इसके जिम्मेदार अंजना, रूबिका, चित्रा, सुधीर जैसे लोग हैं। भुगतना फील्ड रिपोर्टर को पड़ता है। इस बहादुर रिपोर्टर की सहनशीलता को नमन है, जिन्होने सारी आवाजों को इग्नोर कर अपने Work पर फोकस रखा।
Khan Sir अब मुसलमान हो गए हैं,क़ानून व्यवस्था के मसले पर नफरती लोगों को मौका मिल गया। TV चैनल तो ऐसे लिख रहे हैं…फैसल खान के ठिकानों पर छापेमारी।
ठिकानों पर…वाह! दो-चार दिन में ISI से संपर्क भी खोज लाएंगे सूत्र। हजारों बच्चों की उम्मीद Khan Sir को नहीं छोड़ा तो किसी और की क्या बिसात!
@Abhinav_Pan
CM यानी करप्ट माउथ
• ANI पर गाली।
• सदन में नेता प्रतिपक्ष जैसे वयोवृद्ध को अभद्र शब्दों से संबोधित किया।
• गुरुजनों से अभद्र वाचिक व्यवहार
• मंच से गाली।
• और अब भाषण का यह निम्न स्तर।
आख़िर क्यों?
विज्ञान कहता है की किशोरावस्था में किया गया “वनस्पति” का अत्यधिक सेवन व्यक्ति के बोलने और समझने की छमता को प्रभावित करता है। वही मनोविज्ञान कहता है कि बचपन और किशोरावस्था के अनुभव व्यक्ति की भाषा, व्यवहार और व्यक्तित्व पर गहरी छाप छोड़ते हैं। वही संस्कार आगे चलकर सार्वजनिक जीवन में भी झलकते हैं।
CM के “करप्ट माउथ” होने की वजह शायद यही है।
जिन्हें CM का इतिहास नहीं पता, उनके लिए यह दबाई गई जानकारी है:
• मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 1994 के आसपास अजय सिंह बिष्ट अपने पारिवारिक परिवहन व्यवसाय में सहयोग कर रहे थे।
• उस समय उनके पास तीन बसें और एक ट्रक था।
• संभवतः उन्होंने यह भाषिक अभद्रता उसी दौर में, डग्गामार वाहन चलवाते समय सीखी।
• अजय सिंह बिष्ट के पिता श्री आनंद सिंह बिष्ट और गोरखनाथ मठ के पूर्व महंत श्री अवैद्यनाथ जी यानी श्री कृपाल सिंह बिष्ट जी, रिश्ते में भाई बताए जाते हैं।
• कहा जाता है कि बाद में उनके चाचा ने ही उन्हें मठ में बुलाया।
• महंत श्री अवैद्यनाथ जी ने अपने भतीजे अजय सिंह बिष्ट को कुछ ही वर्षों में मठ का उत्तराधिकारी बना दिया।
सवाल उठता है: उत्तराधिकारी के रूप में उन्हीं को क्यों चुना गया? क्या यह केवल योग्यता का निर्णय था या रिश्तेदारी का भी प्रभाव था? पहले मठ की गद्दी मिली, फिर कुछ ही वर्षों में लोकसभा की सीट भी।
स्पष्ट किया जाए कि मठ में महंत चुनने के लिए क्या कोई औपचारिक चुनाव प्रक्रिया हुई थी? डग्गामार वाहन चलवाने वाला व्यक्ति क्या 4 वर्षों में ही इतना योग्य हो गया? यदि नहीं, तो क्या इसे ‘पक्षपाती परिवारवाद’ नहीं कहा जाना चाहिए?
और अंत में- पद और परिधान रिश्तों और समय की मदद से मिल सकते हैं, पर भाषा और व्यवहार नहीं।
#असफल_मुख्यमंत्री
#CM_CorruptMouth
शिक्षक केवल पढ़ाते नहीं, समाज की दिशा भी तय करते हैं। अगर देश के लाखों छात्रों को पढ़ाने वाले शिक्षकों को “दो कौड़ी” कहकर अपमानित किया जाएगा, तो यह केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि पूरे शिक्षा जगत का अपमान है।
विपक्ष की भूमिका सवाल पूछना है, लेकिन मीडिया का काम सत्ता के आगे झुकना नहीं बल्कि सच दिखानाना चाहिए।
आज देश का युवा अपने शिक्षकों के साथ खड़ा है।
#TeacherRespect #AbhinaySharma #MediaDebate #StudentsVoice
Paper Leak, बेरोज़गारी, महंगाई जैसे मुद्दे शायद अब खत्म हो गए हैं…
तभी तो DNA में राहुल सिन्हा और Black & White में अंजना के लिए चर्चा का विषय अब “अभिनय” रह गया है।
Rejoinder के साथ जल्द मुलाकात होगी।
तब तक…
कह लीजिए
निशाना मैं नहीं, मेरे सवाल हैं|
प्रयागराज यू पी में तानाशाही चरम पर है बंद कमरे में भी लाखों छात्रों के भविष्य पर बात करने तक की इजाजत नहीं पेपर लीक पर बात करने पर प्रशासन रोकने पहुंच गया है।
मोदी योगी की डबल इंजन सरकार पूरी तरह फेल हो चुकी है विपक्ष को कुचलना चाहती है।
बिजली महंगी, रसोई महंगी, रोज़मर्रा की ज़िंदगी महंगी—लेकिन सरकार के वादे आज भी सस्ते हैं।
जनता राहत की उम्मीद कर रही थी, सरकार ने एक और महंगाई का झटका दे दिया।”
हर महीने बढ़ता बिल, घटती बचत—यही है महंगाई पर बीजेपी सरकार का मॉडल?”
#upelectricitybill#UttarPradesh#VoiceOfYouth #pushpendrasaroj #samajwadipartyofficial
अखिलेश सरकार इस सरकार से लाख गुना बेहतर थी उनका ध्यान छात्रों की तरफ़ था इसलिए उन्होंने लैपटॉप बाटें
लेकिन योगी सरकार का छात्रों से दूर दूर तक कोई लेना देना ही नहीं है ।
प्रयागराज की सड़कों पर उमड़ा प्रतियोगी छात्रों का ग़ुस्सा सिर्फ़ एक परीक्षा का विरोध नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ़ आवाज़ है जिस पर युवाओं का भरोसा लगातार टूटता जा रहा है। लेखपाल भर्ती परीक्षा को निरस्त कर निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया की मांग कर रहे छात्रों का कहना है कि भाजपा सरकार में भर्ती परीक्षाएं अब मेहनत नहीं, बल्कि अव्यवस्था और संदेह का प्रतीक बन चुकी हैं।
पेपर लीक, धांधली और लगातार उठते सवालों ने प्रतियोगी युवाओं के भविष्य को असुरक्षा के अंधेरे में धकेल दिया है। मेहनत करने वाला छात्र आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
गंगा एक्सप्रेसवे का प्रधानमंत्री Narendra Modi ने बड़े प्रचार और दावों के साथ उद्घाटन किया था।
BJP ने इसे अपनी उपलब्धि बताकर जमकर प्रचार किया, रीलें बनाईं और विज्ञापनों में पेश किया।
लेकिन अब इसी एक्सप्रेसवे के निर्माण में कथित भ्रष्टाचार और घटिया काम के वीडियो सामने आ रहे हैं।
सवाल ये है कि आखिर इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
क्या सरकार इस मामले की निष्पक्ष जांच कराएगी?
दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?
जनता सिर्फ प्रचार नहीं, जवाब और जवाबदेही चाहती है।
"एक और निर्माणाधीन पुल भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है"
देश में चौतरफा लूट मची हुई है, जिसको मौका मिल रहा है वो लूट रहा है,
कुछ लोग दब कर मर गए हैं, कुछ लोग दबे हैं।
ठेकेदार को अब तक नया टेंडर भी मिल गया होगा।
📍 हमीरपुर ( बेतवा नदी)
महाराष्ट्र से लेकर मध्य प्रदेश तक, यूपी से लेकर अन्य राज्यों में, सभी जगहों पर जहां जहां भाजपा की सरकारें हैं वहां वहां किसान अपनी फसल फेंकने, रौंदने, नष्ट करने को मजबूर हैं क्योंकि भाजपा सरकारों में फसलों का उचित मूल्य किसानों को नहीं मिल रहा है।
भाजपा किसान विरोधी है, किसानों की बर्बादी की जिम्मेदार है।
यह उत्तरप्रदेश की अन्तर्राष्ट्रीय सिटी आगरा है. शहर के छीपीटोला इलाके में भयंकर पानी संकट है. नगर निगम के अफसर चैन की चादर तानकर सो रहे है और महिलाऐं बर्तन लेकर सड़क पर बैठी है.
प्रदर्शनकारी महिलाऐं बता रही है कि एक-एक बूंद को तरस रहे है. मगर अफसर नही सुनते. नगर निगम में भी कई बार गुहार कर चुकी है.
आज आगरा का तापमान 44 डिग्री के आसपास है.
45-50°C की गर्मी में हजारों रुपये खर्च कर SSC-GD परीक्षा देने पहुंचे छात्रों को सेंटर पर पता चला — परीक्षा रद्द।
हर भर्ती में वही कहानी: पेपर लीक, अव्यवस्था और युवाओं का शोषण।
बीजेपी सरकार ने युवाओं का भविष्य बर्बाद कर दिया है।