भारत में अब मुस्लिम होना शायद आसान नहीं है!
आईपीएस बुशरा बानो को केवल इसलिए ट्रांसफर कर दिया गया कि उन्होंने एक कार्यक्रम में "अस्सलामुअलैकुम" बोल दिया था!
बस फिर क्या था हिंदूवादी हो गए आहत और भाजपा सरकारें तो बैठी ही है उनके आदेश का पालन करने के लिए और शुभेंदु सरकार ने कर दिया तत्काल ट्रांसफर!
📌 मगर इसी देश में कांवड़ यात्रा में पुलिस अधिकारी वर्दी में कांवड़ यात्रियों के पैर दबाते है तब प्रोटोकॉल शायद याद नहीं रहता है!
📌 एक पुलिस स्टेशन का उद्घाटन हिन्दू रीति रिवाज भूमि पूजन से होता है तब किसी को दिक्कत नहीं होती है!
📌 अनुज चौधरी जैसा पुलिस अधिकारी वर्दी में गदा लिए हिन्दू धार्मिक यात्रा में शामिल होता है तो तबादला या करवाई तो दूर उल्टा प्रमोशन होता है!
📌 तेलंगाना में DGP अपने पद ग्रहण पर हिन्दू मंत्रोच्चारण करवाते है मगर किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता है!
बस जैसे ही एक मुस्लिम महिला आईपीएस बुशरा बानो सलाम कर देती है सबकी भावना आहत और उसकी सजा भी दे दी जाती है!
स्वागत करिये यही है मोदी भाजपा का नया भारत!!!
एक भारतीय सेना में कर्नल और एक भारतीय पुलिस सेवा में अफसर!
इन दोनों को मोदी जी की डबल इंजन सरकार ने किस बात की सजा दी है इसे खुद प्रधानमंत्री को और सुप्रीम कोर्ट को देश को बताना चाहिए।
अभी ब्रिक्स सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने समावेशी कल्चर विविधता प्रेम सहनशीलता और जितने भी दुनिया के अच्छे-अच्छे शब्द हैं सब उपयोग में लाए।
लेकिन व्यवहार में उनका और उनकी सरकार का और उनकी पार्टी का सब कुछ विपरीत।
इन दोनों मामलों, कर्नल सोफिया कुरैशी को उनके मध्य प्रदेश के मंत्री ने आतंकवादियों की बहन क्यों कहा था और उन्हें इसके बावजूद मंत्री पद से क्यों नहीं हटाया गया, कोई पनिशमेंट क्यों नहीं दिया गया और दूसरे अभी इस मामले में आईपीएस बुशरा बानो ने अरबी के कुछ शब्द प्रयोग करके ऐसा कौन सा नया काम किया जो अभी ब्रिक्स में और उससे पहले उनसे मिलने वाले अरब मुल्कों के राष्ट्राध्यक्ष उनके सामने भी नहीं करते रहे हैं?
प्रधानमंत्री जी मामला छोटा नहीं है।
पूरी दुनिया देख रही है कि आप कुछ शब्दों के इस्तेमाल पर जो कहीं से भी नकारात्मक नहीं है सभ्य शब्द हैं एक महिला आईपीएस को सजा देते हैं आपके समर्थक उसे ट्रोल करते हैं।
और माननीय सुप्रीम कोर्ट न्याय की किताबों में यह दोनों मामले जाएंगे और वहां यह नहीं लिखा जाना चाहिए कि आप इन दोनों मामलों में कुछ भी नहीं कर सके!
अगर इस देश के प्रधानमंत्री और देश का सुप्रीम कोर्ट एक वरिष्ठ महिला सेना अधिकारी और एक वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारी के सम्मान, गरिमा की भी रक्षा नहीं कर सकते हैं तो समझ लीजिए दुनिया भर में क्या मैसेज जाएगा कि भारत में कोई कानून व्यवस्था संविधान न्याय नहीं बचा है!
पटियाला हाउस कोर्ट ने साबित कर दिया कानून सबके लिए एक जैसा नहीं है, बिलकुल नहीं है
स्वतंत्र भारद्वाज को 14 दिन मे जमानत मिल गयी, उसके केस की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये की गयी
Umar Khalid और शर्जील इमाम तो 6 साल से जेल मे है, अब तक ट्रायल भी शुरू नहीं हुआ है
मुझे नहीं पता उमर खालिद दोषी है या निर्दोष लेकिन इतना पता है कि खुद को निर्दोष साबित करने के लिए एक मौका मिलने के हक़दार तो है
क्या स्वतंत्र जैसे नफरती, राम रहीम और आसाराम जैसे सज़ायफ्ता लोगो को ही जेल से बाहर घूमने की आजादी है?
Bail Jail Swatantra Bhardwaj Umar Khalid
अंतरिम ज़मानत पर रिहा हिंदुत्ववादी कट्टरपंथी स्वतंत्र भारद्वाज ने एक वीडियो में दावा किया कि एक आदमी का सिर फोड़ने के बाद भी कोई कानून उसे छू नहीं सकता. मीडिया चैनल्स ने उसे कभी एक इन्फ्लुएंसर, यूट्यूबर और एक 'गुंडा कार्यकर्ता' कहा. देखिए
एक व्यक्ति कैमरे में पकड़े जाने के बावजूद कुछ ही दिनों में ज़मानत पा जाता है।
वहीं दूसरा व्यक्ति बिना किसी ट्रायल या सुनवाई के छह साल तक जेल में पड़ा रहता है
: अभिजीत दीपके, CJP फाउंडर
पिछड़े दलित समाज को गाली देने वाले, मारपीट करने वाले स्वन्त्र भारद्वाज को तीन महीने की अंतरिम बेल दे दी गई
दूसरी तरफ़ JNU से पढ़े लिखे एक युवा को 6 साल से बिना ट्रायल के जेल में रखा है
इस सरकार में गुंडे, माफिया, लुटेरे, घूसखोर, भ्रष्टाचारी मौज़ में है।
नाम में क्या रखा है? बहुत कुछ रखा है जनाब।
एक तरफ भगवा दंगाई स्वतंत्र भारद्वाज है जो ऑन-कैमरा जुर्म कबूलने के बावजूद कुछ ही दिनों में बाहर आ जाता है क्योंकि वो सत्ताधारी पार्टी से हैं।
वहीं दूसरी तरफ उमर खालिद और शरजील इमाम हैं जो बिना ट्रायल के 6 साल से जेल में सड़ रहे हैं, क्योंकि वो मुसलमान हैं।
जब जुर्म करने वाला सत्ता पक्ष का हो तो 24 घंटे में सुनवाई और रिहाई।
और जब बात बेकसूर मुस्लिम युवाओं की हो तो 6 साल से बिना ट्रायल के जेल।
सबकी नज़र में कानून एक समान है , इस झूठे भ्रम को अब और कितने साल ढोना पड़ेगा?
संवैधानिक सिस्टम की यही तो खूबसूरती है।
स्वतंत्र भारद्वाज ने बहुत ही नेक काम किया था इसलिए अंतरिम जमानत पर बाहर आ गया।
बाकी शारजील इमाम और उमर खालिद ने सबसे बड़ा गुनाह किया था जिनका अभी ट्रायल भी नहीं स्टार्ट हो रहा है।
ये स्वतंत्र भरद्वाज ऑन कैमरा अपना गुनाह कबूल करने के बाद भी कोर्ट इसे बेल दे देता है
देश का कानून यही अगर आप हिन्दू रक्षक दल से
ओर आप मर्डर या बालात्कार कर के भी जेल जाते है तो आपको बेल मिल जाएगा
~इस से पहले राम रहीम ओर आसाराम को देख चुके है
इस देश में कानून ओर कोर्ट सिर्फ मुस्लिमों के लिए है
~ उमर खालिद को देख लीजिए
उमर खालिद को बिना जुर्म साबित हुए 6 साल से जेल में रखा जायेगा
स्वतंत्र भारद्वाज का ऑन रिकॉर्ड कबूलनामा होने के बावजूद जमानत पर छोड़ दिया जायेगा।
शायद जज साहब ही बहुत भोले है उन्होंने वीडियो नहीं देखा।
हमने तो सुना पढ़ा था कि इंसाफ की देवी न्याय करती है।
मगर इन अदालतों के फैसले वाकई हैरान करने वाले है।
पटियाला हाउस कोर्ट ने स्वतंत्र भारद्वाज को तीन हफ़्ते की अंतरिम ज़मानत दी ।
यही फ़र्क़ है उमर ख़ालिद और स्वतंत्र भारद्वाज में। और लोग पूछते है की नाम में क्या रखा है?
खुरपेंच नाम से ये आईडी चलाने वाले एक पाकिस्तानी एजेंट है।
या अकाउंट ISI द्वारा भारत में रन करवाया जा रहा है, खुरपेंच नाम से 🆔 चलाने वाले के 7 पिता हैं।
क्या मेरे ऐसा बोलने से सच साबित हो जाएगा ? नहीं होगा क्यूँकि उसके लिए सबूत चाहिए!
उमर खालिद को गद्दार कहने वालो उम्र खालिद अगर अपराधी है तो उसके अपराध अभी तक साबित क्यों नहीं हुए ?
उमर खालिद का बिना कोई जुर्म साबित हुए उसे जेल में क्यों रखा गया है ?
जिस दिन उमर खालिद का ट्रायल चालू होगा उस दिन तुम्हारे और BJP के फर्जी प्रोपोगेंडा बेनकाब हो जाएगा।
फिर पता चल जाएगा की गद्दार कौन है।
कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके की सोच और हिम्मत को सलाम ,
अभिजीत दिपके ने उमर खालिद को लेकर कहा ,
" अगर में मुसलमान होता तो मुझे जेल में डाल दिया जाता लेकिन में मुसलमान नहीं हूं और उमर खालिद पर ट्रायल शुरू होना चाहिए ",
ऐसे प्रदर्शन उम्मीद जताते हैं कि दुनिया की आत्मा अभी पूरी तरह से मरी नहीं है।
हेग में डेढ़ लाख लोगों ने इस्राइल द्वारा किए जा रहे नरसंहार का विरोध किया है। पूरी दुनिया में इस तरह के प्रदर्शन लगातार हो रहे हैं।
क्या अब इस देश में मुस्लिम IAS और IPS अधिकारी “अस्सलामु अलैकुम” भी नहीं कह सकते?
क्या “इंशाअल्लाह” बोलना भी गुनाह हो गया है?
अगर किसी अधिकारी के अभिवादन और आस्था के शब्दों पर सवाल उठाकर उसका ट्रांसफर किया जाता है, तो यह सिर्फ़ एक अधिकारी के साथ अन्याय नहीं, बल्कि भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब और संवैधानिक मूल्यों पर चोट है।
हमारा देश नफ़रत से नहीं, एकता, भाईचारे और संविधान से चलता है।
सियासत के लिए नफ़रत की दीवारें खड़ी करना बंद कीजिए—भारत हर धर्म और हर नागरिक का है।
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