तानाशाह सरकार डर कर काँप रही है।
पहले शिक्षा व्यवस्था को बरबाद किया,
करोड़ों बच्चों का भविष्य बिगाड़ा,
150 से ज़्यादा पेपर लीक करवाए,
25 बच्चों की जान चली गई ,
जब छात्र न्याय माँगने सड़कों पर उतरे,
तो उनपर लाठीचार्ज किया, डंडे बरसाए !
संसद के गेट बंद करवाकर, सांसदों को क़ैद किया,
Debate के लिए साझा विपक्ष की बात नहीं मानी,
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त नहीं किया,
मोदी जी छात्रों पर अत्याचार पर मौन रहे,
गृह मंत्री जिनका दिल्ली पुलिस पर नियंत्रण है,
हमारी माँग करने के बावजूद उनका कोई बयान नहीं आया !!
अब जब कांग्रेस और विपक्ष के सांसद प्रधानमंत्री निवास के आगे धरना दे रहे हैं तो हमारे सांसदों को घसीट-घसीट कर ले गए है।
नेता प्रतिपक्ष श्री @RahulGandhi को बलपूर्वक ले जाया गया है।
ये कौन सा लोकतंत्र है?
मोदी सरकार अपनी तानाशाही की चरम सीमा की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। कल छात्रों पर हुई बर्बरता के बाद आज जनप्रतिनिधियों को हिरासत में लेकर लोकतांत्रिक विरोध की आवाज़ को दबाने की कोशिश की गई। सत्ता का अहंकार स्थायी नहीं होता - समय हर निर्णय और हर अन्याय का हिसाब ज़रूर लेता है।
@yadavakhilesh
गिरफ़्तार करो, जेल में डालो, फर्क नहीं पड़ता - मोदी सरकार की सत्ता की ताकत से ज़्यादा बड़ी हमारे सत्याग्रह की शक्ति है।
हमारे बच्चों के साथ हुए अत्याचार का हिसाब तो देना ही होगा।
Good morning, world! 🌎
We have spectacular new high-resolution images of our home planet, all of us looking back through the Orion capsule window at our Artemis II astronauts as they continue their journey to the Moon.
क्यों लगे 'ब्राह्मणवाद जिंदाबाद' के नारे? पुलिस थाने में भद्दी-भद्दी गालियां और धमकी क्यों? अंजली क्यों रुचि तिवारी के खिलाफ पहुंची FIR करवाने? वीडियो शेयर कर अंजली ने बताया पूरा मामला...
#UGCRegulations@anjali__27
गज़ब झोलाछाप आदमी हो भाई!
थोड़ा सी लाज रख कर कम से कम इस रुचि तिवारी का असलियत का तो पता लगा लेते। और पत्रकारिता के नाम पर इसमें जो गंध फैला रखी हैं वो भी तुम्हें पता होगा। लेकिन तुम्हें नाम के पीछे लगे 'मिश्रा ' टाइटल ने जकड़ रखा हैं।
कुछ मंत्री कह रहे थे कि UGC के नए नियमों का दुरुपयोग नहीं होगा, लेकिन हालात तो नियम लागू होने से पहले ही साफ दिखने लगे हैं।
जिन्हें मिलकर नक़ल माफिया और पेपर लीक के खिलाफ लड़ना था, वे आज जात-पात में बँट गए हैं। असली लड़ाई सिस्टम से होनी चाहिए थी, पर हम आपस में उलझ गए। एक फैसले ने ऐसी दरार पैदा कर दी है, जिसे भरने में शायद दशकों लग जाएँ।
दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्र अंजलि शर्मा ने कथित महिला पत्रकार की पूरी पोल खोल दी ,
ये सब जानबूझकर माहौल खराब और लेफ्ट विंग को बदनाम करने के लिए किया गया ,
क्या टीवी चैनलों के पत्रकारों ने सचमुच अपनी आँखों पर पट्टी बाँध ली है?
देश के कोने-कोने में दलितों और पिछड़ों के विरोध की तस्वीरें, वीडियो और आवाज़ें गूंज रही हैं, लेकिन न्यूज़ स्टूडियो में अजीब-सी ख़ामोशी है। क्या ये प्रदर्शन उन्हें दिखाई नहीं दे रहे, या फिर जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है?
#UGC_लागू_करो
#UGC_बहाल_करो
#We_support_UGC
UGC ने उच्च शिक्षण संस्थानों में “Equity Committee” का प्रावधान किया है—SC, ST के साथ OBC को भी इसमें शामिल किया गया है। यह फैसला यूँ ही नहीं आया। UGC खुद मानता है कि अब तक के “लचीले प्रावधान” कैंपसों में जातिगत अन्याय और भेदभाव को कम करने में नाकाम रहे हैं। और यह सिर्फ़ एक दावा नहीं, बल्कि आधिकारिक आँकड़ों से साबित सच्चाई है।
UGC के अनुसार 2019-20 से 2023-24 के बीच उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव की शिकायतें 118% से ज़्यादा बढ़ी हैं—173 से बढ़कर 378 तक। यह साफ़ बताता है कि समस्या “छिटपुट घटनाओं” की नहीं, बल्कि संरचनात्मक (structural) है। जब उत्पीड़न बढ़ रहा हो, तब सिर्फ़ जागरूकता, पोस्टर या संवेदनशीलता कार्यशालाओं से काम नहीं चलता; सख़्त, समयबद्ध और जवाबदेह प्रावधान ज़रूरी होते हैं। इसी कारण नए नियमों में 24 घंटे में समिति बैठक, 15 दिन में रिपोर्ट और 7 दिन में कार्रवाई की समयसीमा तय की गई है।
अब सवाल उठाया जा रहा है कि इसमें “सामान्य वर्ग” को क्यों नहीं शामिल किया गया। यह ठीक वैसा ही सवाल है जैसे महिला उत्पीड़न रोकने के लिए बनी Women Cell में पुरुषों को क्यों नहीं शामिल किया गया। वजह साफ़ है—जातिगत उत्पीड़न का ढांचा ऐतिहासिक और सामाजिक रूप से SC/ST/OBC के खिलाफ बना है। यह बहिष्कार नहीं, बल्कि उस असमान यथार्थ की स्वीकारोक्ति है जिसे सदियों तक सामान्य बना दिया गया।
एक और तर्क दिया जा रहा है कि “इस नियम का दुरुपयोग होगा।” तो बताइए, ऐसा कौन सा कानून है जिसका दुरुपयोग नहीं हुआ? RTI, श्रम कानून, महिला सुरक्षा कानून—सबके दुरुपयोग के उदाहरण मिल जाएंगे। लेकिन दुरुपयोग की आशंका न्याय से इनकार का आधार नहीं हो सकती। वैसे भी UGC ने अंतिम नियमों में “फ़र्ज़ी शिकायत” वाला डराने वाला प्रावधान हटा दिया है, ताकि पीड़ित चुप न हों।
सच यही है कि जब बात SC/ST/OBC के साथ होने वाले जातिगत भेदभाव को रोकने की आती है, तभी ‘दुरुपयोग’ का शोर सबसे तेज़ हो जाता है। क्योंकि यह नियम किसी व्यक्ति को नहीं, बल्कि उस व्यवस्था को चुनौती देता है जिसने जातिगत असमानता को अब तक ‘नॉर्मल’ बना रखा था। कैंपस में समता भाषणों से नहीं, बल्कि सख़्त, जवाबदेह और लागू होने वाले नियमों से आएगी।
@ugc_india
भागलपुर में 1020 एकड़ जमीन, अडानी ग्रुप को बिजली बनाने के लिए मात्र ₹1 की लीज पर 30 सालों के लिए दी गई....जिस पर 10 लाख आम के पेड़ खड़े हैं...वह सभी पेड़ काटे जाएंगे...लाखों पेड़ अडानी के नाम..!
'एक पेड़ माँ के नाम' से शुरू हुआ सफ़र 'एक पेड़ अड़ानी के नाम'. @moliticsindia की ये शानदार रिपोर्ट ज़रूर देखें. आदिवासियों के सवालों पर देश को सूचना चाहिए.
इतना भी सच नहीं बोलना था मैडम, आपने तो दुनिया को इनकी सच्चाई बता दी !
पहले कश्मीर से भागे अब नेपाल से भागना पड़ा, नेपाल में ब्राह्मणवाद और जातिवाद का खात्मा हुआ है,,,
माँ तो माँ होती है। माँ शब्द जुबान पर आते ही कितना सुकून मिलता है। जो बेजुबान है माँ तो उनकी भी होती है। किसी को भी किसी की भी माँ-बहन-बेटी के प्रति अपशब्द नहीं बोलना चाहिए। इस दुनिया में मौजूद हर इंसान, जीव-जंतु, पशु-पक्षी सभी माँ की ही पैदाइश है।
👉 प्रधानमंत्री मोदी जी महिलाओं और लड़कियों से ब्लात्कार करने वाले प्रज्वल रेवन्ना का प्रचार कर उसे जिताने की अपील करें तो वह मोदी जी का मास्टर स्ट्रोक।
👉 मोदी जी किसी की माँ को 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड बोले तो वाह मोदी जी वाह!
👉 मोदी जी देश के लिए शहादत दे चुके साहसी प्रधानमंत्री की पत्नी और नेता प्रतिपक्ष की माँ को विधवा और जर्सी गाय बोले तो बेशर्म लोग कहेंगे कि मोदी जी ने शानदार भाषण दिया है।
👉 मोदी जी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पैदाइश पर यह कहते हुए सवाल उठाये कि इनका DNA ही ख़राब है अर्थात् इनका खून ही ख़राब और ग़लत है तो वह सही है? जेडीयू के लोग बताए जो नख और बाल काट PMO को भेजे थे उनकी रिपोर्ट आ गई है क्या?
👉 मोदी जी के सचेतक ने अभी कुछ दिन पहले बिहार विधानसभा में मेरी माँ को गाली दी तो मोदी जी ने उसकी पीठ थपथपाई। फिर वो कहे कि मोदी महान!
👉 एक बीजेपी नेता ने हमारी प्रवक्ता को साड़ी-साया खोल सरेआम सड़क पर ब्लात्कार की धमकी दें तो मोदी जी उसे सम्मानित करते हुए अपने जहाज़ तक बुलाते है।
👉 इनके प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल कल टेसू बहा रहे थे वही आदमी कुछ दिन पहले कह रहे थे कि उनसे बड़ा गालीबाज़ कोई नहीं है और वह गालियों की चलती फिरती दुकान है।
👉 मणिपुर में भाजपाइयों द्वारा महिलाओं को निवस्त्र घुमाया गया क्या वो किसी की माँ नहीं थी?
👉 बिहारियों को गुजरात में गाली दी जाती है तो प्रधानमंत्री चुप रहते है। बेरोजगारों और युवाओं को गाली के साथ लाठी से पीटा जाता है तो इनके टेसू नहीं निकलते है।
👉 किसान आंदोलन में हज़ारों किसान मारे गए। किसान और नौजवान आत्महत्या कर रहे हैं, लॉकडाउन में मजदूर पैदल चले, लाखों लोग मारे गए तब नहीं रोए । पुलवामा-पहलगाम और गलवान घाटी में हमारे सैनिक मारे गए जब इनके टेसू नहीं निकले।
ये दोहरे चरित्र के लोग हैं। ये लोग वोट चोरी से ध्यान हटाने के लिए प्रपंच रच रहे है। माँ तो माँ होती है।
#TejashwiYadav #Bihar #RJD #बिहार
लाठी से क्या परेशानी है! जो किसान और पशुपालक क़ौम है, वह लाठी न रखे तो परेशानी होती है! लाठी आत्मरक्षार्थ ज़रूरी है। कोई हमारी छप्परों को आकर चूर कर दे, तो लाठी सहारा है।
चौधरी चरण सिंह जी लाठी रखते थे, लालू जी लाठी रखते हैं। जेएनयू के अपने तीनों ठिकानों पर - दामोदर डॉमिट्री, कावेरी हॉस्टल और ब्रह्मपुत्र हॉस्टल के कमरे में मैं हमेशा एक लाठी रखता था जिसमें लालटेन टंगी होती थी।
तो लाठी, लेखनी और लालटेन के मणिकांचन योग से मेरा व्यक्तित्व बना है। इन तीन प्रतीकों में से किसी को लेकर भी हमारे मन में किसी तरह का लज्जा-भाव नहीं हो सकता, कोई अफ़सोस, कोई पछतावा नहीं। तीनों का सदुपयोग हम अपने सद्विवेक के साथ करते हैं।
कमेरे, मेहनतकश क़ौम के लोग अभाव में रह लेंगे, पर किसी दलाल के आगे सर नहीं झुकाएंगे! जो अन्न उगाते, उसे दो जून की रोटी मयस्सर नहीं, जो कपड़े बनाते, उसके तन पर साफ़ वस्त्र नहीं, जो घर बनाते, उसके सर पर छप्पर नहीं!
इसी स्थिति को हम बदलना चाहते हैं बिना किसी उत्तेजना के, बिना किसी को भला-बुरा कहे! समाजवाद का संघर्ष दो-चार वर्षों में मुकम्मल नहीं होता। यह पीढ़ी दर पीढ़ी की लड़ाई है। बड़े सब्र और संयम की ज़रूरत है। सच्चे और ख़ामोश काम की ज़रूरत है, और इसमें यश भी नहीं है!