@RailwaySeva@drmrnc@drmdnr होना तो सर सामान्य कोच भी नहीं चाहिए. उसमें भी यात्री ही हैं और उन्हें भी इसकी जरूरत होती है.सभी मनुष्य ही हैं.
बस ऐसी स्थिति है इससे आपको अवगत करवाया.
आपने संज्ञान लिया इसके लिए शुक्रिया.
Dear @RailwaySeva #18626 कोशी एक्स्प्रेस के A-1 के बाथरूम और नल में पानी नहीं है.
Gaya station पर इसके बारे में मैंने कोच अटेंडेंट को बोला उसने कहा ट्रेन चलने पर पानी आएगा पर अभी तक नहीं आया. इसका संज्ञान लें.
@drmdnr
शुक्रिया 🙏🙏
@umashankarsingh वे डरते हैं
किस चीज़ से डरते हैं वे
तमाम धन-दौलत
गोला-बारूद पुलिस-फ़ौज के बावजूद ?
वे डरते हैं
कि एक दिन
निहत्थे और ग़रीब लोग
उनसे डरना
बंद कर देंगे ।(उनका डर: गोरख पांडे)
तुम क्या सोचते हो
संसद ने विरोध की भाषा और सामग्री को वैसा ही रहने दिया है
जैसी वह राजाओं के ज़माने में थी
यह जो आदमी
मेज़ की दूसरी ओर सुन रह है तुम्हें
कितने करीब और ध्यान से
यह राजा नहीं जिलाधीश है !
यह जिलाधीश है
जो राजाओं से आम तौर पर
बहुत ज़्यादा शिक्षित है
राजाओं से ज़्यादा तत्पर और संलग्न !
......
यह जानता है हमारे साहस और लालच को
राजाओं से बहुत ज़्यादा धैर्य और चिन्ता है इसके पास
यह ज़्यादा भ्रम पैदा कर सकता है
यह ज़्यादा अच्छी तरह हमे आजादी से दूर रख सकता है
कड़ी
कड़ी निगरानी चाहिए
सरकार के इस बेहतरीन दिमाग पर !
जिलाधीश: आलोकधन्वा
भूमिहार का मान या अपमान @INCIndia में।
सबसे पहले तीन सटे प्रदेश में अध्यक्ष बनाया गया।
झारखंड: @RajeshThakurINC
बिहार: @akhileshPdsingh
यू.पी. : @kashikirai
समानता तीनों भूमिहार जाति के और तीनों को प्रदेश में हो रहे चुनाव से पहले प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया.
@umashankarsingh
समाजवाद बबुआ, धीरे-धीरे आई
समाजवाद उनके धीरे-धीरे आई
हाथी से आई, घोड़ा से आई
अँगरेजी बाजा बजाई, समाजवाद...
नोटवा से आई, बोटवा से आई
बिड़ला के घर में समाई, समाजवाद...
डालर से आई, रूबल से आई
देसवा के बान्हे धराई, समाजवाद...
#rajaysabhaelectionup
इंडियन एक्सप्रेस के लिए @RitikaChopra__ की ऐसी स्टोरी जिसने मुख्य चुनाव आयुक्त के ‘मनमानेपन’ की कलई खोल कर रख दी है! इसके बाद तो उनको पद पर बन रहने का कोई नैतिक हक़ ही नहीं है!
जनपद के कवि जो राष्ट्र के कवि बन गए की जन्म जयन्ती पर उनकी स्मृति को प्रणाम करता हूँ।
"समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध, जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनके भी अपराध।"
:रामधारी सिंह 'दिनकर'
The video from Jamui, Bihar is deeply disturbing.
Two Class 10 students were stopped on a road. Harassed. Humiliated. Molested. A young girl, hands folded, begged to be let go while goons groped her and dragged her away.
Who gave these men the right to behave like this? This is not "culture." It is patriarchy: the belief that any man can police a girl's body, her movement, her choices.
When control is mistaken for culture, and such attitudes are normalised by Andhbhakts, mobs start believing they are the law.
Every individual in that video must be identified and prosecuted under POCSO, and justice must be swift. And if the incident happened on September 19th, why are the culprits not behind bars yet?
And the Bihar government must answer why a girl is not safe on a public road at 7 pm?
बिहार के जमुई का एक वीडियो बहुत बेचैन करने वाला है।
10वीं क्लास के एक छात्र और छात्रा को रास्ते में जबरदस्ती रोक लिया गया। उन्हें प्रताड़ित किया गया, अपमानित किया गया और छात्रा के साथ उत्पीड़न किया गया। बच्ची हाथ जोड़कर उसे जाने देने की विनती करती रही, मगर गुंडे उसे गलत तरीके से छूते और खींचतान करते रहे।
इन लोगों को ऐसी बदतमीज़ी करने का हक किसने दिया? यह "संस्कृति" नहीं है, यह patriarchy है: ये सोच कि किसी भी पुरुष का किसी लड़की के शरीर, उसके आने-जाने और उसकी पसंद-नापसंद पर नियंत्रण है।
जब नियंत्रण को ही संस्कृति मान कर 'अंधभक्त' ऐसी सोच को सामान्य ठहराते हैं, तो भीड़ को लगने लगता है कि वही कानून है।
उस वीडियो में दिख रहे हर व्यक्ति की पहचान होनी चाहिए और उन अपराधियों पर POCSO के तहत मुकदमा चलाकर उन्हें जल्द से जल्द सजा मिलनी चाहिए। और अगर ये घटना 19 सितंबर की है तो गुनहगार अब तक सलाखों के पीछे क्यों नहीं हैं?
और बिहार सरकार जवाब दे कि शाम 7 बजे कोई लड़की राज्य की सड़कों पर सुरक्षित क्यों नहीं है?
@ajitanjum आदरणीय @NitishKumar जी आपने बिहार के लड़कियों के लिए बहुत कुछ किया। आपका प्रदेश अध्यक्ष क्या कह रहा है सुनिए?
@SanjayJhaBihar आप अपने शीर्ष नेता नीतीश कुमार जी की लेगेसी में दाग लगने देते हैं या उमेश कुशवाहा को हटाते हैं यह देखना है!
आज कुंवर नारायण की 100 वीं जयन्ती है।
उनकी कविता के माध्यम से उनकी स्मृति को प्रणामI
और जीवन बीत गया: कुँवर नारायण
इतना कुछ था दुनिया में
लड़ने झगड़ने को
पर ऐसा मन मिला
कि ज़रा-से प्यार में डूबा रहा
और जीवन बीत गया..।