Mother & House Wife
People save good memories in pen drive and bad memories in mind Just change the location, life will automatically change. Love you zindagi
आप एक तरफ अपने आंदोलन को "अराजनीतिक" बनाना चाहते है।
खुद को राजनीति से दूर रखना चाहते है। किसी की आवाज में आवाज मिलाना नही चाहते, कि पेंट न कर दिये जायें। समान स्वर में पक्ष विपक्ष को गरियाते है,
और नई पीढ़ी को "तटस्थ बुद्धिजीवी" का स्वांग रचने की धूर्तविद्या सिखाते हैं।
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औऱ फिर चाहते है कि वही राजनीतिक शख्सियतें आकर आपकी आवाज को वजन दें?? काहे भई?
एकतरफा चलता है क्या?
पोलटिकल पार्टी, पब्लिक के हाथ का टूल होती है। अगर आप मुद्दों पर अडिग है, तो फिर उस मुद्दे से मैच करने वाली पार्टी के साथ हो। दौर बदला, रीति नीति बदली, अब दूसरी कोई पार्टी उस सवाल पर आपके विचार से मैच कर रही है, तो पार्टी बदल दीजिये।
नागरिक का विचार अडिग रहना चाहिए।
पार्टी नही।
नागरिक की तटस्थता लोकतंत्र का जहर है। लेकिन यहाँ तो एक तरफ भक्त है, दूसरी तरफ कमबख्त हैं। भक्त रोज अपना स्टैंड बदलते है, मगर पार्टी नही।
दूसरी तरफ कमबख्त तटस्थ हैं, सुपरलेटिव डिग्री राजनीतिक बकलोल हैं। न उनके स्टैंड का पता, न राजनीतिक चॉइस का। सोनम भी उसी श्रेणी के हैं।
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आंदोलन, खुद एक पोलिटिकल एक्ट है। लेकिन जनता को बिना पॉलिटिक्स, बिना पॉलिटकल पार्टी को साथ लिए, पॉलिटकल एक्ट करना है..
तो करके भरजोर देख ले।
यह लड़ाई, लड़ने के पहले आपने किसी से कोई कोऑर्डिनेशन किया नही। जब अकेले लड़ने की आपकी चॉइस थी, तो बहुत बड़ा बड़प्पन था?? ठीक है।
तो अब मुंह काहे चियार रहे?? अकेले ही लड़िये। जितनी दूर तक जाये, जाने दीजिये। रील, लाइक्स, सोशल मीडिया पर दुर्गर्ष सपोर्ट तो मिल ही रहा है न।
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बहरहाल, सोनम की रिहाई के लिए कई पोस्ट की है। मेरी सहानुभूति है, उन्हें पसन्द करता हूँ। इसलिए उनकी चिंता भी है। उनके साथियों को उन्हें जूस वूस पिलाकर, झटपट बस में लादकर लद्दाख रवाना करना चाहिए।
जिंदगी रही साहब, तो फिर लड़ लेंगे।
क्या राजनीति ही सब कुछ तय करती है, कर सकती है ?
बोली, भाषा, संस्कार, संस्कृति, परम्परा, परिभाषा आदि,,,,
सब कुछ राजनीति ही तय करेगी ?
तो फिर अन्य की जरूरत ही क्या ?
***सुशील पाण्डेय ।।
आज मैंने दिल्ली के एक पेट्रोल पंप और सर्विस स्टेशन पर जाकर ज़मीनी हक़ीक़त जानी। सरकार सफ़ेद झूठ बोल रही है। E20 के कारण गाड़ियों में सच में दिक्कतें आ रही हैं। आम लोग ethanol से बहुत दुखी हैं। लगभग सभी लोगों की माइलेज कम हुई है और बहुत गाड़ियों में ख़राबी की शिकायत हैं।