@helloGr0k Nikalo isko , hatao , 7 saal m 70 peper leak.. banglades m dena utar k chunaw kra le rhe h.. exam nhi...bus har bar rule bnaye h apni kmi ko chupane k liye center dur kr dena , omr se cbt kra Dena pir b to leak ho rha h .are in sbki niyat hi nhi job Dene ki #
अपने चेले शाश्वत शर्मा को नौकरी की सिफारिश से पहले रामभद्राचार्य ने विधानसभा अध्यक्ष की
बटरिंग की, और कहा,
सतीश महाना जी के राजनैतिक भविष्य की और ऊंची, उज्ज्वल कामना करता हूं,
विधानसभा के अध्यक्ष तो बन ही गए हैं,
रामभद्राचार्य जानते हैं, सिफारिश के लिए भी चापलूसी बहुत जरूरी है,
@Satishmahanaup ji
गुरु जी ने समीक्षा अधिकारी की Post चेले के लिए क्यों मांगी,
समीक्षा अधिकारी की शुरूआती सैलरी
60 से 70 हजार होती है,
समीक्षा अधिकारी प्रमोशन पाकर विषेश सचिव की Post तक जाता है,
जिसकी सैलरी आज की तारीख में डेढ़ से दो लाख ₹
तक हो सकती है,
अगर समीक्षा अधिकारी विशेष योग्यताओं से लैस है,
तो वो रिटायर्डमेंट तक 50 खोखे तक की संपत्ति अर्जित कर लेता है,
कई लोग तो 100 खोखे तक भी पहुंच जाते हैं,
ये सभी बातें अभी एक समीक्षा अधिकारी से हुई वार्ता के बाद लिखी गई हैं,
इसीलिए गुरु जी ने अपने चेले के लिए इतनी बड़ी Post मांगी है,
बस इसीलिए नॉर्मलाईजेशन लाया गया है ताकि
तुम्हारे मेहनत पर पानी फेर कर इन जैसे लोगों को भरा जा सके।
नोट:कल ये बाबा आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की बात कर रहे थे और आज सिफारिश के आधार पर नौकरी
हाल ही में एक वीडियो वायरल हो रही है जिसमें तथाकथित संत रामभद्राचार्य जी उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना जी से
उनके एक चेले शाश्वत शर्मा को समीक्षा अधिकारी बनाने की मांग करते हैं,
इस देश का यह कितना बड़ा दुर्भाग्य है कि
एक संत जिसे पूजनीय माना जाता है वह सरेआम भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए मंच से बोल रहे हैं,
एक बात याद रखिए
जब भी धर्म और राजनीति का मेल हो जाए तब वह धंधा बन जाता है।
आज के युवाओं को बिना संघर्ष के सब कुछ चाहिए.
इन युवाओं को गुजरात के जय शाह जी की कहानी पढ़नी चाहिए और उससे प्रेरणा लेनी चाहिए.
जय शाह जी का जन्म गुजरात के अत्यंत निर्धन परिवार में हुआ. हालांकि इस बात को दरकिनार कर वे कड़ी मेहनत करने लगे.
एक वक्त ऐसा था कि आधे पार्ले जी बिस्कुट को पानी में डुबोकर खाना पड़ता था.
लेकिन जय शाह जी इन बातों से अपने लक्ष्य से भटके नहीं. वो कभी धरना प्रदर्शन करने सड़क पर नहीं उतरे.
इसकी जगह कड़ी मेहनत और संघर्ष को चुना. आज अपनी इसी सोच के बूते वो ICC के चीफ हैं.
पूरी दुनिया का क्रिकेट उनकी मुट्ठी में है.
जय शाह चाहते तो नौकरी के लिए प्रदर्शन करते, पुलिस की लाठियां खाते, रोते, बिलखते, सरकार से नौकरी की भीख मांगते.
लेकिन जय ने संघर्ष का रास्ता चुना, मेहनत का रास्ता चुना और दुनिया को अपने कदमों में ला दिया.
आप भी जय शाय बनिए, आंदोलनकारी नहीं