चित्रा विहार रेड लाइट के पास खुलेआम गांजा बिक्री: स्थानीय पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल।
पूर्वी दिल्ली के थाना प्रीत विहार क्षेत्र अंतर्गत चित्रा विहार रेड लाइट के पास बनी झुग्गियों के सामने ऑन-रोड अवैध नशीले पदार्थों (गांजे) की बिक्री का मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारियों के अनुसार, रईस नामक एक व्यक्ति इस अवैध कारोबार की बागडोर संभाल रहा है और वह इस काम में नाबालिग बच्चों तथा महिलाओं का ढाल बना उन्हें इस्तेमाल कर रहा है।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि पुलिस और कानून की कार्रवाई से बचने के लिए आरोपी द्वारा बच्चों और महिलाओं को आगे किया जाता है। सड़क किनारे सरेआम हो रही इस तस्करी के कारण न केवल क्षेत्र का माहौल खराब हो रहा है, बल्कि आसपास के मुख्य मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों और स्थानीय निवासियों में भी असुरक्षा का माहौल व्याप्त है।
पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल
इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आ रहा है। सूत्रों का दावा है कि यह अवैध व्यापार स्थानीय पुलिस की कथित शह या अनदेखी के कारण लगातार फल-फूल रहा है। ऐसे में कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं:
क्या स्थानीय बीट ऑफिसर की भूमिका संदिग्ध है? बीट पुलिसकर्मी का मुख्य काम अपने क्षेत्र की हर गतिविधि पर नजर रखना होता है। ऐसे में ऑन-रोड चल रहे इस कारोबार की जानकारी बीट ऑफिसर को न होना कई संदेह पैदा करता है।
क्या थाना अध्यक्ष इस गतिविधि से बेखबर हैं? यदि चित्रा विहार जैसे मुख्य रेड लाइट इलाके पर अवैध नशीले पदार्थ बिक रहे हैं, तो सवाल यह भी है कि क्या यह जानकारी थाना अध्यक्ष तक नहीं पहुंची, या फिर मामले पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा?
स्थानीय निवासियों की मांग
क्षेत्र के नागरिकों और समाजसेवियों ने इस मामले का तुरंत संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस के उच्च अधिकारियों, विशेषकर संबंधित डीसीपी (East District) से हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का कहना है कि इस अवैध नेटवर्क को ध्वस्त कर मुख्य आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और संबंधित बीट कर्मियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की जाए ताकि क्षेत्र को नशे के इस जाल से मुक्त कराया जा सके। @DCP_SHAHDARA@ADCP1Shahdara@ShahdaraAddlDCP@ACPPuneet@ShoPreet@CrimeBranchDP@DelhiZone_NCB@CBIHeadquarters@DelhiGovDigital
स्वामी दयानंद अस्पताल में ओपीडी क्षेत्र के भीतर आटोक्लेव यूनिट निर्माण पर चिकित्सकों का विरोध और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ।
पूर्वी दिल्ली स्थित स्वामी दयानंद अस्पताल (दिलशाद गार्डन) के ओपीडी परिसर में आटोक्लेव यूनिट के निर्माण को लेकर चिकित्सकों और अस्पताल प्रशासन के बीच विवाद गहरा गया है। अत्यधिक भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक क्षेत्र में उच्च तापमान तथा भाप के दबाव पर काम करने वाली इस नसबंदी (स्टरलाइजेशन) प्रणाली की स्थापना से जन-सुरक्षा और संक्रमण नियंत्रण के मानकों पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
भीड़भाड़ वाले ओपीडी क्षेत्र में निर्माण कार्य
अस्पताल की दूसरी मंजिल पर ओपीडी क्लिनिक तथा पंजीकरण काउंटर स्थित हैं, जहाँ प्रतिदिन सैकड़ों मरीज और उनके संबंधी पहुँचते हैं। वर्तमान में दो पंजीकरण काउंटरों को स्थानांतरित करके एक नई दीवार का निर्माण किया जा रहा है, ताकि इस बंद कमरे में आटोक्लेव यूनिट स्थापित की जा सके। चिकित्सकों का तर्क है कि मुख्य आवाजाही वाले मार्ग में इस प्रकार की इकाई की स्थापना किसी दुर्घटना अथवा संक्रमण के प्रसार का कारण बन सकती है।
शल्य चिकित्सा (सर्जिकल) विभाग के डॉक्टरों का कहना है कि स्थापित स्वास्थ्य मानकों के अनुसार आटोक्लेव यूनिट को सामान्य जन-आवाजाही से दूर किसी सुरक्षित स्थान पर बनाया जाना चाहिए।
इस नए निर्माण के विषय में शल्य चिकित्सा विभाग के चिकित्सकों से कोई सुझाव या सहमति नहीं ली गई।
जानकारी के अनुसार, यह निर्माण कार्य अस्पताल प्रशासन (चिकित्सा अधीक्षक, उप चिकित्सा अधीक्षक तथा विभागाध्यक्ष) के स्तर पर संचालित किया जा रहा है।
विभागाध्यक्ष (डॉ. जगमोहन) के निष्कासन और तत्पश्चात पुनर्नियुक्ति को लेकर अस्पताल परिसर में पहले से ही विभिन्न चर्चाएँ चल रही हैं। इस प्रशासनिक उठापटक के बीच ओपीडी क्षेत्र में जोखिम भरे निर्माण कार्य शुरू कराए जाने पर चिकित्सकों ने असंतोष जताया है। समाचार पत्रों में इस विषय पर खबरें प्रकाशित होने के बाद भी निर्माण कार्य जारी है।
चर्चा में मामले पर अस्पताल प्रबंधक सुनीता का कहना है कि इस नई इकाई से आम जनता अथवा मरीजों को कोई सुरक्षा जोखिम नहीं होगा। एक अन्य प्रशासनिक अधिकारी के अनुसार, पंजीकरण काउंटर केवल दोपहर तक संचालित होते हैं और आटोक्लेव यूनिट को काउंटर बंद होने के पश्चात ही चलाया जाएगा।
इसके विपरीत, चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल के मुख्य ओपीडी ढांचे में ऐसा फेरबदल संक्रमण नियंत्रण के स्वीकृत मापदंडों के विपरीत है। @MCD_Delhi@AdditionalMcd@MoHFW_INDIA@DCP_SHAHDARA@HelthMinistry@LtGovDelhi@DelhiGovDigital@DPCC_Pollution संबंधित अधिकारी हेतु मामले की जांच कर कार्यवाही के संदर्भ में।
नंदनगरी डी-ब्लॉक में नियमों की धज्जियां: बेखौफ चल रहा अवैध शराब का कारोबार, पुलिस प्रशासन के दावों पर उठे सवाल।
नई दिल्ली: राजधानी के उत्तर-पूर्वी जिले के थाना नंदनगरी क्षेत्र अंतर्गत डी-ब्लॉक (जिसे स्थानीय स्तर पर 'स्कूल ब्लॉक' भी कहा जाता है) में अवैध शराब का कारोबार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, यहां खुलेआम और बेखौफ तरीके से घरों से शराब परोसी जा रही है। इस पूरे अवैध नेटवर्क को 'सुनीता' नामक महिला द्वारा संचालित किए जाने की खबर है।
स्थानीय सूत्रों की मानें तो इस अवैध कारोबार को इलाके के बीट ऑफिसर अशोक का संरक्षण (छत्रछाया) प्राप्त है, जिसके चलते शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है। हैरान करने वाली बात यह है कि हाल ही में जिला पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) द्वारा अवैध गतिविधियों पर नकेल कसने और लापरवाह बीट अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के कड़े निर्देश जारी किए गए थे। इसके बावजूद, नंदनगरी के इस इलाके में कानून का कोई खौफ नजर नहीं आ रहा है और कई घरों को मिनी शराब ठेके में तब्दील कर दिया गया है।
स्कूल ब्लॉक में मंडराता खतरा, निवासियों में रोष
जिस क्षेत्र में यह अवैध कारोबार चल रहा है, उसे 'स्कूल ब्लॉक' के नाम से जाना जाता है। रोजाना स्कूल आने-जाने वाले बच्चों, महिलाओं और स्थानीय नागरिकों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक बनती जा रही है। असामाजिक तत्वों के जमावड़े के कारण क्षेत्र का माहौल लगातार खराब हो रहा है और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्षेत्रीय निवासियों का कहना है कि आला अधिकारियों के सख्त रुख के बावजूद निचले स्तर पर बीट पुलिस की कथित मिलीभगत के कारण यह अवैध धंधा बंद होने का नाम नहीं ले रहा। अब देखना यह होगा कि समाचार संज्ञान में आने के बाद दिल्ली पुलिस के उच्च अधिकारी इस मामले पर क्या कड़ा संज्ञान लेते हैं और आरोपी बीट स्टाफ व अवैध कारोबार चलाने वालों पर क्या कार्रवाई की जाती है। @DCPNEastDelhi@NNagri60662@shonandnagrined@DelhiPolice@CPDelhi@CrimeBranchDP@DelhiZone_NCB@LtGovDelhi@dgovcbic@DelhiGovDigital
@VBN_DIGITAL इस सम्बन्ध में पूर्व में भी कई बार खबरें प्रकाशित हुई पर पुलिस द्वारा अभी तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। जागरूक लोगों का बड़ा सवाल। क्या वजीराबाद पुलिस इस अवैध गतिविधियों से बेखबर है, या सट्टे माफियाओं से मिली हुई है? आखिर स्थानीय पुलिस ठोस कार्यवाही करने में असमर्थ क्यों?
@VBN_DIGITAL इस सम्बन्ध में पूर्व में भी कई बार खबरें प्रकाशित हुई पर पुलिस द्वारा अभी तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। जागरूक लोगों का बड़ा सवाल। क्या वजीराबाद पुलिस इस अवैध गतिविधियों से बेखबर है, या सट्टे माफियाओं से मिली हुई है? आखिर स्थानीय पुलिस ठोस कार्यवाही करने में असमर्थ क्यों?
वजीराबाद थाने के नाक तले पनप रहा अवैध सट्टा और जुए का काला कारोबार, बीट ऑफिसर पर संरक्षण का आरोप।
नई दिल्ली: राजधानी के वेस्ट संत नगर (वजीराबाद थाना क्षेत्र) स्थित 25 फूटा रोड, सोम बाजार और पैराडाइज पब्लिक स्कूल के आसपास के इलाके में अवैध जुआ, सट्टा और 'तितली-कबूतर' का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह अवैध कारोबार पिछले कई महीनों से खुलेआम संचालित हो रहा है, जिससे क्षेत्र का माहौल खराब हो रहा है और आम नागरिकों, विशेषकर स्कूली बच्चों और महिलाओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
लक्ष्मण नाम के दबंग पर संचालन का आरोप
प्राप्त जानकारी और सूत्रों के अनुसार, इस पूरे गोरखधंधे का मास्टरमाइंड 'लक्ष्मण' नाम का एक स्थानीय दबंग व्यक्ति है। वह अपने गुर्गों के साथ मिलकर बिना किसी डर के इस अवैध साम्राज्य को चला रहा है। दिन-रात लगने वाले इस सट्टे के अड्डे के कारण इलाके में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है।
पुलिसिया कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा खेल बीट ऑफिसर की छत्रछाया में फलफूल रहा है। सूत्रों का दावा है कि स्थानीय बीट ऑफिसर नेकी राम की अनदेखी और कथित शह के कारण ही जुआरियों और सटोरियों के हौसले इतने बुलंद हैं।
थाना अध्यक्ष को दी गई सूचना
क्षेत्र में लगातार बिगड़ती स्थिति को देखते हुए जागरूक नागरिकों और सूत्रों द्वारा इस पूरे मामले की शिकायत सीधे थाना अध्यक्ष (SHO) को कॉल के माध्यम से दे दी गई है। अब देखना यह होगा कि वजीराबाद थाना पुलिस इस पर क्या सख्त कदम उठाती है।
स्थानीय लोगों की मांग
निवासियों की मांग है कि पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आए, इस अवैध नेटवर्क को ध्वस्त करे और संबंधित आरोपियों समेत लापरवाह पुलिसकर्मियों पर कड़ी कानूनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई करे। @DcpNorthDelhi@ShoWazirabad@CPDelhi@DelhiPolice@LtGovDelhi@CVCIndia@CPDelhi@CrimeBranchDP@DelhiPolice@govt_delhi
राजघाट पावर हाउस के पास ‘जसप्रीत गैस सर्विस’ में अवैध गैस कटिंग का खेल बेखौफ जारी, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल।
नई दिल्ली: राजघाट पावर हाउस नए कंचनपुरी बस डिपो के पास स्थिति 'जसप्रीत गैस सर्विस' इन दिनों अवैध गतिविधियों और सुरक्षा नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाने को लेकर विवादों में है। क्षेत्रीय चर्चाओं और सूत्रों के अनुसार, गैस एजेंसी परिसर में लंबे समय से बड़े पैमाने पर अवैध गैस कटिंग (सिलेंडरों से अवैध रूप से रिफिलिंग और गैस चोरी) का काला कारोबार बेखौफ फल-फूल रहा है। इस घोर लापरवाही से किसी बड़े हादसे की आशंका को लेकर स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस पूरे अवैध कारोबार को कथित तौर पर गैस एजेंसी के मैनेजर अंकित और गोदाम कीपर राजू का संरक्षण प्राप्त है। सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे इस रिफिलिंग और कटिंग के खेल में रोशन, सूरज, मखमेंदर, लालाराम, शमीम, पप्पू और बंटी की मुख्य भूमिका बताई जा रही है। वहीं, स्थानीय सूत्रों का दावा है कि 'पिंटू' नामक व्यक्ति पूरे तंत्र का वित्तीय लेनदेन और अवैध वसूली संभालने का काम देखता है। घनी आबादी और बस डिपो के पास जारी यह खतरनाक गतिविधि किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व में भी दो बार समाचार प्रकाशित किए जा चुके हैं। जनशिकायत के बाद उच्च अधिकारियों की ओर से औपचारिक जवाब तो आया कि "जानकारी संबंधित अधिकारी को भेज दी गई है और जल्द कार्रवाई की जाएगी", लेकिन धरातल पर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। अधिकारियों का यह उदासीन रवैया अवैध कारोबारियों के हौसले पस्त करने के बजाय और बुलंद कर रहा है।
आस-पास के नागरिकों और पीड़ितों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि कागजी आश्वासनों से हटकर मौके पर निष्पक्ष छापेमारी की जाए। स्थानीय लोगों की मांग है कि:
अवैध रिफिलिंग और कटिंग में शामिल सभी आरोपितों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने पर एजेंसी के खिलाफ दंडात्मक कदम उठाए जाएं।
वित्तीय हेरफेर और अवैध वसूली में शामिल पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश किया जाए।
अब देखने वाली बात यह होगी कि लगातार उठ रही आवाजों और औपचारिक बयानों के बाद संबंधित विभाग और आला अधिकारी इस अवैध नेटवर्क पर कब और क्या ठोस कार्रवाई करते हैं। @MoPNG_eSeva@PetroleumMin@HardeepSPuri@OfficeofHSP@CMODelhi@LtGovDelhi@CPDelhi@DelhiPolice@DCPCentralDelhi@HMOIndia@PMOIndia@AmitShah@AmitShahOffice@rashtrapatibhvn@VPIndia@loksabhaspeaker@LokSabhaSectt@MCD_Delhi@dtptraffic@IndianOilcl@ArvindKejriwal@AtishiAAP@AAPDelhi@SanjayAzadSln@AamAadmiParty@INCDelhi@BJP4Delhi@RahulGandhi@rajnathsingh@yadavakhilesh
राजघाट पावर हाउस के पास जसप्रीत गैस सर्विस में अवैध गैस कटिंग का खेल जारी, जनहित में कड़ी कार्रवाई की मांग।
नई दिल्ली /राजधानी दिल्ली के दरियागंज थाना क्षेत्र राजघाट पावर हाउस नए कंचनपुरी बस डिपो के समीप स्थित 'जसप्रीत गैस सर्विस' में कथित रूप से चल रही अवैध गतिविधियों को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। बताया गया है कि बड़ा गोदाम राजघाट पॉवर हाउस पर, मेन ऑफिस शॉप नंबर 18, आंबेडकर स्टेडियम, दिल्ली गेट पर है। सूत्रों और क्षेत्रीय चर्चाओं के अनुसार, गैस एजेंसी के मैनेजर अंकित और गोदाम कीपर राजू के संरक्षण में गैस कटिंग (सिलेंडरों से अवैध रूप से गैस निकालना) का कारोबार बेखौफ फल-फूल रहा है।
स्थानीय स्तर पर आ रही जानकारी के मुताबिक, इस रिफिलिंग और कटिंग के खेल में रोशन, सूरज, मखमेंदर, लालाराम, शमीम और बंटी की मुख्य भूमिका बताई जा रही है। वहीं, 'पिंटू' नामक व्यक्ति पर पूरे तंत्र से अवैध वसूली और वित्तीय लेनदेन संभालने का आरोप है।
बताया जा रहा है कि पूर्व में इस संबंध में खबरें प्रकाशित होने पर स्थानीय पुलिस ने कुछ हद तक कार्रवाई की थी। लेकिन कुछ भ्रष्टपुलिकर्मियों द्वारा अवैध रकम लेनदेन के चलते दिल्ली पुलिस की साख को गिराने का काम किया है, जिस कारण आरोपी पक्ष बेखौफ होकर अवैध काम को अंजाम दे रहे हैं।
इस गोरखधंधे के कारण आम उपभोक्ताओं को कम वजन (गैस कम) वाले सिलेंडर मिल रहे हैं, जिससे उनकी जेब पर डाका तो पड़ ही रहा है, साथ ही रिहायशी इलाके में इस तरह की अवैध रिफिलिंग से किसी बड़े हादसे की भी आशंका बनी रहती है।
उपभोक्ताओं को कम गैस की समस्या और सुरक्षा जोखिमों से स्थायी छुटकारा कब मिलेगा?
पूर्व में हुई पुलिस कार्रवाई के बावजूद यह नेटवर्क दोबारा कैसे सक्रिय हो गया?
संबंधित खाद्य एवं आपूर्ति विभाग और उच्च पुलिस अधिकारी इस पूरे प्रकरण की गहनता से जांच कर आरोपियों पर सख्त कार्रवाई कब करेंगे?
क्षेत्रीय निवासियों ने संबंधित उच्च अधिकारियों से मामले का तुरंत संज्ञान लेने और दोषी पाए जाने वाले मैनेजर, गोदाम कीपर तथा उनके सहयोगियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। @MoPNG_eSeva@DCPCentralDelhi@PetroleumMin@HardeepSPuri@OfficeofHSP@CMODelhi@LtGovDelhi@CPDelhi@DelhiPolice@DCPNEastDelhi@HMOIndia@PMOIndia@AmitShah@AmitShahOffice@rashtrapatibhvn@VPIndia@loksabhaspeaker@LokSabhaSectt@MCD_Delhi@dtptraffic@IndianOilcl@ArvindKejriwal@AtishiAAP@AAPDelhi@SanjayAzadSln@AamAadmiParty@INCDelhi@BJP4Delhi@RahulGandhi@rajnathsingh@yadavakhilesh@SupriyaShrinate@FanPriyankaGV मामले की गहनता से जांच कर उचित कार्यवाही के संदर्भ में।
शाहदरा के निपुण टॉवर स्थित 'हाइपर क्लब' में नियमों की धज्जियां: देर रात तक अवैध हुक्का और अश्लील डांस का आरोप।
शाहदरा (दिल्ली)
आनंद विहार थाना क्षेत्र अंतर्गत कम्युनिटी सेंटर स्थित निपुण टॉवर (G1, 15/16) में संचालित 'हाइपर क्लब' इन दिनों गंभीर अनियमितताओं और अवैध गतिविधियों को लेकर चर्चा में है। स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस क्लब में आबकारी और सुरक्षा नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। चर्चा है कि
नियमों के मुताबिक वाणिज्यिक गतिविधियों और क्लबों के संचालन की समय-सीमा निर्धारित है, लेकिन सूत्रों द्वारा यह क्लब रात 12 बजे के बाद भी बेधड़क चलता रहता है। देर रात 2 बजे तक क्लब के कपाट खुले रहते हैं, जहां आने वाले ग्राहकों को बिना किसी भय के सुविधाएं परोसी जा रही हैं।
सूत्रों का दावा है कि क्लब के भीतर अवैध रूप से हुक्का बार चलाया जा रहा है और अश्लील डांस की गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं। स्थानीय निवासियों और सूत्रों की मानें तो यह पूरा घटनाक्रम स्थानीय बीट अधिकारियों की ढुलमुल कार्यशैली और कथित संरक्षण के साए में चल रहा है, जिससे इलाके का माहौल खराब हो रहा है, साथ ही बीटकर्मियों द्वारा दिल्ली पुलिस की छवि को धूमिल किया जा रहा है।
क्षेत्रीय नागरिकों और जागरूक लोगों ने पुलिस प्रशासन एवं उच्च अधिकारियों से मामले का तत्काल संज्ञान लेने की अपील की है,कि क्लब के लाइसेंस और संचालन से जुड़े दस्तावेजों की गहनता से जांच हो।
देर रात तक चल रही अवैध गतिविधियों और हुक्का बार पर तुरंत रोक लगाई जाए।
यदि स्थानीय पुलिस कर्मियों की संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ भी सख्त प्रशासनिक कदम उठाए जाएं।
अब देखना यह होगा कि शाहदरा जिला पुलिस प्रशासन इस खबर का संज्ञान लेकर संबंधित क्लब संचालक और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या ठोस कानूनी कार्रवाई करता है। @MCD_Delhi@DCP_SHAHDARA@ADCP1Shahdara@ShoAnandvhar@DelhiPolice@CPDelhi@LtGovDelhi@LokNiwasDelhi
क्या यूपी पुलिस की छवि को खराब करने के उद्देश्य से कुछ वर्दीधारियो ने दबंगों के साथ मिलकर FIR लिखवाई, जिसमें मारपीट करने वाला घटनास्थल से 2 किमी दूर था। आखिर इतनी दूर से मारपीट कैसे कर सकता है, कहीं यह मामला भ्रष्टाचार से संबंधित तो नही?
मेरठ/दिल्ली:
उत्तर प्रदेश के जनपद मेरठ के थाना प्रशिक्षितगढ़ से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां FIR में मारपीट करने वाला व्यक्ति घटना स्थल से 2 किलोमीटर दूर था। जिसमें जो मारपीट करने वाला शख्स अंकुश कुमार नाम का बताया गया है जो दिल्ली पुलिस का जवान हैं, खुद अचंबे में है। उसका दावा है कि जिस समय (सुबह 10:30 बजे) उन पर गांव सोना (थाना परीक्षितगढ़, मेरठ) में मारपीट और धमकी देने का आरोप लगाया गया है, उस समय मैं गांव से करीब 2 किलोमीटर दूर रास्ते में था।
और उसके खिलाफ एफआईआर करवाने वाले गांव के ही कुछ दबंग व्यक्ति अखिलेश, रॉकी,अरविंद आदि है।
पीड़ित अंकुश कुमार का यह भी आरोप है कि विपक्ष जबरन खड़ी फसल काटकर ले जा रहे थे। इस संबंध में पीड़ित ने 13 और 14 अगस्त को दिल्ली से ही 112 नंबर और परीक्षितगढ़ पुलिस (SO) को सूचित किया था, लेकिन मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। इस मामले में जब एक दिल्ली पुलिस के जवान को ही न्याय नहीं मिल पा रहा है तो यहां ऐसी स्थिति में एक आम नागरिक के लिए न्याय मिलना एक मील का पत्थर जैसा साबित होगा, यानी न्याय कोसों दूर रहेगा। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सपना है कि प्रदेश में सबको न्याय मिले लेकिन कुछ वर्दीधारियो के द्वारा उनके सपनों पर पानी फेरा जा रहा है।
विगत, 28 अगस्त की सुबह घटना की सूचना मिलते ही अंकुश कुमार अपनी गाड़ी (DL10CV2286) से दिल्ली से गांव के लिए निकला।
सुबह 10:20 - 10:29 बजे: पीड़ित का दावा है कि वे मेरठ एक्सप्रेसवे से होते हुए गांव से 2 किमी दूर था। इसी दौरान रास्ते में उन्हें 112 नंबर की पीसीआर गाड़ी मिली, जिसे रोककर उन्होंने बातचीत का वीडियो भी बनाया।
सुबह 10:35 बजे: पीड़ित अपने घर पहुंचे, जिसके बाद स्थानीय पुलिस भी वहां आ गई।
पीड़ित ने सवाल उठाया है कि जब वे सुबह 10:30 बजे गांव में मौजूद ही नहीं थे और रास्ते में 112 की गाड़ी के साथ थे, तो वे 2 किलोमीटर दूर से घटना स्थल पर हमला कैसे कर सकता हैं? कहीं ऐसा तो नहीं कि उसकी आत्मा ने वहां पहुंचकर मारपीट की हो?
अंकुश कुमार का यह भी सवाल है कि क्या महज 1 घंटे यानी 11:35 सुबह तक झगड़ा और FIR दोनों तय हो गए?
अंकुश कुमार का यह भी आरोप है कि कुछ पुलिस कर्मियों ने शिकायतकर्ता अखिलेश के साथ साठगांठ कर जल्दबाजी में यूपी पुलिस की छवि को खराब करते हुए फर्जी मुकदमा (U/s 351(3)/352/333 BNS) दर्ज करा दिया है।
खास बात यह है कि एफआईआर में शिकायतकर्ता ने स्वयं माना है कि वह खेत से एक गठ्ठड चारा काट कर लाया था। पीड़ित ने आरोप लगाया कि 112 पर शिकायत करने और दिल्ली पुलिस में होने के कारण, यूपी पुलिस की छवि को खराब करने के उद्देश्य से स्थानीय कुछ पुलिस कर्मियों ने रंजिश रखते हुए यह एकतरफा कार्यवाही की है।
पीड़ित दिल्ली पुलिस दिल्ली पुलिस जवान ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए निम्नलिखित सबूतों की जांच की मांग की है।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा पर गाड़ी (DL10CV2286) की टाइमिंग की जांच की जाए,मोबाइल नंबर (7428323849) की कॉल डिटेल, 112 पर की गई कॉल्स के मैसेज और लोकेशन डेटा और
सुबह 10:00 से 11:15 बजे के बीच 112 पीसीआर गाड़ी, थाना पुलिस की जीपीएस लोकेशन के साक्ष्य और मौके पर पुलिस के पहुंचने और रास्ते में 112 की गाड़ी से हुई बातचीत के वीडियो उपलब्ध कराया जाए।
इस संबंध में पीड़ित ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (1076) पर भी शिकायत दर्ज कराई है और उच्च अधिकारियों से गुहार लगाई है कि झूठी एफआईआर को रद्द कर दोषी पुलिसकर्मियों और साजिशकर्ताओं पर कानूनी कार्यवाही की जाए। @Uppolice@dgpup@UPGovt@CBIHeadquarters@digrangemeerut@adgzonemeerut@meerutpolice@myogiadityanath@CMOfficeUP@HMOIndia@PMOIndia@ACOUPPolice@VigilanceUP@India_NHRC
वजीराबाद रोड पर 'स्वीट्स' के पास सज रही जाम की महफिल: पुलिसिया 'छत्रछाया' में बेखौफ जारी नशे का काला कारोबार!
उत्तर पूर्वी दिल्ली के थाना भजनपुरा क्षेत्र अंतर्गत वजीराबाद रोड पर स्थित अग्रवाल स्वीट्स के बराबर में खुलेआम कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, चिकन और जूस के स्टॉल की आड़ में लंबे समय से अवैध रूप से शराब पिलाने (आहाता) का काला कारोबार बेधड़क फल-फूल रहा है। पूर्व में भी इस संबंध में कई बार प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किए जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस व प्रभावी प्रशासनिक कार्यवाही देखने को नहीं मिली है।
अरुण नामक व्यक्ति का 'बेखौफ' साम्राज्य
स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस पूरे अवैध नेटवर्क को 'अरुण' नामक व्यक्ति द्वारा संचालित किया जा रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि कानून के शिकंजे से बेफिक्र होकर चलाया जा रहा यह गोरखधंधा क्या बिना प्रशासनिक मिलीभगत के संभव है? क्षेत्र में चर्चा आम है कि स्थानीय पुलिस की छत्रछाया और कथित सांठगांठ के चलते ही इस अवैध काम पर अब तक आंच नहीं आई है।
नशेड़ियों का जमावड़ा, महिलाओं की सुरक्षा पर सीधा खतरा
शाम ढलते ही इस मुख्य मार्ग पर नशेड़ियों का हुजूम जमा होने लगता है, जिससे पूरे इलाके में असामाजिक माहौल बन जाता है। सबसे बुरा असर क्षेत्र की महिलाओं और बच्चियों की आवाजाही पर पड़ रहा है।
मुख्य मार्ग होने के बावजूद महिलाएं वहां से गुजरने में असहज और भयभीत महसूस करती हैं।
शराबियों द्वारा फब्तियां कसने और हुड़दंग मचाने की आशंका से स्थानीय निवासियों में भारी रोष है।
उठते गंभीर सवाल:
क्या थाना अध्यक्ष की मिलीभगत है? लगातार खबरों के प्रकाशन के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई न होना क्या पुलिसिया सांठगांठ की ओर इशारा करता है?
जिम्मेदारी से मुंह क्यों मोड़ा? क्या स्थानीय पुलिस और प्रशासन की महिला सुरक्षा के प्रति कोई नैतिक या कानूनी जवाबदेही नहीं बनती?
हादसे का इंतजार? क्या भजनपुरा पुलिस किसी बड़ी आपराधिक वारदात या अप्रिय घटना के होने के बाद ही नींद से जागेगी?
क्षेत्रीय नागरिकों ने आला पुलिस अधिकारियों से मांग की है कि इस अवैध शराब के धंधे पर तुरंत कड़ा संज्ञान लिया जाए और संलिप्त लोगों के साथ-साथ अनदेखी करने वाले पुलिसकर्मियों पर भी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। @DCPNEastDelhi@ACPBhajanpura@BhajanpuraSho@CPDelhi@CrimeBranchDP@DelhiPolice@LtGovDelhi@govt_delhi
दिल्ली के सत्य निकेतन में दर्दनाक हादसा: 5 मंजिला इमारत ढही, दर्जनों बच्चों के दबने की आशंका; MCD और पुलिस पर उठे सवाल।
नई दिल्ली: राजधानी के सत्य निकेतन इलाके में एक बड़ा हादसा सामने आया है, जहां एक 5 मंजिला इमारत अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गई। इस बहुमंजिला इमारत में कोचिंग और पीजी (पेइंग गेस्ट) संचालित होने की खबर है। हादसे के वक्त इमारत में लगभग 40 से 50 बच्चे मौजूद थे, जिनके मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है।
घटना की सूचना मिलते ही राहत एवं बचाव कार्य तेजी से शुरू कर दिया गया है। फायर ब्रिगेड, एनडीआरएफ (NDRF) और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचकर मलबे को हटाने और बच्चों को सुरक्षित निकालने के प्रयास में जुटी हुई हैं।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लापरवाही
सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, इस इमारत पर नगर निगम (MCD) द्वारा पहले भी नोटिस चिपकाया गया था। आरोप है कि इसके बावजूद इमारत का व्यावसायिक इस्तेमाल बदस्तूर जारी रहा। चौंकाने वाली बात यह भी सामने आ रही है कि जिस वक्त इमारत गिरी, उस समय उसमें रह रहे बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाले बिना ही बेसमेंट के निर्माण या मरम्मत का काम कराया जा रहा था।
स्थानीय निवासियों का आक्रोश: भ्रष्टाचारी का आरोप
हादसे के बाद क्षेत्र में भारी तनाव और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों का सीधे तौर पर मानना है कि यह हादसा स्थानीय पुलिस और MCD की कथित मिलीभगत व भ्रष्टाचार का नतीजा है। लोगों का कहना है कि नोटिस के बावजूद अवैध निर्माण और बिना सुरक्षा इंतजामों के बेसमेंट की खुदाई का काम जारी रहना प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है।
फिलहाल प्राथमिकता मलबे में फंसे बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने और उन्हें नजदीकी अस्पतालों में तुरंत इलाज मुहैया कराने की है। वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और मामले की गंभीरता को देखते हुए अन्य सभी क्षेत्रों में पांच मंजिला इमारतों पर कार्यवाही व जांच के आदेश दिए जाने की संभावना है। @MCD_Delhi@DelhiPolice@LtGovDelhi@govt_delhi@DelhiGovDigital@CPDelhi@HMOIndia@PMOIndia@CMODelhi
सुल्तानपुर (यूपी): दोस्तपुर में इंस्टाग्राम पर फ्रॉड का सनसनीखेज मामला, शादी और झूठे सपने दिखाकर युवती का मानसिक शोषण।
दोस्तपुर, सुल्तानपुर: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के दोस्तपुर थाना क्षेत्र से एक गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम (Instagram) के जरिए एक युवक पर आरोप लगा है कि उसने एक युवती को झूठे वादों, शादी के सपने और बड़े-बड़े झांसों में फंसाकर उसका मानसिक व भावनात्मक शोषण किया है। पीड़ित युवती इस समय गंभीर मानसिक तनाव से गुजर रही है और उसने स्थानीय पुलिस प्रशासन से आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।सोशल मीडिया पर किसी को झूठे वादे करके ठगना, ब्लैकमेल करना या झांसा देना पूरी तरह गैरकानूनी और दंडनीय अपराध है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के तहत ऐसे मामलों में कड़ी धाराओं में मामला दर्ज किया जाता है:
BNS धारा 318 (4) [पुराणी IPC धारा 420]: छल (Cheating) करना और धोखा देकर विश्वासघात करने पर सख्त सजा का प्रावधान है।
BNS धारा 69: यदि कोई पुरुष किसी महिला को शादी का झूठा वादा देकर या पहचान छुपाकर संबंध बनाता है या धोखा देता है, तो यह गैर-जमानती अपराध है।
IT Act धारा 66D: कंप्यूटर संसाधन या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करके धोखा देने (Cheating by Impersonation / Online Fraud) पर जेल और जुर्माने का नियम है।
मानसिक प्रताड़ना व ब्लैकमेलिंग (BNS धारा 351/308): किसी को डराना, धमकाना या मानसिक रूप से पीड़ित करने पर सख्त पुलिस कार्रवाई का प्रावधान है।
पीड़िता ने स्थानीय पुलिस प्रशासन से गुहार लगाई है कि मामले का संज्ञान लेकर आरोपी पर तत्काल FIR दर्ज की जाए। इस संबंध में उचित कार्रवाई और ध्यान आकर्षित करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों के आधिकारिक 'X' (ट्विटर) हैंडल संलग्न हैं। लड़के का नंबर:- 6306969147 @112UttarPradesh@sultanpurpolice@sultanpurpolice@CMOfficeUP@Uppolice@dgpup
@cybercrimeup @myogiadityanath@SultanpurDm@homeupgov@MahalaYoga@HRMUP75
पूर्वी दिल्ली: गीता कॉलोनी शमशान घाट पार्किंग बनी अवैध लोडिंग-अनलोडिंग का अड्डा, पार्किंग माफिया और निगम इंस्पेक्टर की मिलीभगत पर उठे सवाल
पूर्वी दिल्ली के गीता कॉलोनी शमशान घाट स्थित नगर निगम (MCD) से अधिकृत पार्किंग क्षेत्र इस समय विवादों के घेरे में है। नगर निगम के नियमों को ताक पर रखकर यहाँ पार्किंग माफिया का बोलबाला बना हुआ है। स्थानीय स्तर पर मिल रही शिकायतों के अनुसार, पार्किंग स्थल का उपयोग वाहनों की सामान्य पार्किंग के लिए कम और व्यावसायिक ट्रकों में खुलेआम सामान की लोडिंग-अनलोडिंग के लिए अधिक किया जा रहा है।
नियमों की अनदेखी और भ्रष्टाचार के मुख्य बिंदु:
* अवैध लोडिंग-अनलोडिंग: निगम अधिकृत पार्किंग का व्यावसायिक माल वाहकों (ट्रकों) के अनधिकृत लोडिंग-अनलोडिंग जोन के रूप में इस्तेमाल।
* रेट बोर्ड का गायब होना: नियमों के अनुसार पार्किंग स्थल के बाहर सरकारी दर सूची (Rate List) का बोर्ड लगाना अनिवार्य है, लेकिन यहाँ ऐसा कोई बोर्ड नहीं लगाया गया है, जिससे वाहन चालकों से मनमाने पैसे वसूलने की आशंका बनी रहती है।
* निगम अधिकारी की भूमिका पर सवाल: आरोप हैं कि आर.पी. सेल (Remunerative Project Cell) के एरिया इंस्पेक्टर तरुण की देखरेख और मिलीभगत से यह सारा खेल चल रहा है, जिससे निगम के राजस्व को सीधा नुकसान पहुँच रहा है।
प्रशासनिक स्तर पर त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता:
* निष्पक्ष जांच: आर.पी. सेल के संबंधित अधिकारी/इंस्पेक्टर के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जाए ताकि राजस्व नुकसान की जवाबदेही तय हो सके।
* पार्किंग ठेके की समीक्षा: पार्किंग माफिया के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए पार्किंग स्थल का लाइसेंस तुरंत रद्द किया जाए।
* पारदर्शिता सुनिश्चित करना: पार्किंग स्थल के प्रवेश द्वार पर स्पष्ट रेट बोर्ड और संपर्क नंबर तुरंत लगाए जाएं।
क्या आप इस आर्टिकल को किसी विशिष्ट अधिकारी (जैसे एमसीडी कमिश्नर या स्थानीय पार्षद) को भेजने के लिए शिकायत पत्र के प्रारूप (Formal Complaint Letter) में बदलना चाहते हैं, या किसी समाचार पत्र के लिए प्रेस रिलीज के रूप में तैयार करना चाहते हैं?
@MCD_Delhi@dtptraffic@SplCPTrafficDel@DelhiPolice@CellDelhi@CrimeBranchDP@CPDelhi@LtGovDelhi
@MoPNG_eSeva LPG गैस एजेंसियों की अवैध गतिविधियों पर संबंधित अधिकारियों की कोई नज़र नहीं, स्थानीय लोगों व चर्चाओं में स्थानीय पुलिस से लेकर एजेंसियों के ठेकेदारों तक भ्रष्टाचार के घेरे में। आखिर कैसे हो समाधान?
सरकारी सीयूजी (CUG) सिम या आपातकालीन ड्यूटी नंबर का 24 घंटे तक बंद रहना केवल एक तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि जनसुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा सवालिया निशान है। ट्रैफिक पुलिस जैसे आपातकालीन विभाग में हर एक मिनट की देरी किसी बड़े हादसे या सड़क जाम की स्थिति को गंभीर बना सकती है।
इस विषय पर प्रमुख सवाल और प्रशासनिक बिंदु:
1. आपातकालीन सेवा की निरंतरता (Emergency Continuity)
बैकअप व्यवस्था: क्या दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के पास सीयूजी नंबर खराब या बंद होने की स्थिति में तत्काल ऑटो-डाइवर्ट (Auto-divert) या बैकअप लाइन की सुविधा उपलब्ध नहीं है?
आपातकालीन प्रोटोकॉल: यदि कोई नागरिक किसी दुर्घटना, गंभीर जाम या एम्बुलेंस को रास्ता दिलाने के लिए सिविल लाइन्स ट्रैफिक सर्किल से संपर्क करना चाहे, तो इस लापरवाही का जिम्मेदार कौन होगा?
2. निगरानी और तकनीकी रखरखाव (Monitoring & Accountability)
इंटरनल ऑडिट: 24 घंटे तक एक महत्वपूर्ण सरकारी नंबर बंद रहने के बावजूद संबंधित अधिकारियों या आईटी सेल को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई?
हेल्पलाइन रिपोर्टिंग पर कार्रवाई: जब नागरिक द्वारा ट्रैफिक हेल्पलाइन पर इसकी सूचना दे दी गई, तो तुरंत नंबर चालू कराने या वैकल्पिक नंबर जारी करने में देरी क्यों हुई?
3. जनसंवाद और पारदर्शिता (Public Communication)
वैकल्पिक नंबर का न होना: नंबर बंद होने की स्थिति में सोशल मीडिया या आधिकारिक पोर्टल पर तुरंत किसी वैकल्पिक नंबर की घोषणा क्यों नहीं की गई?
अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करने हेतु ट्वीट ड्राफ्ट (यदि आप इसे पोस्ट करना चाहें):
> महोदय, ट्रैफिक सर्किल सिविल लाइन्स का सरकारी सीयूजी नंबर (8750871462) पिछले लगभग 24 घंटे से बंद आ रहा है। ट्रैफिक हेल्पलाइन पर सूचित करने के बाद भी नंबर सक्रिय नहीं हुआ है।
आपातकालीन स्थिति में नागरिक किस नंबर पर संपर्क करें? कृपया इस लापरवाही का संज्ञान लेकर नंबर तुरंत चालू करवाएं और वैकल्पिक नंबर जारी करें।
@dtptraffic@DelhiPolice@CPDelhi
राजघाट पावर हाउस क्षेत्र में एलपीजी की धड़ल्ले से कालाबाजारी: कटिंग और घटतौली का बड़ा खेल, पुलिस के नाम पर उगाही का आरोप।
नई दिल्ली: राजधानी के राजघाट पावर हाउस स्थित न्यू कंचनपुरी बस डिपो क्षेत्र में रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडरों से गैस चोरी (कटिंग) और कालाबाजारी का एक बड़ा सिंडिकेट सामने आया है। आम उपभोक्ताओं को पूरी कीमत चुकाने के बावजूद कम वजन के सिलेंडर दिए जा रहे हैं, जबकि चोरी की गई गैस को होटलों और चाय की दुकानों पर ऊंचे दामों में ब्लैक किया जा रहा है।
सिंडिकेट का जाल और संलिप्त एजेंसियां
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह अवैध कारोबार मुख्य रूप से चार गैस एजेंसियों के नाम की आड़ में चलाया जा रहा है:
इण्डियन जसप्रीत गैस एजेंसी
बनारस गैस एजेंसी
पैरा टायर गैस एजेंसी
ऊषा गैस एजेंसी
माफिया और उगाही का गठजोड़
इस गोरखधंधे को सुनियोजित तरीके से चलाने के लिए ठेकेदारों और दलालों का एक पूरा नेटवर्क सक्रिय है:
मुख्य ठेकेदार: रोशन, राम कुमार, सूरज, मुगमिंदर, हरेंद्र और लाला क्षेत्र में गैस की हेराफेरी, रीफिलिंग और कटिंग के काम को धड़ल्ले से अंजाम दे रहे हैं।
पुलिस के नाम पर वसूली: असलम और रहमत नामक दो व्यक्तियों पर आरोप है कि वे इन अवैध ठेकेदारों से 'मंथली' (उगाही) वसूलते हैं और स्थानीय पुलिस के नाम पर लेन-देन का पूरा प्रबंधन करते हैं।
जनता का आक्रोश और प्रशासन से मांग
महंगाई के इस दौर में पूरे पैसे देने के बाद भी सिलेंडरों में कई किलो गैस कम निकलने से स्थानीय निवासियों में भारी रोष है। जनता का सीधा सवाल है कि प्रशासन और खाद्य आपूर्ति विभाग की नाक के नीचे यह भ्रष्टाचार कब तक चलेगा।
क्षेत्रीय निवासियों ने खाद्य आपूर्ति विभाग, वरिष्ठ अधिकारियों और दिल्ली पुलिस कमिश्नर से निम्नलिखित मांगें की हैं राजघाट कंचनपुरी डिपो क्षेत्र में तत्काल सघन छापेमारी की जाए।
गैस कटिंग सिंडिकेट में शामिल सभी ठेकेदारों, दलालों और संबंधित एजेंसियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
इस गिरोह को संरक्षण देने वाले संदिग्ध पुलिसकर्मियों की गहन जांच कर उन पर कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाए। @MoPNG_India @HardeepSPuri@Indian_Oil_Corp@indianoil_ltd@IndianOil_Delhi@DelhiIocl @IndianOil_Hlp @dmcentraldelhi@DelhiGovDigital @OffofLGDelhi @delhipolice@cmodelhi@hmoindia@pmoindia संबंधित अधिकारी हेतु मामले की गहनता से जांच कर कार्यवाही के संदर्भ में।
ग्राउंड रिपोर्ट: 3 से 5 बजे के बीच खुला मजनू का टीला-खैबर पास का सच, किसके ‘प्रसाद’ पर चल रहा ‘सुरेश’ का सिंडिकेट?
नई दिल्ली: दोपहर के 3 बज रहे थे। दिल्ली का मजनू का टीला और खैबर पास इलाका दिखने में आम दिनों जैसा ही लग रहा था, लेकिन अगले दो घंटों में जो तस्वीर सामने आई, उसने राजधानी की सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था के दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दीं। दोपहर 3 से शाम 5 बजे के बीच की गई ऑन-ग्राउंड कवरेज इस बात का पुख्ता सबूत है कि इस इलाके में अवैध पार्किंग और डग्गामार (अनधिकृत) बसों का धंधा कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित सिंडिकेट है।
कवरेज से सामने आए 4 बड़े खुलासे
दिन-दहाड़े नियम-कायदों की धज्जियां
दोपहर 3 बजे से ही सर्विस रोड पर अनधिकृत टूरिस्ट बसों का जमावड़ा लगना शुरू हो जाता है। शाम 5 बजे यानी पीक ट्रैफिक आवर्स तक पहुंचते-पहुंचते यह पूरी सड़क को निगल लेता है। यह समयबद्ध व्यवस्था साफ दर्शाती है कि इस सिंडिकेट को प्रशासनिक कार्रवाई का रत्ती भर भी खौफ नहीं है।
सुरेश’ का सिंडिकेट और हफ्ता वसूली
कवरेज के दौरान सामने आया कि यह पूरा तंत्र 'सुरेश' नामक सरगना द्वारा संचालित किया जा रहा है, जो खुलेआम दावा करता है कि "ऊपर तक प्रसाद पहुंचता है।" बिना पुलिस और MCD की मौन सहमति या मिलीभगत के इतनी व्यस्त मुख्य सड़क पर घंटों अवैध पार्किंग और ओवरलोडिंग का चलना नामुमकिन है।
सुरेश और उसके तंत्र का खूनी खेल: सुरक्षा मानकों की अनदेखी
हिमाचल प्रदेश, पंजाब और जम्मू-कश्मीर जाने वाली इन टूरिस्ट बसों में बिना किसी कमर्शियल फ्रेट परमिट के छतों और डिग्गियों में भारी व्यावसायिक सामान ठूंस-ठूंसकर लादा जा रहा है। ओवरलोडिंग का यह खेल हर पल किसी बड़े सड़क हादसे को दावत दे रहा है।
आपातकालीन सेवाओं पर लगा ब्रेक
शाम 5 बजे जब सड़क पर आम ट्रैफिक का भारी दबाव होता है, तब इस अवैध अतिक्रमण के कारण एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी आपातकालीन गाड़ियां घंटों जाम में फंसी रहती हैं। यह स्थिति स्थानीय निवासियों और राहगीरों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ है।
क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है प्रशासन?
मजनू का टीला की सर्विस रोड पर अवैध कब्जा कोई नया मामला नहीं है, लेकिन 3 से 5 बजे के बीच का यह तांडव बताता है कि 'बस माफिया' के हौसले किस कदर बुलंद हैं। जब मुख्य मार्ग पर खुलेआम नियमों को तार-तार किया जा रहा हो, तब ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय प्रशासन की खामोशी कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
अब देखना यह होगा कि इस ग्राउंड रिपोर्ट के बाद जिम्मेदार विभाग जागते हैं या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही नींद से जागने की रस्म निभाई जाएगी। @dtptraffic@dcptcr@DelhiPolice@DelhiTrafficPol@dtchq_delhi@SplCPTrafficDel@TI_Civillines@DelhiPwd@DelhiGovDigital@CrimeBranchDP@LtGovDelhi@CPDelhi@cmodelhi जांच कर कार्यवाही के संदर्भ में।