आजकल की जवान नस्लों को देखकर मुझे बहुत अफसोस होता है, अपने पड़ोस की मस्जिद छोड़कर फेसबुक ट्वीटर हर जगह दीन की बात करते हैं, मगर मस्जिद में सिर्फ जुमे को जाते हैं, हमारे गुनाहों की बदोलत हम पर आज यह हालात आए हैं, कहीं हिजाब पर पाबंदी कहीं सिगरेट चोरी का इल्ज़ाम लगाकर हत्या....
आज के दौर में मामला कोई भी हो सभी में मुस्लिम नाम जोड़कर खूब घसीटा जा रहा है, लपेटा जा रहा है, क्योंकि वह सामना करने के बजाए अपने ही मज़हब के लोगों से गद्दारी कर रहा है, आपस में किसी को आगे बढ़ते देख जलन हो रही है,
ओर खुद गैरों के तलवै चाट रहा है।
वज़ह क्या है ??
पाक के गद्दाफी स्टेडियम में मैच के वक्त एक मुस्लिम विराट कोहली की तस्वीर लेकर पहुंचा जिस पर लिखा था मुझे तुम्हारी सेंचुरी पाकिस्तान में देखनी है। पाकिस्तानियों ने उसको गद्दार/देशद्रोही नहीं कहा। सोचिए पाक की जगह भारत होता और मुस्लिम के हाथ में फोटो बाबर आज़म की होती तो क्या होता!