मेवात : हम केवल सरकार का आश्रय नहीं लेंगे, आत्मरक्षा का अधिकार है उसके परिणाम जो भी होंगे उसकी जिम्मेदारी हमारी नही होगी
हमलों का हम सामना भी करेंगे और भयभीत भी नहीं होंगे : @AlokKumarLIVE , कार्याध्यक्ष, विश्व हिन्दू परिषद
#Mewat#Haryana
@mlkhattar ये हुई हीं क्यों?
वास्तविकता में पूरी घटनाओं की जिम्मेदारी आपको लेनी चाहिए।
भगवान श्री राम से आपने कुछ नहीं सीखा?
आपकी प्रशासनिक काबिलियत संदेह के घेरे में है।
क्यों न मुख्यमंत्री किसी युवा को बनाया जाय?
आप मानसिक और शारीरिक तौर पर थक चुके हो।
आप इस्तीफा देकर आराम करो सर।
केंद्रीय संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति भाजपा की सदस्य एवं पूर्व सांसद डॉ सुधा यादव जी से गुरुग्राम स्थित उनके आवास पर शिष्टाचार भेंट हुई।
@drsudhayadavBJP जी एक अच्छे राजनीतिक नेतृत्व कौशल वाली नेत्री है और वह जानती है कि आधुनिक दुनिया में अपनी दृष्टि को सफलता की कहानियों में कैसे बदलना है।
प्रभु से प्रार्थना है की ऐसे जनहितैषी राष्ट्र सेविका का सदैव कल्याण करे।
भज मन 🙏 ओ३म्
#sumarti
@mlkhattar@narendramodi
कुछ अकाउंट प्रोपेगेंडा फैला रहे हैं और साहिल नाम होने का फायदा उठा रहे हैं कि यह जिहादी नहीं है!
उन दो कौड़ी के इंसानों को मैं साफ बताना चाहता हूं कि यह तुम्हारे ही लोग हैं!
आज के समय में #लव_जिहाद फैलाने के लिए अक्सर जिहादी प्रवृत्ति के लोग हिंदू नामों का इस्तेमाल करते हैं और ऐसा नाम रखते हैं जो हिंदू और मुस्लिम में कॉमन हो गया है!
उससे भी दो कदम आगे बढ़कर बहुत से जिहादी सिर्फ हिंदू नाम रखते हैं नाम के पीछे खान, अंसारी या जो भी ABCD हो लगा देते हैं, लेकिन जब हिंदू लड़कियां उनसे प्रश्न करती है कि नाम क्या है तो वह अपना जिहादी नाम छुपा कर सिर्फ हिंदुओं वाला नाम बताते हैं!
एक नीच प्रवृति के अकाउंट से लिखा जाता है कि साहिल ने कलावा बांध लिया तो क्या हुआ यह तो सूफी संतों की परंपरा है!
👉 जिस जिहादी को भी साहिल में उनका बाप नजर आता है, वह यहां पर देख ले उसका इंस्टाग्राम अकाउंट है!
सोने की चिड़िया वाले देश का असली राजा कौन ?
बड़े ही शर्म की बात है कि #महाराज_विक्रमादित्य के बारे में देश को लगभग शून्य बराबर ज्ञान है। जिन्होंने भारत को सोने की चिड़िया बनाया था, और स्वर्णिम काल लाया था ।
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★उज्जैन के राजा थे गन्धर्वसैन , जिनके तीन संताने थी , सबसे बड़ी लड़की थी मैनावती , उससे छोटा लड़का भर्तृहरि और सबसे छोटा वीर विक्रमादित्य...बहन मैनावती की शादी धारानगरी के राजा पदमसैन के साथ कर दी , जिनके एक लड़का हुआ गोपीचन्द , आगे चलकर गोपीचन्द ने श्री ज्वालेन्दर नाथ जी से योग दीक्षा ले ली और तपस्या करने जंगलों में चले गए , फिर मैनावती ने भी श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से योग दीक्षा ले ली ।
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★आज ये देश और यहाँ की संस्कृति केवल विक्रमादित्य के कारण अस्तित्व में है
अशोक मौर्य ने बोद्ध धर्म अपना लिया था और बोद्ध बनकर 25 साल राज किया था।
भारत में तब सनातन धर्म लगभग समाप्ति पर आ गया था, देश में बौद्ध और जैन हो गए थे ।
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★रामायण, और महाभारत जैसे ग्रन्थ खो गए थे, महाराज विक्रम ने ही पुनः उनकी खोज करवा कर स्थापित किया
विष्णु और शिव जी के मंदिर बनवाये और सनातन धर्म को बचाया।
विक्रमादित्य के 9 रत्नों में से एक कालिदास ने अभिज्ञान शाकुन्तलम् लिखा, जिसमे भारत का इतिहास है
अन्यथा भारत का इतिहास क्या मित्रो हम भगवान् कृष्ण और राम को ही खो चुके थे।
हमारे ग्रन्थ ही भारत में खोने के कगार पर आ गए थे।
उस समय उज्जैन के राजा भर्तृहरि ने राज छोड़कर श्री गुरू गोरक्षनाथ जी से योग की दीक्षा ले ली। और तपस्या करने जंगलों में चले गए , राज अपने छोटे भाई विक्रमादित्य को दे दिया , वीर विक्रमादित्य भी श्री गुरू गोरक्षनाथ जी से गुरू दीक्षा लेकर राजपाट सम्भालने लगे और आज उन्हीं के कारण सनातन धर्म बचा हुआ है, हमारी संस्कृति बची हुई है ।
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★महाराज विक्रमादित्य ने केवल धर्म ही नही बचाया
उन्होंने देश को आर्थिक तौर पर सोने की चिड़िया बनाई, उनके राज को ही भारत का स्वर्णिम राज कहा जाता है।
विक्रमादित्य के काल में भारत का कपडा, विदेशी व्यपारी सोने के वजन से खरीदते थे
भारत में इतना सोना आ गया था की, विक्रमादित्य काल में सोने की सिक्के चलते थे , आप गूगल इमेज कर विक्रमादित्य के सोने के सिक्के देख सकते हैं।
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★हिन्दू कैलंडर भी विक्रमादित्य का स्थापित किया हुआ है
आज जो भी ज्योतिष गणना है जैसे , हिन्दी सम्वंत , वार , तिथीयाँ , राशि , नक्षत्र , गोचर आदि उन्हीं की रचना है , वे बहुत ही पराक्रमी , बलशाली और बुद्धिमान राजा थे ।
कई बार तो देवता भी उनसे न्याय करवाने आते थे ,
विक्रमादित्य के काल में हर नियम धर्मशास्त्र के हिसाब से बने होते थे।, न्याय , राज सब धर्मशास्त्र के नियमों पर चलता था
विक्रमादित्य का काल श्रीराम के राज के बाद सर्वश्रेष्ठ माना गया है, जहाँ प्रजा धनि और धर्म पर चलने वाली थी ।
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पर बड़े दुःख की बात है की भारत के सबसे महानतम राजा के बारे में हमारे स्कूलों कालेजों मे कोई स्थान नही है ।
सावरकर का बीज
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में जिन्ना की तस्वीर को लेकर 2 साल पहले जब विवाद उठा तो एक दलील ये भी दी गई कि भले ही वो पाकिस्तान के संस्थापक थे मगर ये नहीं भूलना चाहिए कि भारत को अंग्रेज़ों से आज़ाद करवाने में उनका भी योगदान था। मतलब संवेदनशीलता और उदारता का आलम ये है कि जिस शख्स की टू नेशन थ्योरी ने देश के दो टुकड़े कर दिए फिर भी कुछ लोग ये भूलने को तैयार नहीं कि देश की आज़ादी में उनका भी योगदान था और इसके लिए उन्हें मान्यता मिलनी चाहिए। मगर वहीं जब देश की आजादी में सावरकर के मूल्यांकन की बात आती है तो उनके सारे जीवन को ये कहकर खारिज करने की कोशिश की जाती है कि उन्होंने तो अंगेज़ों से माफी मांगी थी...उसके अलावा सावरकर ने क्या किया, वो कौन थे, क्या थे, हमें कोई ख़बर नहीं।
अरे भाई, माफी तो नाभा जेल जाने पर नेहरू ने भी अंग्रेज़ों से मांगी थी। सावरकर तो फिर भी देश की सबसे खतरनाक जेल में बंद थे। जहां उनकी मौत तय थी। मगर नेहरू जी के ऊपर तो ऐसा कोई खतरा नहीं था। वो तो सिर्फ 3 दिन के अंदर अपने पिता से वायसराय को सिफारिश लगवाकर माफी मांग जेल से बाहर आ गए। सावरकर तो अंडमान के जेल में दस साल रहे, नेहरू जी तो कुछ घंटे में ही बाहर आ गए। ऐसे माफी मांगने पर जब उनकी महानता पर कोई असर नहीं पड़ा। वो देश के पीएम बने। भारत रत्न हुए, तो सावरकर की पूरी शख्सियत को ही उनकी माफियां क्यों बना दिया गया।
अगर कोई शख्स देश की खातिर फांसी पर लटक जाए तो ये उसकी महानता है और उस महानता के लिए उसका सम्मान भी होना चाहिए मगर ऐसी ही स्थितियों में दूसरा कोई शख्स जैसे-तैसे खुद को बचाकर देश के लिए ही कुछ करना चाहता है, तो वो अपराधी और डरपोक कैसे हो गया? आखिर दोनों का मकसद तो एक ही है। बस फैसला अलग है।
अगर सावरकर को लगा कि यूं ही मर जाने से अच्छा है कि जैसे-तैसे करके यहां से बाहर आओ फिर देख जाएगा कि आगे क्या करना है, तो इसमें क्या अनैतिक हो गया। वो माफी किसी कायरता वश नहीं बल्कि लड़ाई में जैसे-तैसे बने रहने की रणनीति का हिस्सा था। मगर आखिर में उनका लक्ष्य भी वही था जो गांधी जी का था, जो भगत सिंह का था, जो नेहरू का था। गांधी जी लंदन में पहली बार सावरकर से मिले तो उनके व्यक्तित्व के प्रशंसक हो गए। उन्होंने एक से ज़्यादा मौकों पर सावरकर को सच्चा देश भक्त भी कहा। उनकी मौत के बाद इंदिरा जी ने उनकी याद में डाक टिकट भी जारी किया। नेहरू की मौत के बाद उन्हें पेंशन भी दी गई। मगर राहुल गांंधी मज़ाक उड़ाते हुए कहते हैं कि मैं सावरकर नहीं हूं, माफी नहीं मांगूंगा। मतलब जो लोग खुद अपनी पार्टी का अतीत नहीं जानते वो लोग सावरकर के अतीत पर टिप्पणी कर उन्हें सर्टिफिकेट बांट रहे हैं।
किसी भी देश का इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है कि वो उन लोगों को गुनहगार मान कर उनका मज़ाक बनाने लगे जिनका उसे सम्मान करना चाहिए था। और यही अपराध सालों तक सावरकर को लेकर एक वर्ग करता आया है। ये वो वर्ग है जो औरंगजे़ब की क्रूरता का वर्णन करते हुए हिचकिचाता है और सावरकर ने जो किया उसे स्वीकार करने से मना करता है। सावरकर इसलिए बुरे नहीं थे क्योंकि उन्होंने माफी मांगी वो इसलिए बुरे थे कि उन्होंने हिंदुत्व का विचार दिया। फिर उस विचार की सज़ा के तौर पर उनकी माफियों को ही उनकी पूरी शख्सियत बना दिया गया। एक कवि सावरकर, लेखक सावरकर, चिंतक सावरकर, क्रांतिकारी सावरकर, नेता सावरकर सब दफन कर दिए गए और उनकी वो 6 माफियां खूंटी पर टांग दी गईं । मैक्सिकन कहावत है, जिन्होंने मुझे दफनाने की कोशिश की वो नहीं जानते थे मैं बीज हूं फिर से उग आऊंगा। और ये बताने की शायद ज़रूरत नहीं कि सावरकर का बीज दफन है या फिर से उग आया है।
@nirajbadhwar
बायकाँट रूह अफजा
31 मई को निर्जला एकादशी है, सभी सनातनी पुण्य का काम करेंगे छबीली बाटेंगे, रूह अफजा कम्पनी को एक दिन में 60 करोड़ रुपये की सेल कराएंगे इस 60 करोड़ रुपये में से 10% PFI को जाएगा, जो देश में दंगा पथराव और इस्लामीकरण काम करती है, और सनातनियों पर प्रहार करती है
रविन्द्र जडेजा जी धर्मपत्नी रिवाबा जडेजा जी साड़ी🚩पहनकर स्टेडियम आईं हैं?
ये कोई बड़ी बात नहीं बल्कि बहुत बड़ी बात हैं वरना गुगल कर लेना किसी और क्रिकेटर की वाइफ साड़ी जैसे परिधान में कभी भी क्रिकेट स्टेडियम में आई हों तों मुझे चित्र भेज देना🙏
Csk🥰💞✊
'श्रीराधा के मुख से 24 एकादशी-व्रत के महत्व का वर्णन'
#Thread
दक्षिण दिशा में उशीनर नाम से प्रसिद्ध एक देश है, जहाँ एक समय दस वर्षों तक इन्द्र ने वर्षा नहीं की। उस देश में जो गोधन से सम्पन्न गोप थे, वे अनावृष्टि के भय से व्याकुल हो अपने कुटुम्ब और गोधनों के साथ व्रजमण्डल में आ गये। नन्दराज की सहायता से वे पवित्र वृन्दावन में यमुना के सुन्दर एवं सुरम्य तटपर वास करने लगे। भगवान श्रीराम के वर से यज्ञसीता स्वरूपा गोपाङ्गनाएँ उन्हीं के घरों में उत्पन्न हुईं। उन सबके शरीर दिव्य थे तथा वे दिव्य यौवन से विभूषित थीं।
एक दिन वे सुन्दर श्रीकृष्ण का दर्शन करके मोहित हो गयीं और श्रीकृष्ण की प्रसन्नता के लिये कोई व्रत पूछने के उद्देश्य से श्रीराधा के पास जाकर बोलीं, 'दिव्यस्वरूपे, कमललोचने, वृषभानुनन्दिनी श्रीराधे! आप हमें श्रीकृष्ण की प्रसन्नता के लिये कोई शुभव्रत बतायें। जो देवताओं के लिये भी अत्यंत दुर्लभ हैं, वे श्रीनन्दनन्दन तुम्हारे वश में में रहते हैं। राधे! तुम विश्वमोहिनी हो और सम्पूर्ण शास्त्रों के अर्थज्ञान में पारंपग भी हो।'
श्रीराधा ने कहा, 'प्यारी बहिनों! श्रीकृष्ण की प्रसन्नता के लिये तुम सब एकादशी-व्रत का अनुष्ठान करो। उससे साक्षात श्रीहरि तुम्हारे वश में हो जायेंगे, इसमें संशय नहीं है।
गोपियों ने पूछा, 'राधिके! पूरे वर्षभर की एकादशियों के क्या नाम हैं, यह बताओं। प्रत्येक मास में एकादशी का व्रत किस भाव से करना चाहिये?
श्रीराधा ने कहा, 'गोपकुमारियों! मार्गशीर्ष मास के कृष्णपक्ष में भगवान विष्णु के शरीर से मुख्यत: उनके मुख से एक असुर का वध करने के लिये एकादशी की उत्पत्ति हुई, अत: वह तिथि अन्य सब तिथियों से श्रेष्ठ है। प्रत्येक मास में पृथक्-पृथक् एकादशी होती है। वही सब व्रतों में उत्तम है। मैं तुम सबों के हित की कामना से उस तिथि के छब्बीस नाम बता रही हूँ। मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी से आरम्भ करके कार्तिक शुक्ला एकादशी तक चौबीस एकादशी तिथियाँ होती हैं। उनके नाम क्रमश: इस प्रकार है; उत्पन्ना, मोक्षा, सफला, पुत्रदा, षट्तिला, जया, विजया, आमलकी, पामोचनी, कामदा, वरुथिनी, मोहिनी, अपरा, निर्जला, योगिनी, देवशयनी, कामिनी, पवित्रा, अजा, पद्या, इन्दिरा, पापङ्कुशा, रमा तथा प्रबोधिनी। दो एकादशी तिथियाँ मलमास की होती हैं। उन दोनों का नाम सर्वसमप्तप्रदा है। इस प्रकार जो एकादशी के छब्बीस नामों का पाठ करता है, वह भी वर्षभर की द्वादशी (एकादशी) तिथियों के व्रत का फल पा लेता है।
व्रजाङ्गनाओं! अब एकादशी-व्रत के नियम सुनो! मनुष्य को चाहिये कि वह दशमी को एक ही समय भोजन करें और रात में जितेन्द्रिय रहकर भूमि पर शयन करे। जल भी एक ही बार पीये। धुला हुआ वस्त्र पहने और तन-मन से अत्यंत निर्मल रहे। फिर ब्राह्म-मुर्हूत में उठकर एकादशी को श्रीहरि के चरणों में प्रणाम करें। तदनन्तर शौचादि से निवृत हो स्नान करें। कुएँ का स्नान सबसे निम्रकोटिका है, बावड़ी का स्नान मध्यम कोटिका है, तालाब और पोखरे का स्नान उत्तम श्रेणी में गिना गया है और नदी का स्नान उससे भी उत्तम है। इस प्रकार स्नान करके व्रत करने वाला नरश्रेष्ठ क्रोध और लोभ का त्याग करके उस दिन नीचों और पाखण्डी मनुष्यों से बात न करे। जो असत्यवादी, ब्राह्मणनिन्दक, दुराचारी, अगम्या स्त्री के साथ समागम में रत रहने वाले, परधनहारी, परस्त्रीगामी, दुर्वृत्त तथा मर्यादा का भंग करने वाले हैं, उनसे भी व्रती मनुष्य बात न करें। मन्दिर में भगवान केशव का पूजन करके वहाँ नैवेद्य लगवाये और भक्तियुक्त चित्त से दीपदान करें। ब्राह्मणों से कथा सुनकर उन्हें दक्षिणा दे, रात को जागरण करें और श्रीकृष्ण-संबंधी पदों का गान एवं कीर्तन करे। वैष्णव व्रत (एकादशी) का पालन करना हो तो दशमी को काँसे का पात्र, मांस, मसूर, कोदो, चना, साग, शहद, पराय अन्न, दुबारा भोजन तथा मैथुन, इन दस वस्तुओं को त्याग दे। जुए का खेल, निद्रा, मद्य-पान, दन्तधावन, परनिन्दा, चुगली, चोरी, हिंसा, रति, क्रोध और असत्यभाषण; एकादशी को इन ग्यारह वस्तुओं का त्याग कर देना चाहिये। काँसे का पात्र, मांस, शहद, तेल, मिथ्याभोजन, पिठ्ठी, साठी का चावल और मसूर आदि का द्वादशी को सेवन न करे। इस विधि से उत्तम एकादशी व्रत का अनुष्ठान करें।'
गोपियाँ बोलीं, 'परमबुद्धिमती श्रीराधे! एकादशी व्रत का समय बताओ। उससे क्या फल होता है, यह भी कहो तथा एकादशी के माहात्म्य का भी यथार्थ रूप से वर्णन करो।'
श्रीराधा ने कहा, 'यदि दशमी पचपन घड़ी (दण्ड) तक देखी जाती हो तो वह एकादशी त्याज्य है। फिर तो द्वादशी को ही उपवास करना चाहिये। यदि पलभर भी दशमी से वेध प्राप्त होतो वह सम्पूर्ण एकादशी तिथि त्याग देने योग्य है। ठीक उसी तरह, जैसे मदिरा की एक बूँद भी पड़ जाये तो गङ्गा जल से भरा हुआ कलश त्याज्य हो जाता
द कश्मीर फाइल्स,द केरला स्टोरी, द बंगाल स्टोरी
द अजमेर फाइल्स, जैसी आनी वाली अनेकों
फाईल,स्टोरी और जिहाद का जन्मदाता है.....
मात्र एक व्यक्ति वर्ना हम सब ऐ कभी भी देख नहीं पाते।
दिल्ली मर्डर