“My Children Are Hungry”: 33 Lakh Get ECI’s Notices, Delhi’s Poor Left Struggling.
@Saurabh_Unmute
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“उस मासूम की क्या गलती थी?”
सत्य निकेतन की त्रासदी में अपने बेटे, अर्पित जाज, को खोने वाला परिवार डबडबाई आंखों से यही सवाल पूछ रहा है।
अगर अच्छे और सुरक्षित हॉस्टल होते, तो उन्हें अपने बच्चे को ऐसी खतरनाक जगह में रखने के लिए मजबूर न होना पड़ता। और अगर सुरक्षा मानकों का सच में पालन होता, तो शायद यह त्रासदी होती ही नहीं - एक ऐसी त्रासदी, जिसकी कल्पना उन बच्चों और उनके माता-पिता ने सपने में भी नहीं की होगी।
सिस्टम की गैर-जिम्मेदारी और भ्रष्टाचार ने सपनों से भरी कई जिंदगियां छीन लीं और उम्मीदों से भरे कई परिवारों को उजाड़ दिया।
अर्पित का परिवार भी पूरे देश की तरह जवाबदेही मांग रहा है। वे चाहते हैं कि छात्रों की जिंदगी की जिम्मेदारी तय हो, ताकि फिर किसी माता-पिता को अपने बच्चे को इस तरह खोने का दर्द न सहना पड़े।
सिस्टम से मेरा सीधा सवाल है: नए और सुरक्षित हॉस्टल क्यों नहीं बनाए जा रहे? छात्रों को असुरक्षित PG में रहने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ रहा है? सत्य निकेतन हादसे की जांच कहां तक पहुंची?
ऑल्ट न्यूज़ को इस महीने ज़रूरत है ₹11 लाख की. हमारा फंडरेज़िंग लक्ष्य पूरा करने के लिए अगर 2,200 लोग ₹500 का योगदान करें तो टारगेट पूरा हो सकता है.
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भारतीय स्टेट बैंक ने एक लाख करोड़ का लोन छोड़ दिया। NCLT के बाद एक लाख करोड़ वसूलने की उम्मीद होती भी है क्या? क्या ये लोन माफ़ी नहीं है? ये सौभाग्यशाली लोग कौन थे जिनका हज़ारों करोड़ का लोन राइट ऑफ हो गया!
महाराष्ट्र में SIR प्रक्रिया के बाद अब नए आंकड़े सामने आए.. SIR से पहले जहां महाराष्ट्र में 9 करोड़, 78 लाख, 54 हज़ार 049 वोटर मौजूद थे, तो वहीं अब SIR प्रक्रिया के बाद यह आंकड़ा घटकर 7 करोड़, 71 लाख, 65 हज़ार, 562 हो गया है.. यानी 2 करोड़, 6 लाख, 88 हज़ार 487 वोटरों के नाम हटाए गए.. यानी 21.14% लोगों के नाम हटाए गए..
बड़ा सवाल यह है कि जैसे नवी मुंबई में बीजेपी नेताओं के पास SIR का enumeration form मिला, ऐसा घोटाला राज्य में कितनी जगह पर हुआ होगा और इसका फायदा भविष्य में किसे होगा? क्या हम इस प्रक्रिया को Free and Fair कह सकते हैं?
रेहान फ़ज़ल साहब ने फ़िदेल कास्त्रो के बहाने नेहरू और इंदिरा गांधी के रिश्ते को कितनी खूबसूरती से समझा दिया .
दो मिनट गौर से सुनिए.
अनपढ़ और नफरती गैंग को इतिहास के बारे में कुछ नहीं पता .
36 तोपों की सलामी @DelhiPolice . होटेलों के पैकिंग से आप उन होटेलों तक पहुंच रहे हैं. धमका रहे हैं? ये क्या सोच है? क्या जवाब है Indian Express की इस रिपोर्ट का? क्या इंसानियत मर गई है बिल्कुल?
इस देश में मुसलमान होना गुनाह है क्या ? जामिया इलाके में मुस्लिम स्टूडेंट को क्यों डिटेन किया गया ?
आओ फिर जंतर -मंतर के पास हजारों बच्चों -छात्र बैठे हैं . सबको डिटेन कर लो . या कि देखकर ही डिटेन कर रहे हो ? धार्मिक पहचान के आधार पर ?
हैलमेट में अपना चेहरा छिपाए दिल्ली पुलिस का ये जवान एक लड़की के माथे पर वार कर रहा है . पुलिस वालों ने सारी सीमाएं तोड़ दी .
पुलिस की ये लाठियां सरकार को भारी पड़ेगी .
@CPDelhi@DCPNewDelhi@DelhiPolice वर्दी वाले इन अपराधियों के खिलाफ कब कार्रवाई होगी ?
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शनिवार को जहां ट्वीट कर धर्मेंद्र प्रधान ने पीएम मोदी को अपना इस्तीफा भेजने वाली बात सोशल मीडिया पर पोस्ट की, यह इस्तीफा किसी राजनैतिक दल की नहीं, बल्कि इस देश के युवाओं की जीत है! सोशल मीडिया में जन्में इस आंदोलन की यह जीत है, इस देश के करोड़ों युवाओं को जीत है
रूबिका लियाकत को 18 साल की इस बच्ची की नसीहत.
जंतर- मंतर पर आज मुझे सरदार पटेल से बारहवीं पास कर चुकी रिया मिली. रिया की बात सुनकर मेरा मन किया कि उस बच्ची को मैं सैल्यूट करूं.
रिया और उसकी दोस्त से मैंने लंबी बातचीत की है .
पूरी बात मेरे यूट्यूब चैनल पर
Why is the MP police not arresting these people who are threatening the Judge Tabassum Khan?
These threats amount to serious offences under the BNSS
They are also gross criminal contempt of court. Why is the MP HC or the SC not taking suo moto action for criminal contempt?
21वीं सदी में दुनिया सीवर साफ़ करने के लिए आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल कर रही है, लेकिन भारत में आज भी लोगों को ज़हरीली नालियों और सीवरों में अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। यह केवल तकनीक की कमी नहीं, बल्कि सरकार की नीयत, प्रशासनिक विफलता का प्रमाण है।
इथेनॉल बहस में कार कंपनियों की कोई आवाज़ नहीं है। उन्हें सामने आकर अपना पक्ष रखना चाहिए। उनके सर्विस स्टेशन में कारें आती होंगी। बाइक आती होगी। कुछ तो फीडबैक होगा। उन्हें पता होगा कि मंत्री सही बोल रहे हैं या नहीं। क्या उन्हें भी डर लग रहा है? इतनी बड़ी बड़ी कार कंपनियाँ हैं और चूँ तक नहीं ? डर इस देश का बुनियादी चरित्र हो गया है।
मुझे कार की बहुत ज़रूरत नहीं पड़ती है। महीने में दो तीन दिन ही घर से निकलता हूँ। आज कई दिनों बाद कार चलाने गया तो पता चला कि मेरी कार का माइलेज 14km/lसे घट कर 9.6km/lit हो गया है। मेरी कार 2024 की है। 5.4 किलोमीटर प्रति लीटर कम हो गया है। परिवार के लोग इस्तेमाल करते हैं। तेल का ख़र्चा काफ़ी बढ़ गया है।
मुझे लगता है कि E20 भी नोटबंदी है। इसके ज़रिये कार और बाइक चालकों पर निष्ठा प्रयोग हो रहा है कि वे किस हद तक मोदी सरकार को सपोर्ट कर सकते हैं। ज़्यादा पैसे ख़र्च कर घटिया ईंधन ख़रीदने और कार डैमेज होने पर चुप रह सकते हैं। मोदी सरकार का प्रयोग सौ फीसद सफल हो गया है। जिस स्केल पर माइलेज गिरा है, मनमोहन सिंह की सरकार होती तो सारे गोदी संपादक पेट्रोल पंप से लाइव रिपोर्ट कर रहे होते।
नोट चोरी, वोट चोरी, चंदा चोरी, पेपर चोरी के बाद तेल चोरी को भी व्यापक समर्थन मिल रहा है। यह काम केवल मोदी सरकार कर सकती है। उसके समर्थकों का जवाब नहीं। जो लोग 500 रुपया लीटर पेट्रोल ख़रीदने का सपना देख रहे थे, E20 से पूरा करने का मौका मिल गया है। पेट्रोल और कार की मरम्मत का ख़र्चा जोड़ कर इतना हो जाता होगा।
सरकार चाहे तो एक और प्रयोग कर सकती है। पेट्रोल पंप पर मोदी समर्थक 38 प्रतिशत वोटर के लिए E20 का विकल्प दे और मोदी विरोधी 62 प्रतिशत को E10 का विकल्प दे। मुझे लगता है कि डिफ़ेंडर वाली मोहतरमा भी निष्ठा नहीं बदलेंगी और E20 ही भराएँगी। अगर ये हो जाए तो मोदी समर्थकों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहेगा। 😎