( भगवती उपासक, कुण्डली एवं कर्मकाण्ड विशेषज्ञ )
जय माता की 🙏
माॅं भगवती आपका कल्याण करें,,,
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जीतने भी जीव ( अंडज, स्वेदज, जरायुज, उद्भिज ) हैं- सभी के उत्त्पन्न होने, विकास होने और नष्ट हो जाने के पीछे की जो शक्ति है, उसका केन्द्र ही तो माँ भगवती ही हैं । सभी शक्तियों की अधिष्ठात्री ।।
***सुशील पाण्डेय ।।
परिवर्तन के लिए व्यक्ति के भीतर न्यूनतम स्तर की ग्रहणशीलता भी आवश्यक होती है । यदि वह वर्षों तक अनुपस्थित रहे , तो सबसे कुशल चिकित्सक भी सीमित हो जाते हैं । यानी हार मान लेते हैं ।।
***सुशील पाण्डेय
अपने कर्म /वाणी और विचारों से समाज को एक साथ /प्रेम और मानवता के धागे में पिरोने का उपक्रम करना ही जीवन की सार्थकता है । न कि समाज में विभेद पैदा कर सामाजिक समरसता को नष्ट करने में ।।
***सुशील पाण्डेय ।।
सोशल मीडिया से प्राप्त ज्ञान-
समाज में झगड़ा सिर्फ जातियों के बीच ही नही बल्कि प्रजातियों ( स्त्री बनाम पुरूष ) में भी खूबै तनातनी चल रही है ।
खैर,,,,,,,
वैसे , हमी सर्वश्रेष्ठ हैं - यह विचार युद्ध की ही स्थिति मे ले जाता है ।।
***सुशील पाण्डेय ।।
क्या राजनीति ही सब कुछ तय करती है, कर सकती है ?
बोली, भाषा, संस्कार, संस्कृति, परम्परा, परिभाषा आदि,,,,
सब कुछ राजनीति ही तय करेगी ?
तो फिर अन्य की जरूरत ही क्या ?
***सुशील पाण्डेय ।।
राजनीति, कला की व्याख्या नहीं कर सकती । चूंकि कला- शुद्ध सरल और निष्कपट भाव से हृदय की कल्पना में प्रस्फुटित होती है, जिसे कलाकार कैनवास पर उकेरता है । वहीं राजनीति- छल प्रपंच और स्वार्थ से ओतप्रोत सत्ता की लालसा से संलिप्त होती है ।।
***सुशील पाण्डेय ।।
किसी का नही । यह सब निर्भर करता है उसकी राजनीतिक शक्ति पर । लेकिन यह कहना कि- अमुक नेता या अमुक राजनीतिक दल भ्रष्टाचार रहित है, तो यह अतिशयोक्ति ही होगा ।।
***सुशील पाण्डेय
राजनीति और भ्रष्टाचार, इन दोनों में बहुत ही गहरा सम्बन्ध होता है । ठीक उसी तरह से जैसे- अग्नि मे दाहकत्व, सूर्य की किरणों मे प्रकाश होता है । उसी तरह से राजनीति मे भ्रष्टाचार होता ही है ।
हां यह अलग बात होगी कि- कोई जादा कर जाता है कोई कम । किसी का उजागर हो जाता है
इमानदारी की अहमियत -
बेइमानी को भी इमानदारी की जरूरत होती है । चूंकि एक बेइमान साहूकार अपने व्यापार की देखभाल के लिए ईमानदार कर्मचारी ही रखना चाहता और रखता भी है ।
बाकी तथ्य, तर्क, उदाहरण वगैरह खुद से ख़ोज कर आप इस बात को मान अथवा नकार सकते हैं ।।
***सुशील पाण्डेय ।।
( दिव्य शक्ति/भगवती की उपासना ) के मार्ग पर चलता है, उसके लिए भोग और मोक्ष, दोनों ही हाथ में रहते हैं । अर्थात वह जीवन के समस्त सुखों का भोग करता है और अंततः मोक्ष भी प्राप्त करता है ।
अतः भगवती की पूजा आराधना अवश्य करनी चाहिए ।
पण्डित- सुशील पाण्डेय
ॐ नमश्चण्डिकायै 🙏🙏
श्री संवत् 2083 का गुप्त नवरात्र ( अषाढ़ी नवरात्र ) दिनांक- 15 जुलाई 2026 दिन बुधवार से आरम्भ हो रहा है ।
नवरात्र तिथियां -
प्रतिपदा - 15 जुलाई
द्वितिया - 16 जुलाई
तृतिया - 17 जुलाई
चतुर्थी - 18 जुलाई
पंचमी - 19 जुलाई
षष्ठी - 20 जुलाई
यत्रास्ति भोगो न तत्र मोक्षः ।
यत्रास्ति मोक्षो न तत्र भोगः ॥
श्रीमार्गभूतस्य तु साधकस्य ।
भोगश्च मोक्षश्च करस्थ एव ॥
जहाँ भोगों में आसक्ति है, वहाँ मोक्ष नहीं है; और जहाँ मोक्ष की प्राप्ति है, वहाँ भोगों की आसक्ति नहीं रहती । किन्तु जो साधक श्री