विकसित सोच, नवोन्मेषी विचार के प्रतीक, मेरे जीवन के श्रेष्ठ निर्माता, युवा नेतृत्व के हिमायती, प्रदेश कांग्रेस सचिव आदरणीय श्री आजाद सिंह जी राठौड़ को जन्मदिन की अनंत कोटि शुभकामनाएं बधाई, भगवान श्री कृष्ण सदैव आप पर स्नेह दृष्टि बनाए रखें सा
#AzadBarmer
जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं।
आपका जीवन सदैव ऊर्जावान, प्रेरणादायक और समाज सेवा के प्रति समर्पित बना रहे। आपके नेतृत्व में नई सोच, नई दिशा और जनहित लोक कल्याण में आपके कदम निरंतर आगे बढ़ते रहें,
ईश्वर आपको उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और सफलता प्रदान करें @ArvindSBhati9
@mpsbarmer शान हो, पहचान हो, और अपने दम पर एक अलग मुकाम हो, प्रिय अनुज भ्राता श्री महेंद्र प्रताप सिंह जी आपको जन्मदिन की अनंत कोटि शुभकामनाएं सा, भगवान श्री कृष्ण सदैव आपको नव प्रगति के सोपान पर पदस्थापन करे, आपका सौम्य और सहयोगी भाव सदैव बना रहे,..... खूब खुश रहो, मस्त रहो
सम्माननीय श्री राजेंद्र सिंह जी भियाड़ सा को जन्मदिन कि हार्दिक बधाई शुभकामनाएं सा, आपका स्व अध्ययन, लेखन, और वैचारिक बौद्धिक नित्य प्रतिदिन परिमार्जित हो कर जाति, समाज और राष्ट्र के निर्माण में अहम योगदान हो ऐसी भगवान् श्री कृष्ण से मंगल प्रार्थना सा @RajendraBhinyad
@ArvindSBhati9 बहुत ही दुखद, नेक, नम्र स्वभाव के धनी श्री अधिराज सिंह जी का देवलोकगमन बहुत ही अपूर्णीय क्षति है श्री हरि दिवगंत आत्मा को श्री चरणों मे स्थान दें, परिजनों को यह वज्रपात सहन करने की हिम्मत दे
@arvindchotia वर्तमान समय के माहौल में एक बंदे की उदार सोच ही जीवन का भाग्य निर्माण उदित करता है ऐसे ईमानदार, सरल, बेबाक व्यवहार की बात करने वाले अनुज अरविंद सिंह भाटी को बहुत बहुत शुभकामनाएं
हम उस रक्त-रेखा से जन्मे हैं, जहाँ मातृभूमि की गोद में सिर रखने से पहले पुरखे अपने शीश कटवा कर धरती को सिंचित करते थे। यहाँ ज़ख़्म श्रृंगार हैं, और युद्ध सम्मान।
हम उस परंपरा के वाहक हैं, जो शत्रु की छाया मात्र से भी स्वाभिमान की ज्वाला भड़क उठती है।
हम सभी के पूर्वजों ने इंच भर भूमि के लिए प्राण दे दिए, लेकिन आत्मसम्मान की एक धूलि तक सौंपने को तैयार नहीं हुए। क्या आज के इस ‘युग’ में, हमारे नेताओं के संयमित बयान और निंदा प्रस्ताव ही पर्याप्त हैं, जब निर्दोषों की चिताएँ जल रही हों?
यह कोई साधारण हमला नहीं हैं, यह हमारे धैर्य, हमारी आस्था और हमारी सहनशीलता की सामूहिक परीक्षा है। दशकों से चल रही “आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता” जैसी बहसें अब मृतप्राय हैं। जब क़त्लेआम के पीछे एक निश्चित मानसिकता बार-बार स्वयं को दोहराए, तब मौन भी सहअपराधी हो जाता है। अब भी यदि तथाकथित बुद्धिजीवी, उदारवादी और सेक्युलर प्रवचनधारी आतताइयों की धार्मिकता में पुण्य खोज रहे हैं, तो उन्हें मानवता के किसी भी मंच पर बैठने का नैतिक अधिकार नहीं रह गया।
और यदि हमारे नेतृत्व में संवेदनाओं की कोई गूंज बाक़ी है, मातृभूमि की पीड़ा से जगे हुए तंतु शेष हैं तो यक़ीन मानिए, उनके भीतर भी अब कोरे वक्तव्यों की जगह, ठोस प्रतिशोध की आँधियाँ हिलोरें ले रही होंगी। भारत को अब केवल कड़ी निंदा नहीं चाहिए।
हमें वह चाहिए, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए भय नहीं, सुरक्षा का पर्याय बने।
#Pahalgam
महाराजा जसवंत सिंह जी द्वितीय की समर्पित प्रतिमा का भव्य अनावरण शीघ्र ही किया जाएगा।
132 वर्ष पश्चात उसी परिसर में, जिस परिसर की स्थापना मारवाड़ में शिक्षा के उद्देश्य से की गई थी।
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