मोदी और साय ने मिलकर हसदेव को अदानी के हाथ में बेच दिया है । राजस्थान को कोयला की जरूरत ही नहीं है बावजूद इसके जबरन लोगों के विरोध को कुचलकर, समृद्ध जंगल को बर्बाद करके खदान खोली जा रही है ।
आधे से ज़्यादा कोयला adani के तिल्दा, रायगढ़ और मध्यप्रदेश में पॉवर प्लांटों में खपाया जा रहा है । किसी जाँच एजेंसी में दम नहीं है कि इस हज़ारो करोड़ के भ्रष्टाचार पर कार्यवाही करे ।
छत्तीसगढ़ में बच्चों के मासिक परीक्षा के पेपर को भी अदानी के विज्ञापन का माध्यम बना दिया गया ।
भाजपा के नेताओं को अब अपने माथे पर ही अदानी लिख लेना चाहिए ।
धर्मेंद्र प्रधान को बचाने आंदोलनकारियों पर पुलिसिया कार्यवाही करके मोदी सरकार ने एक बार पुनः साबित कर दिया है कि उसका लोकतंत्र और संविधान में कोई भरोसा नहीं है ।
देश में युवा, छात्र , आदिवासी, किसान, मजदूर के आंदोलन को कुचलकर संगठित लूट का को जारी रखना चाहती है ।
Arresting @PranabDoley19 will not crush the struggle. When the State stands with corporate land grabs & jails those defending indigenous lands, democracy is the first casualty.
Kaziranga is not for corporate profit. India’s land is not for corporate capture. #ReleasePranabDoley
काजीरंगा, असम में जल, जंगल, जमींन पर आदिवासियों के अधिकार के लिए संघर्षरत एक्टिविस्ट प्रणव डोले को गुवाहाटी में पुलिस द्वारा गिरफ़्तार किया गया है जिसका हम पुरज़ोर विरोध करते हैं ।
प्रणव पिछले कुछ वर्षों से काजीरंगा नेशनल पार्क के किनारे होटल हयात के निर्माण सहित विभिन्न परियोजनाओं का विरोध कर रहे थे और जानकारी के अनुसार इसी मामले में उनके ख़िलाफ़ बोकाखात पुलिस ने अपराध दर्ज किया है ।
साथी प्रणव डोले की तत्काल रिहाई की माँग करते हैं ।
तस्वीर राजधानी रायपुर के ग्राम नकटी की है ।
गरीबों को उजाड़कर इसी जगह माननीय विधायकों और अधिकारियों को अपना घर बनाना है ।
विधायक कालोनी के लिए 80 परिवारों को उजाड़ दिया गया ।
सांसद ब्रजमोहन अग्रवाल जी कह रहे हैं कि केंद्र सरकार ने सहमति दी है लेकिन जब तक राज्य सरकार सहमति नहीं देगी खदान नहीं खुल सकती ।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी को तत्काल भाजपा के सबसे वरिष्ठ नेता की बात मानते हुए हसदेव की परसा और केंते एक्सटेंशन खदान की स्वीकृति निरस्त कर देनी चाहिए ।
बयान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल में लिए दिया गया था ।
ये सही है की राज्य सरकार की अनुमति बिना कोई खदान नहीं खुल सकती है क्यूँकि अंतिम वन स्वीकृति और पर्यावरण स्वीकृति राज्य सरकार ही जारी करती है ।
@ChhattisgarhCMO
हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोयला खदानों की स्वीकृति के खिलाफ रामगढ़ संरक्षण एवं संवर्धन समिति के द्वारा आज रामगढ़ (हसदेव अरण्य क्षेत्र )में विशाल आमसभा का आयोजन किया गया ।
आमसभा की अध्यक्षता पूर्व मुख्यमंत्री टी एस सिंह देव जी एवं प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने की ।
राजस्थान के नाम पर हसदेव में 15 हजार एकड़ जंगल जमीन का विनाश किया जा रहा है जिससे 15 लाख से अधिक पेड़ो का विनाश किया जा रहा है ।
दो खदानों PEKB और परसा के लिए पहले ही 6 लाख से अधिक पर काटे जा चुके हैं वह भी ग्रामसभाओं के विरोध को कुचलकर ।
नई केंते एक्सटेंशन खदान की स्वीकृति के ख़िलाफ़ और सम्पूर्ण हसदेव अरण्य के विनाश में ख़िलाफ़ आज पूरे छत्तीसगढ़ में व्यापक आक्रोश है लेकिन अदानी की लूट के लिए समर्पित भाजपा की मोदी-साय सरकार ने छत्तीसगढ़ को अदानी के हाथों बेच दिया है ।
#SaveHasdeo
मोदी सरकार ने राजस्थान के नाम पर अदानी के पॉवर प्लांटों तक कोयला पहुचाने के लिए हसदेव अरण्य में जिस केंते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक की वन स्वीकृति दी है उसके समृद्ध वन क्षेत्र को इस तस्वीर से समझिए।
1762 हेक्टेयर वन क्षेत्र को कोयला खदान में बदलने के लिए 7 लाख से अधिक प्राकृतिक साल जंगल के पेड़ो को काटा जाएगा ।
पहले से संचालित दो खदानों में इसी तरह का जैव विविधता से समृद्ध 10,500 एकड़ समृद्ध जंगल जमीन का विनाश किया जा चुका है ।
अदानी मोदी सरकार की मदद से सिर्फ़ PSU, निजी कंपनियों को ही एनएचआई हथिया रहा है बल्कि इस देश के लोगों की सांसे भी छीन रहा है।
See how deforestation is repeatedly justified. In #Nicobar "only 1.8% forest" will be cleared. In #Hasdeo mining area is "bare minimum." Forests not spreadsheets evry cleared patch fragments ecosystems&destroys habitats.If evry project takes just a little what remains in the end?
छत्तीसगढ़ में एक तरफ़ आदिवासी क्षेत्रों में खनन परियोजनाओं के लिए जंगलों का विनाश किया जा रहा है,
वहीं दूसरी और मध्य छत्तीसगढ़ में खनिज आधारित प्रदूषणकारी उद्योगों के लिए किसानों से उनकी जमीन और पानी छीना जा रहा है ।
रायपुर जिले के तिल्दा ब्लॉक में बड़े पैमाने पर स्थापित किए जा रहे स्पंज आयरन प्लांटों के खिलाफ आज ग्राम अल्दा में विशाल किसान महापंचायत का आयोजन किया गया जिसमे हजारों की संख्या में किसान एकजुट हुए ।
अदानी सहित विभिन्न पूंजीपतियों की सेवा में लगी साय सरकार के खिलाफ पूरे प्रदेश में आक्रोश व्याप्त है ।
विस्थापित आदिवासी मछुआरा समुदायों ने अधिकारों की लड़ाई तेज करने का लिया संकल्प
ग्राम बुका, तहसील पोड़ी उपरोड़ा, जिला कोरबा में आज मिनीमाता हसदेव बांगो बांध से विस्थापित 58 ग्रामों की 22 मछुआरा समितियों के संगठन विस्थापित आदिवासी हसदेव जलाशय संघर्ष समिति द्वारा छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के साथ मिलकर राज्य स्तरीय महासम्मेलन आयोजित किया गया। यह महासम्मेलन 1000 हेक्टेयर से अधिक जल क्षेत्र वाले जलाशयों को ठेका प्रणाली में देने वाली मत्स्य नीति के विरोध में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री दीपक बैज ने की। मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व उप मुख्यमंत्री श्री टी.एस. सिंहदेव, कोरबा सांसद श्रीमती ज्योत्सना चरण दास महंत सहित कांग्रेस पार्टी के विधायकगण उपस्थित रहे।
सभा को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने वन अधिकार मान्यता कानून 2006 के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह कानून आदिवासियों को उनके अधिकार दिलाने के लिए लाया गया था। उन्होंने कहा कि आदिवासियों के सामुदायिक अधिकारों में जल संसाधन भी शामिल हैं, लेकिन भाजपा सरकारों ने इन अधिकारों की अनदेखी की है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विस्थापित आदिवासी मछुआरा समुदाय के अधिकारों के लिए वे पूरी मजबूती से खड़े हैं और मत्स्य नीति में बदलाव की लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री दीपक बैज ने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे आदिवासी बहुल राज्य में आदिवासियों के अधिकारों पर लगातार हमला हो रहा है। बस्तर में लौह अयस्क खनन और उत्तर छत्तीसगढ़ में कोयला खनन के नाम पर आदिवासी समुदायों के साथ अन्याय हो रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस विस्थापित आदिवासी मछुआरा समुदायों की इस लड़ाई के साथ खड़ी है और उन्हें न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
पूर्व उप मुख्यमंत्री श्री टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2022 में पेसा कानून लागू कर ग्राम सभा को सशक्त बनाने का काम किया था, लेकिन वर्तमान सरकार इस कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि पेसा कानून ग्राम सभा को अपनी पारंपरिक सीमा में आने वाले जल, जंगल और जमीन पर निर्णय लेने का अधिकार देता है। ग्राम सभा की अनुमति के बिना जल क्षेत्रों को ठेके पर देना कानून का उल्लंघन है।
सांसद श्रीमती ज्योत्सना चरण दास महंत ने कहा कि विस्थापित आदिवासी मछुआरा समुदाय ने 10 महीने पहले भी उन्हें अपने आंदोलन में बुलाया था। उस समय उन्होंने आंदोलन में शामिल होकर राज्य शासन को पत्र लिखा था और अवगत कराया था कि वन अधिकार मान्यता कानून 2006 का उल्लंघन हो रहा है। उन्होंने कहा कि जल पर स्थानीय आदिवासी समुदायों का अधिकार है और मत्स्य नीति में तत्काल संशोधन किया जाना चाहिए। उन्होंने आश्वस्त किया कि वे आगे भी इस लड़ाई में समुदाय के साथ रहेंगी।
मछुआरा के समिति के अध्यक्ष फिरतु मिंजवार ने कहा कि मत्स्य नीति के नियमों का उल्लंघन करते हुए मत्स्य महासंघ ने बागों जलाशय का ठेका 10 सालों के लिए दे दिया जिसका हम पिछले डेढ़ साल से विरोध कर रहे है हमने हमारा जल हमारा अधिकार का नारा के तहत अपने अधिकार के लिए लड़ना है
मछुआरा समिति के संयोजक सदस्य ऋषि ने कहा कि विस्थापित आदिवासी मछुवारा समितियों का ठेकेदार शोषण कर रहे है जिसके लिए हम मत्स्य नीति को बदलने की मांग को लेकर यह लड़ाई लड़ रहे है जब तक वन अधिकार कानून के अनुरूप बागों बांध के विस्थापित आदिवासी मछुआरा समुदाय को उनके जलाशय पर अधिकार नहीं मिल जाते तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा
मंच का संचालन करते हुए छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन से आलोक शुक्ला ने कहा कि यह हसदेव के आदिवासी पिछले एक दशक से जल जंगल और जमीन को बचाने की लड़ाई लड़ रहे है पूरे प्रदेश में वन अधिकार कानून और पेसा कानून का उल्लंघन कर आदिवासियों के अधिकारों को दरकिनार कर छत्तीसगढ़ के खनिज को लूटा जा रहा है ।
महासम्मेलन में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि जलाशयों को बाहरी ठेकेदारों को सौंपने की नीति विस्थापित आदिवासी और पारंपरिक मछुआरा समुदायों के आजीविका अधिकारों, वन अधिकार कानून 2006 और पेसा कानून के खिलाफ है। सम्मेलन में मांग की गई कि मत्स्य नीति में तत्काल संशोधन किया जाए, जलाशयों की ठेका प्रणाली समाप्त की जाए और वनभूमि पर स्थित छोटे-बड़े सभी जलाशयों के लिए मछली पालन का सामुदायिक अधिकार पत्र स्थानीय ग्राम सभाओं एवं मछुआरा समितियों को प्रदान किया जाए
जारीकर्ता:
विस्थापित आदिवासी हसदेव जलाशय संघर्ष समिति
जिला कोरबा, छत्तीसगढ़
हसदेव-अरण्य में 4.48 लाख पेड़ काटने का प्रस्ताव, अडानी संचालित कोल ब्लॉक के लिए राजस्थान के पीएसयू ने मांगी मंज़ूरी https://t.co/BxqvAgGJFm via @thewirehindi
राजस्थान में बिजली आपूर्ति की आड़ में केवल अडानी को फायदा पहुंचाने का खेल #Hasdeo को उजाड़ रहा है। मौजूदा PEKB खदान, राजस्थान में बिजली आपूर्ति के लिए पर्याप्त है। पहले बलपूर्वक परसा खदान खोला गया, अब केते एक्सटेंशन की तैयारी जिसमे 7 लाख पेड़ काटे जाएंगे।
https://t.co/2IkSLfM5tZ
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हसदेव अरण्य में अडानी के MDO वाली PEKB-1,2 खदान पर रोक लगाने से मना कर दिया.
ये और बात है कि PEKB-1 की खुदाई 4 साल पहले हो चुकी है. PEKB-2 की खुदाई जारी है.
आने वाले दिनों में कई लाख पेड़ काट कर परसा और केते एक्सटेंशन की खुदाई की तैयारी शुरू है.
Assam Gov’t Agrees to Pay the Adani Group for Excessive Power it Cannot Consume in Coming Years. Potentially Rs 12,500 Crore over Five Years: https://t.co/bPPw68Vbww