अपनी कड़ी मेहनत से ग्राम पंचायतों को संभालने वाले पंचायत सहायक आज सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं, और बेपरवाह बनी भाजपा सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। स्थिति यह है कि अपने हक की लड़ाई लड़ रहे साथी कर्मचारियों का पेट भरने के लिए पंचायत सहायकों को आपस में चंदा इकट्ठा करके भोजन का इंतजाम करना पड़ रहा है।
जो पंचायत सहायक गांव-गांव जाकर व्यवस्था की रीढ़ बनते हैं, उन्हें मानदेय और अधिकारों के नाम पर सिर्फ अनदेखी मिली है। योगी जी, गांव-देहात की नींव संभालने वाले इन युवाओं की अनदेखी करना भाजपा को भारी पड़ने वाला है; क्योंकि जब 'ग्राम पंचायत की रीढ़' ही आपकी तानाशाही के खिलाफ खड़ी हो जाएगी, तो सत्ता का धराशायी होना तय है।
हमारे पंचायत सहायको की आवाज बनने के लिये,
आपका बहुत-बहुत सहृदय आभार 🙏🙏
#पंचायत_सहायकों@sonker_ragini
हमें पूरे देश के समर्थन की जरूरत है। 🙏🏻🙏🏻
हर ग्राम सचिवालय में आपने एक बंधुवा मजदूर भी रखा है 6000 मानदेय में जो लखनऊ के इको गार्डन में संघर्ष कर रहा।
गांवों की डिजिटल पंचायतें बिना पंचायत सहायकों के अधूरी हैं, लेकिन इनका जीवन आर्थिक बदहाली के साए में चल रहा है। डिजिटल क्रांति के नायकों के साथ यह उपेक्षा क्यों?
नियमित मानदेय और सम्मानजनक रोजगार हमारा हक है!
#पंचायत_सहायक_संघर्ष
कम मानदेय और अंतहीन काम का बोझ उठाए, हर पंचायत सहायक का परिवार अपनों की उम्मीदें पूरी करने की आस में रोज घुट-घुट कर जी रहा है। साहब,अब तो हमारी सुधि लीजिए, वरना यह दर्द आंसुओं में बहकर सिस्टम की बेरुखी की दास्तां बयां करता रहेगा। @myogiadityanath#पंचायत_सहायकों_की_मांगे_पूरी_करो
लगभग 50 हजार की संख्या में पंचायत सहायक लखनऊ के ईको गार्डन में अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। सीधे तौर पर देखा जाए तो प्रदेश के 2 लाख लोग इससे सीधा प्रभावित हैं👇🏻
माननीय मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी बताएं कि 6 हजार रूपए में क्या होता है? कैसे कोई इतने कम रूपए में अपना परिवार चला सकता है?
मानदेय बढाकर 30 हजार करने की पंचायत सहायकों की मांग एकदम जायज है। जल्द से जल्द ये मांगें सुनी जाएं।।
#पंचायत_सहायक_संघर्ष
#पंचायत_सहायक_का_मानदेय_बढ़ाओ
#पंचायत_सहायक_नियमित_करो
सिर्फ वादों से ग्रामीण विकास की नींव मजबूत नहीं होगी, उसके लिए धरातल पर काम करने वालों का पेट भी भरना जरूरी है।
पंचायत सहायकों की सेवा सुरक्षा और स्थायी नीति की मांग अब और नहीं दबाई जा सकती।
#पंचायत_सहायक_संघर्ष
पंचायत सहायकों की मांग किसी ऐशो-आराम की मांग नहीं है।
हम सिर्फ इतना चाहते हैं
कि हमारी मेहनत का ऐसा मानदेय मिले
जिससे हम अपने परिवार का सम्मानपूर्वक पालन-पोषण कर सकें।
#पंचायत_सहायक_संघर्ष@CMOfficeUP
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की सरकार पंचायत सहायकों की आवाज़ को अनसुना करना बंद करे।
लखनऊ के ईको गार्डन में प्रदेशभर से आए पंचायत सहायक अपने हक़, सम्मान और भविष्य की सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मानदेय बढ़ाने, सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान, नौकरी की सुरक्षा और अपनी अन्य जायज़ मांगों को लेकर वे लगातार आंदोलनरत हैं।
सबसे दर्दनाक तस्वीर यह है कि भारी बारिश और तपती दोपहर में हमारी बहनें पेड़ों के नीचे तिरपाल के सहारे रहने को मजबूर हैं। रात होने के बाद भी उनका संघर्ष नहीं थमता। अपने हक़ की आवाज़ बुलंद करने के लिए उन्हें ईको गार्डन के अंदर कैंडल मार्च निकालना पड़ रहा है। दूसरी तरफ प्रशासन उनकी समस्याएँ सुनने के बजाय उन्हें वहाँ से हटाने पर आमादा है।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी याद रखें, बारिश में भीगते हुए और अंधेरी रात में मोमबत्तियाँ लेकर न्याय मांग रहे पंचायत सहायकों की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता।
अगर जल्द ही पंचायत सहायकों की जायज़ मांगों पर ठोस और सम्मानजनक फैसला नहीं लिया गया, तो मैं स्वयं लखनऊ के ईको गार्डन पहुँचकर पंचायत सहायकों के बीच बैठूँगा। जरूरत पड़ी तो उनके साथ वहीं दिन-रात रहूंगा भी।
बारिश हो, तपती दोपहर हो या अंधेरी रात, अपने हक़ के लिए संघर्ष कर रही हमारी बहन-बेटियों को अकेला नहीं छोड़ेंगे।
@UPGovt आंदोलनकारियों को हटाने की कोशिश बंद करे, उनकी मांगें सुने और तत्काल समाधान निकाले।
जय भीम! जय भारत! जय मंडल! जय संविधान!
#पंचायत_सहायक_का_मानदेय_बढ़ाओ
#पंचायत_सहायक_नियमित_करो