लाती है और रास्ते में गिरफ़्तार कर लेती है फिर वो चाहे आम आदमी हो या आईपीएस जैसा बड़ा अधिकारी।
ज़मीन की जो लूट भाजपाई अयोध्या से लेकर बनारस, गोरखपुर, प्रयागराज, मथुरा, आगरा, लखनऊ, ग़ाज़ियाबाद, मेरठ व पूरे प्रदेश में सरेआम-साक्षात् कर रहे हैं, वो इस सरकार को इसलिए दिखाई नहीं देती है क्योंकि उसमें उनकी हिस्सेदारी है और उनके ही लोग ‘भू-माफ़िया’ बनकर लगे हुए हैं।
निंदनीय!
श्रीमान @dgpup महोदय,
खाकी का मतलब यह तो नहीं कि फ्री में ऑटो में सवारी करने का लाइसेंस मिल गया हो।
पुलिस नियमावली के अनुसार –
खाकी धारक का प्रथम दायित्व समाज को भय एवं अपराध मुक्त बनाने हेतु पूरे निष्ठा, ईमानदारी एवं निडरता के साथ अपने कर्त्तव्य का पालन करना हैं।
ये खाकी धारी जो कर रहा है ये पूर्णतः गलत एवं अपराध है। कृपया इस प्रकरण की जांच करके विभागीय कार्यवाही करें।
पाकिस्तानी एजेंट के लिए काम करने वाला कुलेंद्र शर्मा गिरफ्तार...
असम पुलिस का दावा है कि...
कुलेंद्र शर्मा लंबे समय से पाकिस्तानी जासूसी एजेंसी से जुड़े लोगों के संपर्क में थे और उन्हें संवेदनशील जानकारियां उपलब्ध करा रहे थे।
IAF के रिटायर्ड ऑफिसर हैं शर्मा..
रुबिका-चित्रा-अंजना, मोहम्मद अतहर हुसैन के कातिलों को आतंकवादी कब कहेंगी ? टैग करके पूछो।
बिहार के नवादा कुछ युवकों ने मोहम्मद अतहर हुसैन से नाम पूछा, धर्म जानने के लिए पैंट उतारकर निजी अंगों की जांच की, पेट्रोल डाला गया।
फिर हाथ–पैर बांधकर पीटा, ईंट से उंगलियां तोड़ दी, नाखून उखाड़ डाले। इलाज के दौरान मौत हो गई। मोहम्मद अतहर हुसैन फेरी लगाकर कपड़ा बेचने का काम करते थे।
पुलिस द्वारा चार आरोपी सोनू कुमार, रंजन कुमार, सचिन कुमार और श्री कुमार को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है।
वह रे यूपी पुलिस!
एक तरफ़ 6 दिसंबर को Black Day लिखने वाली डॉ. शीबा खान को “सांप्रदायिक हिंसा भड़काने” के नाम पर बिना देर किए गिरफ्तार कर लिया जाता है।
लेकिन दूसरी तरफ़—मौलाना असद मदनी साहब की तस्वीर शौचालय में लगाकर उस पर शौच करने वाला ऋषभ ठाकुर, अब तक खुलेआम घूम रहा है।
तो क्या यूपी पुलिस की नज़र में सिर्फ़ एक ही तरफ़ की बात “सांप्रदायिक उकसावा” है?
क्या दूसरे मामले में आंखें मूँद लेना कानून का हिस्सा बन चुका है?
अगर एक पोस्ट तुरंत गिरफ्तारी बन सकती है तो
धर्मगुरु का अपमान, नफ़रत फैलाने वाली हरकत, ये क्या है? ये सांप्रदायिक हिंसा भड़काने की कोशिश नहीं?
तो फिर सवाल उठना लाज़मी है,
क्या कानून भी बिक चुका है?
या फिर कानून भी अब चेहरा देखकर चलता है?
सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग का सरेंडर होते ही पूरा खेल खुल गया
— चुनाव आयोग बोले सॉफ्टवेयर इस्तेमाल ही नहीं किया और पेंच यहीं फंस गया
— 2018 से जो सॉफ्टवेयर चल रहा था बिहार में अचानक बंद क्यों हुआ
— एसआईआर का पूरा खेल अब कोर्ट में एक्सपोज़ होने लगा है
—उधर, अमित शाह का सीक्रेट प्लान था नीतीश को रिप्लेस करना पर मामला उलटा पड़ रहा
— निशांत की एंट्री का एलान नीतीश की मर्जी के बिना और पार्टी में भूचाल
— जेडीयू के दो बड़े नेता शाह के दरबार में और पटना में अफरातफरी
बहराइच हिंसा में एक आदमी के कत्ल के जुर्म में फांसी की सजा तय की गई है वह भी मनुस्मृति का श्लोक पढ़ कर
लेकिन
गुजरात दंगा 2002 में बाबू बजरंगी खुद जुर्म कुबूल कर रहा है कि कैसे गर्भवती मुस्लिम महिला का पेट चीर कर जिंदा बच्चे का कत्ल किया था
इसको मनुस्मृति से सजा नहीं मिली क्यों ?
आगामी 14 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में राहुल गांधी जी की आवाज पर पूरा देश इकट्ठा हो रहा है।
जिसमें एक ही नारा है- 'वोट चोर, गद्दी छोड़'
इस रैली में देश का हर वो शख्स शामिल हो रहा है, जो 'वोट चोरी' के खिलाफ है ।
मैं आप सभी को इस भव्य रैली में आने का निमंत्रण देता हूं। हमारे साथ आइए और 'वोट चोरी' के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कीजिए।
: @INCMinority के चेयरमैन @ShayarImran जी
कैसे होगा चुनाव सुधार? वैसे ही जो हम बार बार कह रहे हैं
1. चुनाव से कम से कम एक महीने पहले मशीन-रीडेबल वोटर लिस्ट सार्वजनिक हो
2. CCTV फुटेज मिटाने वाला काला कानून तुरंत वापस लिया जाए
3. विपक्ष को EVM तक पहुंच मिले और उसका आर्किटेक्चर सार्वजनिक किया जाए
4. चुनाव आयुक्तों को सज़ा से बचाने वाला कानून बदला जाए ताकि उनकी मनमानी पर लगाम लगाई जाए
सरकार ये सुधार नहीं चाहती - मगर हम हर हाल में ये बदलाव ला कर रहेंगे।
चाइना ने 130 करोड़ में शानदार स्कूल बना दिए और यहाँ भाजपा ने 6000 करोड़ केवल प्रतिमाओं पर बहा दिया !!
भाजपा ये बात अच्छे से जान ले कि असली माप हमारी पढ़ाई और भविष्य है सिर्फ़ दिखावे की मूर्तियाँ नहीं !!
#School#Education#Future#Corruption#Scam
मध्यप्रदेश के जिला झाबुआ के गांव पाटड़ी चौकी क्षेत्र में ईसाई समाज के रावजी डामर जी को जबरन “जय श्री राम” बोलने के लिए मजबूर करना और मना करने पर उनके साथ मारपीट करना भीड़तंत्र और धार्मिक फासीवाद का खतरनाक उदाहरण है।
किसी भी नागरिक की आस्था उसकी निजी स्वतंत्रता है।
“जय श्री राम बोल, नहीं तो टुकड़े कर दूंगा” जैसी धमकियां न धर्म हैं, न राष्ट्रवाद—ये आतंक की मानसिकता हैं।
धर्म परिवर्तन का आरोप लगाकर किसी व्यक्ति को सरेआम पीटना, डराना या अपमानित करना कानूनन अपराध है। यदि कोई शिकायत है तो उसका समाधान संवैधानिक प्रक्रिया से होगा, न कि सड़क पर सज़ा सुनाकर।
दुखद यह है कि यह घटना कोई अपवाद नहीं है।आगरा में 38 वर्षों से टैक्सी चला रहे बुज़ुर्ग कैब ड्राइवर रहीस जी के साथ भी 24 नवंबर को यही हुआ—ताजमहल मेट्रो पार्किंग में उन्हें “जय श्री राम” बोलने के लिए मजबूर किया गया, मना करने पर दाढ़ी खींची गई, थप्पड़ मारे गए और धमकियां दी गईं।उनका पूरा परिवार दहशत में आ गया था। बेटे कह रहे थे —“अब्बा, बाहर मत निकलो, टैक्सी बेच देंगे।” यह डर किसी एक व्यक्ति का नहीं, देश के अल्पसंख्यक नागरिकों के मन में बैठाया गया डर है।
हम मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 जी से कहना चाहते हैं—
धार्मिक नारे किसी की देशभक्ति का प्रमाण नहीं होते।
आस्था थोपना, संविधान रौंदना है।
अल्पसंख्यकों पर हमले को “शंका” या “आरोप” के नाम पर कभी भी सही नहीं ठहराया जा सकता।
हम @MP_MyGov से माँग करते हैं कि—
रावजी डामर के साथ मारपीट और धमकी देने वालों पर सख्त धाराओं में कार्रवाई हो।
पीड़ित को तत्काल सुरक्षा, चिकित्सा और न्याय मिले।
धर्म परिवर्तन के आरोपों की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच सुनिश्चित की जाए।
साथ ही, हम @mygovindia से अपेक्षा करते हैं कि देश में बढ़ती धार्मिक हिंसा, जबरन धार्मिक नारे लगवाने और अल्पसंख्यकों को डराने की घटनाओं पर स्पष्ट नीति और जवाबदेही तय की जाए।
भारत नारे से नहीं, संविधान से चलता है।
जो आस्था को लाठी बनाते हैं, वे देश की आत्मा पर हमला करते हैं।
@PMOIndia@narendramodi@CMMadhyaPradesh
बहराईचा हिंसा के दौरान टीवी स्क्रीन पर सबसे ज़्यादा सुना गया सवाल “प्रशासन को हटाइए, हम खुद मुकाबला करेंगे, हम भी गोलियाँ चलाएँगे” ऐसी बयानबाज़ी लाइव चलती रही और उसी समय करीब दो घंटे तक भीड़ को खुली छूट मिल गई।
इन दो घंटों में संगठित तरीके से मुस्लिम घरों में तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी की घटनाएँ दर्ज हुईं।
पूछना चाहती हूं आखिर.....
इतनी खुली धमकी के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? भीड़ को दो घंटे की आज़ादी किसने दी? और मीडिया ऐसे बयानों को सवाल के नाम पर क्यों amplify करता रहा?