भाई अमित पासवान द्वारा आज हमको जानकारी मिली कि सासाराम करशेरूआ के सरपंच प्रतिनिधि रामइकबाल पासवान जी को O+ ब्लड की आवश्यकता हैं। मैं तुरंत पटना PMCH पहुंच एक यूनिट बल्ड दिया साथ ही आईसीयू में जाकर उनका हाल चाल भी लिया।
@AmitPaswanBihar@BhimArmyChief
राजस्थान के डांगावास हत्याकांड के पीड़ित परिवार से मेरी बात हुई। 11 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद 5 अगस्त को आए फैसले से वे बेहद आहत हैं। उनकी एक ही पीड़ा है यदि सभी 40 आरोपी बरी हो गए, तो फिर उनके 5 परिजनों सहित कुल 6 लोगों की हत्या किसने की?
वर्ष 2015 में राजस्थान के नागौर जिले के डांगावास गांव में हुए इस जघन्य हत्याकांड में 5 दलितों सहित कुल 6 लोगों की नृशंस हत्या हुई, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था। अब एससी-एसटी विशेष अदालत द्वारा सभी 40 आरोपियों को संदेह का लाभ देकर बरी किए जाने से पीड़ित परिवार स्वयं को न्याय से वंचित महसूस कर रहा है।
यह केवल एक परिवार का मामला नहीं है। इस फैसले ने पूरे क्षेत्र, विशेषकर दलित समाज के लोगों के बीच असुरक्षा और न्याय व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। लोगों के मन में यह सवाल है कि यदि इतनी बड़ी घटना में भी दोषियों की जवाबदेही तय नहीं हो पाती, तो पीड़ितों को न्याय कैसे मिलेगा और कानून के प्रति विश्वास कैसे कायम रहेगा?
डांगावास का फैसला उन पुराने जख्मों को फिर ताज़ा कर गया है, जो लक्ष्मणपुर बाथे जैसे नरसंहारों ने दलित समाज को दिए थे। वर्ष 1997 में बिहार के लक्ष्मणपुर बाथे में 58 दलितों का नरसंहार किया गया था, जिसमें 27 महिलाएं और 16 मासूम बच्चे भी शामिल थे। वर्षों बाद उस मामले में भी सभी आरोपी बरी हो गए। आज देश जानना चाहता है कि यदि सभी आरोपी निर्दोष हैं, तो इन निर्दोष लोगों की हत्या आखिर किसने की?
परिवार ने बताया है कि वे इस फैसले को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। हम न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, लेकिन न्याय की इस लड़ाई में पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़े हैं। हमें विश्वास है कि राजस्थान हाईकोर्ट में मामले के सभी तथ्यों की निष्पक्ष समीक्षा होगी और पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा।
Are Daughters Really Safe in Engineering Colleges?
After 7 PM, when the hostel doors are locked, that's when the real game of terror begins!
In the Girls Hostel of Chhapra Engineering College, the Principal's driver breaks every rule and forces his way in.
The girls who were sent there to study become victims of his harassment and misconduct. When these girls resist, they are given the horrifying threat of being framed in false cases.
Is this repulsive behavior of a driver, under the cover of power, ever justifiable in any society?👇
नेता नहीं एक बेटा बनकर आये है धामपुर विधानसभा में क्षेत्र में सिर्फ़ समस्याएँ सुनने नहीं, उनका समाधान करने का संकल्प लेकर आए हैं।🙏
@BhimArmyChief@AzadSamajParty@ASP4Nagina
आरक्षण के मु्द्दे पर नगीना सांसद @BhimArmyChief चन्द्रशेखर आजाद का यह बयान समस्त देशवासियों को अवश्य सुनना चाहिए 👇🏻
"जो लोग संविधान के विरोध में आए 10% आरक्षण को लेते हैं वो भी आरक्षण पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। जो सदियों से आरक्षण का लाभ लेते आ रहे हैं, जो संस्थानों पर काबिज हैं, कमजोर वर्गों पर अत्याचार पर जिनके मुंह से एक शब्द नहीं निकला, वो हमसे सवाल कर रहे हैं? आपको कोई अधिकार नहीं है"
उत्तर प्रदेश में भर्ती प्रक्रियाएँ अब रोजगार का माध्यम कम और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ का प्रतीक अधिक बन चुकी हैं।
ग्राम पंचायत अधिकारी (VPO) भर्ती इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। 28 जून 2022 को भर्ती का विज्ञापन जारी हुआ, अक्तूबर 2022 में PET आयोजित हुई, अप्रैल 2025 में मुख्य परीक्षा संपन्न हुई और अब मुख्य परीक्षा को भी एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, फिर भी अंतिम परिणाम घोषित नहीं किया गया।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, आखिर आपकी सरकार किस बात का इंतज़ार कर रही है? क्या यही भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए की तथाकथित "डबल इंजन सरकार" की कार्यशैली है, जहाँ भर्तियाँ वर्षों तक फाइलों में धूल खाती रहती हैं और लाखों युवा अपने भविष्य की उम्मीद में भटकने को मजबूर हैं?
प्रदेश के युवाओं को अब और इंतज़ार नहीं, बल्कि समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया और न्याय चाहिए।
दतिया में बीजेपी की हार की सबसे बड़ी वज़ह बन गए माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष @BhimArmyChief नगीना से लोकप्रिय सांसद भाई चन्द्रशेखर आजाद जी : @UPTakOfficial
मुख्य जिले गोरखपुर में छेड़खानी के मामले में पीड़ित छात्रा को स्कूल से बाहर करना और उसे प्रायोगिक व लिखित परीक्षा से वंचित करना अत्यंत निंदनीय है। सुरक्षा के नाम पर पीड़िता की शिक्षा छीनना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, अपराध का दंश झेलने के बाद भी सज़ा पीड़िता को ही भुगतनी पड़ रही है। यह शिक्षा व्यवस्था और प्रशासन दोनों की गंभीर विफलता है। सरकार तत्काल हस्तक्षेप कर छात्रा का शैक्षणिक अधिकार बहाल करे।
ऐतिहासिक लांडोर बंगला, ललिंग किला (धुले) में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जी को अभिवादन एवं शिक्षा अधिकार परिषद
महाराष्ट्र के धुले जिले स्थित ऐतिहासिक लांडोर बंगला, ललिंग किला वह पावन स्थल है, जहाँ 31 जुलाई 1938 को भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर एक न्यायालयीन प्रकरण के सिलसिले में धुले आए थे और कुछ समय के लिए यहाँ ठहरे थे। यह स्थान आंबेडकरवादी समाज के लिए ऐतिहासिक, प्रेरणादायी और गौरवपूर्ण धरोहर है।
आज भी देशभर से लाखों आंबेडकरवादी अनुयायी इस ऐतिहासिक स्थल पर पहुँचकर बाबा साहेब को श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं। इसी ऐतिहासिक परंपरा का निर्वहन करते हुए आज भी डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जी को विनम्र अभिवादन एवं श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
इसके उपरांत भीम आर्मी धुले जिला द्वारा आयोजित "शिक्षा अधिकार परिषद" का सफल आयोजन किया गया। परिषद में शिक्षा को प्रत्येक बच्चे का संवैधानिक अधिकार बताते हुए सामाजिक न्याय, समानता और भारतीय संविधान के मूल्यों को सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने, संगठन को मजबूत बनाने तथा सामाजिक अधिकारों एवं संविधान की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया गया।
जय भीम!
जय संविधान!
सीवान, सारण, जहानाबाद, कटिहार, पूर्णिया, गोपालगंज सहित पूरे बिहार में NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं, छात्रों पर हुए लाठीचार्ज, गोलीबारी और शांतिपूर्ण संवैधानिक आंदोलन के बाद भीम आर्मी के साथियों एवं अन्य आंदोलनकारियों पर मुकदमे दर्ज करना लोकतंत्र और संविधान की मूल भावना पर सीधा हमला है।
हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। यदि किसी प्रकार की हिंसा हुई है, तो उसकी निष्पक्ष एवं न्यायिक जांच होनी चाहिए और दोषी चाहे किसी भी पक्ष का हो, उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई हो। लेकिन केवल आंदोलन को दबाने के लिए कार्यकर्ताओं पर मुकदमे दर्ज करना स्वीकार्य नहीं है।
बिहार के माननीय मुख्यमंत्री श्री Samrat Choudhary जी से हमारी प्रमुख मांगें:
1)भीम आर्मी/आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के सभी निर्दोष साथियों दीपक सम्राट, राजेंद्र रौशन, शेख नौशाद सहित अन्य छात्र नेताओं एवं शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमे तत्काल वापस लिए जाएं।
2)छात्रों पर हुए लाठीचार्ज, गोलीबारी एवं बल प्रयोग की उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में न्यायिक जांच कराई जाए।
3)घायल सभी छात्रों, नागरिकों एवं पुलिसकर्मियों का समुचित इलाज और मुआवजा सुनिश्चित किया जाए।
4)जिन पुलिस अधिकारियों ने अधिकारों का दुरुपयोग किया हो, यदि जांच में ऐसा पाया जाता है, तो उनके विरुद्ध भी विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।
5)लोकतांत्रिक आंदोलनों को अपराध की तरह देखने की प्रवृत्ति बंद की जाए तथा नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
6)छात्रों, युवाओं और सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ सरकार तत्काल संवाद स्थापित करे ताकि विवादों का लोकतांत्रिक समाधान निकल सके।
7) बिहार सरकार के माननीय पूर्व मंत्री Tej Pratap Yadav एवं अन्य जन प्रतिनिधियों और पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ अध्यक्ष Shantanu Shekhar सहित बिहार के विभिन्न जिलों में गिरफ्तार 700 से ज्यादा छात्रों, नौजवानों, सामाजिक, राजनैतिक कार्यकर्ताओं को बिना शर्त अविलंब रिहा किया जाएं।
हम सरकार को आगाह करते हैं कि लोकतंत्र में असहमति अपराध नहीं है।
भीम आर्मी संविधान, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए सदैव शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से संघर्ष करती रहेगी।
"हम डरेंगे नहीं, झुकेंगे नहीं, संविधान के रास्ते पर चलेंगे और न्याय की लड़ाई जारी रखेंगे।"
जय भीम! जय संविधान!
सारनाथ का यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होना पूरे देश के लिए गर्व और हर्ष का विषय है। भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेशस्थली को मिली यह वैश्विक मान्यता भारत की समृद्ध बौद्ध विरासत का सम्मान है।
सारनाथ ने पूरी मानवता को शांति, करुणा, समानता और मध्यम मार्ग का संदेश दिया। यह उपलब्धि हमारी ऐतिहासिक धरोहर को विश्व पटल पर नई पहचान देगी। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर सृजित होंगे।
सारनाथ की इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएँ।
जय भीम! नमो बुद्धाय!
क्या बोले थे कि इस्तीफा नहीं देंगे ............? यह भारत की युवा पीढ़ी और छात्रशक्ति है इसके आगे तो बड़ी से बड़ी ताकत को झुकना पड़ता है फिर यह महामानव क्या चीज़ है ?
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा , युवा पीढ़ी और छात्रशक्ति को बधाईयां !
ज़ुल्म जब भी हद से आगे बढ़ने लगता है,
वहीं से बदलाव का सूरज निकलने लगता है।
आज जंतर-मंतर पर बच्चों और बच्चियों के साथ जिस प्रकार का बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया गया, उसने मन को गहराई तक झकझोर दिया। मैंने जलियांवाला बाग का वह दौर नहीं देखा, लेकिन आज जो दृश्य सामने आए, उन्होंने इतिहास के उस काले अध्याय की याद अवश्य दिला दी।
लोकतंत्र में अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। यदि उस अधिकार का उत्तर बल प्रयोग से दिया जाए, तो यह केवल कुछ लोगों पर नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी आघात है।
इसी पीड़ा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के संकल्प के साथ, आज से मैं संसद भवन परिसर में परम पूज्य बाबा साहेब की प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठ रहा हूँ। जब तक न्याय सुनिश्चित नहीं होता और इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध उचित कार्रवाई नहीं होती, मेरा यह शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा।
जंतर-मंतर पर 21 दिनों से शांतिपूर्ण भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक जी को जबरन अस्पताल ले जाने व उनके साथियों को हिरासत में लेने की खबरें गंभीर चिंता का विषय हैं। लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध संवैधानिक अधिकार है, अपराध नहीं। #SonamWangchuk#RightToProtest#Constitution
मेरठ के ललिता गौतम हत्याकांड के संदर्भ में न्याय की मांग कर रहे लोगों के साथ पुलिस के कथित व्यवहार की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराई जाए।यदि जांच में SSPअविनाश पांडेय की जिम्मेदारी स्थापित होती है,तो उन्हें तत्काल पद से हटाकर विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।@Uppolice@myogiadityanath
नगीना सांसद @BhimArmyChief चन्द्रशेखर आजाद की लखीमपुर-खीरी में हुई यह रैली उस दिन की है जब अखिलेश यादव ने नोएडा में रैली की थी
एकतरफ आठ महीनों की मेहनत व तमाम सांसद विधायकों को लगाकर की गयी रैली और र दूसरी तरफ बिना प्रचार तंत्र के हुई यह रैली
चन्द्रशेखर आजाद की रैली में उमड़ा यह जनसैलाब यह बताने के लिए काफी है कि देश की राजनीति में उनकी क्या अहमियत है
आज के समय चन्द्रशेखर आजाद देश के सबसे अधिक लोकप्रिय नेता हैं...!!
जनपद गौतम बुद्ध नगर के GIMS अस्पताल में कार्यरत लगभग 450 आउटसोर्स कर्मचारी, जिनमें डॉक्टर, नर्स, नर्सिंग स्टाफ, वार्ड बॉय, सफाई कर्मी एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं, पिछले दस दिनों से अपने रोजगार की सुरक्षा, सेवाओं के सम्मानजनक समायोजन और दीर्घकालीन अनुभव को उचित मान्यता दिए जाने की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं। इनमें से अनेक कर्मचारी पिछले 10 से 13 वर्षों से संस्थान की सेवा कर रहे हैं तथा कोविड महामारी के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों की सेवा और स्वास्थ्य व्यवस्था को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। ऐसे कर्मचारियों को धमकाए जाने की खबरें बेहद चिंताजनक हैं।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, क्या यही उन स्वास्थ्यकर्मियों का सम्मान है जिन्होंने कोविड महामारी के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर प्रदेशवासियों की सेवा की थी? जिन कर्मचारियों ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष संस्थान को दिए, उनमें से कई आज आयु सीमा पार कर चुके हैं और अपने भविष्य को लेकर असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। क्या उनकी सेवाओं, अनुभव और योगदान को इस तरह नजरअंदाज किया जाना न्यायसंगत है?
हम @UPGovt से मांग करते हैं कि कर्मचारियों के साथ किसी भी प्रकार की धमकी, उत्पीड़न या दमनात्मक कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा उनकी सेवाओं, अनुभव और रोजगार सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए न्यायसंगत एवं मानवीय समाधान निकाला जाए।