26वें अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन में हरियाणा पुलिस ने एक और राष्ट्रीय उपलब्धि अपने नाम की। 🇮🇳
हरियाणा राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो (SCRB) द्वारा विकसित #CrPIS प्रणाली को देशभर में सर्वश्रेष्ठ मॉडल के रूप में सराहा गया तथा रिकॉर्ड समय में इसके सफल विकास एवं क्रियान्वयन के लिए NCRB द्वारा ‘Certificate of Excellence’ से सम्मानित किया गया।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने नई दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में इस अत्याधुनिक प्रणाली का शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व एवं डीजीपी श्री अजय सिंघल के मार्गदर्शन में हरियाणा पुलिस तकनीक आधारित पुलिसिंग और वैज्ञानिक जांच के क्षेत्र में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है।
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दोहरे हत्याकांड के आरोपी को वारदात के कुछ ही घंटों के भीतर गिरफ्तार कर हरियाणा पुलिस ने अपनी त्वरित कार्रवाई और पेशेवर दक्षता का परिचय दिया। आरोपी दिल्ली फरार होने की फिराक में था, लेकिन सोनीपत पुलिस की सतर्कता और तकनीकी निगरानी के चलते उसे दबोच लिया गया।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के सुरक्षित हरियाणा के संकल्प और डीजीपी अजय सिंघल के नेतृत्व में अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई लगातार जारी है। कानून व्यवस्था को चुनौती देने वालों के लिए हरियाणा में कोई जगह नहीं।
#HaryanaPolice #SonipatPolice #ZeroToleranceAgainstCrime #SafeHaryana
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🚨 हरियाणा पुलिस का अपराधियों पर लगातार प्रहार जारी
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के जीरो टॉलरेंस विजन के अनुरूप हरियाणा पुलिस अपराध और अपराधियों के खिलाफ लगातार निर्णायक कार्रवाई कर रही है।
पानीपत में 12 वर्षीय अपहृत बच्चे को 11 घंटे में सकुशल बरामद करने के बाद आज झज्जर के दुजाना में STF बहादुरगढ़ यूनिट की बड़ी कार्रवाई में कुख्यात अपराधी एवं संजय बिरधाना गैंग के सक्रिय सदस्य इंद्रपाल को ढेर किया गया।
DGP अजय सिंघल के नेतृत्व में हरियाणा Police का स्पष्ट संदेश—कानून का राज सर्वोपरि है, अपराधियों के लिए हरियाणा में कोई जगह नहीं।
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⚠️ सावधान! ‘पेमेंट रिक्वेस्ट’ फ्रॉड से बचें ⚠️
साइबर ठग पहले लॉटरी, कैशबैक या किसी आकर्षक ऑफर का लालच देते हैं, फिर आपके UPI ऐप पर Payment Request भेजते हैं। जैसे ही आप UPI PIN दर्ज करते हैं, आपके खाते से पैसे कट जाते हैं।
✅ याद रखें: UPI PIN पैसे भेजने के लिए होता है, प्राप्त करने के लिए नहीं।
✅ पैसे पाने के लिए QR कोड स्कैन करने या PIN डालने की आवश्यकता नहीं होती।
✅ किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
साइबर धोखाधड़ी से बचें, सतर्क रहें और दूसरों को भी जागरूक करें।
📞 साइबर हेल्पलाइन: 1930
🌐 शिकायत दर्ज करें: https://t.co/icVnIgWjM1
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🚨 OLX पर घर, दुकान या ऑफिस किराए पर दे रहे हैं? सावधान रहें! 🚨साइबर ठग OLX पर किराये के विज्ञापन देखकर खुद को सेना या बैंक अधिकारी बताकर संपर्क करते हैं। फर्जी आईडी और दस्तावेज़ भेजकर भरोसा जीतते हैं तथा “एडवांस पेमेंट” के नाम पर QR कोड, बैंक डिटेल्स या OTP मांगकर धोखाधड़ी करते हैं।✅ किरायेदार से हमेशा आमने-सामने मिलकर बात करें।
✅ किसी भी अनजान कॉल या दस्तावेज़ पर बिना सत्यापन भरोसा न करें।
✅ बैंक डिटेल्स, OTP, UPI PIN या अन्य व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।
✅ किरायेदार की पहचान और दस्तावेज़ों की अच्छी तरह पुष्टि करें।साइबर फ्रॉड का शिकार होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या शिकायत दर्ज करें: https://t.co/icVnIgWjM1 #HaryanaPolice #CyberSafety #OLXFraud #OnlineFraud #CyberAwareness #StayAlertStaySafe #DigitalSafety #CyberCrime #SafeDigitalIndia
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साइबर अपराधियों द्वारा विदेशी नंबरों से की जाने वाली एक्सटॉरशन कॉल्स, धमकी भरे मैसेज और ऑनलाइन फ्रॉड से बचाव हेतु हरियाणा पुलिस ने “अभेद्य” मोबाइल ऐप विकसित की है।
यह ऐप संदिग्ध विदेशी कॉल, मैसेज और वॉइस नोट्स को नागरिकों तक पहुंचने से पहले ही ब्लॉक कर देता है।
“अभेद्य” ऐप अब Play Store पर उपलब्ध है।
लोग इसे डाउनलोड कर ऐप में दिए गए नंबर पर कॉल करके अपने नज़दीकी SP/DCP ऑफिस के साइबर सेल के माध्यम से एक्टिवेट करवा सकते है।
हरियाणा पुलिस आपकी सुरक्षा और साइबर जागरूकता के लिए सदैव प्रतिबद्ध है।
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वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक अहम पहल — “डबल OTP प्रणाली”।
अब बैंकिंग ट्रांजैक्शन के दौरान खाताधारक के साथ-साथ उनके Trusted Contact/परिवारजन के मोबाइल पर भी Authentication OTP भेजा जाएगा। दोनों OTP की पुष्टि के बाद ही राशि ट्रांसफर होगी।
यह सुविधा 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वैच्छिक है। वर्तमान में HDFC बैंक द्वारा गुरुग्राम व फरीदाबाद में लागू।
सतर्क रहें —
❌ OTP, PIN, Password किसी से साझा न करें।
📞 साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें।
हरियाणा पुलिस का संकल्प — “साइबर क्राइम मुक्त हरियाणा”।
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हरियाणा पुलिस की नई आईटी पहल के तहत पहली बार प्रदेश में नव नियुक्त कांस्टेबलों के जिला/यूनिट आवंटन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से संपन्न की गई। डीजीपी हरियाणा श्री अजय सिंघल ने कंप्यूटर पर एक क्लिक के साथ इस प्रक्रिया को पूरा किया।
इस पारदर्शी प्रणाली के तहत 5100 पुरुष एवं 1797 महिला कांस्टेबलों से ऑनलाइन माध्यम से उनकी पसंद पूछी गई, ताकि उन्हें उनकी मेरिट/सीनियरिटी एवं पसंद के अनुसार जिला/यूनिट आवंटित किए जा सकें।
यह पहल पुलिस भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और तकनीक के बेहतर उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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Haryana Police, under the visionary leadership of DGP Sh. Ajay Singhal, is redefining women’s safety with sensitivity, not just force. 94,000 women tracked real-time, 98% case resolution, crimes down 38%. From Durga Shakti to data-driven patrols, we’re building trust. Safety is society’s conscience.
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हमारे यहाँ भाषाई संघर्ष चरम पर है।
बोलचाल, औपचारिक बातचीत, शिक्षा-कारोबार - सबके लिए अलग-अलग भाषा है। बॉडी लैंग्वेज पोल-पट्टी खोलती रहती है सो अलग।
आश्चर्य नहीं कि हमारे यहाँ ज्यादातर समय समझने-समझाने में ही बीतता है।
लेकिन शोध ये कहता है भाषा की विविधता और इसके विकास से मनुष्य के मस्तिष्क का आकार बड़ा हुआ है।
एक से अधिक भाषा सीखने से एक औसत भारतीय का दिमाग तेज ही हुआ है। कइयों में एक कारण ये भी है कि दुनियाँ भर में भारतीय मूल के डॉक्टर, इंजीनियर, सीईओ भरे पड़े हैं।
#बेचारी_हिंदी
#हौसलानामा
लोग पूछते है कि आगे क्या करोगे?
स्कूल में था तो यही पूछते थे। सोचता था कि जब नदी आएगी तो पार कर जाएँगे। इतनी चिंता क्यों करनी है?
जब #IPS में थे तो आठ-नौ साल ही फ़ील्ड में एसपी, सीपी, आईजी-एडीजी, रेंज और डीजीपी रहे। घटनाएँ तेज़ी से घटित होती थी। हैंड्स-ऑन रहना होना था। बाक़ी जगह तो काम ख़ुद ही गढ़ना होता था।
काम ख़ुद गढ़ने का समय दोबारा आ गया है।
पिछले अक्टूबर जब छठ पूजा में घर गए थे तो पुराने लोगों से मिलना हुआ। हमसे पहले जैसा प्यार रखते है। जीवन के आख़िरी दौर में हैं। बच्चे रोज़ी-रोटी की तलाश में बाहर चले गए हैं। शरीर जवाब दे रहा है। कोई हालचाल भी पूछ ले तो आँखें भर आती है।
परिवार में भी हमसे बड़े हैं। हमसे पहले वाली अपेक्षा रखते हैं - कुछ बड़ा करो, फिर से।
सोचता हुँ कि इससे बड़ा क्या हो सकता है कि जीवन के चौथेपन से जूझ रहे स्वजनों को समय दूं? किताब #हौसनानामा का आख़िरी अध्याय - ‘चौथेपन की मार’ - इसी विषय पर है।
सरकार-युवा सरोकार ठीक कैसे रहे इस विषय पर किताब बीच में है। उसे पूरा करना है।
पुलिस को ताक़तवर नहीं मजबूत और कारगर कैसे बनाते हैं, इसपर भी एक किताब बनती है। पिछले दिनों हमने ये देखा कि ये संभव है।
पाँच-छह सौ पेज की आत्मकथा तो लिखनी ही लिखनी है। जेपी के संपूर्ण क्रांति, #इमरजेंसी, अमिताभ बच्चन के शोले और उसके बाद की घटनायें स्मृतिपटल पर स्पष्ट है।
दुनियाँ अच्छी कहने की नहीं बनाने की चीज़ है।
वर्ष 2018 में हिंदी पत्रिका #कादम्बिनी में हौसलानामा की समीक्षा छपी थी। ‘चौथेपन की मार’ अध्याय का विशेष उल्लेख था। मेनुस्क्रिप्ट की स्क्रीन रिकॉर्डिंग पोस्ट कर रहा हुँ।
#SoGoodToBeAmongBooks
2018 में मैंने #हौसलानामा नाम की एक किताब लिखी थी। तब तक जीवन जैसा देखा था, वैसा लिखा।
बड़े अखबार एवं पत्रिका में समालोचकों ने किताब की लिखी बातों एवं लेखन शैली की बड़ी प्रशंसा की। इसकी तुलना #श्रीलाल_शुक्ला के #राग_दरबारी से की।
लेकिन #हिंदी लेखन दो तरफ़ से मारी गई है - लिखने वाले लिखते नहीं कि कोई छापता नहीं है। प्रकाशक हाथ खड़े कर देते हैं कि किताब कोई ख़रीदता नहीं तो छापें कैसे? https://t.co/QQNSxA5usI
मैं इस कुचक्र तो तोड़ना चाहता हुँ। अंग्रेज़ी-फ़ारसी जितनी बोल लें, बात समझ में तो मातृभाषा में ही आती है। जितने जितना अच्छा लिखेंगे, भाषा उतनी ही समृद्ध होगी। लिखाई तब होगी जब लोग पढ़ेंगे।
किताब से उस समय पुलिस पर लिखे गए अध्याय का #स्क्रीनशॉट् पोस्ट कर रहा हुँ।
पुलिस को लोगों के हिसाब से ढालने की इक्छा बचपन से थी। ख़ुशी है कि #हरियाणा #डीजीपी बनाए जाने पर मैं ऐसा कर पाया।
*पुलिस एक्शन अपडेट*
29.12.2025
कुख्यात अपराधी, ड्रग तस्कर की धरपकड़ एवं अपराधियों के अड्डे पर रेड लगातार जारी।
उद्देश्य अपराधियों को भेजना जेल और पब्लिक प्लेस को रखना सुरक्षित जिससे कि लोग रहें बेख़ौफ़, जन-जीवन रहे अपराध-मुक्त।
29 दिसम्बर को कुल 282 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया।
इनमें 24 कुख्यात जघन्य अपराधी शामिल।
गैंग्स के खिलाफ कार्यवाही करते हुए 1 लुक आउट सर्कुलर जारी, 9 अपराधियों की इंटेलिजेंस सूचना अन्य राज्यों के साथ साझा की गई।
आर्म्स एक्ट के 5 मुकदमें में 9 गिरफ्तार। उनसे 5 कट्टा/पिस्तौल तथा 6 जिंदा कारतूस, 1 मैगजीन बरामद।
NDPS act के तहत 12 मुकदमें दर्ज, 17 गिरफ्तार, 2 kg 920 gm गांजा, 35 kg 300 gm poppy husk तथा भारी मात्रा में अन्य ड्रग बरामद।
डायल 112 से प्राप्त 3705 इवेंट में से 3258 का निपटारा किया गया।
23 हुड़दंगियों के खिलाफ कार्यवाही की गई
सड़क सुरक्षा के लिए मोटर वाहन अधिनियम के तहत 11,073 चालान किए गए।
70 एक्सीडेंट पीड़ित व्यक्तियों को पुलिस सहायता पहुंचाई गई।
साइबर, नशामुक्ति तथा महिला सुरक्षा पर 84 जनसंपर्क कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जिसमें 9,117 लोगों ने भाग लिया।
नाईट पेट्रोलिंग पर 5,148 जवान एवं अधिकारी, 1575 पेट्रोलिंग वाहन तथा 379 नाके लगाए गए।
#पुलिस ने 550 ठंड में ठिठुर रहे और भूखे सोने के बेबस को पहुंचाई सहायता।
आप भी ऐसा ही करो।
साइबर क्राइम: 29.12.2025
राज्य में साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कुल 173 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें 81 लाख 7 हजार 751 रुपये की ऑनलाइन ठगी रिपोर्ट की गई।
साइबर टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 81 लाख 99 हजार 969 रुपये (101.1%) की राशि होल्ड कर ली।
ठग एक भी रुपया नहीं निकाल पाये।
साइबर थानों द्वारा 9 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया और उनसे 2 लाख 46 हजार 709 रुपये की रिकवरी की गई,।
87 लाख 66 हजार 129 रुपये शिकायतकर्ताओं को रिफंड किए गए।
इसके अलावा साइबर टीम ने ठगों के 530 मोबाइल नंबर ब्लॉक किए, जिससे अब वे दोबारा ठगी में इस्तेमाल नहीं हो पाएंगे।
सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाने वाले 47 प्रोफाइल/लिंक टेक-डाउन (रिमूव) किए गए।
इसके अतिरिक्त, 9 साइबर अपराधियों की क्राइम लिंकेज रिपोर्ट संबंधित राज्यों को भेजी गई है, ताकि वहाँ की पुलिस इन मामलों में भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई कर सके।
अगला लक्ष्य: अमनचैन अगले चौबीस घंटे
#PeaceNext24Hour
हरियाणा राज्य में 2024 की तुलना में 2025 में दर्ज कुल अपराधों में साफ गिरावट दर्ज की गई।
संगठित गिरोहों, साइबर अपराधियों और आदतन हिंसक अपराधियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई और तेज हुई।
2026 में तकनीक, फॉरेंसिक विज्ञान और न्याय की “आखिरी माइल” तक मजबूत पहुंच के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है।
अपराध के आंकड़े:
28 दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक, IPC/BNS और विशेष स्थानीय कानूनों के तहत दर्ज कुल संज्ञेय अपराध 2024 के 1,35,574 मामलों से घटकर 2025 में 1,27,850 रह गए। यानी करीब 5.7 प्रतिशत की कमी।
IPC/BNS के तहत अपराध भी करीब 3 प्रतिशत घटे हैं, जबकि विशेष और स्थानीय कानूनों के मामलों में 17 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है।
हत्या, लूट और महिलाओं के खिलाफ अपराध में गिरावट
हत्या के मामलों में भी कमी दर्ज हुई है। 2024 में जहां 958 हत्याएं हुई थीं, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर 904 रह गई।
गंभीर चोट (ग्रेवियस हर्ट) के मामले भी करीब 9 प्रतिशत कम हुए। पुलिस की तेज कार्रवाई और लगातार गश्त के चलते राज्य में 100 से ज्यादा सुनियोजित हत्याओं को समय रहते नाकाम किया गया।
लूट, झपटमारी और सेंधमारी जैसे अपराधों में भी साफ गिरावट आई है। लूट के मामले करीब 24 प्रतिशत, झपटमारी 12 प्रतिशत और चोरी-सेंधमारी के मामले 13 प्रतिशत से ज्यादा घटे हैं।
महिलाओं के खिलाफ अपराधों में भी सुधार देखने को मिला है। बलात्कार के मामले 1,373 से घटकर 1,025 रह गए, यानी 25 प्रतिशत से ज्यादा की कमी।
छेड़छाड़, यौन उत्पीड़न और दहेज हत्या के मामलों में भी गिरावट दर्ज की गई है। अपहरण और SC/ST एक्ट के तहत अपराधों में भी कमी आई है।
गैंग और बदमाशों पर सख्त प्रहार
हरियाणा पुलिस ने नवंबर-दिसंबर में ‘ऑपरेशन ट्रैकडाउन’ और ‘ऑपरेशन हॉटस्पॉट डॉमिनेशन’ के तहत 4,000 से ज्यादा आदतन और हिंसक अपराधियों को जेल भेजा। इससे संगठित अपराध और वसूली करने वाले गिरोहों की कमर टूटी है।
अक्टूबर से दिसंबर के बीच 100 से ज्यादा योजनाबद्ध हत्याओं और हमलों को पहले ही पकड़कर नाकाम किया गया।
अंतरराज्यीय और विदेश में बैठे गैंगस्टरों के खिलाफ भी कार्रवाई हुई। कई बड़े अपराधियों को विदेश से प्रत्यर्पित या डिपोर्ट कर भारत लाया गया, जिससे बाहर से चल रहे अपराध नेटवर्क टूटे।
साइबर अपराध और फॉरेंसिक में मजबूती
साइबर अपराध के खिलाफ हरियाणा पुलिस देश में अग्रणी बनी हुई है। साइबर थानों, बैंकिंग धोखाधड़ी और सोशल मीडिया अपराध से निपटने वाली टीमों को मजबूत किया गया। 2025 में ऑनलाइन ठगी के मामलों में न सिर्फ पकड़ बढ़ी, बल्कि ठगी गई रकम की रिकवरी भी बेहतर हुई।
फॉरेंसिक विज्ञान में बड़े स्तर पर निवेश किया गया है। डीएनए, मोबाइल और साइबर फॉरेंसिक, बैलिस्टिक और नशे से जुड़े मामलों की जांच अब ज्यादा तेजी और सटीकता से हो रही है। इससे चार्जशीट मजबूत हुई हैं और सजा की दर भी बढ़ी है।
नए कानून और 2026 की तैयारी
भारतीय न्याय संहिता (BNS) समेत नए आपराधिक कानूनों को पूरे राज्य में सफलतापूर्वक लागू किया गया है। पुलिसकर्मियों और अभियोजन अधिकारियों को प्रशिक्षण देकर थानों में बिना किसी रुकावट के व्यवस्था बदली गई।
2026 में हरियाणा पुलिस CCTV, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्राइम मैपिंग और प्रेडिक्टिव पुलिसिंग पर ज्यादा जोर देगी। साइबर अपराध, डार्क वेब और क्रिप्टो से जुड़े मामलों के लिए विशेष इकाइयां बनाई जाएंगी। साथ ही पीड़ितों, महिलाओं और कमजोर वर्गों के लिए पुलिस सेवाओं को और संवेदनशील बनाया जाएगा।
डेटा आधारित तैनाती, मजबूत कानूनी कार्रवाई और अंतरराज्यीय व अंतरराष्ट्रीय सहयोग के सहारे हरियाणा पुलिस 2026 में राज्य को और सुरक्षित बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगी।
#HaryanaPolice
#PeoplesPolice
**अपराध-रोधी रणनीति 2026 **
हरियाणा पुलिस ने वर्ष 2026 के लिए अपराध‑रोधी रणनीति को नया तेवर देते हुए हिंसक अपराधियों, ड्रग नेटवर्क, साइबर अपराध और उभरते सुरक्षा खतरों पर सख्त और प्री‑एम्पटिव (पूर्व‑नियोजित) फोकस का संकेत दिया है।
मधुबन स्थित हरियाणा पुलिस अकादमी में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में डीजीपी ओ.पी. सिंह ने साफ कहा कि “हरियाणा की आखिरी गली तक दबदबा पुलिस का होना चाहिए, अपराधियों का नहीं।”
ख़ूंखार अपराधी और हॉटस्पॉट पर नकेल
रणनीति के केंद्र में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को 100 हिंसक अपराधियों की लाइव निगरानी की जिम्मेदारी देना शामिल है, जबकि हर जिले को अपने 20 सबसे खतरनाक अपराधियों की अलग सूची तैयार कर उन पर कड़ी नजर रखने को कहा गया है। इनमें हत्या, रंगदारी, कॉन्ट्रैक्ट किलिंग और संगठित गिरोहों से जुड़े आरोपी और सजायाफ्ता अपराधी शामिल रहेंगे, जिन पर लगातार निगरानी, कानूनी पाबंदियां और आर्थिक जांच के जरिए दबाव बनाए रखने की बात कही गई।
इसी के साथ, शहरी इलाकों में रंगदारी, सीमावर्ती जिलों में ड्रग सप्लाई रूट और ग्रामीण बेल्ट में जुआ‑शराब और बदमाश तत्वों वाले इलाकों को क्राइम हॉटस्पॉट मानकर वहां लगातार “डोमिनेशन” (दबदबा) वाली पुलिस मौजूदगी पर जोर दिया गया। डीजीपी ने साफ किया कि लक्ष्य सिर्फ घटना के बाद कार्रवाई नहीं, बल्कि अपराध की तैयारी, संसाधन जुटाने और नेटवर्किंग को पहले ही चरण में तोड़ना है।
नशा: सिर्फ रेड नहीं, सज़ा और डि‑एडिक्शन भी
नशे के खिलाफ मोर्चे पर 2026 के लिए फोकस “कमर्शियल क्वांटिटी” वाले मामलों पर रहेगा, जहां सख्त जांच, मजबूत चार्जशीट और कोर्ट में सज़ा की दर बढ़ाने को प्राथमिकता दी जाएगी। ड्रग माफिया की अवैध कमाई की पहचान कर उसे कुर्क करने की कार्रवाई को अनिवार्य हथियार के रूप में देखा जा रहा है, ताकि नेटवर्क की आर्थिक कमर तोड़ी जा सके।
बैठक में नशा‑मुक्ति व्यवस्था को सामाजिक न्याय विभाग से स्वास्थ्य विभाग में स्थानांतरण के हालिया सरकारी फैसले को भी अहम अवसर के रूप में देखा गया। वरिष्ठ अधिकारियों ने माना कि इससे डि‑एडिक्शन सेंटरों का विस्तार और अपग्रेडेशन तेज़ी से हो सकता है, बशर्ते पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच करीबी समन्वय बने। जिलों से अपेक्षा की गई कि वे सिर्फ पकड़‑धकड़ और जागरूकता तक सीमित न रहकर युवाओं और दोहराए जाने वाले नशा‑उपयोगकर्ताओं को ठोस उपचार और पुनर्वास विकल्प तक पहुंचाने में भी सक्रिय भूमिका निभाएं।
साइबर अपराध: हेल्पलाइन से लेकर कोर्टरूम तक
मधुबन बैठक ने साफ दिखा दिया कि साइबर फ्रंट पर लड़ाई सिर्फ टेक्निकल नहीं, कानूनी भी है। डीजीपी ओ.पी. सिंह ने माना कि साइबर अपराधी संसाधन‑सम्पन्न, तकनीकी रूप से दक्ष और कई बार महंगे वकीलों से लैस होते हैं, ऐसे में पुलिस की तैयारी सतही नहीं हो सकती।
रणनीति के तहत साइबर हेल्पलाइन और जिला‑स्तरीय रिस्पॉन्स सिस्टम को और मजबूत करने, शिकायत से एफआईआर, चार्जशीट और ट्रायल तक पूरी प्रक्रिया की नियमित समीक्षा करने पर जोर दिया गया। डिजिटल सबूतों की कस्टडी, फॉरेंसिक प्रोटोकॉल और गवाह‑सुरक्षा जैसी बातों के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर को कड़ा बनाने और शुरू से ही अभियोजन पक्ष के साथ तालमेल पर बल दिया गया।
स्लीपर सेल, सीमापार नेटवर्क और बदला भू‑राजनीतिक माहौल
बैठक में पारंपरिक अपराध से आगे बढ़कर सुरक्षा से जुड़ी नई चुनौतियों पर भी गंभीर चर्चा हुई। हरियाणा की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए आतंकवादी स्लीपर सेल की पहचान और उन्हें सक्रिय होने से पहले ही नाकाम करने को प्रमुख प्राथमिकता बताया गया। सिंह ने अधिकारियों को आगाह किया कि स्थानीय शरारती तत्वों को पाकिस्तान‑मूल के अपराधियों या संगठित गिरोहों के साथ हाथ मिलाकर सनसनीखेज वारदातों की साजिश रचने का कोई अवसर न मिले।
बदले हुए भू‑राजनीतिक परिदृश्य के बीच संदिग्ध घुसपैठ और अवैध प्रवास पर भी सतर्क नज़र रखने की बात कही गई, जिसमें संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों की गतिविधियों की वैधानिक निगरानी भी शामिल है। अधिकारियों को संकेत दिया गया कि यह निगरानी कानून, प्रक्रिया और मानवाधिकारों के दायरे में रहकर, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और जन‑सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मानकर की जाए।
विकसित भारत 2047 और हरियाणा की ‘यूएसपी’
पूरी चर्चा के दौरान डीजीपी ने राज्य की सुरक्षा जरूरतों को केंद्र की “विकसित भारत 2047” दृष्टि से जोड़कर देखा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे खुद को सिर्फ क्राइम‑कंट्रोल एजेंसी नहीं, बल्कि हरियाणा के दीर्घकालिक आर्थिक‑सामाजिक विकास के सुरक्षा सहयोगी के रूप में देखें।
*पुलिस एक्शन अपडेट*
28.12.2025
कुख्यात अपराधी, ड्रग तस्कर की धरपकड़ एवं अपराधियों के अड्डे पर रेड लगातार जारी।
उद्देश्य अपराधियों को भेजना #जेल और पब्लिक प्लेस को रखना सुरक्षित जिससे कि लोग रहें बेख़ौफ़, जन-जीवन हो अपराध-मुक्त।
28 दिसम्बर को कुल 263 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया।
इनमें 27 जघन्य तथा 8 भगोड़े अपराधी शामिल।
गैंग्स के खिलाफ कार्यवाही करते हुए 7 अपराधियों की इंटेलिजेंस सूचना अन्य राज्यों के साथ साझा की गई।
आर्म्स एक्ट के 5 मुकदमें में 9 गिरफ्तार। उनसे 6 कट्टा/पिस्तौल तथा 8 जिंदा कारतूस, 3 मैगजीन बरामद।
NDPS act के तहत 12 अभियोग दर्ज, 16 गिरफ्तार, 2 kg 51 gm गांजा, 28 kg 454 gm poppy husk तथा भारी मात्रा में अन्य ड्रग बरामद।
डायल 112 से प्राप्त 3946 इवेंट में से 3504 का निपटारा किया गया।
29 हुड़दंगियों के खिलाफ कार्यवाही की गई
सड़क सुरक्षा के लिए मोटर वाहन अधिनियम के तहत 10,442 चालान किए गए।
85 एक्सीडेंट पीड़ित व्यक्तियों को पुलिस सहायता पहुंचाई गई।
साइबर, नशामुक तथा महिला सुरक्षा पर 65 जनसंपर्क कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जिसमें 2,556 लोगों ने भाग लिया।
नाईट पेट्रोलिंग पर 5,146 जवान एवं अधिकारी, 1581 पेट्रोलिंग वाहन तथा 371 नाके लगाए गए।
#पुलिस ने 677 ठंड में ठिठुर रहे और भूखे सोने के बेबस को पहुंचाई सहायता।
आप भी ऐसा ही करो।
साइबर क्राइम: 28.12.2025
राज्य में साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कुल 251 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें 1 करोड़ 61 लाख 73 हजार 763 रुपये की ऑनलाइन ठगी रिपोर्ट की गई।
साइबर टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इसमें से 64 लाख 14 हजार 205 रुपये (39.7%) ठगों तक पहुँचने से पहले ही होल्ड कर लिए।
साइबर थानों द्वारा 17 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया।
56 हजार 627 रुपये शिकायतकर्ताओं को रिफंड किए गए।
इसके अलावा साइबर टीम ने ठगों के 315 मोबाइल नंबर और 57 IMEI नंबर ब्लॉक किए, जिससे अब वे दोबारा ठगी में इस्तेमाल नहीं हो पाएंगे।
सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाने वाले 43 प्रोफाइल/लिंक टेक-डाउन (रिमूव) किए गए।
इसके अतिरिक्त, 7 साइबर अपराधियों की क्राइम लिंकेज रिपोर्ट संबंधित राज्यों को भेजी गई है, ताकि वहाँ की पुलिस इन गिरफ्तार अपराधियों को प्रोडक्शन वारंट पर लेकर वहाँ दर्ज मामलों में भी इनपर कानूनी कार्रवाई करे।
अगला लक्ष्य: अमनचैन अगले चौबीस घंटे
#PeaceNext24Hour
Haryana Police has signalled an aggressive, prevention‑first turn in its crime strategy for 2026, putting violent offenders, drug networks, cyber fraud and emerging security threats under a sharper statewide lens.
Chairing a high‑level review at Haryana Police Academy, Madhuban, Director General of Police O P Singh asked his officers to ensure that “police, not criminals, dominate the last mile in Haryana.”
STF list and hotspot pressure
At the heart of the new blueprint is a decision to task the Special Task Force with maintaining a dynamic watchlist of 100 violent offenders, while every district prepares its own top‑20 list of the most dangerous elements. These will typically include accused and convicts in murder, extortion, contract killings and gang cases, who, in the DGP’s words, “should feel the law’s breath on their neck every single day.”
District police units have been told to back the lists with real measures: targeted surveillance, preventive legal action, financial scrutiny and regular physical verification to ensure these offenders neither regroup nor rearm. Parallelly, crime hotspots — from urban extortion zones and border‑district drug corridors to rural vice pockets — are to see sustained “domination” through visible patrols, night rounds and community‑led intelligence, rather than episodic drives
Drugs: from raids to convictions and de‑addiction
On narcotics, the meeting marked a clear shift from seizure‑centric policing to outcome‑driven investigations. Singh underlined that cases involving commercial quantity recovery would be the top priority, with teams judged not only by FIRs but by conviction rates and the extent to which drug proceeds are identified, frozen and confiscated.
The deliberations also hooked policing strategy to a key policy move: the transfer of de‑addiction responsibilities from the Social Justice Department to the Health Department. Senior officers described this as an opportunity to expand and upgrade the fragmented de‑addiction ecosystem, aligning tough enforcement on supply with credible treatment pathways for users, particularly young consumers trapped in repeat addiction. Districts have been nudged to work in closer tandem with health officials so that raids, arrests and awareness campaigns point citizens towards real services, not just slogans.
Cybercrime and the courtroom battle
If the STF watchlist will shape the boots‑on‑ground approach, the cyber front is where Haryana Police expects some of its hardest legal battles. Singh’s message to his officers was blunt: cyber offenders are often resourceful, technically skilled and backed by expensive defence lawyers, so the police response cannot be “thin, casual or paperwork‑driven.”
The roadmap puts fresh stress on strengthening cyber helplines, tightening the pipeline from complaint to FIR and charge sheet, and institutionalising close follow‑up of court proceedings in major cases. Officers have been told to harden their standard operating procedures for evidence preservation, chain of custody and digital forensics, and to treat prosecutors as core partners from the investigation stage itself, not as an afterthought.