भगवान की कृपा से दो भिन्न कालखण्डों में हुए और अलग भक्तिधाराओं के संतों का मिलना हुआ। और फिर ‘श्री भक्तमाल’ ग्रंथ उस स्वरूप में सामने आया, जिसमें आज वह श्रद्धालुओं को भक्ति की राह दिखा रहा है।
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ऐसे बच्चे जो चार दिन के प्रेम के लिए किसी की हत्या करने से भी हिचकिचाते, वास्तव में वे माता-पिता की परवरिश पर एक गम्भीर सवाल हैं।
#केतनअग्रवाल
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सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों का संचालन करने वाली कम्पनियाँ हैं तो विदेशी ही। इन्हें भारत की बढ़ती ताकत से असुरक्षा होती ही होगी। ऐसे में, उन्हें बहाना चाहिए होता है कि किसी तरह भारत की छवि खराब कर सकें। और हम भारतीय खुद...
#SocialMedia
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ट्रम्प और उनके अमेरिकी प्रशासन ने साबित कर दिया कि वे जो कहते हैं, वह करते नहीं और जो करते हैं, वह कहते नहीं। इसीलिए अमेरिका पर भरोसा नहीं
#ModiTrump
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इस प्रसंग से आम जनता के सामने भी अपनी इस समझ को मजबूती देने का बहाना है कि जब ‘सरकारी’ सरकार पर ही भारी पड़ रहा है और वह ‘निजी’ की तरफ रुख कर रही है, तब वे यदि ऐसा करते हैं, तो फिर इसमें गलत क्या है?
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महिलाएँ जो काम घरों में करती हैं, उनसे भारत के कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 15-17% का योगदान होता हे। फिर भी उनके काम को न तो कोई मान्यता मिलती है और..
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आरोपी ने उनकी उम्र का भी लिहाज नहीं किया। गलती के लिए खेद जताने या माफी माँगने के बजाय उसने उनसे न सिर्फ बहस की, बल्कि सरोज दस्तूर जी को मारते हुए जमीन पर गिरा दिया। बड़ा-सा पत्थर उठाकर उन पर दे मारा। इससे उनका पैर टूट गया।
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गाय के लिए हमने अपने घरों के दरवाजे बंद कर दिए। र अब देखिए, हमारे इसी उपेक्षापूर्ण व्यवहार का श्राप लगा है हमें कि हम लगातार तनाव-अवसाद के अँधेरों में घिर रहे हैं। उससे राहत पाने के लिए हमें उसी गाय और गौवंश की शरण लेनी पड़ रही है।
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उन्हें इस ग्रंथ को लिखने की प्रेरणा कैसे हुई? इसके उत्तर में एक रोचक कहानी बताई जाती है। गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित ‘श्री भक्तमाल’ ग्रंथ और इसी तरह के सभी ग्रंथों में यह कहानी समान रूप से कही गई है।
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