#factsyoudidntknow#IndianHistory
हनुमान् चालीसा भूत दिखने पर पढ़ते हैं, किंतु पुलिस दिखने पर भी हनुमान् चालीसा का पाठ करते पहली बार देखा !
जब मुगल पहलीबार भारत आए तो मुगल सेना युद्धाभ्यास में व्यस्त थी, तब मुगल सुल्तान ने गुप्तचर जनकारी लेने भेजा पता करके आओ भारतीय राजाओं की सेना कौनसा अभ्यास कर रही है !
पता कर गुप्तचर वापस लौटा तो मुगल सुल्तान ने पूछा कहो भारतीय राजा की सेना क्या क्या अभ्यास कर रहे है ?
गुप्तचर बोला पता ना जी आम की लकड़ियों में आग लगा गोला बना कर बैठे और कुछ कुछ जप रहे है !
अब समझे भारतीय राजाओं ने सभी संसाधन होते हुए भी भारत को गुलाम कैसे बनवाया ?
सनद रहे :– तब आरक्षण नहीं था, शुद्ध टैलेंट मैरिटखोर देश को गुलाम बनावा 1200 साल छिताई खिलवाते रहे !
hope that's help, नमस्ते !
#Baba_Manish
पूंछ उठाकर भागता सूरवीर! 😃🤣
दिल्ली पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज को अरेस्ट किया था, लेकिन पुलिस का डंडा देखते ही ये लफंगा खिड़की से निकलकर ऐसे भागा, जैसे मुगलों को देखते ही कायर राजा भाग गए थे।
खुद को सूरवीर समझने वाले ये लफंगे असल में भगोड़े हैं।
BJP will lose UP election badly. If Anti Incumbency was not enough, now its covert support to anti reservation forces will sink it to the bottom to 2007 like scenario
BSP will be biggest beneficiary and in positon to form a govt
Nothing says “progressive politics” quite like ignoring Babasaheb and feminists from the Ambedkarite movement for decades and then applauding an upper-caste leader for repeating them.
Didn’t know that people only listen to an upper-caste Congress delivery system!
In Pune, Rahul Gandhi rightly criticised the casteist and patriarchal Manusmriti. But, just days earlier, he had declared that he would never let the RSS be finished and vowed to protect RSS’s expression, which propagates the values of the Manusmriti.
Aise kaise chalega? Yeh kya golmaal hai?
Babasaheb had publicly burned the Manusmriti on December 25, 1927, and Ambedkarites, especially women, have critiqued the Manusmriti for decades. Since the late 90s, the women of Bharip Bahujan Mahasangh and now Vanchit Bahujan Aaghadi have marked Manusmriti Dahan Din as Bhartiya Stree Mukti Din. Despite repeated demands from Maharashtra Ambedkarites to declare December 25 as Bhartiya Stree Mukti Din, Congress despite party being in power in the state, Congress never formally condemned the Manusmriti nor acknowledged Bhartiya Stree Mukti Din.
Now, Rahul Gandhi has simply co-opted the vocabulary of the Ambedkarite movement for electoral gains.
The upper-caste feminists, socialists, and liberals ignore Ambedkarites and Dalit feminists but rush to write long, glowing praise for Rahul Gandhi for saying the exact same things Ambedkarites have fought for decades to articulate.
• What does this say about the mainstream political and intellectual class?
• What does this say about their intellectual honesty?
• What does this selective validation say about their persistent preference for upper-caste leadership?
• What does this persistent preference for upper-caste, Congress leadership unmask about a sanitised liberalism that champions inclusion only so long as real, structural political power remains locked within the Congress?
आज दिनांक 24-08-2026 को जनपद बहराइच में पार्टी के जिम्मेदार पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के साथ सेक्टर बूथ समीक्षा के संदर्भ एक अतिमहत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई जिसमें शामिल हुआ।
#जयभीम#मिशन_2027#BSP#बहराइच
भारत में "वन नेशन वन एजुकेशन"लागू होना चाहिए।
सभी सरकारी अधिकारी कर्मचारी सरकारी पदों पर आसीन सांसद विधायक पार्षद नगर पंचायत नगर निगम अध्यक्ष मेयर मंत्री और कोई भी सरकारी तनख्वाह ले रहे व्यक्ति के लिए बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ना अनिवार्य होना चाहिए.
साथियों मुझे बताते हुए अतयंत हर्ष हो रहा है की मेरी किताब का दक्षिण एशिया संस्करण प्रकाशित हो गया है। यह भारत, नेपाल, बंदलादेश, श्रीलंका एवं भूटान में सस्ते दाम पर मिलेगी। अभी अमेज़ॉन पर लन्दन/अमरीकी संस्करण रूपए 22000/-का बिक रही है. अब यह 1100/- में भारत में बिकेगी।
2007–2012 का दौर गवाह है कि बहनजी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में कानून का राज स्थापित हुआ। न जाति देखी गई, न चेहरा, और गलत करने वाला सीधे कानून के सामने था। 2027 में जनता फिर उसी भरोसेमंद शासन को वापस लाना चाहती है।
देश मे हेल्थ बजट 106570 करोड़ लगभग और उत्तरप्रदेश मे 37956 करोड़ जो की हेल्थ और मेडिकल पर ही खर्चा होता है और उसके बाद एक नागरिक की मौत अयोध्या में स्ट्रेचर समय पर ना मिलने पर हो जाति है दुर्भाग्य है देश का. स्वास्थ्य मंत्री जी अपना विभाग छोड़कर आरक्षण खत्म करने में लगें हैँ.स्वास्थ मंत्री जी को अपना विभाग बदलवा लेना चाहिए. या इस्तीफा देना चाहिए.जय भीम जय भारत
महाराष्ट्र में वर्गीकरण समर्थक अपना प्रतिशत काहे नही देखते
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बिहार में;
चमार जाति = 5.25%
बाल्मीकि/मेहतर = 00.24%
दुसाध = 5.32%
धोबी = 00.84%
पासी = 1%
कुल पद = 2035
चमार = 111 (5.4% अथार्त प्रतिशत 5.25% के आसपास)
दुसाध = 88 (4.34% अथार्त अपने प्रतिशत 5.31% से कम)
धोबी = 59 (2.92%अथार्त अपने प्रतिशत 0.84% से ज्यादा)
पासी = 49 (2.42% अथार्त अपने प्रतिशत 1% से ज्यादा)
लेकिन इन मोहतर्मा अपने ब्राह्मण ठाकुर व अन्य मित्रो के साथ मिलकर ऐसा माहौल बनाने की सोच रही है जैसे चमार को कई गुणा ज्यादा मिल गया।।जबकि;
"दुसाध को नुकसान हुआ। लेकिन वर्गीकरण का सबसे ज्यादा विरोध बिहार में दुसाध ही करते है क्योंकि रामविलास पासवान जी जानते थे कि जब तक एकता है तब तक पूछा जा रहा है"
इसलिए मुझे धोबी व पासी के द्वारा अपने प्रतिशत से 3 गुणा ज्यादा शीट लेने पर आपत्ति नही है। अच्छी बात है कि वो पढ़कर मौका ले रहे है।।
प्रश्न : यह है कि ऐसा मौका बाल्मीकि व अन्य क्यो नही भुना रहे।
उत्तर : जैसे यह मोहतर्मा बाल्मीकि से आह्वान करने की पढ़ाई करो, और धोबी व पासी की तरह अपने प्रतिशत से कई गुणा ले लो कि जगह "चमार हाय हाय" में व्यस्त है।
यह मोहतर्मा इसकी जगह कह सकती थी कि;
"बाल्मीकि मात्र दशमलव 2 प्रतिशत (0.2%) होने के बाद भी उनके पास अवसर है कि वो पढ़कर 16% आरक्षण पर हक जमा सकते है।।अब अगर बाल्मीकि की लिए वर्गीकरण भी कर दिया जाए तो 0.2% पर कितना मिलेगा?
"
ऐसी ही मूर्खता महाराष्ट्र में हो रही है।।
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1.मातंग मात्र 2% है।
2.चमार कि उससे सम्बंधित जातिया भी 2% के आसपास है।
3.महार 8% है।
अब मातंग व चमार महाराष्ट्र में 2%-2% में क्या कर लेंगे? जबकिं वो 14% पर बिहार में पासी व धोबी की तरह शिक्षित होकर अपना हक जमा सकते है।
वर्गीकरण के नाम पर एक तरह से बाल्मीकि का कंधा इस्तेमाल करके जो जातिया हमेशा आरक्षण ही नही बल्कि एससी/एसटी के खिलाफ रही है वो मुख्यतया सवर्ण जातिया अपना हित साधना चाहते है। उन्हें आर्टिकल 30 के अल्पसंख्यक आरक्षण जो कि एससी/एसटी से बेहतर है से आपत्ति नही है लेकिन एक नफरत, चिढ़, जो एससी/एसटी के प्रति डीएनए में पूर्वजो से मिली है, उंसके आधार पर नए नए प्रयोग करते रहते है।
अब इस मोहतर्मा से जाटव हाय हाय करवाते रहते है। जबकि इस मोहतर्मा को समझना चाहिए कि इन लोगो को तुम्हारे व्यक्तिगत मैटर से कुछ लेना देना नही है, न ही कोई sympathy है। वो तो एससी/एसटी के ही बिल्कुल खिलाफ है।।
विकास कुमार जाटव
गौतमबुद्ध नगर में सपा और भाजपा के शक्ति प्रदर्शन के बाद अब बसपा मायावती के गृह जिले से अपने 'मिशन-2027' का आगाज करने जा रही है. दादरी के बजाय जेवर के दनकौर में जनसभा आयोजित कर और प्रत्याशी की घोषणा की कमान आकाश आनंद को सौंपकर पार्टी अपने इस पारंपरिक गढ़ में खिसके जनाधार को फिर से साधने की कवायद में है.
पूरी खबर: https://t.co/kQt7y7jYbL
#AkashAnandRally #JewarSeat #Mayawati #BSP #UPElection2027
संदीप चौधरी ने जयंत चौधरी से पूछा
"पश्चिम उत्तर प्रदेश से इलाहाबाद हाई कोर्ट से ज्यादा नजदीक लाहौर है"
यह सवाल पश्चिम उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट की अलग बेंच के लिए था।
"जयंत चौधरी ने कहा वह इस पर पर्दे के पीछे
भाजपा से बात कर चुके हैं"
भाजपा भी पश्चिम उत्तर प्रदेश को एक अलग राज्य नहीं बना रही है और ना ही पश्चिम में इलाहाबाद हाईकोर्ट की कोई बेंच खोल रही है।
सालों से पश्चिम उत्तर प्रदेश एक अलग राज्य और हाईकोर्ट की अलग बेंच की मांग कर रहा है।
बसपा ने अपने शासनकाल में हाईकोर्ट की अलग बेंच और अलग राज्य के लिए प्रस्ताव भेजा था लेकिन कांग्रेस ने नहीं माना।
बताया जाता है समाजवादी पार्टी ने इसमें अड़ंगा अदा दिया था।
अगर बसपा 2012 में फिर से सरकार में आती तो दबाव बनाकर अब तक उत्तर प्रदेश के चार हिस्से हो जाते हैं पश्चिम उत्तर प्रदेश में एक अलग बेंच बन जाती और आज पश्चिम उत्तर प्रदेश की तस्वीर अलग होती है।
So, all the "sanskari lafangaas" have started crying over this FIR, calling it a fake SC-ST Act case. Abusing an MP and issuing rape threats against him and SC women is not a serious concern for them at all. Wow!
Is being a rape-apologist your merit? Sick.
आरक्षण कोई खैरात नहीं है, यह संविधान से मिला अधिकार है। इसका उद्देश्य उन वर्गों को समान अवसर देना है जिन्हें सदियों तक सामाजिक असमानता का सामना करना पड़ा।