Reporting the ground reality from Ranchi, Jharkhand.
After Jantar Mantar, students are protesting against repeated exam irregularities and delays in the Jharkhand Public Service Commission (JPSC) recruitment process.
In the 26 years since Jharkhand was formed, JPSC has conducted civil services examinations only 14 times. Years of delays, cancellations, allegations of irregularities, and prolonged uncertainty have left thousands of aspirants frustrated, with many feeling that their futures have been put on hold.
The protest has also taken on a political dimension, with the Jharkhand Loktantrik Krantikari Morcha (JLKM) extending its support to the students.
I'll be on the ground covering the protest, speaking to students, organisers, and political leaders, and bringing you every side of the story, beyond the headlines.
I refuse to accept selective outrage. If you are more offended by a protest slogan than by serious crimes or allegations of violence against women, then your priorities need questioning. Accountability should be demanded consistently, not only when it suits your politics. Don’t be a hypocrite.
> नाम खुरपेंच
> काम BJP की दलाली
> असली काम निष्पक्ष होने का अभिनय करना
> जब जंतर मंतर के प्रोटेस्ट में सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर थे कोई पोस्ट नहीं
> प्रोटेस्ट करने वाले छात्र का भरपूर मजाक बनाया भाई ने
> जब पूरी दुनिया की कैमरा उस आंदोलन की तरफ मुड़ा तब भाई को views का डर सताने लगा
>भाई reach पाने लिए 4,5 पोस्ट डाल दिया ।
> भाई चाहता तो 17 July से पहले आंदोलन को समर्थन दिखा सकता था
> लेकिन फिर BJP से दलाली का पैसा नहीं मिलता।
> छात्र के साथ होने नाम पर ऐसे लोग देश को दीमक की तरह खा रहे हैं
> मुझे उम्मीद है इनको निष्पक्ष समझने वाले इनके फॉलोवर्स सचेत रहेंगे
JMM @mahuamajilive: ये प्रोटेस्ट करने वाले पार्टी के लोग हैं
करारा जवाब दिया युवा ने
जब आंदोलन को राजनीतिक रंग देने की कोशिश हुई, तब झारखंड के छात्रों ने अपना अलग मंच खड़ा कर दिया।
यही झारखंड के युवाओं का जवाब है यह लड़ाई किसी पार्टी की नहीं, छात्रों के भविष्य की है।
जो छात्र हित की बात करेगा, उसका साथ मिलेगा।
जो आंदोलन को हाईजैक करने की कोशिश करेगा, उसे छात्र खुद जवाब देंगे।
जो जन्तर-मन्तर पर इस्तीफा माँग रहे थे वो झारखंड पर कह रहे सरकार को बात सुननी चाहिए, इसी को आसान भाषा में दोगलापन कहते हैं,
ऐसे लोगों को पहचाने और याद रखें कि ये निष्पक्ष नहीं हैं
काहे बे ? पैसा आ गया खातों में?
हालांकि हम कभी इस्तीफे के समर्थक नहीं रहे हैं क्योंकि जो आता है वो खाता है,जब तक सिस्टम नहीं बदलेगा कुछ नहीं बदलेगा,
लेकिन हेमंत सोरेन ने छात्रों का जीवन खराब किया है ,हर परीक्षा में धांधली हुई हैं, हम सोरेन का इस्तीफा लेकर सिस्टम सुधरेंगे।
मीडिया में आरक्षण बहुत जरूरी है ! - : राजकुमार भाटी जी🔥🔥🔥
राजकुमार भाटी जी साधारण परिवार से निकले, सच्चे संघर्षशील और बहुजन हितों के निडर आवाज़ हैं।
वे ऊंची-ऊंची बातें नहीं करते, बल्कि ज़मीन की हकीकत को साधारण भाषा में रख देते हैं।
बहुजन समाज को ऐसे ही सच्चे, निडर और समर्पित नेताओं की ज़रूरत है जो जातिगत भेदभाव के खिलाफ लड़ें पिछड़ों-दलितों-किसानों-युवाओं की आवाज़ बनें और सत्ता के गलियारों में भी आम आदमी की बात रख सकें।
राजकुमार भाटी जैसे नेता बहुजन आंदोलन की रीढ़ हैं। वे न सिर्फ बोलते हैं, बल्कि बहुजन समाज की पीड़ा को अपनी आवाज़ बनाते हैं।
बहुजन एकता ज़िंदाबाद!"